प्रोफेसर OBC सूर्यनारायण डूल्ला की केवल यह गलती थी कि उन्होंने परीक्षा में नकल करते छात्र को पकड़ा। अब छात्र के पिता ने SC/ST एक्ट लगा दिया और प्रोफेसर को इस्तीफा देना पड़ा।
अब कुछ लोग फांसी की मांग कर रहे हैं। इससे भविष्य में GEN/OBC प्रोफेसर नकल पकड़ने से पहले सौ बार सोचेंगे।
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के शासकीय महाविद्यालय बरपाली में एक दलित छात्रा को परीक्षा में नकल करते ओबीसी वर्ग के प्रोफेसर मगेन्द्र यादव ने पकड़ लिया.... नाराज छात्रा ने प्रोफेसर के खिलाफ SC ST एक्ट लगवा दिया।
3. अगर इस मासूम बच्चे से किसी ने सिखा-पढ़ाकर किसी की जिंदगी बर्बाद करने के लिए ये कृत्य करवाया है, तो उस साजिशकर्ता को ऐसी सजा मिले जो नजीर बने, ताकि दोबारा कोई किसी गरीब की जिंदगी बर्बाद करने की हिम्मत न करे।
न्याय चाहिए, राजनीति नहीं।
नीले गमछों वालो का आतंक बढ़ता ही जा रहा है। अब खुलेआम पुलिस को धमकाकर जबरदस्ती ओबीसी समाज की टीचर के खिलाफ FIR दर्ज करवा रहे है।
अगर मामला सच में जातिगत भेदभाव का है तो टीचर OBC वंदना वर्मा का पक्ष क्यों नहीं सुना जा रहा? एक बार स्कूल में जाकर निष्पक्ष जांच तो कर लीजिए।
आज इस मुद्दे पर OBC समाज खड़ा नहीं हो रहा है, ये दुख की बात है।
मेरी मांग बिल्कुल साफ है:
1. पहले मामले की निष्पक्ष और पूरी जांच हो, उसके बाद मुकदमा लिखा जाए।
2. जांच में अगर वंदना वर्मा जी दोषी पाई जाती हैं, तो उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
SC/ ST वाले बड़े चालाक होते है।
जब चुनाव आते है तो ओबीसी समाज को शुद्र घोषित कर देते है और जब बारी न्याय की आती है तब SC/ST एक्ट पीठ पीछे से ठोक देते है।
अब कम से कम एक OBC यादव परिवार का तो शुद्र होने का भ्रम टूट जाएगा।
अंबेडकरवादियों को जब सवर्णों से लड़ना होता है तो OBC समाज याद आता है और जब OBC समाज कट्टरपंथियों से लडने के लिए अंबेडकरवादियों से सहयोग मांगता है तो ये हम हिंदू नहीं है कहकर OBC समाज को लात मार देते हैं। इसलिए OBC समाज, सवर्णों के साथ लड़ाई के अंबेडकरवादियों का साथ ना दे।
मैं प्रोफेसर बन गया, क्रीमी लेयर में आ गया...अब मुझे आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा
-धर्मेंद्र यादव, प्रवक्ता, सपा
यही खूबसूरती है OBC आरक्षण की।
यानी क्रीमीलेयर क्रॉस होने के बाद ओबीसी को आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा जिससे हमारे वर्ग के ही पिछड़े व्यक्ति को आगे आने का मौका मिलेगा।
बिहार में कुल पद थे 2035 ।
जिसमें दलित वर्ग के लिए आरक्षित थे 403।
इन 403 सीटों में अकेले जाटव समाज ने 111 पद गटक लिए। यानी कुल पदों का 27 %, जबकि उनकी आबादी मजह 5% है।
आखिर कब तक अपने ही भाइयों का हिस्से का आरक्षण खाते रहेंगे।
महाराष्ट्र में वर्गीकरण समर्थक अपना प्रतिशत काहे नही देखते
*********************************************
बिहार में;
चमार जाति = 5.25%
बाल्मीकि/मेहतर = 00.24%
दुसाध = 5.32%
धोबी = 00.84%
पासी = 1%
कुल पद = 2035
चमार = 111 (5.4% अथार्त प्रतिशत 5.25% के आसपास)
दुसाध = 88 (4.34% अथार्त अपने प्रतिशत 5.31% से कम)
धोबी = 59 (2.92%अथार्त अपने प्रतिशत 0.84% से ज्यादा)
पासी = 49 (2.42% अथार्त अपने प्रतिशत 1% से ज्यादा)
लेकिन इन मोहतर्मा अपने ब्राह्मण ठाकुर व अन्य मित्रो के साथ मिलकर ऐसा माहौल बनाने की सोच रही है जैसे चमार को कई गुणा ज्यादा मिल गया।।जबकि;
"दुसाध को नुकसान हुआ। लेकिन वर्गीकरण का सबसे ज्यादा विरोध बिहार में दुसाध ही करते है क्योंकि रामविलास पासवान जी जानते थे कि जब तक एकता है तब तक पूछा जा रहा है"
इसलिए मुझे धोबी व पासी के द्वारा अपने प्रतिशत से 3 गुणा ज्यादा शीट लेने पर आपत्ति नही है। अच्छी बात है कि वो पढ़कर मौका ले रहे है।।
प्रश्न : यह है कि ऐसा मौका बाल्मीकि व अन्य क्यो नही भुना रहे।
उत्तर : जैसे यह मोहतर्मा बाल्मीकि से आह्वान करने की पढ़ाई करो, और धोबी व पासी की तरह अपने प्रतिशत से कई गुणा ले लो कि जगह "चमार हाय हाय" में व्यस्त है।
यह मोहतर्मा इसकी जगह कह सकती थी कि;
"बाल्मीकि मात्र दशमलव 2 प्रतिशत (0.2%) होने के बाद भी उनके पास अवसर है कि वो पढ़कर 16% आरक्षण पर हक जमा सकते है।।अब अगर बाल्मीकि की लिए वर्गीकरण भी कर दिया जाए तो 0.2% पर कितना मिलेगा?
