ये डेमोक्रेसी है!😳😲
पुलिस उनकी है, डंडे उनके है, सिस्टम उनका है सब-कुछ उनका है ।
तनख्वाह से पैसा कटता है ना, 100 रुपये कमाती हूं तो 30 रुपये देती हूं ना, फिर क्या होता है उसका, ये होता है।
आप लोग मेरे बच्चों को डंडे मारोगे सिर्फ इसलिए कि वो अपना हक मांग रहे हैं।
CJP के आशुतोष रांका बोले- "हिंदू-मुस्लिम और मेलोडी की बातें आपने जरूरी सुनी होंगी लेकिन 2 मिनट शिक्षा के मुद्दे पर बात कर लो, इन्हें सांप सूंघ जाता है..."
यूपी पुलिस का जातिवाद!
कुछ दिन पहले जब ललिता गौतम को न्याय दिलाने के लिए दलित मेरठ कलेक्ट्रेट आए थे, तो प्रशासन ने गेट बंद कर दिया था। धरना देने पर SSP अविनाश पांडेय ने उन्हें गालियां दीं, थप्पड़ मारे और 8 लोगों को गुंडा बताकर जेल भेज दिया।
आज किसानों ने ट्रैक्टरों का झुंड लेकर उसी कलेक्ट्रेट को घेर लिया। कमिश्नरी चौराहा घंटों तक किसानों की छावनी बना रहा। एडिशनल कमिश्नर को बीच सड़क पर आकर बात करनी पड़ी। बात नहीं बनी तो किसान अनेक ट्रैक्टर लेकर कलेक्ट्रेट में घुस गए। DM से लेकर SP और SSP तक मुंह ताकते रह गए। किसी की हिम्मत नहीं थी कि किसानों पर हाथ छोड़ दे।
कहाँ गया मेरठ का वह SSP अविनाश पांडेय, जो दलित समुदाय को "पूरी रोड गंदी कर दी सालों ने...", "सड़क तुम्हारे बाप की नहीं है..." जैसी गालियां देते हुए दलितों की लाठी-डंडों से पिटाई कर रहा था और बंदी वैन में घुसकर उन पर थप्पड़ चला रहा था?
इन जातिवादी पुलिसकर्मियों की सारी हेकड़ी सिर्फ दलितों के खिलाफ निकलती है। इन्हें पता है कि ये किसान जाट हैं, उन्हें हाथ लगाएंगे तो वे उनकी औकात बता देंगे। जब वे ट्रैक्टर लेकर लाल किले तक घुस सकते हैं, तो एक कलेक्ट्रेट की क्या बिसात है! बाकी दलितों का क्या है, कमजोर समाज से हैं, जब चाहे उन्हें पीट दो, भला कौन सुनने वाला है? अविनाश पांडेय से बस यही कहूंगा; तुम लोग आईने में खुद से नजर कैसे मिला पाते हो? शर्म नहीं आती?
देश को सोनिया शेहरावत जैसे असिस्टेंट कमांडेंट की कतई जरूरत नहीं है..... और जिसको यह नहीं पता कि नेम प्लेट से गर्मी लगती है कि नहीं वो पेपर कैसे पास कर ली ?कहीं यह भी तो नहीं पेपर लीक से पास हुई है ??
चप्पा-चप्पा इंक़लाब के नारों से गूंज रहा है।
जब युवा अपने भविष्य, शिक्षा और रोज़गार के सवाल पर सड़क पर उतरते हैं, तो वह सिर्फ़ एक आंदोलन नहीं, बल्कि देश के आने वाले कल की आवाज़ बन जाता है।
अब यह आवाज़ किसी एक शहर की नहीं, पूरे देश की बन चुकी है। आइए, लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से न्याय, शिक्षा और युवाओं के अधिकारों की इस लड़ाई में एकजुट होकर अपनी भागीदारी निभाएँ। बदलाव की शुरुआत हमेशा जागरूक समाज से होती है।
"बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ "
वाली Rss की मोदी सरकार का क्रूर और विभत्स चेहरा"शिक्षा को बचाने निकली बेटी आज हमारे बीच नहीं रही
लेक़िन इस बेटी ने इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया ऐसी बेटियों पर देश गर्व करेगा....!!
जंतर मंतर पर सरकार के द्वारा जो गुंडे भेजे जा रहे थे वो महिलाओं कों भी नहीं छोड़ रहे है...
सबूत देख लीजिये.. 👇
इसे कोई दलाल मिडिया नहीं दिखायेगा ऐसे हालात
ये प्रयागराज है अब आएगा ऊंट पहाड़ के नीचे.!🔥🔥
कल ही विग वाला पत्रकार कह रहा था दिल्ली में कर रहे हो यूपी में मत करना!
एक जातिवादी पूर्व IAS अपनी जाति के मुख्यमंत्री को तानाशाह समझता है वो भी ये जाहिर कर रहा था कि नौजवान उससे डरते हैं
अब क्या बोलोगे बेशर्मो.!