सम्मान अपनी जगह है, लेकिन लोकतंत्र में किसी भी नेता को इस स्तर तक पहुँचा देना कि 15 महीने के बच्चे की हर हरकत में भी चमत्कार दिख रहा है, सुनील शेट्टी को... यह ठीक सोच नहीं है।
नेता कितने भी बड़े क्यों न हों, भगवान तो नहीं हैं।
अगर हम बच्चों को बचपन से ही नेताओं की तस्वीरों के आगे लड्डू चढ़ाने की कहानियाँ सुनाकर गर्व महसूस करने लगेंगे, तो कल वे सवाल पूछना तो दूर , सिर्फ़ जयकार करना सीखेंगे।
देश को ऐसे नागरिक चाहिए जो संविधान, विज्ञान और कर्तव्य का सम्मान करें; किसी भी नेता की पूजा करने वाली पीढ़ी नहीं।
बच्चों को भगवान और माता-पिता का सम्मान सिखाइए, नेताओं की पूजा नहीं। लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जागरूक नागरिक हैं, भक्त नहीं।
जब तर्क कम पड़ जाएँ, तब जादू और चमत्कार की कहानियाँ शुरू हो जाती हैं।फ़िल्मों में अभिनय अच्छा लगता है, लेकिन लोकतंत्र में नहीं shetty ji...
@Profdilipmandal@Profdilipmandal क्या आज आप नैतिक सिद्धांत भी भूल गए ओबीसी का आरक्षण बंगाल में घटा दिया गया उसको लेकर सरकार आलोचना भी नहीं कर पा रहे हो इतना पैसा बीजेपी ने आपको मुंह बंद रखने के लिए दे दिया
जब निजी कंपनियां तेज़ इंटरनेट दे रही हैं, तो BSNL अभी भी धीमी स्पीड क्यों दे रहा है? करोड़ों रुपये सरकारी फंड मिलने के बाद भी BSNL की सेवाएं बेहतर क्यों नहीं हुईं? कई ग्रामीण क्षेत्रों में BSNL नेटवर्क बिल्कुल गायब क्यों रहता है? कॉल ड्रॉप की समस्या सालों से खत्म क्यों नहीं हुई? इंटरनेट स्पीड इतनी कम क्यों है कि साधारण वीडियो भी नहीं चल पाता? शिकायत दर्ज कराने के बाद भी महीनों तक समाधान क्यों नहीं होता? BSNL के टावर इतने कमज़ोर क्यों हैं कि थोड़ी बारिश में ही नेटवर्क गायब हो जाता है? ग्राहक सेवा (Customer Care) इतनी कमजोर क्यों है? क्या BSNL को जानबूझकर निजी कंपनियों के लिए कमजोर किया जा रहा है? 4G सेवा शुरू करने में BSNL को इतने साल क्यों लग गए? जब Jio और Airtel 5G दे रहे हैं, तब BSNL अभी भी 3G/4G पर क्यों अटका है? BSNL के कई दफ्तरों में कर्मचारी ग्राहकों के साथ सही व्यवहार क्यों नहीं करते? नई सिम या कनेक्शन लेने की प्रक्रिया इतनी धीमी क्यों है? ब्रॉडबैंड कनेक्शन लगवाने में कई हफ्ते क्यों लग जाते हैं? खराब लाइन ठीक करने में कई दिन क्यों लग जाते हैं? क्या BSNL के पास तकनीकी स्टाफ की कमी है? अगर है, तो नई भर्ती क्यों नहीं की जाती? सरकारी कंपनी होने के बावजूद BSNL की जवाबदेही तय क्यों नहीं होती? कई शहरों में BSNL के टावर बंद क्यों पड़े हैं? नेटवर्क सुधारने के लिए वास्तविक निवेश कितना हुआ है? क्या BSNL में भ्रष्टाचार की वजह से सेवाएं प्रभावित हो रही हैं? क्या पुराने उपकरणों के कारण नेटवर्क खराब है? अगर उपकरण पुराने हैं तो उन्हें बदला क्यों नहीं जाता? BSNL का डेटा प्लान सस्ता होने के बावजूद उपयोग करने लायक