शिक्षा व्यवस्था बचाने की ख़ातिर मध्य प्रदेश से आए एक छात्र को सुनिए और देखिए… मूँगफली के बचे खुचे दाने खाकर जुटा जंतर मंतर पर… जब इस तरह से छात्र जुड़ते हैं तो बात दूर तलक जाती है…
यह घटना केवल कलयुग की पराकाष्ठा नहीं, बल्कि संबंधों के सबसे निचले स्तर को उजागर करने वाली और भीतर तक झकझोर देने वाली त्रासदी है।
वर्षों तक हम ऐसे अपराधों में बेटों के उदाहरण सुनते रहे, लेकिन अब जब बेटियाँ भी इस प्रकार की घटनाओं में सामने आने लगी हैं, तो यह किसी एक लिंग का नहीं, बल्कि पूरे समाज की नैतिक और सांस्कृतिक गिरावट का संकेत है।
मानव मनोविज्ञान के अनुसार यदि बचपन से व्यक्ति में सहानुभूति (Empathy), कृतज्ञता (Gratitude) और नैतिक चेतना (Moral Development) का विकास नहीं होता, तो वह धीरे-धीरे अपने ही संबंधों को उपयोग की वस्तु समझने लगता है। तब संपत्ति, पैसा और व्यक्तिगत स्वार्थ, माँ-बाप के त्याग से भी बड़े दिखाई देने लगते हैं।
सबसे बड़ा संकट यह नहीं कि अपराध बढ़ रहे हैं। सबसे बड़ा संकट यह है कि मनुष्य के भीतर का मनुष्य छोटा होता जा रहा है।
आज आवश्यकता केवल कठोर कानूनों की नहीं, बल्कि ऐसी शिक्षा और ऐसे संस्कारों की है जो बुद्धि के साथ-साथ हृदय को भी शिक्षित करें। क्योंकि जिस दिन मनुष्य अपने भीतर की करुणा, कृतज्ञता और संवेदना खो देता है, उसी दिन वह सबसे बड़ा निर्धन बन जाता है।
सभ्यता केवल ऊँची इमारतों, आधुनिक तकनीक और आर्थिक प्रगति से नहीं बचती; वह तब तक जीवित रहती है, जब तक घरों में माता-पिता के प्रति सम्मान, त्याग और प्रेम जीवित रहता है।
डॉ. धीर सिंह धाभाई
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एक बार योगी रोए थे,
बाकी सब इतिहास बन गया।
आज के. अन्नामलाई रोए हैं,
वह भी इतिहास रचेंगे।
आज नहीं तो कल।
पूरा भारत आपके साथ है। आपने 140 करोड़ लोगों का दिल जीत लिया है ♥️। 🙏🏽
@annamalai_k
पंचमुखी हनुमान जी की कृपा के 6 स्पष्ट संकेत: 👇
✅ नेगेटिविटी का जाना, सुकून का आना।
✅ शत्रुओं के वार का बेअसर होना।
✅ रुके हुए कामों में अचानक गति।
✅ साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि।
✅ स्वप्न में प्रभु के दर्शन।
✅ घर में सुख-शांति का वास।
जिसके रक्षक हनुमान, उसका क्या बिगाड़ेगा काल? 🚩
जय श्री हनुमान 🙏🏻