बहन वियोना राजस्थान कांग्रेस के नेता NSUI के आम छात्रों के पक्ष में आवाज नहीं उठाएंगे... आपको याद हो तो कल ही एक छात्र के लिए धड़ाधड़ ट्वीट चेप रहे थे, जबकि ना ही वो NSUI की बात करता है, और ना ही सदस्य है!
इसलिए मैं राजस्थान सरकार से आग्रह करता हूं कि आप इन छात्रों से बात करिए, इनकी आवाज सुनिए...मांग मानो या ना मानो, लेकिन बात जरूरी है... मुझे उम्मीद है BJP सरकार आपसे बात करेगी!
क्योंकि कांग्रेस के so-called वरिष्ठ नेता तो गैर कांग्रेसियों के लिए आवाज उठाएंगे, लेकिन कांग्रेस के विचारों वाले छात्रों के लिए नहीं!
#Jaipur #Rajasthan @BhajanlalBjp@RahulGandhi
अलवर के विकास पुरुष, राजस्थान की शान, पूर्व केंद्रीय मंत्री, AICC महासचिव, CWC सदस्य भँवर श्री जितेंद्र सिंह जी को जन्मदिन पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ।
भगवती जमवाय आपको सदा प्रसन्न, स्वस्थ और यशस्वी बनाए रखें।
जनसेवा का संकल्प और मजबूत हो
#BhanwarJitendraSingh@JitendraSAlwar
जमवारामगढ़, जयपुर में कुलदेवी जमवाय माता जी के मंदिर में सपरिवार पूजा-अर्चना कर सबकी खुशहाली के लिए प्रार्थना की।
भगवती जमवाय अलवर सहित संपूर्ण राजस्थान और देशवासियों को सदैव स्वस्थ एवं समृद्ध रखें, ऐसी कामना है।
इस अवसर पर ऊर्जावान कांग्रेस कार्यकर्ताओं, समर्थकों और स्थानीय जनों द्वारा दिए गए सम्मान से अभिभूत हूँ।
#Rajasthan
बाला किला, अलवर में विराजी माँ करणी के दर्शन कर सपरिवार पूजा - अर्चना की।
भगवती माँ करणी से समस्त अलवर और राजस्थान वासियों की खुशहाली एवं तरक्की की कामना है।
#Alwar#Rajasthan
मोदी सरकार ने हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था तबाह कर दी है। स्कूल पास कर कॉलेज जाने की तैयारी कर रहे देश के करोड़ों स्टूडेंट्स / Gen Z के लिए यह सरकार आफ़त बन चुकी है।
देशभर की Central Universities में 12th के बाद एडमिशन के लिए CUET (UG) परीक्षा ली जाती है।
आज NTA द्वारा करवाई जा रही इस परीक्षा में भारी गड़बड़ियां सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु सहित देशभर के तमाम केंद्रों पर परीक्षा 2 घंटे बाद भी शुरू नहीं हो पाई।
NTA इसे Technical Glitch का नाम दे रही है, मगर यह हमारे Education System का फेलियर और सरकार की बेईमानी है।
NEET और CBSE की परीक्षाओं के बाद CUET की परीक्षा में यह अनियमितता / गड़बड़ी सरासर इस सरकार की नाकामी है।
लगातार बड़ी परीक्षाओं में गड़बड़ी BJP सरकार की शिक्षा और युवा विरोधी नीयत दिखाता है।
#CUETUG2026
Shri K. P. Dhanapalan was my colleague in the Lok Sabha. His passing is deeply saddening.