क्यों नहीं है? क्या सरकार BSNL को बचाने के लिए गंभीर है या सिर्फ घोषणाएं करती है? BSNL का मोबाइल इंटरनेट अक्सर घंटों बंद क्यों रहता है? क्या BSNL के अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाती है? ग्रामीण इलाकों में BSNL की स्थिति सबसे खराब क्यों है? क्या BSNL को आधुनिक तकनीक अपनाने में दिक्कत है? ग्राहकों से बिल तो पूरा लिया जाता है, लेकिन सेवा अधूरी क्यों मिलती है? BSNL के टावर कई जगह वर्षों से अपग्रेड क्यों नहीं हुए? क्या BSNL की योजनाओं में पारदर्शिता की कमी है? नेटवर्क सुधारने के लिए दी गई सरकारी सहायता का उपयोग कैसे हुआ? क्या BSNL के प्रबंधन में गंभीर कमियां हैं? क्या निजी कंपनियों के दबाव में BSNL को पीछे किया जा रहा है? BSNL की ऐप और डिजिटल सेवाएं इतनी कमजोर क्यों हैं? कई जगह BSNL की सिम काम ही क्यों नहीं करती? BSNL के ग्राहक लगातार कम क्यों हो रहे हैं? क्या BSNL अपने ग्राहकों की समस्याओं को गंभीरता से लेता है? कॉल कनेक्ट होने में इतनी देर क्यों लगती है? कई जगह BSNL नेटवर्क सिर्फ नाम का क्यों है? इंटरनेट स्पीड का दावा और वास्तविकता में इतना अंतर क्यों है? BSNL की ब्रॉडबैंड सेवा बार-बार क्यों बंद हो जाती है? क्या BSNL में तकनीकी सुधार की कोई स्पष्ट योजना है? सरकारी कंपनी होने के बावजूद सेवा इतनी खराब क्यों है?क्या BSNL के कर्मचारियों को आधुनिक प्रशिक्षण दिया जाता है? ग्राहकों के फीडबैक पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? BSNL के टावर लगाने में इतनी देरी क्यों होती है? क्या BSNL को निजीकरण की ओर धकेला जा रहा है? आखिर कब BSNL अपने ग्राहकों को भरोसेमंद और तेज़ सेवा दे पाएगा?
@BSNLCorporate@CMDBSNL@BSNL_RJ@JM_Scindia
EWS में 50% की सीलिंग टूट चुकी है, अब "सीमा" का बहाना मत दो!
ये बांध टूट चुका है, पानी बह चुका है।
तो फिर OBC का हक 27% क्यों रोका जाए?
हमारी मांग साफ़ है—प्रभावी प्रतिनिधित्व के लिए ओबीसी आरक्षण 52% किया जाए।
विशेष प्रावधान केवल मनुवादियों के लिए नहीं हो सकते, उनका सिस्टम पहले से ही हर संस्थान में बैठा है।
जब तक वंचित वर्ग को उचित भागीदारी नहीं, तब तक ये सिस्टम बदलने वाला नहीं।
आज पटना में अतिपिछड़ा वर्ग के उत्थान, उन्नति, बेहतरी, भागीदारी और आर्थिक सबलता के लिए हमारे गठबंधन ने “अतिपिछड़ा न्याय संकल्प” पेश किया। इसके अंतर्गत:-
𝟏. ‘अति पिछड़ा अत्याचार निवारण अधिनियम’ पारित किया जाएगा।
𝟐. अतिपिछड़ा वर्ग के लिए पंचायत तथा नगर निकाय में वर्तमान 𝟐𝟎% आरक्षण को बढ़ाकर 𝟑𝟎% किया जाएगा।
𝟑. आबादी के अनुपात में आरक्षण की 𝟓𝟎% की सीमा को बढ़ाने हेतु, विधान मंडल पारित कानून को संविधान की नौवीं अनुसूची में डालने हेतु केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
𝟒. नियुक्तयों की चयन प्रक्रिया में “𝐍𝐨𝐭 𝐅𝐨𝐮𝐧𝐝 𝐒𝐮𝐢𝐭𝐚𝐛𝐥𝐞” (𝐍𝐅𝐒) जैसे अवधारणा को अवैध घोषित किया जाएगा।
