भाजपा नेताओं द्वारा मानेसर प्रकरण पर की जा रहीं टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया:
ये लोग बार-बार मानेसर को लेकर के ये तंज कसते हैं हमारे पर, ये हमारे घर का मामला है, वो हम निपटते जाएँगे आपस के अंदर, चाहे पायलट साहब हों, चाहे वो डोटासरा जी हों, चाहे वो जूली साहब हों, चाहे वो सीपी जोशी साहब हों, चाहे वो भंवर जितेंद्र सिंह जी हों, जो भी नेता हमारे हैं, नेता कई हैं हमारे तो, पूर्व पीसीसी अध्यक्ष हमारे चंद्रभान जी भी हैं, डॉक्टर बीडी कल्ला जी भी हैं, जितने ही नेता हम हैं, आपस में हम बात कर लेंगे और कोई गलतफहमी दूर कर लेंगे।
सच्चाई, सच्चाई का विकल्प होता नहीं है, सच्चाई मैंने अपनी रख दी है सामने और आगे भी रख देंगे साथ में और बार-बार कहते हैं कि 25 सितंबर को क्या हुआ? हाईकमांड के खिलाफ में रिवोल्ट कभी नहीं कर सकते, राजस्थान की कांग्रेस जो है इतिहास गवाह है, इंदिरा गांधी की कांग्रेस बनी थी 1 जनवरी 1978 को, तभी जो है इंदिरा जी सबसे पहले 1 जनवरी 78 को बनीं और 15 दिन बाद में सबसे पहले जयपुर आई थीं, हम लोग मौजूद थे, जेल गए हुए थे हम लोग। जेल आते-जाते थे हम लोग, इंदिरा जी के यहाँ जेल गए थे, इतना विश्वास इंदिरा जी ने राजस्थान पे किया, सोनिया गांधी ने विश्वास किया, राहुल गांधी विश्वास कर रहे हैं, अभी देखा आपने पुष्कर में क्या-क्या हुआ। सब विश्वास राजस्थान की कांग्रेस पर हाईकमांड का पहले था, आज भी है।
25 सितंबर की घटना जो हुई है वो उस व्यक्ति के खिलाफ ही हुई थी जिसका नाम चल गया था कि ये मुख्यमंत्री की शपथ ले सकते हैं, पायलट साहब। इनके खुद के लोगों ने चला दिया, ऐसा माहौल बन गया कि 100 लोग इकट्ठे हो गए, कहा भई अगर नया मुख्यमंत्री बने, अशोक गहलोत जा रहा है अध्यक्ष बनने के लिए, नया मुख्यमंत्री बने, बने वो हमने जो लॉयल्टी दिखाई हाईकमांड के साथ में, हम होटलों में बंद रहे हैं, लॉयल्टी दिखाई हाईकमांड साथ रहे हम लोग, सरकार बचाई, हम में से किसी को भी, हम में 100 लोग में से किसी को मुख्यमंत्री पद दे दीजिए, बना दीजिए, हमें मंजूर है पर पायलट साहब मंजूर नहीं होंगे क्योंकि वो तो ले जाने वालों में थे मानेसर, ये उनकी मांग थी, उसको तोड़-मरोड़ कर के कह रहे हैं कि हाईकमांड के खिलाफ में रिवोल्ट हो गया, अरे हाईकमांड खिलाफ रिवोल्ट होता तो मैं मुख्यमंत्री रह पाता क्या बाद में? अगर रिवोल्ट हम करते, तो हाईकमांड मुझे क्यों रखती मुख्यमंत्री? ये तो आरोप लगाने वाले को समझना चाहिए।
और लास्ट बात ये है, हिंदुस्तान के इतिहास के अंदर जब कभी भी हाईकमांड ने तय किया कि मुख्यमंत्री बदलना चाहिए, बदलने का फैसला कर लेते हैं, 90% एमएलए जो होता है जो मुख्यमंत्री साथ होते हैं, वो छोड़ के जाते हैं नए मुख्यमंत्री बनने वाले के पास। नए मुख्यमंत्री पास जाते हैं कि भई ये कल बनने वाला है, शपथ लेगा 5 दिन बाद में, 2 दिन बाद में और इन्हीं को जो है हमें मंत्री बनना है इनके साथ, हमारे काम तो नए मुख्यमंत्री से पड़ेंगे, तो पुराने मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह जी, कैप्टन साहब हों चाहे वो एक्स वाई जेड कोई हो, जो-जो मुख्यमंत्री हटाने का फैसला हाईकमांड ने किया है, 90% विधायक छोड़ के जाते हैं उनके पास से, ये तो मैंने देखा है। कोई नहीं रुकता है।
क्या कारण था उस दिन कि नए मुख्यमंत्री का नाम चल पड़ा, चला दिया खुद ने चला दिया, उनके दोस्तों ने चला दिया, उसके बाद में उनके पास नहीं गए, उनके पास नहीं गए, क्यों नहीं गए भाई? वो तो शपथ लेने वाले थे मान लो, जाते उनके पास में, ये बात सचिन पायलट को भी समझनी चाहिए, अब वो भी उनको भी करीब 15-20 साल हो गए राजनीति करते हुए, एमपी बने हुए, वो भी मतलब अनुभव प्राप्त हो चुके हैं, हम सब कोई उनके दुश्मन नहीं हैं कोई, हम तो स्नेह रखते हैं बचपन से ही, हम तो बचपन से ही इनके परिवार में आते-जाते थे, जब हम MP बनकर गए, तो वैभव हो चाहे ये हो, 2-3 साल के बच्चे की तरह थे, हम तो बच्चे की तरह मानते हैं आज भी उनको। अब उसके बाद में अगर वो राजनीति में पता नहीं कौन गाइड कर रहा है।
