Our founder who created the Jhooth ki goonj website has been continuously threatened by Rahul Gandhi’s PR team.
She is just 20 years old. Let this tweet spread and tell everyone what kind of person Rahul Gandhi is.
मेरे ऊपर SC/ST एक्ट में FIR पर कुछ बातें सवर्ण समाज से
कोई मेरी माँ या बहन पर सीधे बलात्कारी मानसिकता के साथ यह कहे कि उसका विवाह मैं चंद्रशेखर के साथ करा दूँ, और मैं चुप रह जाऊँ तो आप बताइए कि मैं कैसा पुत्र या भाई हूँ?
इतने पर भी चंद्रशेखर को ले कर मैंने कोई जातिसूचक शब्द नहीं बोला, जो उक्त वीडियो में है। जब स्टेज से ब्राह्मणों की बेटियों को खींचने की बातें होती हैं और किसी SC नेता का चेला सोच-समझ कर उकसाने के लिए ऐसी बात करेगा, तो मैं चुप कैसे रहूँगा?
आज व्यक्ति अपने मौलिक अधिकारों को समझे या न समझे, वह यह अवश्य जानता है कि SC/ST एक्ट क्या है। तो मैं जब बोलता हूँ तो मुझे अपनी सीमाएँ (चाहे वह कितनी ही अनुचित क्यों न हों) पता हैं कि क्या बोलना है, क्या नहीं।
मैं जानता हूँ कि दिल्ली पुलिस के नॉर्थ अवेन्यू स्टेशन में आजाद समाज पार्टी वालों ने कितना दवाब दे कर रात के बारह बजे यह FIR लिखवाया है जो कोर्ट में दो मिनट नहीं टिकेगा। एक भी धारा ऐसी नहीं है जो होल्ड करेगी।
मैं सैनिक स्कूल का छात्र हूँ और इतनी रैगिंग झेल चुका हूँ कि मेरा मनोबल तोड़ने के लिए दिल्ली पुलिस को कस्टडी में मेरी हत्या करनी पड़ेगी, दो-चार डंडों से मेरा मनोबल नहीं टूटने वाला। और यदि मैं जीवित बच गया तो इसी स्थिति में जंतर मंतर जाऊँगा और अपने समाज से कहूँगा कि बताओ, तुम्हारी बहन और माँ को ले कर कोई ऐसी टिप्पणी करे तो क्या करोगे?
यदि ऐसा कमेंट फिर मेरे वीडियो पर आया तो मैं पुनः उसी तरीके से उत्तर दूँगा जो मैंने दिया। कानून जब तक है, संशोधन नहीं होता, मैं उसका सम्मान करूँगा और दिल्ली पुलिस के साथ पूर्ण सहयोग करूँगा। 92% ऐसे केस केवल प्रताड़ित करने के लिए होते हैं।
अंत में, सवर्ण समाज से यह पूछना चाहता हूँ कि क्या इस तरह की टिप्पणी पर मुझे सह लेनी चाहिए थी क्योंकि किसी पार्टी के लोग नाराज हो जाएँगे? क्या ब्राह्मणों की माँ और बहनें इन रेप मैंटिलिटी से संचालित गुंडों के शाब्दिक बलात्कार के लिए जन्म लेती हैं?
समर्थन जिस तरह दे रहे है दुनिया देख रही है ।
कम से कम झूठ मत फैलाव यार, अपने काम से मतलब रखो फर्जी बाते न करो।
" All demands have been meet"
तुम्हे इल्म भी है कि हमारी मांगे क्या है पूरी जानकारी इक्कठा करिए फिर बात करियेगा। https://t.co/gNHqdvQGNV
हमार अकेले बेटवा रहे, हम विधवा हैन, हमरे करेजा का पैसा के लालच दे के मार डालिन…… मृतक की रोती-बिलखती माँ और परिजन
निहाल शुक्ला और रजत शुक्ला की सेप्टिक टैंक में उतरने के कारण मौत हो गई। ग़रीबी देखिए इस परिवार की। रहने के लिए टूटा हुआ कच्चा घर।
मामला UP के प्रयागराज का। ये परिवार शोषक है? या फिर पीड़ित, वंचित, शोषित।
ब्राह्मणों ने पानी नहीं पीने दिया, उसका कोई सबूत तो दो, पिछले 400 से 500 सालों की बात करे तो इस देश में मुगलों और ईसाइयों का शासन था तो ब्राह्मणों ने कहा से तुम्हारा शोषण कर लिया, अजीत भारती की इस बात जवाब है नीलाण्डो...
डिजिटल मीडिया पत्रकार झारखंड क्यूँ नहीं जा रहे?
•वहाँ रीच नहीं मिलेगी
•PR वाला पैसा नहीं आना
•वहाँ के बच्चे गालियां नहीं दे रहे
•वहाँ के बच्चे राष्ट्रगान गा रहे
•वहाँ के बच्चे वास्ते गाना हुईयां नहीं कर रहे
•वहाँ के बच्चे बैगी जीन्स नहीं पहनते
•वहां के बच्चे गरीब और पिछड़े बैकग्राउंड के हैं तो क्लासी वीडियोज नहीं आयेंगे
बड़े सिलेब्रिटीज और स्टैंडअप कॉमेडियन झारखंड की बात क्यूँ नहीं कर रहे?
