@yadavakhilesh@aashishsy रथ में अगर पीछे/बगल में स्क्रीन भी लगी होती तो और अच्छा रहता जिससे टीवी स्क्रीन से प्रचार होता और कुछ चीजें स्क्रीन पर जायदा समझ में आती जैसे आरक्षण की लूट , 26000 स्कूल तोड़ना और भी मुद्दे ।
देखो भाजपा की आपस की लड़ाई
मुख्य जी ने उपों की प्रसिद्धि घटाई
सबको मालूम है इस ‘प्री-पेड’ भाजपाई सर्वे का सर्वेसर्वा कौन है। यह भी अजीब बात है कि ‘सर्वेसर्वा’ जी ने हारे हुए को, जीते हुए से दोगुना दिखाया है। लगता है, इसके पीछे भी ‘हाता नहीं भाता’ सक्रिय है। किसीको सबसे पीछे दिखाकर उसका अपमान करना अच्छी बात नहीं।
जनता कह रही है कि जब भाजपा की बारात उठनी ही नहीं है, तो दूल्हों के विकल्प का नाटक क्यों किया जा रहा है।
पीडीए का सच्चा सर्वे : भाजपा शत-प्रतिशत यूपी का चुनाव हार रही है और देश का भी।
पीडीए के ‘प्रेम, दया, अपनापन’ का सौहार्दपूर्ण सकारात्मक संदेश हर दिन नये लोगों को जोड़ रहा है।
भ्रष्ट भाजपा के पाप का घड़ा जनता अपने वोट से तोड़ेगी।
भाजपा जाएगी फिर कभी नहीं आएगी!
ये बहुत सकारात्मक बात है कि हर एक सजग-सतर्क-सचेत-सक्रिय ‘पीडीए प्रहरी’ के प्रयास रंग ला रहे हैं और हवा का रुख़ समझनेवाले अधिकारी भी अब अपने स्तर पर जाँच-सुधार में सहयोग दे रहे हैं। ये लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत है।
अधिकारी भी सब समझ रहे हैं कि किसी भी भाजपाई घपले की सीमा तब तक ही सुरक्षित है, जब तक उनकी अपनी क़लम और नौकरी नहीं फँस रही है। वो नहीं चाहते हैं कि कल को जब भाजपा के ये सारे चुनावी-अपराध खुलें तो उनमें अधिकारियों की संलिप्तता का मामला भी बने और उन्हें निलंबन-बर्खास्तगी के अपमान का घूंट पीना पड़े, इसीलिए अधिकारीगण अब न केवल चुनावी गलतियाँ स्वीकार भी कर रहे हैं बल्कि साज़िशन की गई उन तथाकथित गलतियों को सुधार भी रहे हैं।
सच की सबसे बड़ी सकारात्मक ताक़त भी यही होती है कि उसका नैतिक बल किसी भी धनबल-बाहुबल से अधिक शक्तिशाली होता है और अच्छे लोग उससे जुड़ते चले जाते हैं, इसीलिए अंत में जीत सत्य की ही होती है।
उप्र के सभी अच्छे-सच्चे अधिकारी जिस तरह अप्रत्यक्ष रूप से लोकतंत्र की रक्षा के लिए शांति से सक्रिय हैं, उसके लिए प्रदेश के हर नागरिक के साथ-साथ हम भी उन्हें हार्दिक धन्यवाद देते हैं। लोकतंत्र की पुनर्स्थापना में उनकी कर्तव्यनिष्ठता सदैव याद रखी जाएगी।
लोकतंत्र की रक्षा में दिन-रात लगा हर एक ‘पीडीए प्रहरी’ इतिहास में एक ‘जनतंत्र सेनानी’ के रूप में दर्ज़ हो रहा है। संपूर्ण उत्तर प्रदेश में सक्रिय सभी ‘पीडीए प्रहरी’ इस लोककल्याणकारी सद्कर्म के लिए बधाई के पात्र हैं!
