Veterinarian, शिराओं में अध्यात्म और धमनियों में विज्ञान,Afficianado of retro Hindi, Bibliophile,अतिदानाद् बलिर्बद्धो ह्यति सर्वत्र वर्जयेत्,(रिट्वीट ≠सहमत)
अपना बहुमूल्य समय देने के लिए धन्यवाद माननीय नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव जी। वेटरनरी छात्रों का इंटर्नशिप भत्ता बढ़ाने के लिए आपकी बुलंद आवाज़ सदन के पटल पर गूंजेगी,इस आशा से पूरा पशु चिकित्सक समाज आपकी तरफ देख रहा है। @yadavakhilesh@Y_Sangram@PaliwalMayankS@samajwadiparty
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव से आज सरकार बल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ, पंडित दीन दयाल ..
https://t.co/NOVRQjZkfm
इस तरह की दो अतियां बनाना अनुचित है। आरक्षण खैरात भी नहीं है और संवैधानिक अधिकार भी नहीं है। आरक्षण दलितों और वंचितों को आगे ले आने के लिए बनाई गई एक सकारात्मक व्यवस्था है लेकिन आरक्षण का लाभ आठ बार के सांसद और हर सरकार में मंत्री रहे रामविलास पासवान के बेटे को भी चाहिए तो यह उसका दुरुपयोग है।
आरक्षण तीन बार मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव के बेटे और बहू को भी चाहिए तो यह अनुचित है। आप समर्थ हो गए। आपने जनाधार बनाया है। लोकप्रिय हैं तो सुरक्षित सीटें किसी शोषित वंचित के लिए छोड़िये। स्वयं आगे बढ़कर नेतृत्व करिए। मुकाबला करिए।
इसी तरह हर वह व्यक्ति जो सामर्थ्यवान है, जो बराबरी से आगे जा चुका है, जो नीति नियंता बन गया है, वह भी आरक्षण की बैसाखी से चलेगा? यह आरक्षण की मूल भावना के विपरीत है।
युवा बिहारी चिराग पासवान काहे का युवा है यदि वह इस तरह की मूढ़ता भरी बातें करे। वह कभी समर्थ नहीं हो सकता। नहीं हो पाएगा।
बहुत दिन नहीं गुजरे जब चिराग पासवान को बिहार में एनडीए का भविष्य माना जाता था।
अनेक लोगों की राय थी कि नए वोटरों से जुड़ने के लिए भाजपा को लोजपा का विलय करवा के चिराग को प्रोजेक्ट करना चाहिए। दुर्भाग्य से उनसे आंशिक सहमति रखने वालों में मैं भी था।
पर इधर आरक्षण के मुद्दे पर चिराग ने जो स्टैंड दिखाया है, उससे यह तो स्प्ष्ट है कि उनकी दृष्टि कितनी संकुचित हो चली है।
आरक्षण की समीक्षा सवर्णों का कोई हथकंडा नहीं बल्कि दलितों के अंदर ही सच्चे वंचितों को हक़ दिलाने का माध्यम है। पर स्वयं समृद्ध पासवान जाति से आने वाले चिराग इसपर भला क्यों हामी भरने लगें?
#IndiaMatters with @ShivAroor
"Hum laaye hai toofaan se kashti nikaal ke, is desh ko rakhna mere bacchon sambhaal ke": @YashikaHTyagi1's message to Gen-Z
🇮🇳 Minamarg Check Post Incident | Ladakh Sector
A video from the Minamarg (Minimarg) check post has circulated showing a tourist arguing with security personnel over a temporary road restriction.
The Indian Army, in coordination with local police and civil administration, implements such measures as a routine and essential part of anti-terrorism and security operations in this highly sensitive high-altitude border region near the LoC.
Road closures, cordons, and regulated movement are standard when:
• Intelligence or operational requirements demand a search/cordon to neutralise potential threats
• Weather, landslides, or convoy movements require safety clearances
• The safety of residents, tourists, and troops must be prioritised
These are not arbitrary or “anti-tourist.” They exist precisely so that civilians, including tourists can travel safely in an area that has historically faced infiltration and terror risks.
Compromising a security protocol for individual convenience could endanger dozens of lives.
