ये चल क्या रहा है? कोई कफ सिरप कैसे डाल सकता हैं आँख में? आई ड्रॉप की जगह कान या नाक का ड्रॉप डाल दे तो समझ में आता है कि ह्यूमन एरर हो सकता है (जो नहीं होना चाहिए), पर कफ सिरप? इसको तो मृत्युदंड मिलना चाहिए।
दीपके कितना बड़ा अखंड चूतिया है, उसका प्रमाण यह वीडियो है। कॉन्ग्रेस की दो कौड़ी की रैली हो रही थी, वह भी उसी दिन जिस दिन महीने भर पहले से NEET प्रस्तावित था, लोग जाम में फँसे, समय से पहुँच नहीं पाए। और चूतिए कॉकरोच को यही नहीं पता कि ट्रैफिक और प्रशासनिक व्यवस्था राज्य सरकार के हाथ में होती है। कॉन्ग्रेस एक तरफ कोटा में रॉकस्टार राहुल के शो कर रही है, और वास्तव में पार्टी की रैली के कारण बच्चों का पुरा साल खराब हो रहा है।
जब क्रांति अनशन की बात कह कर ब्रेड पकौड़े खाने लगे, हगने के लिए फाइव स्टार होटल जाने लगे, छात्र समस्या के नाम पर मजदूर-किसान बुलाने लगे क्योंकि कोई आ नहीं रहा, तब अंततः ऐसे ही कुतर्की बकचोदियाँ बच जाती है।
कॉन्ग्रेस ने ऐसा क्या दे दिया है कि राहुल गाँधी का नाम तक नहीं ले पा रहा दीपके? पार्क होटल या ब्रेड पकौड़ा?
अरे निर्लज्ज @dpradhanbjp, स्वयं कुर्सी क्यों नहीं त्याग रहा?
इसकी असफलताओं पर लिख-लिख कर, मैंने शिक्षा मंत्रालय पर इतना लिख दिया कि मैं भी अब अपनी कुर्सी पर नहीं बैठ पा रहा!
मैंने कल एक रोते हुए बच्चे की वीडियो देखी कि उसके पास पैसे नहीं हैं, वो पुनः जाँच क्यों करवाए पैसे दे कर? उसे ‘एसेंशियल रिपीट’ में डाल दिया @cbseindia29 इवैलुएटर ने।
ऐसा तो है नहीं कि कॉपी भेजनी है डाक से। जब हर परीक्षार्थी के हर कॉपी की स्कैन PDF उपलब्ध है, तो वह बच्चों को तो निःशुल्क मिलनी चाहिए। वो लॉगिन करे, उसकी हर कॉपी उसे दिखे, और जब उसे दोबारा जाँच में भिजवानी हो, तो CBSE एक रिफंडेबल अमाउंट ले।
पता नहीं क्यों ये बकलोली कि कॉपी देखने के भी पैसे लगेंगे। कोई तर्क नहीं, कोई अतिरिक्त खर्चा नहीं, बस बच्चों को सताओ। 98 लाख कॉपियाँ हैं, 18 लाख बच्चे हैं। हर बच्चे की एक प्रोफाइल और कॉपी के pdf लिंक क्यों नहीं डाल देते ये लोग साइट पर?
वहीं आप बगल में लगा दें री-इवैलुएशन का बटन। पेमेंट ले लो। यदि बात सही निकले तो पेमेंट रिटर्न कर दो।
पूरा दिन टाइमलाइन केवल ऐसे बच्चों के कॉपी के पन्नों से पटा पड़ा है जिसमें लगता है भाँग खा कर जाँच की गई है। फिजिक्स और कैमिस्ट्री के सबसे अधिक। कहीं पन्ने मिसिंग हैं, कहीं ब्लैंक पेज लिखा है, कहीं रॉन्ग क्वेश्चन नंबर लिखा है, कहीं स्टेप के नंबर नहीं दिए, कहीं उत्तर ही मिस कर दिया, कहीं MCQ को गलत कर दिया…
@EduMinOfIndia यदि थोड़ी भी लज्जा बाकी है, तो ढंग का काम कर दो। और हाँ @narendramodi@PMOIndia, @dpradhanbjp को निकालिए मत, उनको प्रमोट कर के रक्षा मंत्री टाइप कुछ बना दीजिए। किसी राज्य का राज्यपाल या विदेश में राजदूत टाइप का कुछ। रिवार्ड कीजिए, बहुत बढ़िया कार्य कर रहे हैं।
‘Pakistani’ Vedant is not the only one with wrong answer sheet. There are many with blurred scans, mixed pages, wrongfully identified blank pages, ‘repeated answer’, missing marks for steps, unevaluated answers and so on.
