Starlink is licensed in over 165 countries and has spent five years complying with every single law and requirement of the government of India, so why still no license?
Is Ambani the real boss of India?
Two Lil girls yes,but wether they were running from or Israel is hard to establish with this video.Killing anyone is a sin let alone Kids irrespective of their ethnicity,relegious belives and political inclination.
Ужасающие кадры, на которых две маленькие девочки бегут, спасая свои жизни, пока палестинец преследует их, словно добычу.
Он выстрелил первой девочке в спину, когда она в отчаянии пыталась убежать. Вторая замерла, обернулась и умоляла его не убивать её.
Он всё равно казнил её, не выказав ни малейшего колебания.
Это то, что палестинцы из Газы сделали 7 октября.
Никогда не забывайте.
@nishachauha पाबंदियां उसूलो की, फासले ये दुनियावी सब मिटा के तुम मेरे करीब आओ,
ये दिल महल घर है तुम्हारा रहो इसमें सदा के लिए छोड़ इसे कहीं ना अब जाओ
ख्याल लखनवी
This is reflection of us the do called Adults,,,Kids can't be https://t.co/9WzwuhClxm carrying visible hatered ,on the other side there are kids who are trained to kill others.Fault is deep rooted needs हैंडलिंग accordingly.
@nishachauha आज रूबरू होंगे दो चाँद एक ही रात में,
एक फलक पे ठहरेगा, इक हमारे साथ में।
चाँद वो फलक वाला अपनी चमक भूल जाएगा,
अर्श-ए-हुस्न से पर्दा जब यहाँ उठाया जाएगा।
कह उठेंगे सब तारे फलक के उस महताब से,
इश्क़ की रौशनी आगे है हर इक आफ़ताब से।
ख्याल लखनवी
तेरी रहगुज़र में ख़लल का ख़सारा क्यों करूँ।
लोग ढूँढते होंगे साहिलों पर पनाहें,
तेरे दर के सिवा कोई किनारा क्यों करूँ।
तू जो चाहे तो बिछ जाऊँ राहों में तेरी,
तुझे दर्द दे जो, वो बात में दोबारा क्यों करूँ।
जान ले ले जो तेरी ऐ जाने-जाँ,
ऐसा कोई मैं इशारा ही क्यों करूँ।
तुझसे रौशन है मेरी ये ज़िंदगी,
तुझे छोड़ कर किसी और का नज़ारा ही क्यों करूँ।
तेरी मुस्कान ही तो क़ायनात है मेरी,
तेरे अश्कों को मैं फिर गवारा क्यों करूँ।
तू रहे सलामत बस ये दुआ है मेरी,
जान ले ले जो तेरी ऐ जाने-जाँ,
ऐसा कोई मैं इशारा ही क्यों करूँ।
तुझसे रौशन है मेरी ये ज़िंदगी,
तुझे छोड़ कर किसी और का नज़ारा ही क्यों करूँ।
तेरी मुस्कान ही तो क़ायनात है मेरी,
तेरे अश्कों को मैं फिर गवारा क्यों करूँ।
तू रहे सलामत बस ये दुआ है मेरी,
ढलती शब से ले के सहर तक तुझ पे जाँ निसार करूँ।
रूह की गहराइयों में उतर जाऊँ कुछ इस तरह,
जिस्म और जाँ के दरमियाँ जो है वो दीवार पार करूँ।
इत्मीनान से बैठें फिर हम सवेरे की धूप में,
उस नई सहर के साथ फिर नए वस्ल का इंतिज़ाम करूँ।
— 'ख़्याल लखनवी'
कितनी बातें की उनसे
दिन और रातें की उनसे...
पर एक बात अब भी बाकी है
एक मुलाक़ात अब भी बाकी है...
कितना साथ पा लिया उनका
कितना दिल छू लिया उनका...
पर बरसात अब भी बाकी है
प्यार में जगी रात अब भी बाकी है...
आ कि पूरी मैं तिरी हर इक हसरत आज की रात करूँ,
भर के बाहों में तुझे आँखों से आँखें चार करूँ।
सँवार कर अपने ही हाथों से तिरी ज़ुल्फ़ों को,
सामने बिठा के जी भर के तिरा दीदार करूँ।
तोड़ दूँ आज सारी हदें इस भीगी बरसात में,
कितनी बातें की उनसे
दिन और रातें की उनसे...
पर एक बात अब भी बाकी है
एक मुलाक़ात अब भी बाकी है...
कितना साथ पा लिया उनका
कितना दिल छू लिया उनका...
पर बरसात अब भी बाकी है
प्यार में जगी रात अब भी बाकी है...
@nishachauha ज़ब्त एहसास सारे दिल के,जज़्बात रुह के अक्सर , हर्फो से सफो पर बहुत सलीके से उकेर देता हूं,
समेट कर अपने आप को मिसरो, मक्ता,मतलो अशआर को शेर,ग़ज़ल और नज़्म में उड़ेल देता हूं
ख्याल लखनवी
दास्तां सुनाने के लिए ही सही तू लौट के तो आ एक बार,
आ के अब ना फिर कभी लौट के जाने के लिए तो आ एक बार
इश्क़ की पुरानी हर वो निशानी दिखानी फिर तुझे इक बार,
अधूरी रह गई थी जो अधूरे इश्क़ की वो दास्तां पूरी सुनानी फिर एक बार