जातिवाद ने फिर एक दलित की जान ले ली। उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में 17 साल के दलित लड़के केतन लाल की बर्बर हत्या कर दी गई। जल्द एक ग्राउंड रिपोर्ट #JusticeForKetan
राजा रघुवंशी हत्याकांड में सोनम रघुवंशी का एक इंटरव्यू देखा। उसने कहा कि वह नेपाल या इंदौर कहीं भागकर नहीं जाएगी, और न्यायिक प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेगी।
सोनम रघुवंशी को छोड़िए, असली सवाल तो न्यायपालिका पर है, जिसने ऐसी खूंखार औरत को जमानत दे रखी है।
पैर दबाने से मना करने पर दलित की हत्या!
ललितपुर में शराब पार्टी में दलित ने जातिवादियों का पैर
दबाने मना किया तो सम्यक जैन, गजेंद्र लोधी और गौरव रैकवार ने लोहे की राड से पीटकर उसकी हत्या कर दी।
BJP राज में दलित वेंटीलेटर पर जीने को मजबूर हैं।
अत्यंत पीड़ादायक खबर।
हरियाणा के रोहतक में एक दलित युवक की निर्मम हत्या का भयावह मामला सामने आया है। हमलावरों ने घेरकर तेजधार हथियार से नीरज की गर्दन पर हमला करके उसकी हत्या कर दी, और उसका शव एवं सिर अलग-अलग कर दिया।
BJP राज में दलित समुदाय कहीं भी सुरक्षित नहीं है।
दलित हिंदू नहीं हैं।
बांदा में ललित वर्मा और शिवानी चौहान ने लव मैरिज की थी, लेकिन फिर भी पुलिस ने उन पर FIR दर्ज की।
पुलिस उन्हें जबरन उठाकर थाने ले आई। यहां जातीय दंभ में लड़की के पिता ने थाने में ही उसकी जघन्य हत्या कर दी।
सवाल यह है कि कोई थाने में चाकू लेकर घुसा कैसे? थाने में SHO से लेकर SI, हेड कांस्टेबल सहित अनेक सिपाही मौजूद थे। सबकी मौजूदगी में बेटी बार-बार अपने मां-बाप से मुकदमा वापस लेने के लिए गिड़गिड़ाती रही। उसने कहा कि मैं बालिग हूं और इस लड़के से बहुत प्रेम करती हूं। मैं इसी लड़के के साथ रहना चाहती हूं और रहूंगी।
लेकिन दो कौड़ी का दरिंदा बाप अपने जातीय अहंकार में ग्रस्त था। वैसे उसकी आर्थिक हालत एकदम तंग थी, बमुश्किल घर वालों को पेट भर खाना दे सकता था, लेकिन वह समाज में अपनी जाति का अहंकार कमतर नहीं होने देना चाहता था। भला उसकी बेटी किसी दलित से शादी कैसे कर सकती थी? लड़का हिंदू है तो क्या हुआ? है तो निचले दर्जे का। "हिंदू-हिंदू एक हैं" वाली लफ्फाजी से जातीय अभिमान थोड़ी तय होता है।
जब उसके बाप को यह लग गया कि लड़की उसकी बात नहीं मानेगी, तो उसने जेब से चाकू निकाला और लड़की पर कई वार कर उसकी हत्या कर दी। पुलिस तमाशबीन बनकर खड़ी देखती रही। सवाल यह है कि अगर दलित थाने में भी सुरक्षित नहीं है, तो पुलिस उन्हें थाने में उठाकर लाई ही क्यों? वे दोनों तो इसी भरोसे पर आए थे कि पुलिस की निगरानी में वे सुरक्षित रहेंगे। CO, SHO सहित सभी जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। BJP सरकार समाज को "लाइन हाजिर" वाली लफ्फाजी दिखाकर गुमराह न करे।
दूसरा बड़ा सवाल यह है कि इस घटना पर सारे हिंदू संगठन मौन क्यों हैं? हिंदू राष्ट्र में दलितों की स्थिति की झलक साफ दिखाई दे रही है। क्या यह आधिकारिक ऐलान हो चुका है कि दलित हिंदू नहीं हैं? अतः उनकी हत्या एवं जातीय अत्याचार पर कोई मुंह न खोले? हिंदू समाज स्वयं को डायनासोर क्यों समझ रहा है कि दूसरी जाति में विवाह हो गया तो उनकी प्रजाति संकटग्रत हो जाएगी?