ये बच्चे पाकिस्तान के नहीं हैं। दर्जन भर लोगों ने तो केवल मेरे एक पोस्ट के नीचे इस समस्या के बारे में लिखा है। CBSE की वेबसाइट ना तो ट्रैफिक हैंडल कर पा रही है, ना ही उत्तरपत्र की जाँच सही हुई है, ना ही पुनः जाँच के आवेदन पर साईट ठीक से कार्य कर रही है।
@dpradhanbjp चाहे जितना प्रयास कर लें, उनके मंत्रालय ने शिक्षा से संबद्ध हर विभाग की रेड मार रखी है। आप केवल यह सोचिए कि यह बच्चा (जो भारत का ही है, ABP पर इंटरव्यू दे रहा है) यदि यह झेल रहा है, तो ऐसे कितने लोग होंगे जिनकी कॉपी ग़लत जाँची गई, किसी और का नंबर किसी और पर चढ़ा दिया गया होगा!
दिल्ली जिमखाना क्लब
१. एलीट हर समाज में होते हैं, उन्हें एक्सक्लूसिव जगहें वैसे ही चाहिए जैसे मिडिल क्लास से तुरंत बाहर आए लोगों को ‘अपनी स्टेटस की जगह’ चाहिए। इसमें कोई समस्या नहीं है, पर हम जब वह स्टेटस चाहते हैं तो हम पैसे देते हैं। कोई पीएम आवास के बगल में, 22 एकड़ की जगह का किराया ₹1000 प्रति वर्ष कैसे दे सकता है?
२. खुशवंत सिंह का टेनिस खेलना ऐसी बकचोदी भरा तर्क है कि क्या कहें। वो क्या डेविस कप खिलाड़ी थे? या बुढ़ापे में टेनिस की शॉर्ट्स पहन कर टाइम पास करने आते थे?
३. कल्चरल हैरिटेज है ये। सच में? कौन से संस्कृति को योगदान दिए जाने वाले कार्य यहाँ पर हुए हैं?
४. जो बवाल काटे हुए हैं उनमें से भी अधिकांश का कोई उचित तर्क नहीं है कि क्यों यह सही हो रहा। उनका यही है कि हम भिखमंगे हैं, तो अमीर अपनी टोली बना कर साले क्यों रहते हैं। भाई, तुम भी कमाओ, तुम भी सर्विसेज में जाओ, टॉप के लॉयर-बिजनेसमैन बनो, सदस्यता पा जाओ यदि 37 वर्ष की प्रतीक्षा कर सकते हो तो।
बात यह है कि हम सब ऐसी एक्सक्लूसिविटी चाहते हैं, अवैध हो तब भी चाहते हैं। हम चाहते हैं कि हमें मंदिर में किसी जान-पहचान के माध्यम से लाइन में न लगना पड़े।
इस पर यदि आप इसलिए प्रसन्न हैं कि सरकार के बगल में ये लोग इतने कम रेंट पर एक ‘व्यवसाय’ चला रहे थे, तब तो उचित है, परंतु यदि आपकी समस्या अमीरों का एक्सक्लूसिव क्लब है, तो उत्तर है: तुम भी कमाओ भाई!
राहुल गाँधी ने सप्ताह भर पहले बंगाल के चीफ पोल ऑफिसर को सरकार में मुख्य सचिव नियुक्त होने पर लिखा था कि ‘यही है भाजपा-चुनाव आयोग वोट चोरी मॉडल, जितनी बड़ी चोरी, उतना बड़ा पुरस्कार’।
अब केरल के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर को केरल सीएम ने अपना सचिव बनाया है, क्या अर्थ निकाला जाए?
इस पर आप कहीं चूँ-चपड़ नहीं देखेंगे।
पीएम ने जो तेल बचाने आदि के संकेत दिए और कोरोना काल की याद दिलाई, वह ईरान से कम और आने वाले सुपर एल-नीनो के प्रभाव का आकलन अधिक दिख रहा है।
भारत के संदर्भ में, मानसून औसत से कम रहने से आने वाली फसल प्रभावित होगी। ईरान के कारण खाद की आपूर्ति कम हो रही है, तो फसल और कम होगी। वैश्विक परिस्थितियों के कारण, चाहे यूक्रेन हो या ईरान, खाद्य आपूर्ति के संकट उत्पन्न होंगे। यूरोप से ले कर अन्य महादेशों में भी युद्धजनित संकट न केवल आर्थिक है, बल्कि सामाजिक भी है।
इसी मानसून के कारण इंडोनेशिया, मलेशिया से होने वाले खाद्य तेल की आपूर्ति भी प्रभावित होगी। तेल कम खाने की बात आने वाले समय से जोड़ कर ही कही गई है। हेल्थ तो सेकेंडरी है, पहले खाने को हो तब तो खाएँगे!