•रील और स्टोरी लगाने का पैसा बच्चे नहीं दे पायेंगे
•कंफर्म ही नहीं हैं कि झारखंड भारत का हिस्सा है
•फर्क़ नहीं पड़ता
एक आवाहन मैं कॉलेज और यूनिवर्सिटीज़ के हमारे प्रोफेसर्स से भी करना चाहता हूँ...
आप भी कोर्स की पढ़ाई के साथ-साथ स्टूडेंट्स के साथ ड्रग्स के खतरों पर बात करें।
नशे के खिलाफ अपने कैम्पस में एक मूवमेंट चलाएं।
आपके प्रयास बड़े परिणाम ला सकते हैं: PM @narendramodi
बिहार के एक गांव में सोनू यादव ने मोनू जाटव को अपने बोतल से पानी नहीं पीने दिया!
इसलिए दिल्ली में अभय शर्मा की IIT की सीट, विकास जाटव को कम मार्क्स में दे दी गयी जिसके मातापिता दोनों IAS हैं!
ये है भारत में होने वाला सामाजिक न्याय - in a nutshell! 😂
Story Credit: @priti134
बहुत लोगों को आरक्षण हटाओ नाम से समस्या है। इसे अव्यावहारिक और मूर्खतापूर्ण भी कहा गया। लेकिन किसी भी आंदोलन की शुरुआत बड़े लक्ष्य से होती है। हमारा उद्देश्य तत्काल आरक्षण समाप्त करना नहीं, बल्कि वर्तमान स्वरूप की आरक्षण व्यवस्था पर राष्ट्रीय चर्चा शुरू करना है।
मैं स्वयं कई बार कह चुका हूँ कि मौजूदा परिस्थितियों में आरक्षण हटाना संभव नहीं है। फिर भी इस आंदोलन का समर्थन इसलिए है कि जब तक समाज इस विषय पर खुलकर बात नहीं करेगा, तब तक कोई राजनीतिक दल भी इसे मुद्दा नहीं बनाएगा। यदि लाखों लोग अपने परिवार और समाज में इस पर चर्चा शुरू करें, तो संसद और विधानसभाओं तक भी यह विषय पहुँच सकता है।
पहला कदम यही है कि आँकड़ों और तथ्यों पर चर्चा हो। क्या आरक्षण का सबसे बड़ा लाभ कुछ ही प्रभावशाली जातियों तक सीमित रह गया है? पिछले 70 वर्षों में वास्तविक लाभ किसे मिला? जिन समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति बदल चुकी है, उनकी समीक्षा क्यों नहीं होती? इन प्रश्नों पर बात होना आवश्यक है।
यदि “आरक्षण हटाओ” शब्द से आपत्ति है, तो इसे “Reservation Reforms” या “वर्तमान स्वरूप की आरक्षण व्यवस्था में सुधार” भी कहा जा सकता है। हमारा उद्देश्य व्यवस्था की समीक्षा और सुधार है।
इसी तरह जाति हटाओ का अर्थ यह नहीं कि जाति एक दिन में समाप्त हो जाएगी। लेकिन जातिवाद पर चर्चा तो होनी ही चाहिए। अपनी पहचान पर गर्व अलग बात है, लेकिन उसी के आधार पर दूसरों को हीन समझना जातिवाद है।
EWS को पूर्ण समाधान नहीं माना जा सकता। यदि आर्थिक रूप से कमजोर छात्र को पढ़ाई के लिए कर्ज लेना पड़े और वर्षों तक उसे चुकाना पड़े, तो व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हमारा मत है कि प्राथमिक शिक्षा तक वंचित वर्गों को पूरा सहयोग मिले। लेकिन उच्च शिक्षा और प्रतिस्पर्धी चयन की व्यवस्था में वर्तमान आरक्षण मॉडल की समीक्षा होनी चाहिए। यदि सहायता दी जाए, तो उसका आधार वास्तविक आर्थिक और सामाजिक वंचना हो, न कि केवल जाति।
जिसके पास मर्सिडीज़ है बस उसके नाम के आगे दलित लग गया तो वो गरीब है
मेरे पिता किसान है - बस मै सवर्ण समाज से हु इसलिए मैं अमीर हु
आरक्षण के खिलाफ मोर्चा खुल चुका है - हर्ष दुबे के द्वारा अब देखते हैं सवर्ण समाज कितनी अपने बच्चों की चिंता करता है
40% हमारी आबादी देश के सबसे बड़े टैक्स पेयर्स हमारे लोग और हम ही गुलाम हैं
गुलाम ही हैं - 50% सीटो पर हम बैठ ही नहीं सकते हमे अधिकार ही नहीं है ये गुलामी नहीं तो क्या है ?
