ये बात है संजय गांधी अस्पताल उर्फ मौत खाना रीवा मध्यप्रदेश की, जहां का प्रशासन , जहां का प्रबंधन, जहां के डॉक्टर/ विद्यार्थी (आदमखोर) अच्छे खासे मरीजों को
मुर्दा बनाकर अपने शोध या प्रायोगिक को अंजाम देते हैं,
वरना हमारे पिताजी हमारे साथ नहीं होते, जितनी गालिया दी जाए उतनी कम है, सरकार को इस लापरवाही पर सख्त कदम उठाना चाहिए अन्यथा धर्मेन्द्र प्रधान तो बस ट्रेलर था।
और कल रात में हमारे सतर्कता को देखते हुए ये लोग , हमको साफ बोल देते हैं, या तो ऑपरेशन करवा लो या फिर lama लेलो, नॉर्मल इलाज हम नहीं करेंगे, कुल मिलाके इनका oriention भी वही था , पर भगवान का धन्य है कि हमारी बुद्धि काम कर गई और अपने मरीज को उस आदमखोर खाने से बाहर ले आये
और 9:00 बजे वो डॉक्टर जिंदल आता है, जोकि जबरदस्ती सबको बाहर कर देता है। पता नहीं गुप्त रूप से ये लोग क्या करते हैं, हालांकि जब मृतकों के साथ ये आदमखोर क्या क्या करते हैं, तो जीवितों के साथ खैर छोड़िए। अब वापस से सारी चीजें नॉर्मल चल रही होती हैं, कि एक डॉक्टर साहब रणजीत करके
हमारे मरीज के प्रति हमारी सतर्कता बढ़ती हुई देखकर , जो स्टाफ था वो हमको भांप जाता है , और हमारे प्रति उसका बर्ताव बदल जाता है।
दूसरे दिन सुबह 7:00 के आस पास हमको बेड allot किया जाता है
उसकी अंतिम शांति थी, और तब से वो मरीज बोलना चालना सब बंद कर देता है। इसको देखकर मेरे अंदर की आत्मा बाहर आ जाती है । और हम अपने मरीज को लेकर सतर्क हो जाते हैं
तभी मेरे सामने मौत का नांग नाच शुरू होता है, एक मरीज जो कि बोल रहा था, समझ रहा था, ये लोग उसके ऊपर में ventilator कैसे डाला जाता है इस बात का experiment करवा रहे थे, मेरे कानो तक एक आवाज जाती है कि छोड़ो मुझे क्या कर रहे हो, और फिर वो इंसान शांत हो जाता है, सम्भवतः ये
डाक्टर का कोई नामु निशान नहीं था, बस वही स्टूडेंट ही सब देख रहे थे। तभी एक डॉक्टर जिंदल आते हैं और सबको बाहर जाने को बोलते हैं, पिता जी के साथ मै था, मैने बोला मै नहीं जाऊंगा , तो उन्होंने फोर्स किया लेकिन मै नहीं माना, उन्होंने कहा ठीक है अपने मरीज का ध्यान रखो
तमाम ताम झाम करते करते 6:00 बजे हमको आईसीयू के लिए शिफ्ट किया गया, उसके बाद 7:30 में हम आईसीयू में प्रवेश करते हैं और वह जाकर पता चलता है कि मौत के देवताओं के पास बेड ही नहीं है, उसके बाद स्ट्रेचर पर ही उनको एडमिट किया गया
में लेकर गए समय लगभग 10:40 , वहां डॉक्टर को दिखवाने के बाद , डॉक्टर के कहे मुताबिक ct scan karwane गए, और बिना किसी भीड़ के लगभग 5-6 लोग थे, 2:00 बजे ct स्कैन हुआ ,हमको बोला गया जाके 7 नंबर वार्ड में एडमिट करवा लो जो कि इमरजेंसी वार्ड था
मै कल अपने पिता को लेकर संजय गांधी अस्पताल लेकर गया था, उनकी ब्रेन इंजरी जो कि पहले से थी और उसका पहले से इलाज चल रहा था। उनकी स्थिति डाउन पड़ते देख अस्पताल लेकर गया, जाने पर सबसे पहले ये पता चला कि main ब्रांच मे आंदोलन मचा है , जिसके कारण हम इनको सुपर स्पेशिलिटी वार्ड
परीक्षा दी, दिन-रात मेहनत की — अब हर दिन बस रिजल्ट का इंतजार है।
SSC GD 2025 और CPO 2024 के नतीजों में 100 दिन से ज़्यादा की देरी हो चुकी है।
ये देरी अब सिर्फ प्रक्रिया नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के धैर्य, भविष्य और मानसिक स्थिति की परीक्षा बन चुकी है।
आख़िर कब तक ये चलता रहेगा…?
@DoPTGoI
#SSC_CPO_2024_RESULT_DO
#SSC_GD_RESULT_DO