𝟓. अतिपिछड़ा वर्ग की सूची में अल्प या अति समावेशन (𝐮𝐧𝐝𝐞𝐫- 𝐨𝐫 𝐨𝐯𝐞𝐫-𝐢𝐧𝐜𝐥𝐮𝐬𝐢𝐨𝐧) से सम्बन्धित सभी मामलों को एक कमेटी बनाकर निष्पादित किया जाएगा।
𝟔. अतिपिछड़ा, अनुसूचित जाति, जन-जाति तथा पिछड़ा वर्ग के सभी आवासीय भूमिहीनों को शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में श्रेणीकृत 𝟑 तथा 𝟓 डिसमिल आवासीय भूमि उपलब्ध करायी जायेगी।
𝟕. 𝐔𝐏𝐀 सरकार द्वारा पारित ‘शिक्षा अधिकार अधिनियम’ (𝟐𝟎𝟏𝟎) के तहत निजी विद्यालयों में नामांकन हेतु आरक्षित सीटों का आधा हिस्सा अति पिछड़ा, पिछड़ी जाति, अनुसूचित जाति और जन-जाति के बच्चों के लिए किया जायेगा।
𝟖. 𝟐𝟓 करोड़ रुपये तक के सरकारी ठेके/आपूर्ति कार्यों में अति पिछड़ा, अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ी जाति के लिए 𝟓𝟎% आरक्षण देने का प्रावधान किया जाएगा।
𝟗. संविधान की धारा 𝟏𝟓(𝟓) के अंतर्गत राज्य के सभी निजी शिक्षण संस्थानों के नामांकन में आरक्षण लागू किया जायेगा।
𝟏𝟎. सभी प्रकार के आरक्षण की देख रेख के लिए उच्च अधिकार प्राप्त आरक्षण नियामक प्राधिकर (𝐑𝐞𝐬𝐞𝐫𝐯𝐚𝐭𝐢𝐨𝐧 𝐑𝐞𝐠𝐮𝐥𝐚𝐭𝐨𝐫𝐲 𝐀𝐮𝐭𝐡𝐨𝐫𝐢𝐭𝐲) की स्थापना की जाएगी। विधान मंडल की अनुमति के बिना आरक्षण हेतु जारी जातियों की सूची में परिवर्तन नहीं किया जायेगा। #TejashwiYadav #Bihar
दिल्ली के मप्र भवन में हुई बैठक ने एक बार फिर साफ कर दिया कि सरकार ओबीसी आरक्षण को लेकर सिर्फ मीटिंग-मीटिंग खेलने में लगी है। महाधिवक्ता साहब ने कहा कि ओबीसी वकील ही केस लड़ेंगे। सवाल है—क्या अब तक गैर-ओबीसी वकील केस लड़कर नाकाम साबित हुए? या सरकार अब जिम्मेदारी से पल्ला झाड़कर ठीकरा वकीलों पर फोड़ना चाहती है?
ओबीसी संगठनों की मांग बिल्कुल वाजिब है—जिन पदों पर कोर्ट का कोई स्टे नहीं है, वहां नियुक्तियां रोकी क्यों गई हैं? सरकार चाहती तो कल ही आदेश निकाल सकती थी कि नियुक्ति न्यायालयीन निर्णय के अधीन रहेगी, लेकिन इसके बजाय “दो दिन की मोहलत” का नाटक हो रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में 23 सितंबर से सुनवाई शुरू होनी है, और सरकार आखिरी समय में “काबिल वकीलों के नाम बताओ” का खेल खेल रही है। यह गंभीरता है या मजाक?
हकीकत यह है कि सरकार ने 27% आरक्षण का वादा तो किया, लेकिन जमीन पर लागू करने की हिम्मत नहीं दिखाई। ओबीसी नौजवान अब बेरोजगारी और भर्तियों में रोक के दोहरे बोझ तले कुचले जा रहे हैं।
मोदी–मोहन की जोड़ी याद रखे—आरक्षण के मुद्दे पर खोखले वादे अब और नहीं चलेंगे।
#OBCआरक्षण #न्यायकीलड़ाई #सरकारकीनाटकबाजी #युवाकाखून
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निधन के बाद कल होने वाले सभी सरकारी कार्यक्रम रद्द किए जाएंगे. 7 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया जाएगा. कल सुबह 11 बजे कैबिनेट की बैठक होगी. डॉ. मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा.
