कुंडलिनी ध्यान- #PatanjaliMeditation - 17-10-2023
द्रष्टा भाव से प्राणों को देखिये, प्राण ब्रह्म के साथ एकात्म होकर के ऐसे ओंकार में पूरे प्रतिष्ठित होकर के मूलाधार से सहस्रार तक अष्टचक्रों में ध्यान करते हुए, जिनको द्रष्टा ध्यान करना हैं। देह को, प्राणों को, इन्द्रियों को, मन को द्रष्टा भाव से, साक्षी भाव से ��ेखते हुए बॉडी, माइंड, थॉट्स, इमोशन से अपने आप को पूरा डिटैच करते हुए, इसको प्रेक्षा ध्यान बोलो, द्रष्टा ध्यान बोलो, विपश्यना बोलो, गुणातीत, भावातीत ध्यान बोलो, इसको उदासीन ध्यान बोलो, श्वासो के साथ, प्राणों के साथ ऐसे साक्षी हो जाएं जिनको जो रोग है।
यौगिक आसन, प्राणायाम, ध्यान, भजन, कीर्तन से मेरे भीतर की ऊर्जा उद्ध-बुद्ध हुई है, और उससे मेरे रोग मिट रहे हैं, मेरे शरीर की सारी संवेदनाएँ सकारात्मक हो रही हैं। सारी ऊर्जा सकारात्मक हो रही है। एक-एक सेल, जीन, क्रोमोसोम, RNA, DNA, प्रोटीन डी-जनरेट हुए सेल्स रिपेयर हो रहे हैं, रिजूवनेट हो रहे हैं। अपने-अपने रोग के मिटने का संकल्प, मैं रोग मुक्त हूँ, योग युक्त हूँ, ऐसे भगवान के अनुग्रह से अनुग्रहित, उपकृत होते हुए अपने रोगों से मुक्त होने के संकल्प के साथ ध्यान करें।
रोग मुक्ति का ��्यान किसी को कोई विकार बहुत गहरा होता है। किसी में काम, किसी में लोभ, किसी में मोह, किसी में अहंकार कोई ना कोई विकार बड़े दुःख देते हैं, जो भी रोग, विकार गहरा है उसकी भगवत चरणों में आहुति दें, कि प्रभु आप ही मुझे उभारो आप इस रोग, दुःख से मुझे तारो, हे हरि आप तारणहार हो मैं आपकी शरणागत हूँ।
ज्ञानाग्नि से ज्ञान के प्रकाश से, भक्ति के, पुरुषार्थ के, प्रार्थना के प्रकाश से, ज्योति से आप दग्धबीज हो जाते ह���ं, निर्बीज हो जाते हैं। अब जो पूर्ण स्वस्थ है वो कुंडलिनी ध्यान करें। अब थोड़ी देर के लिए कुंडलिनी ध्यान का अभ्यास कराते हैं।
मूलाधार शक्ति का केंद्र है। मेरे मूलाधार चक्र से शक्ति का ऊर्ध्व-आरोहण हो रहा है। स्वाधिष्ठान चक्र से सारी अशुद्धि का क्षय हो रहा है, मणिपुर की शक्ति से पूरे शरीर का शारीरिक पोषण हो रहा है, सारे न्यूट्रास्यूटिकल्स की डेफिशियेंसी से हम मुक्त हो रह��� हैं। मणिपुर चक्र में ध्यान से मेरा सारा भावनात्मक जो कुपोषण है, मैं उससे मुक्त हो रहा हूँ, विशुद्धि चक्र में ध्यान से मेरे जीवन में संयम और मर्यादा आ रही है मैं सब प्रकार के प्रलोभन से, आकर्षण से मुक्त हो रहा हूँ, आज्ञा चक्र में ध्यान से अपरा विद्या और भृकुटी में ध्यान से परा विद्या और सहस्रार में, ब्रह्मरंध्र में ध्यान से ब्रह्म विद्या में हम प्रतिष्ठित हो जाते है योग और अध्यात्म की जो अतीन्��्रिय शक्तियां है उनसे अभिभूत, आशीषित, आप्लावित हो जाते हैं।
योग में अपरिमित धैर्य भी है और अपरिमित शौर्य, वीरता, पराक्रम भी है और वीरता और विनय का संतुलन, शक्ति और भक्ति का संतुलन, श्रम और विश्राम का संतुलन,
प्रार्थना औ�� पुरुषार्थ क��� संतुलन यही तो है योग।
#PatanjaliMeditation #पतंजलिमेडिटेशन
माँ ब्रह्मचारिणी का ध्यान- #PatanjaliMeditation - 16-10-2023
निर्बीज, दग्धबीज होकर क�� गुरु, भगवान की शरणागति किसी का मन प्रकाश प्रधान है, किसी का मन क्रिया प्रधान है, किसी का अस्तित्व प्रधान है। अपनी-अपनी भाव चेतना के अनुरूप मौन ध्यान, नाम-जप के साथ ध्यान, साक्षी ध्यान, दृष्टा, प्रेक्षा, विपश्यना ध्यान, गुणातीत, भावातीत ध्यान, नाम ध्यान, नाम जप के साथ,शब्द, ब्रह्म ध्यान और जिनका चित चंचल हो जाता है, अव्यवस्थित हो जाता है, बहुत स्मृतियाँ आती हैं या नींद आ जाती है, मौन होकर के ध्यान करने में तो कपालभाति या अनुलोम-विलोम के साथ ध्यान किया करो सक्रिय ध्यान।
आज मैंने कहा माँ ब्रह्मचारिणी का ध्यान करते हैं, माँ ब्रह्मचारिणी का ध्यान यहीं है। सब कुछ को ब्रह्ममय अनुभव करो, सब कुछ ब्रह्म से ही उत्पन्न हुआ है, ब्रह्म से ही संचालित है, ब्रह्म में ही आश्रय पा रहा है, सब कुछ ब्रह्म ही है।