I pray that the departed soul rests in peace and that his family and supporters find the strength to bear this irreparable loss. 🙏🏻
आज फूलबाग, अलवर में NEET Aspirants ने मुलाकात की। NEET Paper Leak के कारण इन स्टूडेंट्स में भारी आक्रोश है।
2024, 25 और 2026... हर साल देश के प्रतिष्ठित माने जाने वाले मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम 'NEET' में भारी गड़बड़ियां सामने आ रही हैं, इससे स्टूडेंट्स बेहद निराश हो चुके हैं।
काफ़ी स्टूडेंट्स 10th क्लास के बाद से ही कोचिंग में एडमिशन ले लेते हैं, कई साल Medical Entrance की तैयारी करते हैं। बहुत से स्टूडेंट्स 12th के बाद कोचिंग करते हैं, अपने कई साल ड्रॉप करते हैं, क्योंकि ईमानदारी से preparation कर #NEET में सिलेक्शन लेकर MBBS करना इनका सपना होता है। बच्चों के साथ ही उनके पैरेंट्स की भी उम्मीदें जुड़ी होती हैं।
आज इन बच्चों ने बताया कि Education System से इनका भरोसा उठ चुका है। इन्हें लगता है कि जो Re-NEET होगा, वह भी Leak हो सकता है। इन्हें लगता है कि यह सरकार स्टूडेंट्स को लेकर, GenZ, युवाओं और education को लेकर responsible नहीं है, sensitive नहीं है।
अलवर के ये होनहार हमारे बच्चों की तरह है। मैंने इन्हें हिम्मत बंधाई है, कहा है कि system में सुधार नहीं होगा तो हम इस सिस्टम को ही बदल देंगे।
#NEETPaperLeak
#Alwar #Rajasthan
आज जयपुर में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री आदरणीय श्री भंवर जितेंद्र सिंह जी का स्वागत कर शिष्टाचार मुलाकात की।
#BhanwarJitendraSingh@OfficeBJS
टीम सीताराम शर्मा नेहरू
बीते दिनों बानसूर क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेस नेता श्री भोरेलाल बागड़ी जी के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
बागड़ी जी को मैं बचपन से जानता था, स्व. रानी साहिबा उन्हें अपना भाई मानती थी।
विधान सभा और लोक सभा चुनावों में उन्होंने पूरे मन से साथ दिया। उनका निधन बानसूर और आसपास के क्षेत्र के साथ ही मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है।
मेरी प्रार्थना है कि ईश्वर उन्हें अपने चरणों में स्थान दें, उनके परिवार और प्रियजनों को हिम्मत मिलें।
#Alwar #Rajasthan @INCRajasthan
कल अलवर में हमारे नेता पुर्व केंद्रीय मंत्री, आदरणीय भंवर जितेंद्र सिंह जी व नेता प्रतिपक्ष आदरणीय टीकाराम जूली जी और ज़िलाध्यक्ष प्रकाश गंगावत जी व बलराम यादव जी के साथ आमजन के सुख-दुख में शामिल हुए। @JitendraSAlwar@TikaRamJullyINC
मेरे दादाजी बताते थे कि खैरथल, अलवर के लिए बिजनेस कैपिटल था, असम का प्रभारी रहते हुए भी मैंने देखा कि यहाँ का नाम पूरे देश में जाना जाता है।
कांग्रेस की पिछली सरकार में पूर्व मुख्यमंत्री श्री @ashokgehlot51 जी ने इस क्षेत्र का मान-सम्मान रखते हुए यहाँ के लोगों का हक़ दिया, खैरथल को ज़िला बनाया, तुरंत अफसर लगाए।
मैंने गहलोत जी को फोन करके धन्यवाद दिया था कि देश में कई ज़िले बनते-बिगड़ते हुए देख लिए, लेकिन जैसे रिकॉर्ड समय में यहाँ काम हुआ, जनता की इच्छा को प्राथमिकता पर रखा गया; कहीं नहीं हुआ होगा!
