फूलन देवी ने बौद्ध धम्म उस स्थान पर अपनाया था, जहाँ डॉ. अंबेडकर ने अपनाया था।
उस तिथि को अपनाया था, जिस तिथि को गुरु रैदास का जन्म हुआ था।
उस मार्ग को अपनाया था, जिसे गौतम बुद्ध ने बताया था।
15 फरवरी,1995 को फूलन देवी के समक्ष बुद्ध, रैदास और डॉ.अंबेडकर का अद्भुत समागम हुआ था।
दिनांक 24 सितंबर 2022 को उत्तरप्रदेश के वाराणसी में #राष्ट्रीय_पिछड़ा_वर्ग_मोर्चा का जो प्रथम राष्ट्रीय अधिवेशन हो रहा है, उस अधिवेशन की तैयारी के अंतर्गत महत्वपूर्ण मीटिंग गौर्विका पैलेस, पालमपुर में सफलतापूर्वक संपन्न।
@MNtvNews ब्राह्मण अपनी ब्राह्मणी व्यवस्था याने यहां के मूलनिवासियों को मूर्ख बनाये रखने के लिए कोई भी षड्यंत्र करने से बाज नहीं आएंगे जबकि ये अच्छी तरह से जानते हैं कि भारत पूरे विश्व में सम्राट असोक और बुद्ध के नाम से जाने जाते हैं।