जिसकी जितनी आवादी, उसकी उतनी हिस्सेदारी। 🔥🔥
देश के सभी विश्वविद्यालयों में करीब 95% सवर्ण बैठे हैं। न्यायालय में कॉलेजियम सिस्टम से बने करीब 82% से अधिक जज सवर्ण कब्जा कर बैठे हैं।
आज मुकेश भाई ने बखिया उधेड़ दिया है। बाबा साहब ने कहा है आरक्षण नहीं होता अगर दशकों तक जाति के नाम पर शोषण न किया जाता।
यहां तक कि आप कमरा भी किराए से लेने जाओगे तो आपसे जाति पूछी जाती है न कि योग्यता। इसलिए जाति जनगणना जरूरी है। जिसकी जितनी आवादी उसकी उतनी हिस्सेदारी होगी।
@MukeshMohannn
आज सोनम वांगचुक, अभिजीत दीपके और ये सारे युवा आपके बच्चों के भविष्य के लिए लड़ रहे हैं।
अब घर बैठने से काम नहीं चलेगा। अब सबको एक होकर सड़कों पर उतरना होगा। तभी इस देश में कुछ बदलेगा।
उठो, चलो जंतर मंतर।
#SonamWangchuk को लेकर Indian Army जवान का संदेश वायरल, माइनस 50°C टेंट का किया जिक्र सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में भारतीय सेना के एक जवान ने सोनम वांगचुक के समर्थन की अपील की है। वीडियो में जवान ने कहा कि सोनम वांगचुक ने भारतीय सेना के लिए माइनस 50 डिग्री सेल्सियस जैसी अत्यधिक ठंड में उपयोगी सोलर हीटिंग तकनीक और टेंट विकसित किए, जिससे लद्दाख जैसे दुर्गम इलाकों में तैनात जवानों को बड़ी राहत मिली। इसी आधार पर वह लोगों से वांगचुक के शांतिपूर्ण आंदोलन का समर्थन करने की अपील करता है।
नोट: वीडियो सोशल मीडिया से मिला है, वीडियो में बोलने वाले व्यक्ति की पहचान और उसमें किए गए सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। 🇮🇳🇮🇳🇮🇳 🪖 🪖 🪖
दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का मंगलवार को 17वां दिन है। उनकी सेहत लगातार बिगड़ रही है। वजन 8.5kg कम हो गया है। अनशन शुरू होने पर वजन 67 किग्रा था।
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#SonamWangchuk#CJP#CJPProtest#JantarMantar#HindiNews
सोनम वांगचुक, जिसने कभी अपने लिए नहीं माँगा, कुछ कि पद चाहिए, सत्ता चाहिए।
अपनी ज़िंदगी देश, समाज और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए लड़ते रहे है और 15-16 दिनों से अनशन पर बैठे हैं!
अपने लिए नहीं, देश के लिए। देश के बच्चों के भविष्य के लिए! उसके बाद भी देश के नेताओं की सोई हुई संवेदनाएँ नहीं जाग पा रही।
सत्ता की ख़ामोशी बरकरार है।
भूख हड़ताल और अनशन भी अगर व्यवस्था को सुनाई नहीं दे रहा, तो एक आम नागरिक की आवाज़ की कीमत क्या ही होगी?
अब दर्द सिर्फ़ यह नहीं कि एक व्यक्ति अनशन पर है, बड़ा दर्द यह है कि देश धीरे-धीरे उस मुकाम पर पहुँच रहा है जहाँ जनता की पीड़ा का महत्व खत्म है और उस पर सत्ता हावी है।
सोचिए, आज अगर एक ऐसे व्यक्ति की आवाज़ अनसुनी की जा सकती है, जिसने अपना जीवन देश के लिए लगा दिया, तो कल बेरोज़गार युवा, न्याय की गुहार लगाता परिवार, किसान, छात्र या कोई भी आम नागरिक किस उम्मीद से अपनी तकलीफ़ के लिए लड़ पाएगा और कौन उसकी सुनेगा?
लोकतंत्र का मतलब सिर्फ़ चुनाव है क्या? अगर सत्ता अपने शांत नागरिक की आवाज़ नहीं सुन रही, तो ये लोकतंत्र पर सवाल नहीं है?
और अगर वह आवाज़ भी अनसुनी होने लगे! तो यह चिंता सिर्फ़ पूरे देश को होनी चाहिए।
Be stand with Sonam Wangchuk
Sonam wangchuk sir is on hunger strike till the resignation of Education minister,
Please 🥺 come and support peacefully at Jantar Mantar,
It's for you and your children not personal.🤯
"छात्रों को बारिश से बचाना है जो पिछले 12 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं।दिल्ली पुलिस हमें तिरपाल अंदर नहीं लाने दे रही है"
- अभिजीत दीपके | @abhijeet_dipke
लगता है इंसानियत मर चुकी है मां के सामने जानवरों की तरह मारते रहे बेटे को,,
मां बिलखती रही मत मारो मेरे बेटे को मर जाएगा वो लेकिन उस मां की किसी ने नहीं सुनी डंडो से लाठियों से लगातार मारते रहे 💔
requested to the police authorities to please let us set up tents so that the students who are on hunger strike can be protected from rain.
Education minister must resign!