तमाम मुस्कुराते चेहरों के पीछे खामोश उदासी है, भीड़ में चलते हुए भी नितांत अकेलापन है, अनगिनत संघर्षों का उचित मूल्य नहीं है, सम्बन्धियों के मध्य जासूसी है, कष्ट में सहारा देने वाले कन्धों का अभाव है और साथ देने वाले बहुत कम हैं।
वर्तमान समाज की समस्या है!
प्रदीप कुमार ओझा
Today World is like a global village and have faces many upsetness but some are being created by him which belongs to nature.....
Global warming,climate change,reducing glaciers and hunger are increasing day by day..
So we have work on good Environment.
#WorldEnvironmentDay
स्क्रीन को स्क्राॅल करती ऊंगलियाँ, काॅल को इग्नाॅर करते लोग, वर्चुअल स्टेट्स से वास्तविक स्थिति का अनुमान लगाते व्यक्ति, संदेश से संदर्भित होते सम्बन्ध, आभासी दुनिया में मित्रों की कतार परन्तु वास्तविकता में हम सभी अकेले हैं!
---प्रदीप कुमार ओझा
*उदन्त मार्त्तण्ड* हिन्दी पत्रकारिता का 'द्वि-शताब्दी' समय!
30 मई 1826
हिज़ मैजेस्टी की सरकार जब भारत में भाषाई मजबूती के लिए फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना की तो इसी कलकत्ता से पण्ड़ित जुगल किशोर शुक्ला ने उदन्त मार्तंड नाम से हिन्दी पत्रकारिता का शंखनाद किया।
अभिनव भारत के संस्थापक, द इंडियन वार आफ इंडिपेंडेंस के लेखक, इंग्लैंड में फ्री इंडिया सोसाइटी के संगठनकर्ता, प्रखर राष्ट्रवादी, मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए संपूर्ण जीवन संघर्षरत, माँ भारती के अमर सपूत वीर दामोदर सावरकर जी की जयंती पर सादर प्रणाम व कोटि-कोटि नमन।🌹🙏