इसका प्रभाव छः माह से आरंभ हो कर तीन वर्ष तक रह सकता है। 90% संभावना है कि वैज्ञानिक जैसा बता रहे हैं, वैसा ही घटित होगा। हाँ, सरकारों को पहले से पता है कि क्या-क्या होगा, तो भंडारण पर ध्यान दे रही है।
गरीब को सर्वाधिक मार पड़ेगी और 80 करोड़ को जो राशन मिल रहा है, उसके मिलने के कारण, जो भंडारण हो सकता था ऐसे समय के लिए, वह कदाचित पूरे देश पर एक बोझ बन जाए।
अक्टूबर से चावल, गेहूँ और तेल के मूल्यों में वृद्धि होगी। कालाबाज़ारी चलेगी और विपक्ष सिलिंडर की ही भाँति इस पैनिक क्रिएशन में अपना भरपूर सहयोग देगा। PM को आगामी यूपी चुनाव के कारण एड़ी-चोटी का बल लगाना पड़ जाएगा।
विपक्ष इसी अवसर की तलाश में है और प्राकृतिक आपदा से उत्पन्न कृत्रिम व्यवधानजनित कुव्यवस्था को वो जम कर भुनाएँगे। सरकार को मल्टीपल फ्रंट पर लड़ना होगा। ऐसे में उन्हें वह भी करना पड़ेगा जो अपने ईगो के कारण वो टाल रहे हैं।
समाचार समाप्त हुए।
प्रधान, सरकारी नाकामी और CBSE स्कूलों की नई SMC
धर्मेंद्र प्रधान @dpradhanbjp जाते-जाते एक और कांड कर के जा रहा है। वैसे प्राइवेट स्कूल, जिसमें सरकार एक पैसा नहीं देती, उनमें SMC (स्कूल मैनेजमेंट कमिटी) में 75% अभिवावकों का होना अनिवार्य कर दिया गया है। यानी, स्कूल के मालिक अब यह तय नहीं करेंगे कि स्कूल कैसे चले।
ऊपर से आपको लगेगा कि यह तो अच्छी बात है, स्कूल मनमानी फीस लेते हैं, अब नकेल बँधेगी। हालाँकि ऐसा कुछ नहीं है। फीस नियंत्रित करना है तो ब्रैकेट बना दो, फ्रेमवर्क बना दो कि कितनी फैसिलिटी पर कितनी फीस मान्य है।
एसी और स्वीमिंग वाले स्कूल की फीस आपके बगल के आठ कमरों वाले स्कूल के फीस के बराबर नहीं होगी। हाँ, यूनिफॉर्म और किताब के नाम पर बाध्यता बंद होनी चाहिए। और ये कार्य वहाँ करो जहाँ सरकार पैसे देती है।
खैर, अब ये जो SMC है, उसमें 75% अभिभावक होंगे, तो स्कूल का पैसा कहाँ खर्च होगा, वही तय करेंगे। कौन से शिक्षक पढ़ाएँगे, वही तय करेंगे। किस शिक्षक की कितनी सैलरी होगी, वही तय करेंगे।
इस कमिटी में वस्तुतः स्कूल के मालिक के अलावा सब हैं। 8% स्थानीय प्रशासन के लोग, 8% शिक्षक, 8% में आंगनवाड़ी, आशा बहू एवम् अन्य स्थानीय लोग होंगे। सरकारी बना नहीं सकते, वहाँ से पैसा आता नहीं, तो प्राइवेट का दोहन करो।
और तो और, ये कमिटी ही यह तय करेगी कि स्कूल अपनी बाउंड्री बनाने से ले कर लैब बनवाने, स्मार्ट क्लास का काम या अन्य बड़े कार्य किस ठेकेदार को दे। यानी, अब अभिभावक यह बताएँगे कि स्कूल जिस ठेकेदार से कम में काम करा रहा है उसकी जगह वो अभिभावकों के बीच के किसी व्यक्ति को ठेका दें, वह भी PWD रेट पर!
सरकार इस पर यही कहेगी कि ‘ये स्कूल और स्कूल के ट्रस्टी की मनमानी रोकने के लिए है’। फिर तो सरकार को हर दुकान, हर कम्पनी में ‘उपभोक्ता की कमिटी’ बना देनी चाहिए कि पारले का बिस्कुट कितने में बिकेगा, मारुति की कार कितने में आनी चाहिए। प्राइवेट का मतलब फिर क्या होता है?
