#HiddenTruthOfGita
गीता ज्ञान दाता कहता है कि मेरी प्राप्ति करने वाला तो दुख के घर में ही रहेगा जन्म मरण चालू रहेगा मोक्ष प्राप्ति तो उस परमपिता परमेश्वर की शरण में जाने से ही होती है
#HiddenTruthOfGita
गीता अध्याय 6 श्लोक 16 में लिखा है कि हे अर्जुन यह योग (साधना) न तो अधिक खाने वाले का, न बिल्कुल न खाने (व्रत रखने) वाले का सिद्ध होता है।
#HiddenTruthOfGita
अध्याय 11 श्लोक 47 में पवित्र गीता जी को बोलने वाला प्रभु काल कह रहा है कि 'हे अर्जुन यह मेरा वास्तविक काल रूप है।
अधिक जानकारी साधना चेनल 7:30pm
#HiddenTruthOfGita
श्री कृष्ण जी ने गीता जी का ज्ञान नहीं वाला
श्री कृष्ण जी तो पहले से ही अर्जुन के साथ थे यदि गीता जी के ज्ञान को श्री कृष्ण जी ने ही बोला होता तो अध्याय 11 श्लोक 32 में यह नहीं कहते कि अब प्रवृत्त हुआ हूं।
सतज्ञान के लिएSant RampalJi Maharaj YoutubeChannelपर
#SupremeGodKabir
परमात्मा कहते हैं -
पृथ्वी ऊपर पग जो धारे, करोड़ जीव एक दिन में मारे।
ये काल का लोक है यहाँ पल भर में न जाने कितने पाप कराता है ये काल।
जबकि सतलोक में कोई पाप/ जीव हिंसा नहीं होती। सतलोक सुख सागर है।
#SupremeGodKabir
पृथ्वी लोक में चींटी से लेकर हाथी तक, रंक से लेकर राजा तक कोई सुखी नहीं है।
सतलोक एकमात्र ऐसा स्थान है जहां राग द्वेष नहीं हैं। जहां किसी वस्तु का अभाव नहीं। जहां सभी प्यार से रहते हैं। जहां बारह मास बंसत रहता है।
#अमरलोक_VS_मृत्युलोक
सुख सागर - सतलोक
SA NEWS
काल लोक में युगों से भूखे प्राणियों
की भूख तृप्त सतलोक में होती है।
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#सतलोक_VS_पृथ्वीलोक
Eternal place Satlok
#सतलोक_चलना_है
God Kabir says that
You get this human birth after many Yugas.
Therefore, you go to the shelter of Tatvdarshi saint and attain salvation by devotion to him.
And Go to enternal Satlok.
#सतलोक_VS_पृथ्वीलोक
Eternal place Satlok
यह संसार दुखों का घर है
इससे ���ी भिन्न एक संसार है
जहाँ कोई दुखी नहीं होता।
वह स्थान सनातन परमधाम
अर्थात सतलोक है।
वहाँ का प्रभु कबीर साहेब अविनाशी है।
#सृष्टि_रचयिता_कबीरपरमेश्वर
सतलोक Vs पृथ्वी लोक
सतलोक में जाने के बाद जीवात्मा का जन्म-मरण हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है।
लेकिन सतभक्ति के अभाव में पृथ्वी के प्राणी 84 लाख योनियों के चक्कर में भटकते रहते हैं।
#सृष्टि_रचयिता_कबीरपरमेश्वर
84 लाख योनियों का कष्ट नहीं है।योनियों में उत्पन्न करता है।
जबकि सतलोक परमेश��वर कविर्देव (कबीर साहेब) का लोक है जो अजर अमर अविनाशी लोक है।
#सृष्टि_रचयिता_कबीरपरमेश्वर
पृथ्वी लोक पर प्रत्येक जीव दुःखी है।
सतलोक सुख का सागर है। वहां दुख नाम की कोई चीज़ नहीं। जपृथ्वी लोक एक कैद खाना है। जहाँ पर 21 ब्रह्मांड का स्वामी ज्योति निरंजन काल/ब्रह्म आत्माओं को दुःखी करने के लिए 84 लाखन्म-मृत्यु नहीं है। बुढ़ापा नहीं है।
#सृष्टि_रचयिता_कबीरपरमेश्वर
सृष्टि रचना
परब्रह्म कौन है?
परब्रह्म :- यह केवल सात शंख ब्रह्माण्ड का स्वामी (प्रभु) है। यह अक्षर पुरुष भी कहलाता है। परन्तु यह तथा इस��े ब्रह्माण्ड भी वास्तव में अविनाशी नहीं है।
जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज
#सृष्टि_रचयिता_कबीरपरमेश्वर
दुनिया कैसे बनी?
सतलोक का मालिक कौन है?
पूर्ण प्रभु कबीर साहेब ही सतलोक के स्वामी हैं। इन्हीं का नाम अकालमूर्ति - शब्द स��वरूपी राम - पूर्ण ब्रह्म परम अक्षर ब्रह्म आदि है। कबीर प्रभु का - मानव सदृश शरीर तेजोमय है।
#सृष्टि_रचयिता_कबीरपरमेश्वर
संसार रूपी वृक्ष की जड़ कौन है? गीता अध्याय नं. 15 के श्लोक नं. 1 में संसार रूपी वृक्ष की जड़ परम अक्षर पुरुष पूर्ण परमे��्वर कबीर साहेब हैं।