एक तो जो मीडिया जो है, वो सच्चाई पे उनका सपोर्ट करे मुझे ख़ुशी होगी, मुझे भी सपोर्ट किया। बचपन से मीडिया ने मुझे सपोर्ट किया, मैं मीडिया फ्रेंडली कहलाता हूँ, मीडिया ने भी हमारे साथ चाय पी होगी तो पेमेंट खुद ने दिया होगा मीडिया वालों ने, ऐसे सम्बन्ध हम लोगों ने रखे हैं पर हमने कभी नहीं कहा कि तुम अंट-शंट अनर्गल ऐसी बातें करो जिससे मेरी खुद की इमेज पे लोग हँसें। कभी उसको बना देते हैं, प्राइम मिनिस्टर बना देते हैं उसको, पायलट साहब को, कि ये प्राइम मिनिस्टर के उम्मीदवार हैं, कभी कहते हैं कांग्रेस प्रेजिडेंट के उम्मीदवार हैं, कभी कहते हैं ये कांग्रेस वर्किंग प्रेजिडेंट बनने जा रहा है, कभी कहते हैं ये जी एस ओ बनने जा रहा है और कभी कहते हैं पीसीसी अध्यक्ष बनने जा रहा है, तो क्यों पायलट साहब के पीछे पड़े हुए हो तुम लोग? जितने भी मीडिया वाले हो, तुम लोग पीछे पड़े हुए हो, तुम लोग जो है दिल्ली में चाहे मेनस्ट्रीम मीडिया हो और चाहे वो आपका सोशल मीडिया हो।
सोशल मीडिया को मैं सलाम करता हूँ उनको, इस संकट की घड़ी में जो भूमिका सोशल मीडिया निभा रहा है, उनको मैं सलाम करता हूँ। डेमोक्रेसी खतरे में है, उसकी रक्षा करने के काम की बड़ी भूमिका किसी की है, मेनस्ट्रीम मीडिया की नहीं है, सोशल मीडिया की है और उनके अंदर जो बैठे हुए लोग हैं, जमीनी हकीकत उनको नहीं मालूम है, वो नई-नई स्टोरी चलाते रहते हैं, कोई फायदा नहीं, सबसे बड़ा नुकसान जो कर रहा है पायलट साहब का, वो वो मीडिया कर रहा है जो आउट ऑफ़ वे झूठी ख़बरें चला करके, झूठे पोस्ट देकर के ये इसके लायक हैं।
एक पत्रकार ने लिख दिया कि सोनिया गांधी राहुल गांधी को क्यों बेटा मानती है? सचिन पायलट को बेटा क्यों नहीं मान लेती है? ये पत्रकारिता है क्या इनकी? पत्रकारिता है इनकी, आप कल्पना कीजिए कि कहाँ ले जा रहे हैं देश को, मीडिया वाले भी। इसलिए मैं कहना चाहूँगा पायलट साहब को ही, उनको सच्चाई स्वीकार करनी चाहिए, गलती इंसान से ही तो होती है, गलती इंसान से होती है, मैं भी कर सकता हूँ। उन्होंने गलती कर दी तो स्वीकार कर लेना चाहिए, मैंने बाहर निकलते ही जैसलमेर के होटल से, जब तय हो गया ये लोग भी आ रहे हैं, आते ही मैंने बात कि आप लोग स्टेटमेंट दिया, 'फॉरगेट एंड फॉरगिव'। अगर मेरी भावना सचिन पायलट समझ जाते उस दिन, वो भी फॉरगेट एंड फॉरगिव करते, मैंने उसके ये नहीं कहा कि मेरी गलती नहीं थी, उसकी गलती थी, मैंने कहा 'फॉरगेट एंड फॉरगिव' मतलब जिसने गलतियाँ हमने करी आपस के अंदर, सब भूलो और माफ़ करो, अब वो बात भी अगर समझ में नहीं आई उनको, उसमें मेरा क्या कसूर है?
हम आज भी मिलते हैं, हँसी-मजाक भी करते हैं, बातचीत भी करते हैं। हमारी कोई आपस में दिक्कत नहीं है, सच्चाई को स्वीकार उन्होंने करना सीखा नहीं, उसके कारण ये इशू अभी तक बना हुआ है। मैंने बीकानेर में कहा 6 महीने पहले, भूलो इसको अब आप, मानेसर को भूलो। क्या मेरे मानेसर भूलने की बात कहने के बाद में क्या कोई स्टेटमेंट आया ऐसा? इशारों में ही आया क्या? भई चलो ये इशू खत्म हो गया क्योंकि उनके एडवाइजर वैसे ही होंगे, उनके एडवाइजर ऐसे ही दिखते हैं, इस कारण से ये इशू बना हुआ रहता है, हम नहीं चाहते इशू बना रहे, जो हो गया सो हो गया। गलती इंसान से ही तो होती है, पर जब तक कोई गलती को स्वीकार नहीं करे, तो भई आप जानते हो इशू तो बना ही रहता है, मैं नहीं चाहता इशू बना रहे।
हम चाहते हैं कि आज कांग्रेस पार्टी संकट में है देश के अंदर, देश खुद संकट में है और देश को अगर कोई बचा सकता है तो वो सिर्फ कांग्रेस बचा सकती है। ये गांधी जी के सानिध्य वाली पार्टी है, पंडित नेहरू हों, मौलाना आजाद हों, सरदार पटेल हों, उस वक्त के नेता थे हमारे। उन्होंने कैसे पार्टी को, देश को आजाद करवाया, हम भूल सकते हैं क्या? जेलों में बंद रहे थे 10-10 साल तक, इन्होंने उंगली नहीं कटाई हमारी आरएसएस-बीजेपी वालों ने, आज राज कर रहे हैं वो लोग। ये देश को तोड़ देंगे लोग, ये ऐसे खतरनाक लोग हैं, हिंदू-मुस्लिम करते-करते पता नहीं देश को कहाँ ले जाएँगे।