यूपी के देवरिया में एक मंदिर में चढ़ावे के बंटवारे को लेकर वशिष्ठ गिरी-त्रिपुरारी गिरी, दोनों गुट के पुजारियों ने एक दूसरे पर लाठी-डंडे एवं गालियों से ताबड़तोड़ हमला किया।
वैसे चढ़ावा तो ईश्वर के नाम चढ़ता है न? फिर ब्राह्मण पुजारी इसके लिए आपस में क्यों लड़ रहे हैं? घोर अनर्थ!
जाति से नहीं, मानवता से पहचान — यही है हमारा अभियान।
भारत का संविधान सभी नागरिकों को समानता, गरिमा और न्याय का अधिकार देता है। फिर भी जातिगत भेदभाव आज भी समाज की प्रगति और एकता में बाधा बना हुआ है।
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आइए संकल्प लें कि हम जाति नहीं, इंसानियत को अपनी पहचान बनाएंगे और एक ऐसे भारत के निर्माण में योगदान देंगे जहाँ हर व्यक्ति को सम्मान और अवसर मिले।
✊ समानता | ⚖️ न्याय | 🤝 बंधुत्व | 🌟 गरिमा
PACI – People Against Casteism in India
"जातिवाद के खिलाफ़ हम सब की आवाज़"
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बीएचयू में एससी की खटीक जाति से आने वाले छात्र व 7 बार नेट क्वालीफाई करने वाले शिवम् सोनकर धरने पर बैठे है, उनका कहना है कि कुलपति (वीसी), चीफ प्रॉक्टर ने उनका पीएचडी 2024-25 के दाखिले में सामान्य वर्ग की परीक्षा में द्वितीय स्थान प्राप्त करने के बावजूद प्रवेश नही दे रहे है। उनका आरोप है कि आरक्षण प्रणाली में गड़बड़ी करके एससी होने की वजह से उन्हें प्रवेश न देकर कहा जा रहा है कि जाओ जूते साफ करो।
बाकी पूरा विषय सामने आने के बाद।
वैसे;
"उपवर्गीकरण समर्थक कँहा गायब हो गए"
विकास कुमार जाटव
बहुजन नायक मान्यवर श्री कांशीराम साहब की राजनीति में आने से पहले कुछ प्रतिज्ञाएं -
👉 मैं कभी घर नहीं जाऊंगा ।
👉 मैं कभी शादी नहीं करूंगा।
👉 मैं कोई भी बैंक बैलेंस नहीं रखूंगा।
👉 मैं अपना संपूर्ण जीवन अम्बेडकर के आंदोलन के लिए समर्पित करूंगा।
👉 मैं इस दबे कुचले समाज को शासक बनाकर रहूंगा ।
" ऐसे ही थोड़ी कोई बन जाता है कांशीराम"
कांशीराम उस व्यक्तित्व का नाम है जो त्याग और तपस्या की मूर्ति है, जब इतना त्याग किया तो बहुजन समाज ने विश्वास किया और कंधे से कंधा मिलाकर समाज साथ खड़ा हुआ और बेहतर परिणाम दिया, आजकल के नेताओं को इनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।
" कांशीराम तेरी नेक कमाई,सोती कौम को गये जगाई "
जय भीम, जय भारत 🙏
बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय 🐘🐘🐘🐘
बसपा से जुड़ेंगे तो आगे बढ़ेंगे,सुरक्षित भी रहेंगे।
- आदरणीय बहन कु.मायावती जी
" जीवन हर क्षण आपको एक सही फैसला लेने का मौका देता है, मगर बहुत कम लोग इन मौकों को देख पाते हैं "। - गौतम बुद्ध
#नमोबुद्धाय_जयभीम साथियों ✊💙🙏
#GoodMorning 🌄