माता-पिता ब्रह्म होकर के भगवान होकर के जन्म देते हैं, गुरु ब्रह्म है, गुरु ब्रह्मा है, गुरु बनकर ज्ञान देते हैं वो ब्रह्म ही अन्न बनकर के हमें ऊर्जा देता है, शक्ति देता है, सुख देता है, ब्रह्म ही औषध बनकर के यह ब्रह्म दृष्टि, यह भागवत दृष्टि, यह ब्रह्म भाव हमारा अखंड हो जाए इसलिए हम माँ ब्रह्मचारिणी की उपासना करते हैं, ब्रह्म के सिवा और कुछ भी हमें नजर ना आये।
ऐसी भागवत बुद्धि, ऐसा भागवत भाव, ब्रह्म भाव समष्टि के प्रति, सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड ���े प्रति, यह है माँ ब्रह्मचारिणी का ध्यान। फिर भोग दृष्टि नहीं रह जाएगी, फिर भगवान की दृष्टि होगी सारे जगत को देखने की यही है भागवत दर्शन, भगवत अनुभूति जब सारे जगत को ब्रह्म का मुहूर्त स्वरूप मानकर के, भगवान की मुहूर्त अभिव्यक्ति मान के, भगवान का साक्षात विग्रह मान के व्यवहार करेंगे, फिर 24 घंटे का ध्यान, 24 घंटे की समाधि सहज समाधि, सहज मुक्ति मिल जाएगी।
माँ शैलपुत्री का ध्यान - #PatanjaliMeditation - 15-10-2023
आज विशेष रूप से नवरात्रि में माँ शैलपुत्री का ध्यान करे नौ दिनों में माता के 9 स्वरूप ध्यान करने है नौ रूप तो मात्र लाक्षणिक है यह पुरा पिंड और सारा ब्रह्माण्ड उसी माँ भगवती का स्वरूप है नौ दिनों में ऐसा अभ्यास बनाये अपना हर नाम में, हर रूप में, हर स्वरूप में उसी आध्या शक्ति, जगदम्बा, भगवती का दर्शन हो।
यह पूरी प्रकृति माता, यह प्रकृति, यह संस्कृति के स्वर सब भगवतमय है पूरा जीवन ही भगवत मय हो जाए पूरा जीवन ही भगवान की अराधना बन जाए इन नौ दिनों में ऐसे हम साधना करे और माँ दुर्गा के नौ रूपों की अराधना करते हुए मूलाधार से सहस्रार तक।
अष्टचक्रो में, नव द्वारो में, पिंड के, ब्रह्माण्ड के कण-कण में भगवती शक्ति का ह�� वास है प्राणो का और प्राण ब्रह्म का सब कुछ ब्रह्ममय है, भगवतमय है, भगवती मय है ऐसे प्राणो का और प्रणव का आलम्बन लेकर के धीरे धीरे ध्यान को भी बढ़ाना।
पूरे राष्ट्रवासियों को शारदीय नवरात्रि की पतंजलि परिवार और पूरे भारत के ऋषि सत्ता, सनातन धर्म की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं। आज नवरात्रि का प्रथम द���न हैं और नवरात्रि में व्रत-उपवास करते हुए, उपासना करते हुए, शक्ति की अराधना करते हुए, बल की उपासना करते हुए शरीर बल, इन्द्रिय बल, मनोबल, आत्म-बल बढ़ाएं। आज नवरात्र है, तो शैलपुत्री की देवी की, शक्ति की उपासना, मानें जितने भी स्वरूपों में, केवल इस मूर्ति के रूप में ही नहीं, जितने भी स्वरूपों में हमें इस पूरे अस्तित्व में यह जो पूरी प्रकृति है, यह प्रकृति ही शक्ति स्वरूपा है।
#Navratri2023
प्रधानमंत्री जी के आह्वान पर पतंजलि योगपीठ परिवार खोरधा जिला के कार्यकर्ताओं के साथ यूनिट - ४ मार्केट भुवनेश्वर में एक अ��्टूबर १घंटा स्वच्छता के लिए श्रमदान कार्यक्रम में शामिल होने का सौभाग्य मिला।
#SwachhBharat
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आज नेपाली और गोरखा समाज के हज़ारों लोगों के साथ हरितालिका तीज का उत्सव मनाया. पराक्रम और शौर्य की पहचान वाले लोगों का गाना सुनकर, डांस और मस्ती देख कर अच्छा लगा. मेरी शुभकामना है कि नेपाली और गोरखा महिलाएँ भी खूब तरक्की करें . एक हाथ में पूजा की थाली, तो दूसरे में कम्प्यूटर हो.
@yogrishiramdev
आज बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में वरिष्ठ पत्रकार-लेखक और हम सब के आत्मीय श्री @hemantsharma360 जी की षष्ठीपूर्ति के अवसर पर पूज्य श्री @yogrishiramdev जी, श्री @brajeshpathakup जी, श्री @proframgopalya1 जी, श्री @DrKumarVishwas जी एवं अन्य विद्वत और स्नेहीजनों के साथ एक आत्मीय और ओजपूर्ण कार्यक्रम में सहभागी होने का सौभाग्य मिला।
#60KeHemant पुस्तक के लोकार्पण और षष्ठीपूर्ति पर हेमंत शर्मा जी को अनेकों शुभकामनाएं देता हूँ।