मैं तुमसे सिर्फ़ कलम और किताब चाहता हूँ,
ज़मीं पे बहते लहू का हिसाब चाहता हूँ।
मैं अब गुलाब नहीं, इंक़लाब चाहता हूँ।
आज नेता प्रतिपक्ष आदरणीय श्री @RahulGandhi जी सत्ता की आँखों में आँख डालकर वही सवाल पूछ रहे हैं, जो आज देश का हर युवा पूछ रहा है।
👉छात्रों पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया?
👉बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज का आदेश किसने दिया?
देश इन सवालों के जवाब का इंतज़ार कर रहा है।
#ChhatronKiGoonj
आदरणीय श्री @RahulGandhi जी के मार्गदर्शन में चल रहे ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के अंतर्गत चौमूं में छात्रों और युवाओं से सार्थक संवाद हुआ।
जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुआ बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज और उसके विरोध में प्रधानमंत्री आवास के बाहर शांतिपूर्ण ढंग से बैठे नेता प्रतिपक्ष आदरणीय श्री राहुल गांधी जी के साथ हुआ दुर्व्यवहार और पुलिसिया दमन बेहद निंदनीय है।
लोकतंत्र में जनता की आवाज़ को दबाने का यह प्रयास स्वीकार नहीं किया जा सकता। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा देना होगा।
#ChhatronKiGoonj
📍 छात्रों की गूंज, चौमूं
जम्मू-कश्मीर प्रवास के दौरान माननीय उपमुख्यमंत्री श्री सुरिंदर कुमार चौधरी जी से शिष्टाचार भेंट हुई।
इस दौरान प्रदेश के वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य, संगठनात्मक गतिविधियों तथा जनहित से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा हुई।
📍 जम्मू-कश्मीर
'मेहनत की लूट सबसे ख़तरनाक नहीं होती,
पुलिस की मार सबसे ख़तरनाक नहीं होती,
सबसे खतरनाक होता है,
हमारे सपनों का मर जाना।'
और आदरणीय श्री @RahulGandhi जी इस देश के युवाओं के सपनों को किसी भी कीमत पर मरने नहीं देंगे।
करोड़ों नौजवानों के सपनों को बचाने, उनके हक की आवाज बुलंद करने और धर्मेंद्र प्रधान जी द्वारा चलाए जा रहे भ्रष्ट व ठप शिक्षा मंत्रालय को उखाड़ फेंकने के लिए कांग्रेस पार्टी 30 जून, 2026 से एक बड़ा छात्र आंदोलन शुरू करने जा रही है। यह आंदोलन देश के 28 प्रमुख शहरों में एक साथ चलाया जाएगा।
📍प्रेस वार्ता
राजीव भवन, जम्मू
Father’s Day पर मन बार-बार उन स्मृतियों में लौट जाता है, जहाँ पिताजी का स्नेह, उनका मार्गदर्शन और उनका विश्वास हर कदम पर साथ दिखाई देता है।
जीवन में कुछ रिक्त स्थान कभी नहीं भरते। पिता का साया भी ऐसा ही होता है। समय बीत जाता है, लेकिन कुछ यादें और कुछ सीखें जीवन भर साथ रहती हैं। आज भी जब पीछे मुड़कर देखती हूँ, तो आपकी मुस्कुराहट, आपका स्नेह, आपका आत्मविश्वास और लोगों के प्रति आपका अपनापन स्मृतियों में उतना ही जीवंत है।
कई बार मन करता है कि एक बार फिर आपकी सलाह सुन सकूँ, आपका मार्गदर्शन पा सकूँ, लेकिन फिर लगता है कि आपने जो संस्कार दिए हैं, वही आज भी हर कदम पर मेरा हाथ थामे हुए हैं।🙏🏻❤️
#FathersDay
📍 AICC कार्यालय, नई दिल्ली
आज कांग्रेस मुख्यालय में लोकसभा नेता प्रतिपक्ष आदरणीय श्री @RahulGandhi जी से मुलाकात कर उन्हें जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ व बधाई दीं।
The Great Nicobar project is not just about development. @RahulGandhi ji exposes the environmental and social costs being ignored in the name of progress.
#GreenOverGreed
औसियां विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत बाना का बास की भादुओ एवं बाना बिश्नोइयों की ढाणियों में पिछले दिनों आए तेज अंधड़ के कारण बिजली की लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई थीं।
बीते कई दिनों से ग्रामीण अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि जिन कामों को बिजली विभाग को करना चाहिए, उन्हें ग्रामीण अपने निजी खर्च और जोखिम पर करने को मजबूर हैं जिसके कारण किसी भी समय कोई बड़ा हादसा हो सकता है। यदि ऐसा होता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
सवाल यह भी है कि जब समस्या की जानकारी विभाग को है, तो अब तक समाधान क्यों नहीं हुआ? आखिर ग्रामीणों को अपने हाल पर छोड़कर बिजली विभाग अपनी जिम्मेदारी से कब तक बचता रहेगा?