लड़ाई हमें सब को मिलके लड़नी चाहिए, पायलट साहब हों, चाहे मैं हूँ, चाहे कोई नेता है। अगर हमें ईमानदारी है कांग्रेस में रहने की, और हम चाहते हैं कांग्रेस के लिए जान लगा दें क्योंकि कांग्रेस ने हम सबको सब कुछ दिया है, इनको केंद्रीय मंत्री बनाया, मैंने उनको केंद्रीय मंत्री बनाने में मदद करी। उन्होंने अपनी जुबान से यें कभी नहीं कहा, इस बात की मुझे शिकायत भी है। उनको मालूम है कि मैंने उनकी मदद करी है, उनका फ़ोन आया तो मैंने कहा मैंने आपके लिए बात कर ली है, आप मंत्री बन जाओगे। उन्होंने ये बात जुबान से नहीं कही, ये दुःख तो होता है हम लोगों को भी।
भाई, अगर वो अपने दोस्तों में भी कहते हैं हाँ भाई अशोक गहलोत ने मेरी मदद भी करी थी, तो मेरा दिल भर जाता। क्यों नहीं कही उन्होंने, क्यों नहीं ये बात कही? जब मुझसे वो फ़ोन कर रहे हैं, रिक्वेस्ट कर रहे हैं कि मेरे को मंत्री बनाने में मदद करो, तो मैं मदद करके आ गया, तो क्या उनका धर्म नहीं था क्या कहने का? भई देखो मतलब अशोक गहलोत ने मेरी मदद भी की थी, ठीक है आज हमारी गलतफहमी हो गई आपस में, कुछ तो कहते वो, ये बातें नहीं कही उसके कारण आज सब कुछ बातें आगे बढ़ रही हैं।
दुनिया में सच्चाई का कोई विकल्प नहीं है, सुन लो। गांधी जी ने कहा था, 'द ट्रुथ इज गॉड, गॉड इज ट्रुथ', सत्य ही भगवान है, ईश्वर है, ईश्वर ही सत्य है, हम तो इस पे चलते हैं और पायलट साहब हों, चाहे कोई नेता हो, पीसीसी अध्यक्ष हों, चाहे नेता प्रतिपक्ष हो, डोटासरा जी हो और नेता हो, सबको हम तो यही कहेंगे भई सब लोग मिलके चलो, राजस्थानी कांग्रेस का मान-सम्मान हाईकमांड राहुल जी के दिमाग में ऐसा है जो कोई विश्वास नहीं कर सकता। बार-बार वो कह भी चुके हैं, अभी पीसीसी प्रेसिडेंट की और जूली साहब की तारीफ करके गए कि ये जुगल जोड़ी बनी रहे आपकी, अच्छा काम आप लोग कर रहे हो, इससे बड़ा कॉम्प्लीमेंट क्या होगा? अगर वो कह दें, इससे बड़ा कॉम्प्लीमेंट क्या होगा?
25 सितंबर के घटनाक्रम को लेकर किए गए दुष्प्रचार के संबंध में:
आज मुझे सब कुछ मिल गया, मैं अति संतुष्ट पॉलिटिशियन हूँ देश का। अब मैं पद के पीछे नहीं हूँ। कोई पद ज़बरदस्ती आकर मुझपर पड़ जाए तो अलग बात है देखो। मैं कोई पद के लिए नहीं हूँ कि पद के लिए मैं ये करूँ, वो करूँ, कुछ नहीं करना मुझे।
तीन-तीन बार मुख्यमंत्री कम नहीं होता देखो। ये तो हमारे नेता लोग समझ नहीं पा रहे हैं मेरी भावनाओं को। मैंने कहा लाइन मेरे से बड़ी खींचो तुम। मेरी लाइन तुम मिटाओ मत, मेरे से बड़ी लाइन खींचो। कौन मुख्यमंत्री बनेगा, नहीं बनेगा, किसी को नहीं मालूम। हम चाहते हैं कि सब मिलकर चलते रहो, चलते रहो। अभी संकट जो मैं कह रहा हूँ देश संकट में है, तो क्यों नहीं तुम आगे आ-आकर के हम सब मिलकर देश की रक्षा करें? कांग्रेस का औरा जो राजस्थान में है, हिंदुस्तान में वो हमें महसूस है, दिल्ली में रैली होती है सबसे अधिक लोग राजस्थान से जाते हैं। हाईकमान इस बात को जानता है। 20-25 साल से मैं देख रहा हूँ। इसलिए कृपा करके सब मतभेद भूलो, सब एक हो जाओ।
और इस मीडिया वालों को, मेजर क्या वो मीडिया जो मुख्य मीडिया है वो मीडिया जो आपका क्या कहलाता है, गोदी मीडिया। अब गोदी मीडिया का गोदी हटे ये उन मीडिया वालों से चाहिए कि अब गोदी हटवा दें वो अपना। वो तब हटवा पाएँगे जब ईमानदारी के साथ में सामाजिक सरोकार रखेंगे, देश हित में बात करेंगे, और सरकार के दबाव में नहीं आएँगे तो जाकर के ये तमगा गोदी मीडिया का हटेगा।
और सोशल मीडिया में मैं कहना चाहूँगा कृपा करके आप सच्चाई पे चलो, और आप सचिन पायलट को नुकसान मत करो। बहुत नुकसान कर चुके हो, बहुत नुकसान कर चुके हो। इतना नुकसान कर दिया आप कल्पना नहीं कर सकते, मैं बराबर सुनता रहता हूँ उनको। अब मैं कहता हूँ अब किसको जाके मैं कहूँ? किसको जाके कहूँ? कोई कुछ बोलता, कोई कुछ बोलता, कोई कुछ बोलता है और कमेंट कर देते हैं हम लोगों पर।
कुछ एबीसीडी पता नहीं उनको, और रिवोल्ट हो गया, रिवोल्ट हो गया। अरे, रिवोल्ट कैसे हो गया? अगर 100 लोगों ने कहा कि हमने साथ दिया हाईकमान का, सरकार हमने बचाई है। हम में से किसी को भी बना देते मुख्यमंत्री, क्या गलत कहा उन्होंने? क्या गलत कहा उन्होंने? और उसको रिवोल्ट बता रहे हैं वो हाईकमान के खिलाफ है, पर मैंने माफी माँगी सोनिया गांधी से फिर भी, मैं उस वक्त विधायक दल का नेता था।
