सिंघाडे बेच रही अम्मा को प्रति किलो 2-4 रुपए बचते हैं ! मैंने पूछा “लोग ख़रीदने के बहाने इतने सिंघाड़े खा जाते हैं,नुक़सान कौन भरता है अम्मा?” बोलीं “बालकों के खाने-चखने से तो आमद बढ़ती है बेटा, कमी-बेसी भगवान के करने से होवै है !”अम्मा कम में संतुष्ट हैं.कारपोरेट नहीं हैं ना❤️🙏
गणितज्ञ डॉ. वशिष्ठ नारायण सिंह जी के निधन के समाचार से अत्यंत दुख हुआ। उनके जाने से देश ने ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में अपनी एक विलक्षण प्रतिभा को खो दिया है। विनम्र श्रद्धांजलि!