To the individual in the video and similar voices:
Being “Gen Z” (or any generation) is not a qualification, a badge of entitlement, or a licence to disregard security protocols. National security does not pause for slogans, tax receipts, or generational self-identification.
Comparing legitimate operational restrictions to “locking Kashmiris” is both factually misleading and disrespectful to the forces who protect every citizen, Kashmiri, tourist, or otherwise in this challenging terrain.
Threatening Parliament while creating a public confrontation at a sensitive post does not strengthen democracy; it risks operational security.
We urge all visitors and residents:
Support these measures. They are conducted for your safety and the nation’s security. Patience and cooperation save lives.
The Army and police work hand-in-hand daily so that tourism and normal life can continue in J&K and Ladakh.
Respect the uniform. Respect the protocol. Respect the reality of the frontier.
#IndianArmy #NationFirst #SecurityFirst #JandK #Ladakh #WeCare
@adgpi@lg_ladakh@OpIndia_com@DGP_Ladakh@KargilPolice@LehPolice@trafficpoliceLA@JmuKmrPolice@SrinagarPolice@DIPR_Leh@Incognito_qfs@BundelKhandee@theskindoctor13@SaffronChargers@RealAnujX
तारीख -15 अगस्त
स्थान- कांग्रेस मुख्यालय
किरदार- नाम के कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जी, सुपर अध्यक्ष राहुल गांधी जी, सुपर से भी ऊपर अध्यक्ष सोनिया गांधी जी
अपराध- वंदे मातरम् का अपमान, दलित राष्ट्रीय अध्यक्ष का अपमान, 140 करोड़ भारतीयों का अपमान
कल सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने सिर्फ वंदे मातरम् का ही अपमान नहीं किया, बल्कि अपनी ही पार्टी के एक दलित राष्ट्रीय अध्यक्ष को भी जमकर अपमानित किया। जब खड़गे जी वहाँ मौजूद थे तो हर तरह के निर्देश देने के अधिकारी वो ही थे…मगर वंदे मातरम् गायन के बीच में सोनिया जी ने राष्ट्रीय गीत को रोकने का निर्देश देकर ख़ुद को फिर एक बार राष्ट्रीय अध्यक्ष से ऊपर साबित किया और बताया कि कांग्रेस में कुर्सी पर चाहे कोई भी पीएम हो या प्रेसिडेंट हो, आदेश और निर्देश देने का हक तो सिर्फ़ गांधी परिवार को ही है। कल के सारे वीडियो में साफ़ देखा जा रहा है कि वंदे मातरम रोकने के लिए एक तरफ़ से राहुल जी और एक तरफ़ से सोनिया जी उग्र हो रहे हैं और बीच में खड़गे जी ख़ुद को असहज और असहाय पा रहे हैं। जिस प्रताड़ना से स्वर्गीय मनमोहन जी गुजरे, आज वही हाल गांधी परिवार ने खड़गे जी का कर रखा है।
गांधी परिवार आख़िर ख़ुद को राष्ट्र, संविधान, व्यवस्था से ऊपर क्यों मानता है? क्या देश इनके कल के कृत्य के लिए इन्हें माफ़ करेगा?
संसद के भीतर के प्रदर्शनों के नारों में और जंतर-मंतर के GenZ प्रदर्शनों के नारों में अंतर होना चाहिए था.. लेकिन अब इसके बाद और कुछ कहने को बचा नहीं है.
क्या देश के विपक्ष को सरकार को घेरने के लिए अब इस स्तर तक उतरना पड़ जाएगा? आप किसको बंदर बुला रहे हैं? देश के प्रधानमंत्री को?
जबकि असल में बंदर तो इस देश की जनता बन चुकी है जिसको सियासत के मदारी अपने मन मुताबिक नचा रहे हैं. सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक ने शायद संसद को सीरियसली लेना बंद कर दिया है.
कौन बताएगा इस देश को कि संसद का मानसून सत्र क्यों नहीं चल पाया? कौन देगा इस सवाल का जवाब कि जब इस सत्र जब लोकसभा कुल 114 घंटे चलना चाहिए था तो फिर ये महज 19 घंटे ही क्यों चल पाया? क्यों राज्यसभा की कार्यवाही भी 114 घंटों के बनिस्पत महज 38 घंटे ही चल सकी?