मैं नेता था विधायक दल का, मुझे तीन बार बिना माँगे हुए सोनिया गांधी ने मुझे मुख्यमंत्री पद दिया। 1998 के अंदर, 2008 में सेकंड टाइम मुख्यमंत्री बनाया मुझे सोनिया जी ने, थर्ड टाइम तो मैं 21 पे आया हुआ था। 2013 में मैं 21 पे आया हुआ था, तभी तीसरी बार राहुल गांधी जी ने, सोनिया जी ने, प्रियंका जी ने मिलकर मुख्यमंत्री बनाया।
मैं कांग्रेस प्रेसिडेंट बन रहा था, मैं अनपढ़ नहीं हूँ। मैं पढ़ा-लिखा भी हूँ। ये क्यों भ्रम है मीडिया वालों को? और अनपढ़ आदमी होता तो फिर भी कह देते वो। अनपढ़ कामराज जी थे, तब भी कांग्रेस प्रेसिडेंट थे देश के। मैं अनपढ़ नहीं हूँ। मुझे पता है कांग्रेस प्रेसिडेंट का पद जहाँ गांधी जी अध्यक्ष रहे हों, पंडित नेहरू रहे हों, मोतीलाल नेहरू रहे हों, कौन नहीं रहा? सरदार पटेल रहे हों, उस कांग्रेस प्रेसिडेंट मुझे बना रही हैं सोनिया गांधी और कांग्रेस, तो मैं मना करूँगा? मैं मना करूँगा?
वो तो स्थिति ऐसी बना दी, वो भी एक कॉन्सपिरेसी थी मेरे ख्याल से। मुझे लगता है वो एक बड़ी कॉन्सपिरेसी हुई। अचानक ही ऑब्ज़र्वर आ गए, अचानक ही तमाशा हो गया, बदनाम मैं हो गया।
हिंदुस्तान में लोग समझते हैं अशोक गहलोत जो है, उसको मुख्यमंत्री रहना था, कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनना था, इसलिए रिवोल्ट हुआ। मुझसे कितने नज़दीक आदमी भी देश में हैं, कितने नज़दीक मेरा खुद का मिलने वाला हो, उसके दिमाग में यही बात है कि भाई, अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री रहना था इसलिए रिवोल्ट करवा दिया। अब मैं उनको कैसे समझाऊँ? आज मैं समझा रहा हूँ आपको। अब भी कुछ भला मेरा हो जाए तो आप लोग भला करना, जो मैं बता रहा हूँ आपको। पूरा मुल्क जानता है कि मुझे मुख्यमंत्री रहना था मैंने रिवोल्ट करवा दिया, और वही मैं मीडिया की बात करूँगा।
जिस मीडिया ने बातें फैलाई थी, मैं चुप रहा, और चुप भी मैं इसलिए रहा मुझे सोनिया जी को बताना था कि चाहे ये पायलट के खिलाफ रिवोल्ट था या क्या था, मुझे मतलब नहीं है। आज मैं आया हूँ सिर्फ इसलिए कि मैंने जो है, मैं नेता था विधायक दल का। ऑब्ज़र्वर आए हुए थे एआईसीसी के, एआईसीसी ऑब्ज़र्वर के मायने होते हैं। चाहे वो खड़गे साहब थे चाहे अजय माकन जी थे, और मैं प्रस्ताव पास नहीं करवा पाया।
हालाँकि, मैंने रात को कहा था कि आप अभी इस मीटिंग को बंद करते हैं, कल वापस मीटिंग बुलाकर के अपन बात करेंगे। वो स्थिति बनी नहीं हमारी, इसलिए वो इसलिए जो है, वो नहीं हो पाया प्रस्ताव पास नहीं हो पाया। मैंने जाके सॉरी फील किया मैडम के सामने कि मैं विधायक दल का नेता था। मुझे सब कुछ पार्टी ने दिया है, उसके बाद में भी ये स्थिति बन गई तो मैं माफ़ी चाहता हूँ। ये बात थी।
मैं, पुखराज पाराशर, नेता प्रतिपक्ष आदरणीय श्री राहुल गांधी जी के #GreenOverGreed अभियान के साथ हूँ।
ग्रेट निकोबार केवल एक द्वीप नहीं, बल्कि हमारी अमूल्य प्राकृतिक विरासत और जैव विविधता का महत्वपूर्ण केंद्र है। विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना समय की आवश्यकता है।
आइए, इस मुहिम के साथ जुड़ कर प्रकृति संरक्षण और आदिवासी समुदायों के अधिकारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करें।
@RahulGandhi
#NicobarMatters #RahulGandhi
PM @narendramodi जी,
INS Baaz, UPA सरकार में स्थापित किया गया नौसैनिक अड्डा, पिछले पाँच साल से विस्तार की माँग कर रहा है। मगर, सरकार ने नौसेना की बात अनसुनी कर दी।
अगर आप Great Nicobar project को देश की सुरक्षा से जोड़ते हैं तो आज ही INS Baaz का विस्तार कीजिए। मैं पूरी तरह समर्थन में हूं और पूरा विपक्ष आपके साथ है।
INS Baaz तट पर है - इसके लिए न 1.5 करोड़ पेड़ काटने की ज़रूरत है, न जनजातियों को विस्थापित करने की।
पर सच्चाई यह है - यह project देश की सुरक्षा के लिए नहीं है। यह project है हमारे देश की सबसे अनमोल ज़मीन को एक व्यापारी के हाथों सौंपने के लिए। और हमेशा की तरह इसके लिए भी सेना के नाम का सहारा लिया जा रहा है।
@narendramodi जी - देश की रक्षा सेना करती है। होटल और casino नहीं।
