आज़ादी के दशकों बाद भी भारतीय मुसलमानों के सामने शिक्षा सरकारी रोजगार कारोबार राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आर्थिक सुरक्षा के गंभीर सवाल मौजूद हैं।
यह केवल भावनाओं का विषय नहीं है सच्चर समिति की रिपोर्ट ने मुस्लिम समुदाय की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति में गंभीर पिछड़ेपन को दस्तावेज़ित किया था।
केंद्र सरकार के आधिकारिक अभिलेखों में भी मुस्लिमों की सरकारी रोजगार में कम भागीदारी दर्ज की गई है।
लेकिन सवाल यह है हमारी रणनीति क्या है?
इस्लाम ने ज़कात को केवल दान नहीं बनाया, बल्कि उसके हकदारों की स्पष्ट श्रेणियाँ बताईं। कुरआन में ज़कात के काम पर नियुक्त लोग, कर्ज़दार और अन्य निर्धारित श्रेणियाँ बताई गई हैं।
इसलिए ज़कात का उद्देश्य केवल तत्काल राहत नहीं, बल्कि जरूरतमंद इंसान की गरिमा और जीवन-सुधार से भी जुड़ा हुआ है।
अगर कोई गरीब बच्चा हर साल ज़कात पर निर्भर रहकर पढ़ता रहे, लेकिन उसे आधुनिक शिक्षा, विज्ञान, अंग्रेज़ी, तकनीकी कौशल और रोजगार के अवसर न मिलें, तो हमें मदद के तरीके पर भी आत्ममंथन करना होगा।
मदरसों और मकतबों का धार्मिक एवं शैक्षणिक महत्व अपनी जगह है, लेकिन मुस्लिम समाज को यह भी सोचना होगा कि बच्चों को ऐसी शिक्षा मिले जिससे वे डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, वकील, वैज्ञानिक, उद्यमी और सरकारी अधिकारी बन सकें।
और यह जिम्मेदारी केवल समाज या ज़कात देने वालों की नहीं है।
राज्य और केंद्र सरकारें भी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अल्पसंख्यक कल्याण की सार्वजनिक नीतियों के माध्यम से नागरिकों के विकास में भूमिका निभाती हैं।
उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा के लिए राज्य का अपना कानून और प्रशासनिक ढाँचा मौजूद है।
मुसलमानों को केवल किसी एक पार्टी को हराने के लिए वोट देने के बजाय अपने शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, कारोबार, सुरक्षा, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक अधिकारों पर प्रत्येक दल का रिकॉर्ड और वर्तमान नीति देखनी चाहिए।
किसी पार्टी को समर्थन देना या न देना प्रत्येक नागरिक का अपना लोकतांत्रिक निर्णय है। लेकिन सवाल पूछना लोकतंत्र का अधिकार है
हमारे बच्चों के लिए कितने अच्छे स्कूल?
कितनी छात्रवृत्तियाँ?
कितने रोजगार?
कितने सरकारी अधिकारी?
कितने डॉक्टर और इंजीनियर?
कितने मजबूत अस्पताल?
कितने सफल उद्यमी?
और राजनीति में हमारी वास्तविक हिस्सेदारी कितनी?
उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की सरकारों और माननीय बहन जी मायावती जी के कार्यकाल से जुड़े मुस्लिम कल्याण के कई निर्णय सरकारी सार्वजनिक रिकॉर्ड में दर्ज हैं।
2007–2012 के कार्यकाल के बारे में BSP की प्रकाशित रिपोर्टिंग में उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड, उत्तर प्रदेश राज्य हज समिति, उर्दू-अरबी-फारसी शिक्षा के लिए विश्वविद्यालय की स्थापना तथा कब्रिस्तानों की सुरक्षा/चारदीवारी जैसे निर्णयों का उल्लेख मिलता है।
2010 में BSP सरकार के दौरान 61 और मदरसों को सरकारी सहायता के दायरे में लेने की खबर दर्ज हुई; इससे उस समय सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों की संख्या 100 बताई गई थी और अतिरिक्त व्यय ₹11.18 करोड़ बताया गया था।
2011 में BSP सरकार ने मोअल्लिम-ए-उर्दू डिग्रीधारकों को सरकारी स्कूलों में उर्दू शिक्षक नियुक्ति का रास्ता साफ किया। रिपोर्ट के अनुसार इससे लगभग 10,000 डिग्रीधारकों को लाभ मिलने की उम्मीद थी। उसी वर्ष मान्यता प्राप्त मदरसों में पढ़ने वाली मुस्लिम छात्राओं को सावित्रीबाई फुले बालिका शिक्षा योजना में शामिल करने का निर्णय भी दर्ज हुआ; लगभग 58,000 मुस्लिम छात्राओं को संभावित लाभार्थी बताया गया।
2002–03 के BSP शासन से संबंधित अभिलेखों में मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों में 577 प्राथमिक और 144 वरिष्ठ बेसिक विद्यालय खोलने की योजना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में मदरसों के माध्यम से तकनीकी शिक्षा की पहल का भी उल्लेख मिलता है।
माननीय बहन जी मायावती जी के नेतृत्व में BSP ने मुस्लिम समाज को बहुजन राजनीति के व्यापक ढाँचे में जोड़ने की बात भी लगातार रखी है। आज आवश्यकता यह देखने की है कि भविष्य की राजनीति में मुस्लिम समाज को केवल चुनावी संख्या नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, सत्ता और नीति-निर्माण में वास्तविक भागीदारी कैसे मिले।
असली परिवर्तन
मुस्लिम समाज को केवल ज़कात लेने वाला समाज नहीं, बल्कि ज़कात देने वाला, रोजगार पैदा करने वाला, कारोबार करने वाला और राष्ट्र निर्माण में नेतृत्व करने वाला समाज बनना होगा।
मस्जिदें रहें।
मदरसे रहें।
मकतब रहें।
लेकिन साथ में आधुनिक स्कूल भी हों।
अस्पताल हों।
ITI और कौशल केंद्र हों।
कॉलेज और विश्वविद्यालय हों।
व्यवस्थित मुस्लिम व्यापारिक नेटवर्क हो।
और गरीब बच्चे भी उच्च शिक्षा तक पहुँचें।
आदरणीय बहन @Mayawati जी के लिए सब कुछ कुर्बान है लेकिन हमारी प्यारी बहन जी पदाधिकारीयो पर भरोसा करने उनको सोचती है कि वो अच्छा काम करें।
लेकिन ये पदाधिकारी बहन जी को गलत जानकारी देकर एक गैंग बना रखे हैं तो उनको नहीं छोडूंगा
दूसरा जुगल किशोर नहीं चाहिए
ठीक है मुझे गाली दो ++