इस मानसून सत्र दोनों सदनों को मिलाकर सीधे कामकाजी घंटे बर्बाद होने से देश के करदाताओं का लगभग ₹200 करोड़ से ₹250 करोड़ का प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष वित्तीय नुकसान हुआ है. ये नुकसान का कीर्तिमान किसके माथे मढ़ा जाएगा?
#Loksabha #MonsoonSession2026 #ParliamentSession
फिर से समझा रहा हूं.
पत्रकारों को स्टोरी ख़ुद नहीं बनना चाहिए, स्टोरी को रिपोर्ट करना चाहिए.
स्टोरी में उछलकर फर्जी इमोशन डालने की कोशिश मत करिए, लोगों की बात सुनिए.
स्टोरी में लोगों की आवाज़ दर्ज करिए, ज्ञान बांटने या इमोशन डालने के लिए कोई और प्लेटफॉर्म खोजिए.
हर जगह के प्रोटोकॉल और डेकोरम को फॉलो करिए.
अपनी स्टोरी को अनचाहे भी ऐसा न होने दीजिए कि लोग आप पर कोई ठप्पा लगा सकें.
उछलने में नाम बहुत तेज़ी से ख़राब होता है.
Prashant Kishor exposed one of the biggest flaws in Indian politics.
Political space in India is slowly disappearing for ordinary people and families :
> 1952 Lok Sabha: 26% of MPs were below 40.
> Today: Only 7.6% of MPs are below 40.
> But here’s the bigger problem: 67% of those 7.6% young MPs belong to political dynasties.
> In 1952 and 1957 and 1962 MPs above 70 were almost negligible.
> Today, they are around 17%.
> Many stay in politics until they are settled, and then make sure the political space is passed on to a family member.
Indian politics should be about public service, not a family business.
अब जब @PrashantKishor जीत की तरफ बढ़ रहे हैं. उनके एक बयान का ज़िक्र ज़रूरी है. प्रचार के दौरान उन्होंने कहा था
"ये सिर्फ़ एक सीट का चुनाव नहीं है,सम्राट चौधरी के खिलाफ भी जनमत टेस्ट है। क्योंकि नीतीश कुमार के नाम पर वोट लेकर BJP ने अपना आदमी सेट किया है। यहां अगर BJP हारी तो इसकी गूंज दिल्ली तक सुनाई देगी।'"
जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध
दिनकर की ये पंक्तियां सर्वाधिक दुरुपयोग के कारण सबको रट गई हैं। हर आदमी इसे तीर बनाके ताने देने के लिए तानता है, जबकि वह हक़ीकत भली भांति जानता है।
समय क्या लिखेगा किसी का अपराध? समय पर स्वयं आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं लिखने के लिए।
>अभिजीत दीपके गायब है
>आशुतोष रांका गायब है
>सौरव दास गायब है
>नेहा बोरा गायब है
>राहुल गांधी गायब है
>मोहम्मद जुबैर गायब है
>जुनैद गायब है
>वामपंथी गायब है
>हेली लंग गायब है
>ध्रुव राठी गायब है
>योगेंद्र यादव गायब है
>प्रकाश राज गायब है
>सायमा गायब है
>अरफा गायब है
>शबाना आजमी गायब है
> स्विगी ऑर्डर गायब है
क्योंकि वहां एजेंडा फिट नहीं बैठ रहा है।
Neha Bora's father has not talked to her for 10 years and she is saying it with a smile on her face like it is some sort of achievement. What an idiot!
Neha Bora is a young commie. With time, she will either realise her mistake like Piyush Mishra or she will end up in jail or 6 feet under.
This video of Piyush Mishra should be shown to every student where he explains how communists ruined his life by brainwashing him into believing that having family is a burden and earning money is bad.
बड़े एंकर्स का बायकॉट कर और मीडिया को अनाप-शनाप उपाधियाँ देकर प्रोटेस्ट में आए बच्चों से रिपोर्टर्स पिटवा दिए। आज उन्हीं मीडिया चैनलों पर बड़े एंकर्स को इंटरव्यू दे रहे हैं। ये देख कर खुशी होती है कि हर पीढ़ी प्रतिभाशाली युवा राजनीतिक युवा देने की क्षमता रखता है।