#ManmohanSingh#FormerPM
हेमंत सोरेन ने ऐसा तीर मारा है कि भक्त झेल नहीं पा रहे हैं
अंधभक्तों का दुःख कोई समझ नही पाएगा उन्हें तो वैसे भी उड़ता हुआ तीर लेने का अभ्यास हैं
वैसे ज्यादा दर्द हो सरकार बनने से तो वे पेन किलर ले सकते हैं 😁
@AnirudhGuptaKKM@ChandanSharmaG@ErDPGautam@kajaylroy
देशभर में जातिगत जनगणना की माँग तथा महागठबंधन सरकार के 𝟏𝟕 महीनों के “तेजस्वी जी के सेवाकाल” में बढ़ायी गयी 𝟔𝟓% आरक्षण सीमा को संविधान की 𝟗वीं अनुसूची में शामिल करने की माँग को लेकर 𝐍𝐃𝐀 सरकार के विरुद्ध एक दिवसीय विशाल धरना प्रदर्शन किया जाएगा। #RJD#TejashwiYadav
आरक्षण का आधार धर्म नहीं बल्कि सामाजिक पिछड़ापन होता है। 𝐏𝐌 को इतनी सी भी समझ नहीं है। मंडल कमीशन हमने लागू करवाया है। क्या नरेंद्र मोदी ने कभी मंडल कमीशन और उसकी सिफ़ारिशें पढ़ी है? मंडल कमीशन में 𝟑𝟓𝟎𝟎 से अधिक पिछड़ी जातियों को आरक्षण मिलता है जिसमें अन्य धर्मों की भी सैंकड़ों जातियों को आरक्षण मिलता है।
ये हमसे बड़े और असली 𝐎𝐁𝐂 नहीं ना है? हमसे ज्यादा गरीबों, पिछड़ों और दलितों की इनको समझ नहीं है। ये लोग बस एक-दूसरे को लड़ाते है।
बाबा साहेब के संविधान और जननायक कर्पूरी ठाकुर जी द्वारा दिए गए आरक्षण को खत्म करने की संघियों और भाजपाइयों की पुरानी ख्वाहिश और साजिश रही है। सन् 𝟐𝟎𝟎𝟎 में 𝐍𝐃𝐀 की भाजपाई सरकार ने तो बाजाब्ता “संविधान समीक्षा आयोग” ही गठित कर दिया था।
ये लोग संविधान को मानते ही नहीं, अगर संविधान को मानते तो नफ़रत फैलाने वाली विभाजनकारी भाषा का प्रयोग नहीं करते। #india #Bihar #Constitution #Reservation #trending
अपना वोट देने से पहले एक बार यह ज़रूर सोच लें कि हमारे देश के CJI DY Chandrachud जी इसी साल नंबर में रिटायर हो जाएंगे।
राहुल गांधी की संसद सदस्यता गई तो DY Chandrachud जी ने न्याय दिया।
चंडीगढ़ मेयर इलेक्शन में फ्रॉड हुआ तो DY Chandrachud जी ने न्याय दिया।
इलेक्टोरल बॉन्ड का मामला आया तो DY Chandrachud जी ने देश के सामने सच लाया।
अगर आप यह सब सोचकर अपना निर्णय लेते हैं तो यकीनन आप एक बेहतर निर्णय लेंगे।
अगर कहीं आपका निर्णय गलत हुआ तो आगे CJI DY Chandrachud जी आपके और आपके अधिकारों के लिए लड़ने वाले नहीं होंगे और जो नया आएगा उसका क्या ही भरोसा?
भारत सरकार में गृह मंत्रालय और आईटी मिनिस्ट्री में बैठे कुछ मेरे मित्र अफसरों ने बताया कि आपका खाता तानाशाही रवैया अपनाकर गलत तरीके से बंद कराया गया है, जिसमें रिजुजु और मंडल शामिल हैं। हमें मजबूरी में ट्वीटर को रिपोर्ट करना पड़ा। हम इसके लिए खेद प्रकट करते हैं।
2004 में वाजपेयी चुनाव न जिता पाए. उनको बदल दिया. 2009 में आडवाणी फेल हुए, उनको रिटायर्मेंट में भेज दिया. 2024 में मोदी चुनाव नहीं जिता पाएंगे तो उनको उठाकर फेंक देंगे. यह गति, तेजी से बदलने की क्षमता और चपलता विपक्ष के ज्यादातर दलों में नहीं है. यह वंशवाद के कारण भी है. टॉप की पोस्ट हमेशा परिवार के लिए रिजर्व रखी जानी है. यानी वह पोस्ट एक जाति के पास ही रहेगी. बाकी जाति के नेता टॉप का सपना भी नहीं देख सकते.