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पर्यावरण और हमारे द्वारा उठाए गए सरिस्का के मुद्दे के आपस में जुड़े होने संबंधी सवाल का जवाब:
अरावली में वहां पर इलीगल माइनिंग हो रही है। हमने जो आह्वान किया था, मुझे खुशी है कि पूरे देश के अंदर अरावली एक इश्यू बना और सुप्रीम कोर्ट को को रेस्क्यू में आना पड़ा। सरकार समझ गई थी कि ये पब्लिक इश्यू बन चुका है।
दुर्भाग्य से हमारे मंत्री, जो कई बार मेरे पर आरोप लगाते हैं, और मुझे इसमें राजनीति नहीं करनी है। चाहे आप सरिस्का चले जाओ, चाहे कहीं चले जाओ। जिस प्रकार के फैसले करवाए हैं यादव जी ने, राजस्थान के लोग और अलवर के लोग उनसे उम्मीद नहीं करते थे कि हमारा अपना जो मंत्री है केंद्र में, फॉरेस्ट का भी है, पर्यावरण का भी वही मंत्री है। मैं समझता हूं। तो वो होकर के भी, बजाय इसके कि यहां जनता की जो आवाज उठाएं, वो खुद ही रक्षा करेंगे, वनों की रक्षा भी करेंगे, इलीगल माइनिंग नहीं होने देंगे, पर्यावरण को बचाएंगे। पर पता नहीं क्या कारण है, मैं नहीं कह सकता, पर लोग कई तरह के आरोप भी लगाते हैं। ये स्थिति अच्छी नहीं है।
उनको समझना चाहिए कि अभी भी समय है। वो संभल जाएं। अलवर के अंदर बहुत आक्रोश है गांव-गांव के अंदर। बराबर मेरे पास मैसेज आते रहते हैं, और अभी तो सुप्रीम कोर्ट ने लगा रखी रोक, अभी बनाई है कमेटी कल परसों। उसका हम स्वागत करते हैं। पर उसमें भी ज्यादातर लोग जो हैं ऑफिशियल लोग हैं। हम चाहेंगे जो एक्टिविस्ट लोग हैं उसको उस कमेटी में लेना चाहिए। सरकार में अगर ईमानदारी है, और ईमानदारी से वो चाहते हैं रक्षा हो पर्यावरण की भी और वनों की भी और जो शिकायतें हैं अलवर में और पूरे प्रदेश में, वो शिकायतें समाप्त हों तो केंद्रीय मंत्री जी को चाहिए कि वो खुद जो कमेटी सुप्रीम कोर्ट ने बनाई है या मंत्रालय ने बनाई है, मुझे पूरा इसका ज्ञान नहीं है। वो कमेटी में खाली ऑफिशियल नहीं, एक्टिविस्ट जो सुप्रीम कोर्ट के खुद के पास में हैं, कई कमेटियां सुप्रीम कोर्ट ने पहले बनाई हैं। वो एक्टिविस्ट राय देते हैं, सुप्रीम कोर्ट उसके अकॉॉर्डिंग टू फैसले में विचार करता है। तो मैं समझता हूं कि बहुत जरूरी है कि इस दिशा में आगे बढ़ा जाए।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 49 सिविल लाइन्स पर प्रेस वार्ता का आयोजन :
विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर सभी से वृक्ष लगाने और उनकी रक्षा करने का संकल्प लेने का आह्वान:
किसी ने कहा पहले मौसम बदलता था, अब मौसम बिगड़ता है। वही हालात हम देख रहे हैं चारों ओर, कभी गर्मी, कभी सर्दी, तापमान ऊपर-नीचे होते रहते हैं। पूरी तरह ये सब कुछ जो हो रहा है वो पर्यावरण का जो संतुलन बिगड़ रहा है, प्रदूषण हो रहा है, सब बातें मिली हुई हैं।
मुझे याद है कि सबसे पहले इंदिरा गांधी जी ने जो है, देश का ही नहीं दुनिया का ध्यान आकर्षित किया था कि किस प्रकार से हमें ध्यान देना चाहिए पर्यावरण पर, प्रदूषण पर, वरना आने वाले जमाने में ग्लोबल वार्मिंग होगी और पूरी दुनिया के मुल्कों ने एप्रिशिएट किया था इंदिरा जी के इस आह्वान को। इतनी सोच दूरदृष्टि थी इंदिरा जी की। आज हम देखते हैं कि वो स्थिति बन गई है। दुनिया के मुल्कों में तो ग्रीन पार्टी बन गई है। ग्रीन पार्टी बनना, पॉलिटिकल पार्टी के रूप में बनना बड़ी बात है। इसका मतलब वहां की राजनीति जो है उसमें एक पार्टी पूरी तरह समर्पित अपने आप को कर रही है पर्यावरण, प्रदूषण को लेकर, वृक्षारोपण को लेकर के।
आपको याद होगा मैंने बहुत पहले कहा था कि पानी बचाओ, बिजली बचाओ, सबको पढ़ाओ। फिर मैंने जोड़ा उसके अंदर पानी बचाओ, बिजली बचाओ, सबको पढ़ाओ, वृक्ष लगाओ और बेटी बचाओ। ये पांचों बातें आज भी मौजूं हैं, बहुत ही आवश्यक हैं आम जनता के लिए भी। वृक्षों के अभाव में जो स्थिति बनती है, वृक्ष कटते जा रहे हैं, अभी अंडमान निकोबार का जो राहुल जी ने इश्यू उठाया है, उस पर भारत सरकार को ध्यान देना चाहिए बहुत ही गंभीरता से। राहुल गांधी जी ने जाकर के वहां पर पूरी तरह जांच पड़ताल करके, पूरी बात समझ करके उसके बाद में इसको इश्यू बनाया है। अंडमान निकोबार हमारे मुल्क का सबसे खूबसूरत एक द्वीप है। वो नष्ट हो जाएगा आने वाले वक्त के अंदर। ऐसे कई उदाहरण मिलेंगे आपको जहां पूरी तरह राज्य सरकारें हों चाहे केंद्र सरकार हो, इनकी टॉप प्रायोरिटी का वक्त आ गया है कि बचाना है आने वाली पीढ़ियों के लिए इस देश को, देश की धरती को, देश के मिजाज को, देश के पर्यावरण को, देश के क्लाइमेट को। तो हमें उस दिशा में सोचना ही पड़ेगा, सोचने की आवश्यकता है।
