दिल्ली में छात्रों का समर्थन कर रहें माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी को पुलिस द्वारा डिटेन किया जाना अति निंदनीय है।
लोकतंत्र की है हत्यारी
भाजपा सरकार अत्याचारी
प्रयागराज के “विवेक Sir” रोते हुए
मोदी जी योगी जी और गोदी मीडिया क्या आप लोगों को “विवेक SIR” के आँसू नही दिखाई देते?
ऊपर वाले के पास जब हिसाब होगा तो क्या बोलोगे बच्चों की कोचिंग पर बुलडोजर चलाया, किसी का मकान उजाड़ा, किसी की दुकान उजाड़ी, करोड़ों नौजवानों की ज़िंदगी बर्बाद की।
जिसने वर्षों तक पत्रकारिता को TRP, प्रोपेगेंडा और सत्ता के पक्ष-विपक्ष की लड़ाई में बदल दिया हो, उसे शिक्षकों को 'धंधेबाज' कहने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए।
शिक्षा में गलत लोग भी हैं।
लेकिन पत्रकारिता में भी हैं।
राजनीति में भी हैं।
व्यापार में भी हैं।
तो क्या कुछ गलत लोगों के कारण पूरे शिक्षक समाज को "दो कौड़ी का" कह दिया जाएगा?
anjana शिक्षक का सम्मान कमाने में वर्षों लगते हैं।
भर्तियाँ अटक रही थीं,
लाखों युवाओं की उम्र निकल रही थी,
तब आपके स्टूडियो की आवाज़ कहाँ थी?
शिक्षकों ने पैसे लेकर शिक्षा दी है।
लेकिन पैसे लेकर किसी राजनीतिक दल का प्रवक्ता बन जाना,
व्यवस्था की हर गलती पर पर्दा डालना,
और जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाना...
यह सिर्फ पत्रकारिता का पतन नहीं,
बल्कि अपने पेशे के साथ गद्दारी है।
शिक्षक फीस लेकर ज्ञान देता है,
मेहनत करवाता है,
बच्चे का भविष्य बनाता है
शिक्षकों ने पैसे लेकर पढ़ाया है,
देश के लाखों युवाओं को रोजगार तक पहुँचाया है।
लेकिन गलत को सही और सही को गलत साबित करने की कीमत लेकर काम करना,
समाज और लोकतंत्र दोनों के साथ विश्वासघात किसने किया ?
प्रिय चायवालों,
फतेहपुर में हमने आपमें से एक, जिस ‘आत्मनिर्भर आर्यन’ की दुकान पर प्रेमपूर्वक चाय पी थी उसकी चाय का सैंपल फूड सिक्योरिटी विभाग ने लेकर, आर्यन को ये धमकी दी है कि तुम एल्युमीनियम के बर्तन में चाय बनाते हो, तुम्हारी दुकान सील कर देंगे। शुक्र है ये नहीं कहा कि ‘लाल’ सिलेंडर पर बनाते हो तो सील कर देंगे, वैसे कह भी नहीं पाते क्योंकि सिलेंडर तो मिल नहीं रहा है।
ये धमकी सिर्फ़ एक आर्यन को नहीं है, उन सब आर्यन को है जो महा-बेरोज़गारी के इस भाजपाई दौर में चाय बनाकर या अपना कोई छोटा-मोटा काम करके अपने पैरों पर खड़े होने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा किसी को नौकरी-रोज़गार तो देती नहीं है उसके विपरीत जो स्वयं अपनी मेहनत से कुछ करना चाहते हैं, उनको सिर्फ़ इसलिए धमकाती है क्योंकि हम जैसे लोग उनके काम को सम्मान देने के लिए, उनके कारोबार को प्रोत्साहित करने के लिए, उनके पास चले जाते हैं।
अब जब ये सरकारी विभाग का छोटापन, लखनऊ तक पहुँचेगा तो देखते हैं, इस कुकृत्य के लिए ऐसे अधिकारियों का निलंबन होता है या उनको इनाम दिया जाता है।
फूड सिक्योरिटी विभाग कभी अपने भ्रष्टाचार का भी तो सैंपल ले। उस घूसखोर विभाग में महा-भ्रष्टाचार के जो बेहद बुरे हालात हैं, उसके आधार पर नाम बदलनेवालों को एक सुझाव ये है कि वो इस विभाग का नाम बदलकर सीधे ‘मिलावट विभाग’ ही कर दें या ‘भाजपा चंदा विभाग’।
इससे पीड़ितों में ‘प्रीपेड पीड़ित’ के बाद ‘टी पीड़ित’ की एक और नई श्रेणी जुड़ गयी है। अब पूरे प्रदेश के चाय बेचनेवाले ‘पीडीए’ से जुड़ जाएंगे और एक नई चाय शुरू करेंगे जिसका नाम होगा ‘पीडीए टी’।
भाजपा ने अपनी तुच्छ राजनीति को पाताल से भी नीचे ले जाकर खड़ा कर दिया है। घोर निंदनीय!
हम हर छोटे-से-छोटे गुमटी-टपरीवाले, रेहड़ी-पटरी-फेरी-ठेलेवालों, साप्ताहिक हाट-सब्ज़ी बाज़ारवालों और हर छोटे-बड़े दुकानदार, काम कारोबार-कारख़ानेवालों की, अपनी रोज़ी-रोटी कमाने की सम्मानजनक कोशिश करनेवालों के साथ खड़े हैं और हमेशा रहेंगे।
हम उन सबसे कहेंगे :
मत डरिए, अपना काम करिए!
चिंता न करें : बुरे दिन जानेवाले हैं!