"
ऐसी ही मूर्खता महाराष्ट्र में हो रही है।।
***************************
1.मातंग मात्र 2% है।
2.चमार कि उससे सम्बंधित जातिया भी 2% के आसपास है।
3.महार 8% है।
अब मातंग व चमार महाराष्ट्र में 2%-2% में क्या कर लेंगे? जबकिं वो 14% पर बिहार में पासी व धोबी की तरह शिक्षित होकर अपना हक जमा सकते है।
वर्गीकरण के नाम पर एक तरह से बाल्मीकि का कंधा इस्तेमाल करके जो जातिया हमेशा आरक्षण ही नही बल्कि एससी/एसटी के खिलाफ रही है वो मुख्यतया सवर्ण जातिया अपना हित साधना चाहते है। उन्हें आर्टिकल 30 के अल्पसंख्यक आरक्षण जो कि एससी/एसटी से बेहतर है से आपत्ति नही है लेकिन एक नफरत, चिढ़, जो एससी/एसटी के प्रति डीएनए में पूर्वजो से मिली है, उंसके आधार पर नए नए प्रयोग करते रहते है।
अब इस मोहतर्मा से जाटव हाय हाय करवाते रहते है। जबकि इस मोहतर्मा को समझना चाहिए कि इन लोगो को तुम्हारे व्यक्तिगत मैटर से कुछ लेना देना नही है, न ही कोई sympathy है। वो तो एससी/एसटी के ही बिल्कुल खिलाफ है।।
विकास कुमार जाटव
ये नील प्राणी पुलिस के सामने ही सवर्ण #ओबीसी समाज की बहन बेटियों से शादी करने की बात कर रहा है।
क्या ये अपनी बहन की शादी खटीक, पासवान, मुसहर आदि में कर देगा ?
जब कोई अजित भारती इन्हें जवाब दे देगा फिर ये थाने कोर्ट कचहरी अपना जाति प्रमाण पत्र उठाए फिरेंगे।
ओबीसी समाज हर उस रिफॉर्म के पक्ष में है जिससे आरक्षण का लाभ दलित वर्ग के अति पिछड़े वर्ग तक सम्मानपूर्वक पहुंचे।
ऐसा ना हो आरक्षण 2-4 गिनी जातियों की बपौती बनकर रह जाए।
#ReservationReformAndolan
ये नील प्राणी पुलिस के सामने ही सवर्ण #ओबीसी समाज की बहन बेटियों से शादी करने की बात कर रहा है।
क्या ये अपनी बहन की शादी खटीक, पासवान, मुसहर आदि में कर देगा ?
जब कोई अजित भारती इन्हें जवाब दे देगा फिर ये थाने कोर्ट कचहरी अपना जाति प्रमाण पत्र उठाए फिरेंगे।
अगर यही क्रीमीलेयर का फॉर्मूला दलित आरक्षण में लागू हो जाए तो उनके समाज का ही भला होगा।
असल में दलित आरक्षण कुछ खास 3-4 जातियों ने हाईजैक कर लिया। जिससे दलित आरक्षण इन्हीं जातियों में सिमट के रह गया। इन खास जातियों को ओबीसी की तरह दिल बड़ा करना चाहिए।
मैं प्रोफेसर बन गया, क्रीमी लेयर में आ गया...अब मुझे आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा
-धर्मेंद्र यादव, प्रवक्ता, सपा
यही खूबसूरती है OBC आरक्षण की।
यानी क्रीमीलेयर क्रॉस होने के बाद ओबीसी को आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा जिससे हमारे वर्ग के ही पिछड़े व्यक्ति को आगे आने का मौका मिलेगा।