यूपी के वोटर कह रहे हैं कि समाजवादी पार्टी द्वारा प्रेस कॉन्फ़्रेंस में वोटर सूची में गड़बड़ी की ‘सप्रमाण आपत्ति’ करने के बाद यदि चुनाव आयोग द्वारा दी गई इस सफ़ाई को पल भर के लिए सच मान भी लिया जाए कि “SIR में छोटी-मोटी गलतियां हुईं है” परंतु चुनाव आयोग के पास इस बात का क्या जवाब है कि इन गलतियों का लाभ हमेशा ‘सत्ताधारी भाजपा’ को ही क्यों मिलता है?
जनता ने बात तो सही कही!
राज्यसभा की बात करनेवाले उप्र के मुख्यमंत्री जी में अगर रत्ती भर भी लाज-शर्म-हया हो तो भाजपा द्वारा बनाए गए सिक्किम के विवादित ‘राज्यपाल’ के बारे में बोलें।
उत्तराखण्ड की बेटी के प्रति उप्र के मुख्यमंत्री जी का भी तो कोई दायित्व बनता है या नहीं। उत्तराखण्ड छोड़ आए तो क्या नैतिकता भी छोड़ आए हैं।
देखते हैं उप्र के मुख्यमंत्री जी की आवाज़ किसी बच्ची के साथ हुए पाप के ख़िलाफ़ निकलती है या भयभीत होकर उनकी घिग्घी बंध जाती है। हमारी उनसे अपील है कि यदि उनमें अंश मात्र भी धर्म है तो वो एक आरोपी को राज्यपाल बनाने के फ़ैसले का घोर विरोध करें। ये उनको सीधी चुनौती है, नहीं तो वो सदैव के लिए मौन धारण कर लें। फिर तो यही माना जाएगा कि इसमें उनकी ख़ामोश सहमति भी शामिल है।
दिल्ली का ड्रोन-दूरबीन तो सिक्किम तक नहीं देख पा रहा है देखते हैं उप्र के मुख्यमंत्री जी का बुलडोज़र वहाँ तक पहुँचाता है या नहीं।
आज पूरे देश की हर बेटी और उनके माँ-बाप भाजपा के इस फ़ैसले से बेहद आक्रोशित हैं कि भाजपा ने घोर निंदनीय निर्णय लेते हुए अपने दल के एक ऐसे व्यक्ति को सिक्किम का राज्यपाल बनाया है जिसके घिनौने कुकृत्यों की वजह से एक बच्ची के साथ अन्याय हुआ और उसकी हत्या भी कर दी गई।
भाजपा बेशर्म अपराधियों का गिरोह है।
उत्तराखण्ड की बेटी के साथ न्याय हो!
‘बीजेपी, चुनाव आयोग और प्रशासन’ के त्रिगुट द्वारा SIR प्रक्रिया में डुप्लीकेट वोटर जुड़वाकर 2027 चुनाव जीतने की साज़िश -षड्यंत्र का पर्दाफ़ाश कल की प्रेस कांफ्रेंस में।
चार सौ तीन में चार सौ बीसी नहीं चलेगी!
उप्र की जनता भाजपाइयों से जो करवानेवाली है उसका रिहर्सल ये नेतागण कर रहे हैं।
‘भाजपाई’ उठा-बैठक का अभ्यास कर रहे हैं
क्योंकि अपने कुकर्मों की वजह से डर रहे हैं!
लूटनेवाले लुट गये।
ये समाचार सुनकर तो महाराष्ट्रवाले कुबेर तो डर के मारे ‘यूपी’ ही नहीं आएंगे।
ये है उप्र में अपराधियों के ख़िलाफ़ ज़ीरो हो गये ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ के दावे का सच।
मुखिया ही माफ़िया है!
@iamksydv8 Are jaikey ne ye kaam pahli baar nhi kiya hai kai baar kar chuka hai , personally bolne ka koi fyada nhi aaj nhi bolenge iske khilaaf to kal AY ko bhi aise bol sakta hai .