आज जब संविधान को कमजोर करने की हर मुमकिन कोशिश की जा रही है ऐसे दौर में हमें संविधान को और अधिक मजबूती से पकड़े रहना होगा। इसके साथ-साथ इसके निर्माण की कहानी को जानना बेहद जरूरी है क्योंकि जो लोग इसे कमजोर कर रहे है वे इसकी बुनियाद पर चोट कर रहे है।
ऐसे में हमें संविधान की बुनियाद को एक बार फिर से समझना होगा लेकिन इस बार उसे एक अलग नज़रिए-आदिवासी- से। क्योंकि आदिवासी दर्शन ने हमारे संविधान को समावेशी और लोकतांत्रिक बनाया है।
इस पूरी कहानी को मैंने अपनी नई पुस्तक “संविधान सभा में आदिवासी” में दर्ज किया है।
यदि आप संविधान की बुनियाद को और आदिवासियों के योगदान को समझना चाहते है तो इसे पढ़ सकते है। कुल 360 पेज की इस पुस्तक को @UnboundScript ने छापा है यदि आप इच्छुक है तो ऑनलाइन ऑर्डर कर सकते है अथवा मुझे मैसेज या काल कर सकते है।
जोहार
डॉ जितेंद्र मीणा
जिस आदिवासी समाज ने सदियों से जंगलों, नदियों, पहाड़ों और प्रकृति की रक्षा की, जिसने इस भूमि को अपना घर नहीं बल्कि अपनी पहचान माना, उस आदिवासी समाज को आज भी अपने इतिहास और अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
इसी इतिहास, इसी संघर्ष और संविधान निर्माण में आदिवासी नेतृत्व की ऐतिहासिक भूमिका को सामने लाने का एक छोटा-सा प्रयास है मेरी नई पुस्तक "संविधान सभा में आदिवासी"।
यह पुस्तक उन आवाज़ों की कहानी है जिन्हें अक्सर इतिहास की मुख्यधारा में पर्याप्त स्थान नहीं मिला। यह उन प्रतिनिधियों की कहानी है जिन्होंने संविधान सभा में खड़े होकर आदिवासी समाज के स्वशासन, संस्कृति, पहचान और संवैधानिक अधिकारों के लिए मजबूती से अपनी बात रखी।
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर मैं यह पुस्तक आप सभी साथियों को समर्पित करता हूँ। आशा है कि यह पुस्तक हमारे अतीत को समझने, वर्तमान को देखने और भविष्य की दिशा तय करने में एक सार्थक हस्तक्षेप साबित होगी।
जोहार! 🏹
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राजस्थान के बाड़मेर में स्कूली छात्र-छात्राएं अपनी विभिन्न जायज़ मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि भाजपा सरकार की छात्र विरोधी नीतियों और प्रशासन की उदासीनता के कारण विद्यार्थियों को अपनी आवाज़ बुलंद करने के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है।
जब सरकार छात्रों की समस्याएं सुनने के बजाय उन्हें अनदेखा करती है, तो आंदोलन ही आख़िरी विकल्प बन जाता है। सरकार को चाहिए कि राजनीति छोड़कर विद्यार्थियों की मांगों पर तत्काल कार्रवाई करे और उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करे।
छात्रों की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता, उसे सुना जाना चाहिए।
@RajGovOfficial@RajCMO@rajeduofficial
'चढ़ावा चोर - गद्दी छोड़'
आज संसद परिसर में विपक्ष के सांसदों ने बेहद अनोखे तरीके से 'चढ़ावा चोरी' के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
📍 दिल्ली
@RahulGandhi@INCIndia#NirmalChoudhary
बड़ी खबर-
उद्घाटन के 12 दिन के अंदर धँस गया लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे।
धूमधाम से किया गया था उद्घाटन।
पर उसे भी बड़ी खबर यह है कि दिन रात योगी सरकार की जयजयकार में जुटे ज़ी न्यूज़ को ये खबर चलानी पड़ गई!!
असली ख़बर तो यही है।
अगर माइलेज 3–5% घटेगा, तो हर 100 किमी पर जनता की जेब से और पैसा निकलेगा। बाइक चालक 6–11 रुपये और कार चालक 21–35 रुपये तक अतिरिक्त खर्च करेगा।
भुगतान ज़्यादा, माइलेज कम–आखिर E20 के नाम पर जनता की जेब पर दोहरा वार क्यों?