मुझे गर्व है कि मैं BSP का कार्यकर्ता हूँ और आदरणीय बहनजी के निर्देशन में मिशन और मूवमेंट के सिपाही की तरह काम कर रहा हूँ.बहनजी ने हमेशा बहुजन समाज के हित के बारे में ही सोंचा है और यही कारण रहा है की जब भी मौका मिला राज्य सभा और एमएलसी चुनाव में भेजने का तब गरीब बहुजन समाज के लोगों को राज्य सभा में सांसद और विधानसभा में एमएलसी बनाने का काम किया कभी भी उद्योगपतियों के इशारे पर या उद्योगपतियों को राज्यसभा में सांसद बनाकर नहीं भेजा.ना ही कभी धन्ना सेठों से चंदा लिया.हमें आदरणीय बहनजी पर गर्व है।
Er Ram Ji Gautam सर
#bspindia
#bahanji
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उ. प्र. की पूर्व मुख्यमंत्री परम आदरणीय बहन कु. मायावती जी का बसपा संगठन एवं देश मे बाढ़ जैसी आपदा को लेकर महत्वपूर्ण ट्वीट...... दिंनाक 27.09.2026........................1.जैसाकि यह विदित है कि पिछले कुछ दिनों से देश के विभिन्न भागो में भारी वर्षा व आँधी, तूफान आदि के कारण जनता काफी मुश्किल दौर से गुजर रही है। ऐसे कुदरती विकट हालात में सम्बन्धित सभी राज्य सरकारों को प्रभावित लोगों की हर स्तर पर पूरी-पूरी मदद करनी चाहिये। बी.एस.पी. की यह मांग है।
2.इसके साथ ही महाराष्ट्र राज्य के काफी इलाको में सूखे की मार झेल रहें लोगों व खासकर किसानों के प्रति राज्य सरकार को केवल औपचारिकता नहीं बल्कि पीडि़तों की जमीनी स्तर पर सही से मदद करके किसानों को फौरी राहत देने का प्रयास करना चाहिये।
3.इसी परिपेक्ष्य में यहाँ मैं यह भी कहना चाहूँगी कि देश में बी.एस.पी. संगठन को तैयार करने व सर्वसमाज में पार्टी के जनाधार को बढ़ाने के लिए अब पार्टी संगठन को तीन सेक्टरों में बांट दिया गया है।
*जिसके तहत सेक्टर नं.-1 में 10 राज्य आते है। जिनको बी.एस.पी. राज्यसभा सांसद श्री रामजी गौतम व श्री सुरेश राव ये दोनों केन्द्रीय सेक्टर प्रभारी मिलकर यहाँ पार्टी के सभी कार्य देख रहें हैं।
*सेक्टर नं.-2 में 9 राज्य आते है। जिनको पार्टी के पूर्व राज्यसभा सांसद श्री राजाराम व पूर्व विधायक श्री अतरसिंह राव ये दोनों केन्द्रीय सेक्टर प्रभारी मिलकर यहाँ पार्टी के सभी कार्य देख रहें हैं।
*सेक्टर नं.-3 में उत्तर प्रदेश व उत्तराखण्ड प्रदेश आते है जिनको लखनऊ पार्टी केन्द्रीय कैम्प कार्यालय 9 माॅल एवेन्यू द्वारा सीधा देखा जा रहा है।
4.ऐसे में लोगों के कुदरती मार पड़ने से खासकर सेक्टर नं.-1 व सेक्टर नं.-2 के इन चारों केन्द्रीय सेक्टर प्रभारियों से यह अपील की जाती है कि वे अपने-अपने सेक्टर के अन्तर्गत आने वाले सभी राज्यों में,
*जहाँ-जहाँ भारी वर्षा व तूफान आदि के कारण जबरदस्त जानी, माली, तबाई मची हुई है, वहाँ अपनी पार्टी के लोग भी अपनी सामर्थ के हिसाब से उनकी मदद जरुर करें।
*लेकिन इसके लिए इनको कोई भी अलग से धन इकट्ठा नहीं करना है। ताकि इसकी आड़ में कोई भी नाजायज फायदा ना उठा सके।
5.साथ ही जरुरत पड़ने पर ज्यादा प्रभावित प्रदेशों में, मैं बी.एस.पी. के राष्ट्रीय प्रभारी श्री ईशान आनन्द को भी भेज सकती हूँ। और इस मामले में खासकर सेक्टर नं.-3 के दोनों राज्यों में मेरी खुद भी पैनी नजर है। जहाँ मैं खुद भी ऐसे क्षेत्रों का दौरा कर सकती हूँ।
6.अन्त में मेरा केन्द्र सरकार से भी अनुरोध है कि वे देश के ज्यादा प्रभावित हो रहे राज्यों में, वहाँ कि सरकारों की समय से पूरी-पूरी मदद जरुर करें, जो यह उचित होगा।