राष्ट्र बनता है समाज से।समाज बनता है परिवार से। परिवार बनता है रिश्तों से। रिश्ते बनते है व्यक्ति से।जैसा व्यक्ति होगा वैसा होगा राष्ट्र। राष्ट्र को मापने के लिए अंतिम इकाई व्यक्ति का मूल्याँकन करना होगा।अतः प्रत्येक व्यक्ति को अच्छा नागरिक व ह्यूमन बना होगा ना कि अन्य से तुलना।