श्राद्ध करने से फायदा ये है कि जब मरने वाले मां-बाप का श्राद्ध करते हैं , तो जीते जी मां-बाप का आदर करने की भी प्रेरणा मिलती है। ऐसा नहीं कि जीते जी दंगम दंगा और मर जाए तो पहुंचाओ गंगा। औरंगजेब के बाप ने बहुत बढ़िया बात कही शाहजहां ने। औरंगजेब अपने बाप को जेल में डालकर गद्दी पर बैठ गया था। और शाहजहां को पीने तक के पानी की मटकी भी ठीक से नहीं दी। “अरे बूढ़ा पीता रहेगा उसमें टूटी फूटी मटकी में”। कई बार उसने संदेशा भेजा कि और नहीं तो केवल एक मटकी तो भिजवा दे मेरा बेटा है तू, ठंडा पानी तो पी सकूँ, लेकिन नौकरों ने कहा कि जहांपनाह का हुकुम नहीं है आपको मटकी मिले। तब शाहजहां ने चिट्ठी लिखी कि धन भागी हैं वे हिंदू कि जीते जी बाप की तो सेवा करते हैं, मरने के बाद भी अपने बापों को, दादाओं को खीर खिलाते हैं और तू जिंदे बाप को पानी की मटकी भी नहीं भेजता है कमबख्त ! जय राम जी बोलना पड़ेगा। हिंदू धर्म हित की प्रधानता से चलता है। आने वाले पुत्र और पुत्रियों का भी हित हो और जाने वाले पिता, माता, दादा, परदादा का भी हित हो और अमावस्या के दिन भूले भटके जो प्राणी हैं जिनका कोई श्राद्ध नहीं करता है उनके लिए भी थोड़े तर्पण या दो कण अनाज के डाल दिए जाते हैं तो उनको भी तृप्ति मिले ऐसी भावना होती है।
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अब आप समझना हिंदू धर्म की महानता। ये हमारा स्थूल शरीर है, 27 तत्वों का होता है । जब ये स्थूल शरीर मर जाता है तो सूक्ष्म शरीर रह जाता है 17 तत्वों का। उसमें पृथ्वी तत्व और जल तत्व नहीं होता बाकी वायु, तेज और आकाश तत्व होता है। उसको बोलते हैं प्रेतात्मा। मृतक हुआ और प्रेत कर्म करो। उन्होंने जो देखा है, खाया है, भोगा है। स्थूल शरीर उनके पास नहीं है लेकिन ख्वाइशें तो अंदर होती हैं तो घूमते रहते हैं तो वर्ष में एक दिन, हमारा एक वर्ष बीतता है तो पितृ लोक का एक दिन होता है तो पितृ लोक में तो उनको पहुंचने की गति हुई न हुई तो घूमते रहते हैं तो जब #श्राद्ध_पक्ष आता है, प्रत्येक महीने में भी श्राद्ध कर सकते हैं लेकिन अभी जो श्राद्ध पक्ष आया उसका प्रभाव विशेष होता है।
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#श्राद्ध_महिमा
संसार में फँस मरने के लिए, पशु-योनि में धकेले जाने के लिए तुम्हारा जन्म नहीं हुआ, परमात्म-ज्ञान पाकर मुक्ति का अनुभव करने के लिए तुम्हारा जन्म हुआ है ।
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मान लो मैं किसी जंगल में हूँ अथवा मैं कंगाल हूँ , गरीब हूँ और श्राद्ध के दिन हैं तो अब मैं क्या करूं ? जो कुछ कंद मूल हैं राम जी की नाईं… राम जी ने कंद मूलों से श्राद्ध किया था। अयोध्या में आए तब व्यवस्थित श्राद्ध किया था लेकिन कंद मूल भी नहीं हैं तो हमारा धर्म कहता है चिंता ना करो! पानी का एक लोटा सूर्यनारायण को चढ़ा दो और दोनों हाथ ऊंचे कर दो, आपकी बगल दिखे ऐसे हाथ ऊंचे कर दो, आप हार मान लो कि मेरे पास देने के लिए श्राद्ध की सामग्री नहीं है। देने के लिए मेरे पास अन्न, धन, दक्षिणा नहीं है। फिर भी सूर्य नारायण की साक्षी में हे यमराज! मेरे पिता फलाने भाई, फलाने भाई और उनका यह गोत्र है, आप उनको सुख दीजिए, उनको शांति दीजिए और उनका आशीर्वाद मुझे मिले। आप इतना भी करते हैं तो आपकी प्रार्थना से आपके पितरों को संतोष होता है।
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श्राद्ध में कुशा, काले तिल और तुलसी की महिमा बड़ी भारी है। श्राद्ध में कुशा, काले तिल और तुलसी का उपयोग पितरों को तृप्त करता है। श्राद्ध में भोजन आदि से तो पितरों की बाह्य तृप्ति होती है लेकिन प्रीतिपूर्वक भगवन्नाम कीर्तन, भगवद स्मृति उनको मानसिक तृप्ति देती है।
तुलसी में पिडार्चन होता है, विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। धन - धान्य जिनके पास है वो उस ढंग से करें और जिनके पास नहीं है तो कम से कम साधन से भी श्राद्ध हो सकता है। कोई पितर अथवा कोई सुह्रद रह गया हो तो अमावस्या को उनकी तृप्ति के लिए श्राद्ध किया जा सकता है।