उसके अभाव में पता नहीं क्या होगा आने वाले वक्त के अंदर। हम देखते हैं कि उत्तराखंड के अंदर कभी बद्रीनाथ, केदारनाथ में क्या-क्या नहीं हुआ है? हमने सबने देखा है। अनेकों परिवार के लोग वहां बह गए थे। वो भी हिंदुस्तान के लोग गवाह हैं उसका, किस प्रकार से वहां पर स्थिति बदली थी।
इसलिए मैं कहना चाहूंगा कि ये जो इश्यू बनते जा रहे हैं, अभी आज विश्व पर्यावरण दिवस है। उसके अंदर भी मैं आह्वान करूंगा लोगों को भी आगे आएं वृक्ष लगाने के लिए। हम चाहेंगे कि एक अपील करें लोगों से, किस प्रकार से वृक्षों का क्या उपयोग है। हर व्यक्ति, हर परिवार ये संकल्प करना चाहिए कि घर के अंदर जगह है तो वहां पर भी, घर के आस-पास है वहां पर भी, या जहां वो क्षेत्र चुने स्कूल हो, कॉलेज हो, पर वृक्ष लगाएं, वृक्ष लगाएं ही नहीं वृक्षों की रक्षा भी करें।
इस प्रकार का माहौल बनाएंगे तब जाकर के जो ये माहौल बिगड़ता जा रहा है, जो मैंने आपको कहा कि पहले मौसम बदलता था, अब मौसम बिगड़ रहा है और सब चिंतित हैं उससे। तो गाड़ी पटरी पर लाने के लिए जरूरी है कि तमाम आम जनता जुड़े उससे। बगैर आम जनता जुड़े हुए खाली सरकार के भरोसे हम नहीं रह सकते। सरकारें अपना काम करें, उनको भी ईमानदारी से पूरी निष्ठा से, पूरी प्रतिबद्धता से काम करना ही चाहिए इस दिशा के अंदर, इसमें कोई दो राय नहीं है। सरकार, सरकार ही होती है।
परंतु अगर समाज मिल जाता है तब जाकर के वो प्रोग्राम इम्प्लीमेंट सफलता के साथ हो सकता है।
मैं अपील करुंगा पब्लिक को भी, राजस्थान वासियों को भी, कि इस दिशा में आप आगे बढ़ें क्योंकि राजस्थान तो अपने आप में झेल रहा सदियों से, यहां तो अकाल सूखा पड़ता था एक घर के सदस्य के रूप में होता था वो। हर घर में तकलीफ आती थी उस जमाने के अंदर। और किस प्रकार सरकारों ने अकाल राहत के काम खोले हैं, आजादी के बाद से ही किस प्रकार से गांव-गांव में वहां पर पहुंचे हैं लोग। लोगों को बचाए रखा है, उनको जिंदा रखा है। कितनी तकलीफ झेली होगी, पश्चिमी राजस्थान के लोग ही ज्यादा जानते हैं क्योंकि बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, फलोदी, बाप, शेरगढ़ हो चाहे वो ओसियां हो चाहे भोपालगढ़ या बिलाड़ा कोई हो। पूरा मारवाड़ जो है पाली, जालौर, सिरोही सबमें जो तकलीफ आती ही आती है और वैसे राजस्थान भर में अकाल में चाहे वो आपके दक्षिण राजस्थान हो, डूंगरपुर, बांसवाड़ा के अंदर तकलीफ पाते थे। पूरा राजस्थान भुगतता था अकाल सूखे के अंदर।
नरेगा इसीलिए शुरू किया गया था। दुर्भाग्य से इन्होंने नरेगा बंद कर दिया है। एक जुलाई से पूरा बंद हो जाएगा। पता नहीं क्या होगा। वरना नरेगा के अंदर भी कई जगह वृक्ष भी लगते थे, कई जगह नाड़ियां बनती थी, खुदाई होती थी, पानी इकट्ठा होता था। तो पानी की रक्षा करने का भी, वो भी बड़ा काम है पर्यावरण को बचाने के लिए। किस प्रकार हम पानी को संजोए रखें, कुंड में या नाड़ियों में या घरों में टैंक बना करके। पुराने जमाने में तो हर घर में टैंक होते थे पानी के, उसी से काम चलता था। पालर पानी कहते थे उसको। पालर पानी मतलब बरसात का पानी जो बिल्कुल शुद्ध होता था। वरना पानी तो आप देखते हो हैंडपंप और ट्यूबवेल के भी पीने लायक भी नहीं होते हैं। वो जमाना भी हमने देखा है। मैं समझता हूं आज भी पानी को बचाने का बहुत बड़ी आवश्यकता है। इसीलिए पर्यावरण की भी रक्षा होगी।
मुझे उम्मीद है कि राजस्थान में लोग इस बात को समझेंगे, वक्त आ गया है। इस साल तो और देख रहे हैं हम लोग। और ये जो वर्ल्ड रिकॉर्ड बन रहे हैं, उसमें भी हिंदुस्तान, हिंदुस्तान में राजस्थान, बहुत ज्यादा ये डिस्टरबेंस है मौसम का भी, बदलाव है। मौसम बिगड़ता जा रहा है वो भी हमारे सामने है। इन सब बातों का ध्यान रखते हुए हमारा संकल्प लेने का वक्त आ गया है। धन्यवाद।