दुर्भाग्य से आज भाजपा सरकार इस क्षेत्र के लोगों के साथ, खैरथल तिजारा के साथ अन्याय कर रही है। भाजपा खैरथल की जनभावनाओं से खिलवाड़ कर रही है।
#Alwar #Rajasthan #खैरथल
सदैव युवाओं को आगे बढ़ाने का कार्य आपने किया है।
युवा कांग्रेस और अलवर प्रभारी के रूप में आपके साथ कार्य करते हुए यह करीब से समझने का अवसर मिला कि नेतृत्व का अर्थ निर्णय थोपना नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास और सहमति से आगे बढ़ना होता है।
निजी रूप से आप जिस समर्पण और मेहनत से प्रयास करते हैं, यदि उसी भावना के साथ पूरी टीम मिलकर कार्य करे तो निश्चित रूप से हम और बेहतर परिणाम दे सकते हैं।
आपकी कार्यशैली हमेशा प्रेरणादायी रही है।
@JitendraSAlwar
मैं पूर्व केंद्रीय मंत्री और काँग्रेस के वरिष्ठ नेता भंवर जितेंद्र सिंह का कोई ख़ास प्रशंसक नहीं हूँ; लेकिन उन्होंने असम प्रभारी मामले में इस्तीफ़ा देकर एक बड़ी लाइन खींच दी है। भंवर जितेन्द्र सिंह की यह पोस्ट सिर्फ़ एक औपचारिक विदाई-टिप्पणी नहीं है; यह राजनीति में धीरे-धीरे दुर्लभ होते जा रहे नैतिक बोध, विनम्रता और संगठनात्मक संस्कार की याद दिलाती है।
आज जब चुनावी हार के बाद आरोप, कटुता, आत्ममुग्धता या चुप्पी आदि ये चार ही प्रतिक्रियाएँ अधिक दिखती हैं, तब यह पोस्ट एक अलग राजनीतिक भाषा में बोलती है। इसमें हार की पीड़ा है, लेकिन पराजय की कड़वाहट नहीं; भाजपा की रणनीति पर असहमति है, लेकिन जनता के जनादेश के प्रति सम्मान भी है; कार्यकर्ताओं के लिए आभार है, लेकिन भविष्य के संघर्ष की स्पष्ट पुकार भी है।
कांग्रेस में ऐसे लोग अब सचमुच कितने बचे हैं, जो किसी प्रदेश में साढ़े पाँच वर्ष काम करने के बाद उसे केवल एक “राजनीतिक असाइनमेंट” की तरह नहीं, एक भावनात्मक और मानवीय रिश्ते की तरह याद करें? भंवर जितेन्द्र सिंह की पोस्ट की सबसे बड़ी खूबी यही है कि वह संगठन को सिर्फ़ पदों, टिकटों, उम्मीदवारों और परिणामों के जोड़-घटाव में नहीं देखती। वे असम की जनता, माताओं-बहनों, युवाओं, कार्यकर्ताओं और नेताओं का उल्लेख करते हैं। यह बताता है कि उनके लिए राजनीति महज़ सत्ता-प्राप्ति की मशीन नहीं, संबंधों का विस्तृत लोक है।
इस पोस्ट में एक और महत्त्वपूर्ण बात है। हार को स्वीकार करने की लोकतांत्रिक गरिमा। वे चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हैं। ध्रुवीकरण, परिसीमन, सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हैं। लेकिन इसके बावजूद जनता के निर्णय को विनम्रता से स्वीकार करते हैं। यही लोकतंत्र का कठिन संस्कार है। जनादेश को सिर झुकाकर स्वीकार करना और फिर उसी जनता के पास लौटना; यही परिपक्व राजनीति है।
सबसे संवेदनशील पंक्ति वह है जहाँ वे उम्मीदवारों और वरिष्ठ नेताओं से बूथों और मंडलों तक जाकर कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करने का आग्रह करते हैं। भारतीय दलों में अक्सर कार्यकर्ता चुनाव के समय याद आता है और परिणाम के बाद भुला दिया जाता है। लेकिन यहाँ कार्यकर्ता को पराजय के बाद भी सम्मान देने की बात है। यह राजनीतिक नैतिकता का बड़ा संकेत है। चुनाव केवल विजेताओं की कहानी नहीं होता; वह उन अनगिनत चेहरों की मेहनत भी होता है जिन्होंने धूप, बारिश, तिरस्कार और संसाधनों की कमी के बीच विचार का झंडा उठाए रखा।
भंवर जितेन्द्र सिंह की यह टिप्पणी कांग्रेस के भीतर उस पुरानी परंपरा की याद दिलाती है जिसमें राजनीति सेवा, संबंध, संयम और संघर्ष का नाम थी। यह भाषा आक्रामक हो सकती थी, पर नहीं हुई; यह आत्मदया से भरी हो सकती थी, पर नहीं हुई; यह निराश हो सकती थी, पर नहीं हुई। इसमें हार के बाद भी संगठन को फिर से खड़ा करने की इच्छा है। यही कारण है कि यह पोस्ट केवल असम कांग्रेस के लिए नहीं, पूरी कांग्रेस संस्कृति के लिए एक आईना है कि राजनीति में गरिमा अभी मरी नहीं है, बस उसे बचाने वाले लोग कम होते जा रहे हैं।@JitendraSAlwar