आपका
अखिलेश
#बुरे_दिन_जानेवाले_हैं
विशेष : इस कु-समाचार के बारे में जब भाजपा के कट्टर समर्थकों तक को पता चलेगा तो वो भी बेहद शर्मिंदा होंगे, वैसे सत्ता का लाभ उठा रहे कुछ स्वार्थी लोगों के सिवाय भाजपा के समर्थक लोग अब कुछ ज़्यादा बचे ही नहीं हैं।
गर्मियों से मेरा न तो कोई पुराना बैर है, और न ही कोई गहरा अनुराग। हर इंसान की तरह, इस मौसम की भी अपनी एक अलग तासीर है। इसकी धूप दोपहर में चमड़ी पर जब पड़ती है, तो लगता है किसी ने अपने तपते हुए बुखार वाले हाथों से गाल पर एक कड़क तमाचा जड़ दिया हो। फिर भी, सर्दियों की भारी ठिठुरन के ठीक बाद जब यह दस्तक देती है, तो एक अजीब सी राहत लाती है।
सच कहूं तो यह सूती कमीज़ों और खुली छतों का मौसम है। इसमें ऊनी परतों का कोई भारी बोझ नहीं। बस एक हल्की टी-शर्ट पहनिए और निकल पड़िए। यह मौसम रात की ठंडी हवा जैसा है, जिसमें भारी कंबलों की कोई फिक्र नहीं होती। नींद किसी भी खुले कोने में चुपचाप आ बैठती है।
पर जब सड़क पार करती कोई लड़की धूप की आंच से बचने के लिए अपने चेहरे के आगे हथेली की दीवार खड़ी कर लेती है, तो मुझे इस मौसम पर एक अजीब सी दया आती है। ऐसा लगता है जैसे किसी ने बड़े चाव से आए मेहमान के मुंह पर दरवाज़ा बंद कर दिया हो। उस हथेली से टकराकर लौटती धूप भी कितनी उपेक्षित और अकेली महसूस करती होगी।
बंद शीशों वाली कारों के भीतर बैठे लोगों के लिए इस मौसम का मतलब शायद सिर्फ पिघलती सड़क पर रबर के टायरों का खौलना भर है। फिर भी, इस तपती हुई ज़मीन और सूखी टहनियों के बीच कुछ फूलों का खिलना ज़रूरी है,भले ही उनका नसीब शाम तक टूटकर धूल में मिल जाना ही क्यों न हो।
Rajpal bhai aap 30 yrs se kaam kar rahe ho aur hum sabne aapko repeat kiya hai baar baar kyunki aap apna kaam jante ho aur ek value laate ho , kaam toh aapko bohot milega aur issi dollar rate pe milega aur milte rahega . Hakikat yeh hai .
Aur yeh yaad rakhna ke kabhi kabhi flow mai kuch nikal aata hai ,dena hi hai toh dimag mai rakho dil se kaam karo , dollar upar ho ya neeche kya farak padta hai dena toh India mai hi hai @rajpalofficial
पत्रकार @Anurag_Dwary ने अपनी ज़िम्मेदारी निभाते हुए भाजपा सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से गंदे पानी से हुई मौत को लेकर सवाल पूछा।
इस सवाल पर नेता जी उखड़ गए और जवाब देने के बजाय बदतमीज़ी पर उतर आए, और घंटे-मिनट गिनाने लगे।
दिल्ली में लाल किला के पास हुए कार विस्फोट की दुःखद सूचना मिली। देश की राजधानी में ऐसे विस्फोट चिंताजनक और पीड़ादायक है। इस दर्दनाक हादसे में जिन परिवारों ने अपने निर्दोष प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूँ तथा सभी घायलों के शीघ्र अति शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।
राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में- चाहे वो पुलवामा हो या पहलगाम- हम सरकार के साथ दृढ़ता से खड़े रहे हैं। देश की सुरक्षा और संप्रभुता से महत्त्वपूर्ण कुछ भी नहीं है।
हम केंद्र सरकार से आग्रह करते हैं कि इस मामले की गहन जांच करें एवं निष्पक्ष व पारदर्शी कार्रवाई से जनता को आश्वस्त करें तथा दोषियों को कठोर से कठोर सबक सिखाए।
आखिर कब तक भारतीय डर के साए में रहेंगे? जय हिंद!
दिल्ली में लाल क़िले के पास कार में धमाका हुआ, कई गाड़ियां और दुकानें भी ज़द में आए और अभी कई लोगों की मौत की भी ख़बर आरही है। धमाका कैसे हुआ इसके पीछे क्या है क्या नहीं इसकी कोई पुष्ट जानकारी नहीं आई है। एहतियात बरतें, सावधान रहें।
Dear @ECISVEEP@CEOBihar
On behalf of @RJDforIndia have sent a letter regarding Non‑Release of Gender‑Wise Voter Turnout Data for Phase 1 (6 November 2025) voting. You would agree that transparent and timely dissemination of electoral data is a cornerstone of a healthy democracy. In recent election cycles, the Commission has repeatedly fallen short of this standard, withholding crucial information that the public, analysts, and civil society organisations rely upon to assess the inclusiveness and fairness of the electoral process. The absence of gender-disaggregated turnout figures also undermine public confidence in the integrity of the electoral system.
Jai Hind
नालंदा जिला में EVM के कैमरे आधे घंटे तक बंद रहे! भारी हंगामा हुआ! तब जाके चालू हुआ कैमरा!
हर बार कैमरे बंद होने के पहले उस क्षेत्र में अवैध गाड़ियों की आवाजाही शुरू हो जाती है!
हर बार फालतू बहाने बनाए जाते हैं!
@ECISVEEP अपनी विश्वसनीयता और जनादेश के साथ खिलवाड़ ना करे!
@CEOBihar
#RJD #TejashwiYadav #Bihar