नेता प्रतिपक्ष श्री @RahulGandhi ने ग्रेट निकोबार के जमीनी सच को देश के सामने रखा है। रक्षा के नाम पर पर्यावरण से यह खिलवाड़ और पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने की नीति बेहद चिंताजनक है।
1.5 करोड़ पेड़ों की कटाई, कोरल रीफ़ की तबाही और वहां के आदिवासियों व पूर्व सैनिकों को विस्थापित कर होटलों-कैसीनो का निर्माण कतई स्वीकार्य नहीं है। विकास हमेशा पर्यावरण के लिहाज से संतुलित और सस्टेनेबल होना चाहिए, न कि चुनिंदा उद्योगपतियों के फायदे के लिए।
देश के इस अनमोल हिस्से और पर्यावरण को बचाने की इस लड़ाई में हम सब एकजुट हैं।
जरूर देखें यह वीडियो:
#GreenOverGreed
#NicobarMatters
#WorldEnvironmentDay
I visited the southernmost tip of India.
I stood at Indira Point. I walked under trees that have stood for centuries. I dove into coral reefs among the most vibrant on earth.
And I sat with the people who live there. Tribal communities, whose land is being taken away by violating the Forest Rights Act. Settlers, many of them former soldiers, placed on these islands by the Indian government, who aren’t getting fair compensation.
The Modi government and BJP tells you Great Nicobar Project is about defence. It is not.
Expand INS Baaz - we will back the government fully. The Navy has been asking for expansion for five years - it has been ignored.
They tell you it is about a transhipment port. It is not. India is already building one in Kerala, which is on the mainland.
What it actually is: 1.5 crore trees felled. Coral reefs erased from official maps. Soldiers and tribals displaced - so one businessman can build hotels and casinos on India’s most irreplaceable ecological land.
Every young Indian I have spoken to understands this. You know that no amount of profit is worth destroying what can never be recovered.
I stand for ecologically balanced development. These islands can be the most extraordinary sustainable destination the world has ever seen. That is the India worth fighting for.
#GreenOverGreed
#NicobarMatters
#WorldEnvironmentDay
राजस्थान से श्री नीरज डांगी जी को पुनः राज्यसभा चुनाव हेतु कांग्रेस प्रत्याशी घोषित होने पर हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं।
ईश्वर से आपके सफल कार्यकाल की कामना है।
@NeerajDangiINC
जयपुर को जाम-मुक्त बनाने के विज़न के साथ हमारी कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2021-22 में ओटीएस, रामबाग, जेडीए, जवाहर सर्किल, बीटू बाईपास, लक्ष्मीमंदिर और चौमू हाउस जैसे 7 प्रमुख चौराहों को ट्रैफिक लाइट फ्री करने का ऐतिहासिक काम शुरू किया था। बी-2 बाईपास और लक्ष्मीमंदिर तिराहे पर फ्लाईओवर व अंडरपास इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हैं।
लेकिन संकीर्ण राजनीतिक सोच से ग्रस्त भाजपा सरकार ने आते ही ओटीएस चौराहे पर बनने वाले हैंगिंग ब्रिज का अनुबंध ही रद्द कर दिया! जनता रोज़ जाम में पिसती रही और यह जनकल्याणकारी प्रोजेक्ट भी भाजपा के 'इंतजारशास्त्र' और 'बदले की राजनीति' की भेंट चढ़ गया।
अब माननीय उच्च न्यायालय ने इस सोई हुई सरकार को आईना दिखाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि यह परियोजना हमारी तत्कालीन सरकार की घोषणा के अनुरूप ही पूरी होगी। न्यायालय की यह टिप्पणी भाजपा सरकार के मुंह पर करारा तमाचा है कि "सरकार बदलने से अनुबंध नहीं बदला जा सकता और राजनीतिक द्वेष में सरकारी वादे नहीं तोड़े जा सकते।"
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी, हर विकास कार्य को 'सियासी चश्मे' से देखना बंद कीजिए। जनहित को सर्वोपरि रखिए, क्योंकि राजस्थान की जनता विकास चाहती है, आपकी सरकार का यह हठधर्मिता और राजनीतिक प्रतिशोध वाला रवैया नहीं!
