किस बात का यह घमंड है? शरीर पर वर्दी है इसीलिए इतनी गर्मी है? आपको चालान करना है करिए किसने रोंका? लेकिन क्या आप किसी को वीडियो बनाने से रोकेंगे? आप उठाएंगे? गाली देंगे? अरे साहब बहुत मेहनत से वर्दी मिलती है उतर जाने के बाद याद आएगा कि क्या गलती की है।
भारत का विभाजन इसी आधार पर हुआ था
हिन्दू रुल्ड इंडिया
एंड
मुस्लिम रुल्ड पाकिस्तान
अब इससे साफ है कि मुसलमान अपना अधिकार 1947 में ही ले चुके हैं.. अब इनका हिंदुस्तान में कोई अधिकार नहीं है
मोदी सरकार धर्मांतरण , लव जिहाद , शिक्षा जिहाद , जमीन जिहाद , जनसंख्या जिहाद के खिलाफ कोई कठोर कानून नहीं बना सकी , शायद मोदी को अभी भी मुस्लिम वोटों की उम्मीद है
मगर जो मोदी के पक्के वोट हैं उन स्वर्ण वोटरों को अपराधी बनाने के लिए एक बहुत ही घटिया कानून लेकर आई है मोदी सरकार
4 लाख मंदिर सरकार के कब्जे में हैं, लेकिन मस्जिद एक भी नहीं, क्यों??
भारत की 3 लाख मस्जिदें भी सरकार अपने कब्जे में ले
– सुब्रमण्यम स्वामी
जो इस बात से सहमत है वो कमेंट में अपनी उपस्थिति दर्ज करें।🙏
ब्राह्मणों के गांव के गांव काट दिए गए लेकिन उन्होंने ना अपना जनेऊ तोड़ा ना गाय का मांस खाया। मलेक्ष लोग तलवार की नोंक पर गाय का मांस चखाते तो गर्दन कटा दी गई लेकिन गाय का मांस नहीं खाया: प्रेमानंद जी महाराज को सुनिए
और कुछ लोग धर्म की रक्षा करने के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले ऐसे ब्राह्मणों की तुलना “वैश्या” से करते हैं।
देश में जब कोई आम नागरिक बैंक से बड़ा लोन लेता है, विदेश यात्रा करता है या बड़ी संपत्ति खरीदता है, तो उससे हर रुपये का हिसाब माँगा जाता है
फिर राजनीति में पारदर्शिता की बात करने वाले नेताओं से सवाल पूछना गलत कैसे हो सकता है?
2004 से 2026 तक 54 विदेशी यात्राएँ…
12+ देशों के लगातार दौरे…
लंदन, मिलान, बर्लिन, दुबई, दोहा और वियतनाम जैसे हाई-प्रोफाइल ट्रिप्स…
इन दौरों में चार्टर्ड फ्लाइट्स, 5-स्टार होटल, वीवीआईपी सिक्योरिटी और बड़े स्तर के खर्च शामिल रहे। अनुमानित खर्च ₹60 करोड़+ तक बताया जाता है, लेकिन सार्वजनिक रिकॉर्ड में घोषित रकम सिर्फ ₹11 करोड़+ के आसपास दिखाई देती है।
बाकी करोड़ों रुपये का स्रोत क्या था?
अगर निजी खर्च था, तो टैक्स रिकॉर्ड में पूरा विवरण क्यों नहीं?
अगर पार्टी ने खर्च उठाया, तो कांग्रेस के ऑडिट अकाउंट्स में साफ एंट्री कहाँ है?
देश सिर्फ पारदर्शिता चाहता है।
#WhoFundsRahul
❤️
अजमेर शरीफ दरगाह नहीं पवित्र शिवजी का मंदिर है
कोर्ट का निर्णय
◆ माननीय न्यायालय
का कोटि-कोटि धन्यवाद
(Suprime Court वकील)
(AP Singh)
◆ यह सत्य की विजय है
अनंत अंबानी के विवाह समारोह में जब अखिलेश यादव एंटीलिया पहुंचे थे, तब उनकी पहचान वाली लाल टोपी गायब थी। क्योंकि वहाँ नियम था कि कोई भी नेता अपनी राजनीतिक पार्टी की पहचान पहनकर नहीं आएगा तब वहां पर ना लाल टोपी दिखी, ना समाजवाद याद आया क्योंकि सामने अरबों की चमक थी, बड़े उद्योगपति थे, विदेशी मेहमान थे, महंगी घड़ियों और शाही व्यंजनों की महफ़िल थी।
लेकिन आज जब अपने ही भाई के पार्थिव शरीर को देखने पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे, तब वही लाल टोपी फिर सिर पर सज गई अब सवाल यह है कि अखिलेश यादव वहाँ एक दुखी बड़े भाई के रूप में गए थे या समाजवादी पार्टी के प्रचारक बनकर?
बाबा साहब के संविधान के अनुसार
ये एक So called privilege ब्राह्मण परिवार है
इनका टाइटल तिवारी है , इसलिये इनके लिए न तो कोई सरकारी योजना है और न ही मदद के लिए कोई सवर्ण आयोग.
किसी को इतना अपमानित मत करिए कि वह आपकी जड़ों में आचार्य चाणक्य की तरह मट्ठा डालने पर उतर आए
और आप महानंद से नालानंद बन जाएं
कहा जाता है कि हिमंता बिस्वा सरमा जी को राहुल गांधी ने मिलने का समय नहीं दिया, फिर इंतजार करवाया और चाय के साथ अपने डॉगी का बिस्कुट पेश किया।
नतीजा, असम से कांग्रेस साफ हो गई।
और अगर भविष्य में शर्मा जी को प्रधानमंत्री बनने का बड़ा अवसर मिला तो राजपरिवार की राजनीति हमेशा के लिए समाप्त हो सकता है।
कहा जाता है कि वे अटल जी या मोदी जी की तरह शांत नहीं, बल्कि “खेड़ा का पेड़ा” बनाने की खुली बात करने वाले नेता हैं।
पूज्य योगी आदित्यनाथ जी को मुलायम सिंह यादव और मुख्तार अंसारी जैसे लोगों से इतना संघर्ष झेलना पड़ा कि वे संसद में रो पड़े थे।
आज हाल ये है कि मुस्लिम माफिया खत्म हो चुके है। अतीक मुख्तार अपनी कब्र में करवटें बदल रहे हैं और मुलायम का बेटा “पंडी जी कहेंगे तो ये भी करुंगा, पंडी जी कहेंगे तो वो भी करुंगा…” का पहाड़ा पढ़ने को मजबूर दिख रहे हैं।
सुवेंदु अधिकारी के पिता ने टीएमसी की सेवा की, खुद सुवेंदु ने नंदीग्राम और सिंगुर आंदोलन में ममता का साथ दिया।
लेकिन एक दिन अभिषेक बनर्जी के लिए उनसे कुर्सी खाली करने को कहा गया, जबकि वहां सिर्फ दो कुर्सियां थीं।
आज वही सुवेंदु अधिकारी ममता बनर्जी की राजनीति को जमीन के नीचे दफ्न कर चुके हैं। आगे क्या होगा, समय बताएगा।
ऐसे में कबीर का दोहा याद आता है—
“निर्बल को न सताइए, जिसकी मोटी हाय।
मुए खाल की श्वास से, लोह भसम होई जाय।।”