औसियां विधानसभा क्षेत्र में बिजली व्यवस्था को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। विभाग को तत्काल प्रभाव से क्षतिग्रस्त लाइनों की मरम्मत करवानी चाहिए तथा इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।
ओसियां विधानसभा क्षेत्र के गोपासरिया गांव में जो कुछ हो रहा है, वह प्रशासन की कार्यशैली, सत्ता के दुरुपयोग और आम नागरिकों के साथ किए जा रहे व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जिस ट्रांसफार्मर (ढोलकी) को लेकर पूरा विवाद खड़ा किया गया, वह वर्ष 2013 से वहीं स्थापित था और किसानों की बिजली आपूर्ति की जीवनरेखा रही है।
हाल ही में आए अंधड़ से बिजली के पोल क्षतिग्रस्त हो गए। प्रशासन और बिजली विभाग द्वारा इस समस्या का समाधान करने के बजाय ट्रांसफार्मर को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की कोशिश की गई और जब ग्रामीणों ने इसका विरोध किया, तो उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज कर दिए गए। किसानों पर ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं, मानो वे कोई अपराधी हों।
इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि सोशल मीडिया के माध्यम से जनहित के मुद्दों को लगातार उठाने वाले राकेश गोदारा पर भी FIR दर्ज कर दी गई। यदि जनता की समस्याओं को सामने रखना और आवाज़ उठाना ही अपराध बना दिया जाएगा, तो फिर लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का अर्थ क्या रह जाएगा? क्या सवाल पूछना और सच सामने लाना प्रशासन को इतना असहज कर रहा है?
यह पूरा घटनाक्रम यह संकेत देता है कि ओसियां में समस्याओं का समाधान कम और आवाज़ उठाने वालों को दबाने का प्रयास अधिक हो रहा है। किसानों पर मुकदमे, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर पर FIR और प्रशासन की एकतरफा कार्रवाई यह सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर यह किस प्रकार का शासन है?
लोकतंत्र में सत्ता का काम संवाद करना होता है, दमन करना नहीं। ओसियां में जिस प्रकार की कार्यवाही सामने आ रही है, वह बेहद निंदनीय है। निर्दोष किसानों और राकेश गोदारा के विरुद्ध दुर्भावनापूर्ण जो कार्रवाई की गई है, उसे वापस लिया जाना चाहिए और किसानों की मूल समस्या का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।
ओसियां विधानसभा क्षेत्र में किसानों के घर पुलिस भेज कर जो व्यवहार कर रहा है यह प्रशासन पर गंभीर प्रश्न खड़े करता हैं।
आज ग्राम पंचायत गोपासरिया में राजनीतिक द्वेष की भावना से विद्युत विभाग के कर्मचारी पुलिस बल के साथ एक किसान के खेत से ट्रांसफार्मर (ढोलकी) हटाने पहुँचे। ओसियां में इस प्रकार की यह दूसरी घटना है, जो कई गंभीर सवाल खड़े करती है।
बिजली जैसी मूलभूत आवश्यकता से जुड़े मामलों में सौतेला व्यवहार, पक्षपातपूर्ण रवैया अथवा राजनीतिक द्वेष की भावना से किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। प्रशासन का दायित्व है कि वह निष्पक्षता, पारदर्शिता और जनहित को सर्वोपरि रखते हुए कार्य करे, न कि आम नागरिकों और किसानों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़े।
ओसियां क्षेत्र में किसानों को पर्याप्त बिजली आपूर्ति नहीं मिल रही है, जिससे किसान और आमजन भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। खेती-किसानी का कार्य प्रभावित हो रहा है और लोगों में गहरा असंतोष व्याप्त है।
दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि समस्या का समाधान करने के बजाय किसानों को परेशान किया जा रहा है। जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी किसानों की समस्याओं का निराकरण करना है, वही यदि किसानों पर अनावश्यक दबाव बनाएं, तो यह अत्यंत चिंताजनक स्थिति है।
किसानों का अनावश्यक उत्पीड़न और उनके साथ अन्याय किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
You should never buy a book by its cover. But I couldn’t resist the title.
“Unsaid Goodbye to My Unforgettable Father.”
Perhaps because I still haven’t been able to say goodbye to my father and in this lifetime, I never will. Some bonds are too deep for farewells, and some people never truly leave us.
In my mind, I am still in constant conversation with him. After all, how do you say goodbye to someone who never truly left?
कल पुष्कर में “संगठन सृजन अभियान” के तहत आयोजित 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के समापन अवसर पर आदरणीय श्री @RahulGandhi जी के विचार सुनने और उनसे संवाद का अवसर मिला।
यह संवाद केवल संगठनात्मक प्रशिक्षण नहीं, बल्कि कांग्रेस के मूल्यों, जवाबदेही और जनसेवा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को और मजबूत करने वाला रहा।
📍 पुष्कर, राजस्थान
आज किशनगढ़ हवाईअड्डे पर नेता प्रतिपक्ष आदरणीय श्री @RahulGandhi जी का राजस्थान की पावन धरा पर स्वागत किया।
राजस्थान एवं दिल्ली के नव-नियुक्त जिलाध्यक्षों के प्रशिक्षण शिविर “संगठन सृजन अभियान” में उनका मार्गदर्शन और संवाद संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में नई ऊर्जा का संचार करेगा।
📍 किशनगढ़, राजस्थान
With every scroll, netizens roll back more and more of their digital privacy. The 'Three-Hour Chill' brought by the new IT (Amendment) Rules, 2026 threatens to turn India's digital arena into a government-approved echo chamber. I write ✍️
https://t.co/6sUb5r2P9i
Three hours. That's all it takes to choke your voice under the new IT (Amendment) Rules, 2026. As citizen-privacy and free-expression grapple for breath, dangers of excessive State-oversight loom larger than ever.
I write ✍️ in @IndianExpress