भाजपा सरकार की नाकामी के कारण आज हमारी सुरक्षित राजधानी जयपुर 'क्राइमपुर' बनने की ओर अग्रसर है।
सोडाला में मंदिर से लौट रही 74 वर्षीय बुजुर्ग महिला को बेरहमी से सड़क पर पटककर लूट लिया जाता है और न्यू सांगनेर रोड पर स्कूटी सवार बेटियों को गिराकर पर्स छीन लिया जाता है। 60-60 घंटे बीतने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं।
इस लचर कानून-व्यवस्था से आम जनता अत्यंत भयभीत है। कभी छेड़छाड़, कभी लूटपाट, ऐसा लगता है कि पुलिस का इकबाल बिल्कुल खत्म हो गया है। खौफ का ऐसा माहौल पैदा हो गया है कि महिलाओं ने घरों से बाहर निकलना बंद करने जैसी स्थिति बना ली है।
खोखले विज्ञापनों से बाहर निकलकर भाजपा सरकार कानून का इकबाल बुलंद करे, वरना राजस्थान की जनता इस प्रशासनिक पंगुता को बर्दाश्त नहीं करेगी।
भाजपा सरकार का 'इंतजारशास्त्र' अब जनता के स्वास्थ्य पर भारी पड़ रहा है।
हमारी कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2022 में पाली के बांगड़ अस्पताल में जिन सुपर स्पेशलिटी सेवाओं (कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, यूरोलॉजी, गैस्ट्रोलॉजी) की घोषणा कर इमारत का निर्माण करवा दिया परन्तु वर्तमान भाजपा सरकार आज तक उनके लिए आवश्यक उपकरण, कैथ लैब और ऑपरेशन थिएटर तक उपलब्ध नहीं करा पाई है। नतीजतन, मरीजों को आज भी इलाज के लिए जोधपुर या अहमदाबाद का रुख करना पड़ रहा है।
ये तो केवल एक उदाहरण है। पूरे प्रदेश में कांग्रेस सरकार के दौरान जनहित के लिए बनाई गईं इमारतें खड़ी हुई हैं। जनता को सुविधाओं के लिए तरसाना और केवल इंतजार करवाना ही क्या इस सरकार की 'सुशासन' परिभाषा है?
आखिर भाजपा सरकार के कुप्रबंधन की कितनी सजा प्रदेशवासियों को मिलेगी?
1978 में स्थापित इंडियन मेडिसिन्स फार्मास्युटिकल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IMPCL) देश की एकमात्र सरकारी कंपनी है जो आयुर्वेदिक और यूनानी दवाएं बनाती है। IMPCL वर्षों से मुनाफे में चल रही थी, सरकार को करोड़ों का लाभांश दे रही थी। अब मोदी सरकार ने इसे ₹121 करोड़ में निजी हाथों में सौंप दिया।
भाजपा के सांसद ने सवाल पूछा तो सरकार ने लिखित में कहा था कि IMPCL नहीं बिकेगी। परन्तु अब मोदी सरकार ने इस कंपनी को बेच दिया है। यह सिर्फ एक कंपनी की बिक्री नहीं, जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ भी है क्योंकि यह सरकारी कंपनी सरकारी अस्पतालों में कम दाम में दवाएं उपलब्ध करवाती थी।
IMPCL की कुल संपत्ति ₹260 करोड़ से ऊपर है, फिर इसे इतने कम दाम पर क्यों बेचा? जिस Skymap Pharmaceuticals को यह बेची गई, उसका खुद का सालाना कारोबार IMPCL से छोटा है तो क्या यह सौदा जनहित में है?
देशवासियों के मन में में गहरी चिंता है कि जब देश की सरकारी कंपनियाँ जो मुनाफे में हों, बेची जाने लगें तो यह संकेत क्या है? क्या सरकारी खजाना खाली हो चुका है? भारत सरकार की आर्थिक हालात खस्ताहाल है?
क्या इस सौदे में कोई भ्रष्टाचार हुआ है जिसे मोदी सरकार छिपा रही है?
कल सायला क्षेत्र के प्रवास के दौरान उम्मेदाबाद में अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष श्री ज़ाकिर भाई रंगरेज जी के प्रतिष्ठान एवं श्री राजेश जैन जी के फार्म हाउस पर मिले आत्मीय स्वागत, स्नेह और सम्मान के लिए हृदय से आभार।
Heartiest congratulations to Respected Shri B. K. Hariprasad ji on being appointed as President of Karnataka Pradesh Congress Committee.
Wishing him great success in strengthening the organization and taking the Congress movement to greater heights across Karnataka.
@HariprasadBK2
मुख्यमंत्री जी,
माना कि आपकी सरकार के कुशासन से परेशान जनता आपके मंत्रियों को सुनने नहीं आ रही है पर आप एक आदेश निकालकर राज्यहित का पैसा बचा सकते हैं।
राज्य सरकार को आदेश निकालना चाहिए कि मंत्रियों की सभा में 10 व्यक्तियों का टैंट लगेगा। इससे आपकी सभा भी भरी हुई लगेगी और टैंट का खर्च भी बचेगा। @BhajanlalBjp
आज सायला क्षेत्र के सांगाना में जनाब मठार खान जी के परिवार में आयोजित वैवाहिक समारोह में शामिल होकर शुभकामनाएं प्रेषित की।
इस अवसर पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्री लतीफ खान जी, ब्लॉक अध्यक्ष श्री सवाईसिंह जी, मंडल अध्यक्ष श्री गोपाल देवासी जी, ओबीसी विभाग के उपाध्यक्ष श्री छगनलाल माली जी, श्री कृष्ण मेघवाल जी, स्थानीय सरपंच जी, श्री अयूब खान जी भी उपस्थित रहे।
आज सायला क्षेत्र के उम्मेदाबाद में श्री जोगाराम मेघवाल जी एवं श्री मांगीलाल माली जी के निधन पर उनके निवास स्थान पर पहुंचकर शोक संवेदनाएं व्यक्त।
ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें एवं शोकाकुल परिजनों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति दें।
इस दौरान ब्लॉक अध्यक्ष श्री सवाईसिंह जी, अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष श्री ज़ाकिर भाई रंगरेज, मंडल अध्यक्ष श्री भोलाराम माली जी, श्री गोपाल देवासी जी, ओबीसी विभाग के उपाध्यक्ष श्री छगनलाल माली जी, श्री राजेश जैन जी, श्री कृष्ण मेघवाल जी, श्री जोगाराम सरगरा जी एवं श्री हनीफ़ भाई साथ उपस्थित रहे।