जब भी कुम्भ का मेला होता है, पूर्णकुम्भ या अर्धकुम्भ नागा सन्यासियों को आप देखते हैं। वे नागा सन्यासी नहीं, नागा सैनिक कहे जाते हैं। सनातन धर्म की रक्षा के लिये अतीत में उन्होंने बहुत बलिदान दिए हैं। वर्तमान समय में उनका वह रक्षक स्वरूप राजनीति की भेंट चढ़ चुका है।
पार्टी और पंथ से ऊपर उठकर राष्ट्रचिंतन की पुकार
भारत में 'स्वस्थ क्रांति' की आवश्यकता क्यों?
भारतीय शिक्षा, संविधान और व्यवस्था पर जगद्गुरु शंकराचार्य के विचार
"शिक्षा पद्धति हमारी अपनी नहीं है,
रक्षा की प्रणाली हमारी अपनी नहीं है,
कृषि, गौ-रक्षा, वाणिज्य के प्रक्लप अपने नहीं
Mahadev is embodiment of Nature worship. In rudrabhishek, Mahadev by offering milk, curd, ghee, honey, sharkara, panchamrita, kesar, flower, fruits. Whatever is served to him returns in amplified quantity. Save vedlakshana cows and preserve nature to appeas Shiva. Mahadev.
Traditional gurus who revere the Vedas as the highest truth, no matter their sect, are far more important to us than any politician or this so-called democracy. Putting faith in these parties is as good as sabotaging ourselves.
Guru Shishya Parampara Sada Vijayate 🌸🙇🏻♀️
परम् पूज्य गुरुदेव की भविष्यवाणी थी कि स्वस्थक्रांति की उदभावना नेपाल से होगी जो अब चरितार्थ होने जा रही है। नेपाल सरकार ने संयुक्त हिन्दू मोर्चा की सभी मांगें मान ली हैं, जिसमें प्रमुख मांग नेपाल को हिन्दूराष्ट्र घोषित करना था। नेपाल हिन्दुराष्ट्र बनने के बाद भारत भी होगा।
पौराणिक स्थलों का विकास तो थोड़ा समझ में आता है, लेकिन तीर्थ -स्थलों का अत्यधिक विकास धार्मिक स्थलों का महत्व कम करने के लिये किया जा रहा है। कुछ नेताओं को हिन्दूधर्म से बेहद चिढ़ है, वे सनातन को मिटाने की सोच रखते हैं लेकिन अब स्वयं मिटने वाले हैं। संत समुदाय असहाय स्थितिमेंहै।