जूस पी रहा था कोटेदार, पुलिस उठा ले गई!
फतेहपुर के जहानाबाद थाना क्षेत्र से सामने आए एक मामले ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कानपुर नगर के एक राशन कोटेदार का आरोप है कि जहानाबाद के अमौली चौराहे पर जूस पीते समय पुलिसकर्मियों ने केवल शक के आधार पर उसे रोक लिया। इसके बाद मोबाइल छीनने, थाने ले जाने, घंटों बैठाए रखने, लॉकअप में बंद करने और दबाव बनाकर बयान पर हस्ताक्षर कराने तक के आरोप लगाए गए हैं।
पीड़ित का कहना है कि उससे ऐसा बयान लिखवाया गया जिसमें उसे नशे में पुलिस से अभद्रता करने वाला बताया गया। विरोध करने पर मारपीट की गई और जबरन हस्ताक्षर कराए गए। इतना ही नहीं, मोबाइल वापस मिला लेकिन उसमें रखी नकदी गायब थी। रुपये मांगने पर कथित तौर पर झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी भी दी गई।
यदि आरोप सही हैं तो यह मामला केवल एक व्यक्ति के उत्पीड़न का नहीं, बल्कि नागरिक अधिकारों और पुलिस जवाबदेही से जुड़ा गंभीर प्रश्न है। क्या किसी व्यक्ति को केवल संदेह के आधार पर हिरासत में लेकर उससे मनमाफिक बयान लिखवाया जा सकता है? क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी?
अब निगाहें पुलिस अधीक्षक @abmanglik फतेहपुर पर टिकी हैं, जिनसे पीड़ित ने न्याय की गुहार लगाई है।
सवाल बड़ा है — क्या कानून के रखवालों पर लगे इन आरोपों की सच्चाई सामने आएगी या मामला फाइलों में दब जाएगा?
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