इतना तो काडर है दादा आप लोगों का, खड़ा करके मूत देगा तो बुझ जाएगा! सबको बांग्लादेश भगा दिया क्या?
पर याद आया, आप लोग का काडर और नेता सब आग ही मूतता है। ऐसे में तो आग बढ़ जाएगा। विक्टिम मत खेलो।
१०० करोड़ हिंदुओं में से यदि केवल १ % हिंदू भी शस्त्र लेकर मैदान में उतर जाए तो कोई माई का लाल रोक नहीं सकता,अखंड हिंदू राष्ट्र की स्थापना करने में।
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
भाजपा की जीत के बाद, रात में हावड़ा के उदय नारायणपुर में टीएमसी कार्यकर्ताओं ने भाजपा कार्यकर्ता की पीट-पीटकर हत्या कर दी।
किसी की भी सलाह सुनना बंद करो कि बदला मत लो।
बदला सौ गुना ज़्यादा होना चाहिए।
"इसी मोहल्ले मे मेरी पत्नी को 4 घटे नगा खड़ा किया गया "
एक अन्य माँ के बेटे को खत्म कर दिया ,वो अब भीख के मांगकर पेट भरती है
गुनाह था --- BJP को वोट देना
इन्ही सब गरीब लेकिन समर्पित कार्यकर्ताओ की वजह से BJP जीती है
टीएमसी सरकार के दौरान पश्चिम बंगाल के किस पुलिस अधिकारी ने सेना की गाड़ी को रोक कर चालान काटा था |
@AmitShah साहब कृपया उस अधिकारी को दिल्ली बुलाएं और पूछें किसके कहने पर हमारे देश के सम्मान को बेइज्जत किया था | 😡😡
5 लाख घूस मांगी थी लेकिन मिली सिर्फ 1 लाख ही।
नाम : बी.श्रीलता
पद : GHMC जूनियर असिस्टेंट(सर्कल-37,खैरताबाद ज़ोन)
घूस लेने की वजह: घर के कंस्ट्रक्शन की परमिशन देना।
एक महिला के सामने 1 लाख बिखरा के फ़ोटो लेना और उसको सोशल मीडिया पे वायरल करना कहाँ तक अच्छा है?
ACB से अनुरोध है कि मैडम के गुनहगार पाये पे पूरे हैदराबाद के हर सरकारी दफ़्तर में इनकी फ़ोटो होनी चाहिए जिससे आगे से घूस लेते समय हर इंसान की रूह काँपे।
41 वर्षीय जहांगीर खान पश्चिम बंगाल में 'रंगबाजी' का दूसरा नाम था!
ममता बनर्जी की सत्ता में मोहम्मद जहांगीर बंगाल में आतंक फैलाता था।
अब बीजेपी शासन में जहांगीर खान के लिए बहुत मुश्किल होने वाली है, इसकी एक एक फ़ाइल खुलने वाली।
इसके आतंक का काला साम्राज्य अब बहुत जल्द ध्वस्त होने वाला है!
ममता बनर्जी और टीएमसी को ईशा राय जी जैसी हजारों अबलाओं का श्राप लगा है. 1 साल पहले टीएमसी गुंडों ने इनके पति को मार दिया क्योंकि वो बीजेपी के कार्यकर्ता थे. पति के मौत के बाद बिना किसी स्वार्थ के वो ये काम करती रहीं. इन वीरांगनाओं के संघर्ष को नमन है.
@narendramodi@AmitShah@SuvenduWB बीजेपी को ऐसे लोगों को कभी नहीं भूलना चाहिए..
हम बंगाल में रहते हैं... हम वहाँ क़ी दुर्दशा जानते हैं... कि भगवान की बड़ी कृपा हुई... लेकिन अब जो - जो होगा, उसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी।
:- प्रख्यात कथा वाचक पूज्य श्री राजन जी महाराज
इसे कहते हैं सत्ता की ताकत!