सरकार नकारी है, घटिया शिक्षा देती है इसलिए उसका लोड प्राइवेट स्कूल उठाते हैं। वो मनमानी न करें, इसलिए आप एक रेगुलेशन ले कर आते हैं। प्राइवेट स्कूल को @cbseindia29 तब रिकग्नाइज करती है जब उसके पास कुछ मूलभूत सुविधाएँ हों: लैब है, स्मार्ट क्लास है, सीसीटीवी है, ग्राउंड है, शिक्षकों की डिग्री क्या है, कितने बच्चों पर कितने शिक्षक हैं आदि।
क्या यह फ्रेमवर्क काफी नहीं है? या अब माता-पिता ही तय करेंगे कि उनके बच्चे को जिस शिक्षक ने डाँटा, अब उसे निकाला जाए? क्या माता-पिता बताएँगे कि स्मार्टबोर्ड का टेंडर फलाने की जगह ढिमका को दिया जाए क्योंकि वो इनके मित्र हैं? जब सरकार वित्तीय सहायता नहीं देती, तो वह उसके आर्थिक विषयों में इतना हस्तक्षेप क्यों करना चाहती?
तुमने गाँव के स्कूलों में पंचायत समिति का बवासीर डाल रखा है जो ग्रामीण राजनीति के कारण वहाँ भी नकारापन फैलाती दिखती है। सरकारी शिक्षक जनगणना से ले कर चुनाव ड्यूटी और सामूहिक विवाह तक में ड्यूटी दे रहे होते हैं। दाल-चावल का हिसाब रखना होता है, वह अलग।
RTE के माध्यम से, अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए आपने प्राइवेट में भी गरीब बच्चों के लिए व्यवस्था की। सरकारी में क्यों नहीं डालते? क्योंकि आप जानते हो वहाँ रद्दी शिक्षा मिलती है। प्राइवेट आपका लोड कम करता है, और आप वहाँ 75% माता-पिता के हाथों में नियंत्रण देना चाहते हैं।
अब ये जो गुलाबी बात कही जा रही है, उसका फॉलआउट ये नहीं जानते। स्कूल बंद होने लगे, तो क्या सरकार स्कूल खोलेगी? जिस माता-पिता को विद्यालय मनमानी वाला लगता है, उनके पास विकल्प है कि वो दूसरे विद्यालय में चले जाएँ। आपको एसी चाहिए बच्चों के लिए तो आपको पैसे भी देने पड़ेंगे।
पुनः कहूँगा कि यूनिफॉर्म-पुस्तक का केवल डिजाइन, नाम और सिलेबस स्कूल को देना चाहिए। बच्चों को स्वतंत्रता हो कि वो कहाँ से लें। फीस का ब्रेकेट तय करे सरकार स्कूल की सुविधाओं के आधार पर। इससे इतर यदि निजी स्वामित्व के विद्यालयों में माता-पिता को 75% नियंत्रण दिया गया तो समाजवाद तो आ जाएगा, पर समाजवादी पैरेंट्स के बच्चों को पढ़ाने के लिए विद्यालय नहीं बचेंगे।
Three IPS suspended
There are many criminals
Their leader is Mamata Banerjee
If she is caught and thrown in jail
Then the names of all the criminals will come out
Ratna Debnath
सरकार दावा कर रही है कि NEET लीक के मुख्य आरोपित को उन्होंने पकड़ लिया है। मुझे लगता है कि सरकार चूतिया बना रही है। ३ दिन में सब कुछ सुलझ गया? 2024, 2025 और 2026 में लीक होते रहे और बस एक व्यक्ति 'किंगपिन' है जिसने कोचिंग में बुला कर लिखवा दिया?
जिस स्केल पर ये सब हो रहा है, और होता रहा है, वह इतना सिंपल नहीं है कि एक ने लिखवाया, १० ने ख़रीदा और हो गया? फिर दोबारा परीक्षा क्यों हो रही है? इन सबके परिजनों को ट्रेस करो और उन्हें जेल में डालो।
जिन्होंने चोरी नहीं कि उनका स्कोर ले लो और काउंसलिंग करो। यदि यह लीक इतना डीप नहीं है तो दोबारा एग्जाम की आवश्यकता क्या है? यदि यह इतना ही आसान था, तो NTA या सरकार ने स्वयं इस लीक को क्यों नहीं पकड़ा?
विस्सलब्लोअर ने FIR की चेष्टा की, साक्ष्य जुटाए और तब जा कर ये लोग काम पर लगे। स्पष्ट रूप से यह कुछ बड़े नामों को बचाने का प्रयास है। जितना सीधा और जितनी तीव्रता से एक कुलकर्णी को पकड़ कर किंगपिन बता दिया गया, मुझे नहीं लगता ये इतना सरल है।
सरल है और 11 लोग ही हैं, तो सबका एग्जाम क्यों?