#EndReservation
जब अभिनव पांडे की रिपोर्टिंग की खूब तारीफ़ हो रही हो, तो इस लड़की को भी उतनी ही सराहना मिलनी चाहिए। दोनों ही सच बोल रहे हैं।
ये ऋतिका चंदोला हैं। @RitikaChandola
20 जुलाई को इन्होंने कुछ छात्रों से सीधा सवाल पूछ लिया था — मंच से इक्वलिटी की बात तो खूब हो रही है, फिर रिजर्वेशन पर चुप्पी क्यों? नतीजा? बच्चों ने पहले ‘गोदी मीडिया’ का ठप्पा लगा दिया, फिर धक्का-मुक्की शुरू कर दी।
ये हठी लड़की रुकी नहीं। तो मंच से ऐलान करवा दिया गया — जहाँ दिखे, लोगों को सचेत कर दो, इससे बात ही मत करना।
आज फिर पहुँचीं। मास्क और चश्मा लगाए। पता चला सुबह अच्छी चाय मिलती है, ब्रेड-कुल्चा-टोस्ट कभी भी, बिस्किट का पैकेट और पानी की बोतल भी हाथ में थाम ली।
जिनसे बात की, उनमें ये बातें याद रखने लायक रहीं:
1. बक्सर का एक लड़का वेज बिरयानी खा रहा था। पूछा — कैसी है? बोला, “बहुत बढ़िया। यहाँ वेज वाली देते हैं ताकि सब खा सकें।” ऋतिका ने बताया आगे नॉन-वेज भी है। जवाब मिला — “वो मंच वालों के लिए है, उधर भीड़ बहुत है।” पढ़ाई? “रेलवे।” रेलवे में क्या? “बस रेलवे के स्टूडेंट हैं। बात खत्म।”
2. एक और लड़के से पूछा — जब छात्रों ने बैरिकेड तोड़े और पुलिस ने लाठी चलाई तो कैसा लगा? बोला, “बहुत बुरा लगा, ऐसा नहीं होना चाहिए था। लेकिन बच्चों का सब्र जवाब दे गया।” फिर पूछा नेपाल बनाने की बात चल रही है, क्या वही हाल होगा? दृढ़ जवाब “नहीं। हम नहीं बनने देंगे। जो चाहे कहे, नेपाल नहीं बनेगा।”
3. एक लड़की, जो परीक्षा लीक के खिलाफ थी। पूछा मंच पर बाकी सब चर्चा हो रही है, रिजर्वेशन पर बोलने क्यों नहीं दिया जा रहा? जवाब “मैं खुद जनरल से हूँ। चाहती हूँ कि कम से कम बात तो हो। 27% तो पहले से रिजर्व है, लगभग एक तिहाई मौका खत्म। आबादी भी इतनी है। लेकिन लगता है पहले एक मुद्दा सुलझेगा, फिर शायद दूसरे पर भी बात होगी।”
बीते दो दिन में कई पत्रकारों को ‘गोदी मीडिया’ कहकर पीटा गया, घसीटा गया, धमकाया गया, अपमानित किया गया। ऋतिका चाहतीं तो न्यूज़ रूम से किसी और को भेज सकती थीं या सवालों का रुख बदल सकती थीं। उन्होंने आसान रास्ता नहीं चुना।
लहरों के साथ तैरना आसान है। लेकिन लहरों के खिलाफ, इतनी भीड़ में, जहाँ एक नापसंद सवाल पर मॉब-लिंचिंग का खतरा मज़ाक बन सकता था वहाँ ऋतिका ने न अपना सवाल बदला, न अपना अंदाज़।
अपनी रिपोर्ट के आखिर में यही कहा प्रदर्शन ज़रूरी है, बच्चे अच्छे और सच्चे हैं, बस लीडरशिप में थोड़ी कमी है।
ऐसी हिम्मत को 🫡
Just now in the presence of Union Ministers Sh. JP Nadda, Dr. Jitendra Singh and the senior leaders of Apex Body of Leh Ladakh I finally broke my fast after 26 days. Earlier 65 members of parliament from different political parties had visited or signed letters urging me to break the fast. This was done after long negotiations on various conditions and in view of possible violence in the country. I will explain the conditions in detail in a separate video very soon. Meanwhile I urge you all to stay very vigillant about not allowing violence of any kind anywhere.
7 years back.
I scored 510 and my friend scored 388 in NEET.
I didnt get admission but my Friend who scored 388 got admission into MBBS.
Today he is writing on Instagram "Education System" is Unfair.
तुमसे बड़ा लोकतंत्र का हत्यारा कौन होगा? तुम्हारे बोए जहर से तैयार हुई भीड़ ने तुम्हारे साथ काम किए संवाददाताओं को भी नहीं बख्शा। नाम इसलिए नहीं लिख रहा कि, उसकी पीड़ा बताना है, उसे पीड़ित नहीं दिखाना। असली गोदी मीडिया तुम्हारे जैसे लोग हैं जो सारी जिंदगी गोदी में ही बैठे रहे और गोदी से उतार दिए जाने पर रोने लगे। जरा सा भी शर्म आ रही हो तो अलग-अलग चैनलों के उन रिपोर्टरों से बात करो जिनके साथ भीड़ ने गंदा व्यवहार किया है। शर्म आए तो उनसे माफी मांगो और खुद को पत्रकार कहना बंद कर दो।