जो मंदिर कोर्ट के आदेश के बाद भी बंद रखा गया था, ये कहा गया था कि मंदिर खुला तो खून की नदियां बहेंगी,
आज बंगाल में भाजपा सरकार बनने के बाद गर्व से उस मंदिर को वर्षों बाद खोला गया है।
लोग अपनी मां दुर्गा को देखने वर्षों बाद पहुंच रहे हैं।
"मैं तब से भाजपा में हूं जब लोग हमपर हंसा करते थे।
मैंने कभी नहीं सोचा था कि अपनी आंखों से बंगाल में भाजपा की सरकार बनते देख पाऊंगा।"
: तपन मल्लिक, भाजपा कार्यकर्ता
खेला ज़बर होबे 🔥
ममता के पिल्ले कोलकाता DCP
शांतनु के खिलाफ ED का लुक आउट नोटिस..
ED ने इस शांतनु को पहले भी 5 बार बुलाया था
लेकिन हर बार ममता इसे बचा लेती थी
अब बता बकरे किसकी गोद में जाकर छुपेगा ?
उसका नाम रुचिका गिरहोत्रा था।
वह 14 साल की थी। हरियाणा के पंचकूला की एक टेनिस खिलाड़ी।
12 अगस्त 1990 को वह S.P.S. राठौड़ से मिलने उनके ऑफिस गई। वह हरियाणा लॉन टेनिस एसोसिएशन के प्रमुख और आईजीपी थे। उन्होंने उसके पिता से वादा किया था कि वह उसे खास कोचिंग दिलवाएंगे।
जैसे ही उसकी दोस्त कमरे से बाहर गई, उसने रुचिका के साथ छेड़छाड़ की।
तीन दिन बाद परिवार ने शिकायत दर्ज कराई।
इसके बाद प्रताड़ना शुरू हुई।
राठौड़ ने उसे स्कूल से निकलवा दिया। उसके पिता को बैंक की नौकरी से सस्पेंड करवा दिया गया। उसके भाई आशु पर छह झूठे केस दर्ज किए गए। परिवार का घर बिकवा दिया गया।
परिवार को शिमला के बाहरी इलाके में जाकर मिट्टी भराई का काम करके गुज़ारा करना पड़ा।
28 दिसंबर 1993 को, जब आशु को हथकड़ी लगाकर मोहल्ले में घुमाया गया, कुछ ही दिनों बाद रुचिका ने ज़हर खा लिया।
अगले दिन उसकी मौत हो गई। वह सिर्फ 17 साल की थी।
उसी रात राठौड़ ने पार्टी की।
उसने रुचिका के पिता को उसकी लाश देने से मना कर दिया, जब तक कि वे खाली कागज़ों पर साइन न करें। बाद में उन्हीं कागज़ों से झूठी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार की गई।
पुलिस जांच में FIR की सिफारिश हुई, फिर भी राठौड़ को प्रमोशन मिलते रहे।
1999 में वह हरियाणा का डीजीपी बन गया।
यह केस 19 साल चला।
40 से ज्यादा स्थगन और 400 से ज्यादा सुनवाई।
दिसंबर 2009 में उसे छेड़छाड़ का दोषी ठहराया गया।
सिर्फ 6 महीने की सजा और ₹1000 का जुर्माना।
बाद में सजा 18 महीने की हुई।
2016 में सुप्रीम कोर्ट ने दोष कायम रखा, लेकिन सजा पहले ही काटी हुई मानकर उसे छोड़ दिया गया।
जिस जज ने आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप जोड़ने की कोशिश की, उसे समय से पहले रिटायर कर दिया गया।
जिस जज ने ये आरोप खारिज किए, वह रुचिका के परिवार का पड़ोसी था और संपत्ति विवाद में शामिल था।
बाद में S.P.S. राठौड़ को पंचकूला के गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में VIP गेस्ट के रूप में बुलाया गया।
रुचिका 14 साल की थी जब उसके साथ छेड़छाड़ हुई।
17 साल की थी जब उसने दम तोड़ा।
ऐसी कहानियां जिन्हें भारत को याद रखना चाहिए।