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#श्राद्ध_महिमा
दुनिया में जो संबंध हैं वे सब एक-दूसरे का शोषण कर सुख लेने के संबंध हैं। सच्चा संबंध तो परमात्मा का है अथवा तो परमात्मा को पाये हुए उन ब्रह्मवेत्ताओं का है जो तुम्हें सब संबंधों से मुक्त करना चाहते हैं ।
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आदमी मर जाने के बाद सवा मुहूर्त, सवा दो घंटा, मरा हुआ जीव मूर्छा में रहता है, सूक्ष्म शरीर में। फिर वो जागता है। फिर सोचता है कि क्या हुआ ? कैसे हुआ ? फिर वो मरा हुआ, ये शरीर मरा है और खुद सूक्ष्म शरीर से अपने शरीर को देखता है। घर वाले रोते हैं तो देखता है ,कि कौन आया ? कौन गया ? तीसरा होता है तो कुटुंबी आ जाते हैं, दूर दूर के आ जाते हैं, फलाना कैसे मरा ? ऐसा हो गया सिर में दर्द था, ऐसा हुआ, फलाना हुआ, जो भी निमित हुआ, हार्ट अटैक हो गया, ये हो गया, वो भाई आदमी तो अच्छे थे, भले थे, चलो भगवान उसकी सद्गति करें। वो सब अपने संबंध की जो तातें हैं, वो तोड़ के चले जाते हैं , ताकि ये कहीं भटके नहीं, आगे जाए! उसमें भी रह जाए तो फिर बारहवां किया जाता है। उसमें भी कहीं उसका रह जाए तो बारह महीने में एक दिन उसका श्राद्ध कर देते । ये हिंदू धर्म की बहुत सुंदर व्यवस्था।
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सदियों से इस जीव के साथ जुडें हुए लुटेरे विकार इसको उठते-उठते गिरा देते हैं तो उस गिरने से बचने के लिए भगवान के नाम का उच्चारण है । भगवद् नाम उच्चारण कर्म नहीं अपितु पुकार मानी जाती है ।
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जिस विद्या से तुम्हारे चित्त में विश्रांति नहीं, जिस विद्या से तुम्हें भीतर का रस नहीं आ रहा वह विद्या नहीं, सूचनाएँ हैं । दुःख में डूबना, विरोध में डूबना या भगवान की स्मृति करके निर्लेप रहना यह अपने हाथ की बात है ।
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कैसी भी दुखद अवस्था आए, कितना भी घना अंधेरा हो, सवेरा आता है। कितनी भी कष्टदायी अवस्था हो, घबराओ मत। ज्ञान के प्रकाश में जियो। आत्मा का कतई कुछ नहीं बिगड़ता, तुम हमेशा आत्मा परमात्मा के निकट हो।#AsharamjiBapu
अच्छा विचार आ जाए और अच्छा कर्म करने का भाव आ जाए तो जल्दी करो, हिम्मत करो, उसमें विघ्न पड़ता है, भगवान और बल बढ़ाते हैं। बुरा भाव आ जाए तो बोले अभी नहीं।
सौ-सौ बातें आयेगी मन में, 100 की कर दो साठ, आधा कर दो काट। 10 करेंगे, 10 करवाएंगे, 10 के जोड़ेंगे हाथ।
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सच्चिदानंद समुद्र में कोई भय नहीं है। वह तो अमृत का समुद्र है, उसमें डुबकी लगाने से मृत्यु का भय मिट जाता है और व्यक्ति अमर हो जाता है । #AsharamjiBapuQuotes
भगवान स्वयं तो कभी-कभी प्रकट होते हैं और किसी किसी का, अहिल्या का, शबरी का, किसी किसी का उद्धार करते हैं लेकिन भगवन्नाम तो सदा गुरुओं के द्वारा प्रकट होता रहता है और कईयों का असंख्य लोगों का भला करता रहता है। तो भगवन्नाम भगवान से भी बड़ा माना गया है। 'राम न सकहिं नाम गुन गाई', भगवान भी भगवन्नाम की महिमा नहीं गा सकते, भगवन्नाम की महिमा इतनी सारी भगवान ने भर रखी है!
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बड़े आश्चर्य की बात है कि कुछ चीजें तो भारत में ही मिल सकती हैं दूसरे देशों में नहीं, गंगाजल भारत में, गंगा नदी भारत में, उपनिषद और भगवदगीता भारत में और आत्मा - परमात्मा का अनुभव किए हुए पुरुष धरती पर अगर खोजना है तो भारत में ही मिलेंगे।
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बच्चे याद शक्ति पावरफुल करना है ? दोनों कानों में उंगली डालो। याद शक्ति बढ़ाने का ये अद्भुत टंक विद्या का प्रयोग है। लंबा श्वास लो। मैं होठ बंद करके ॐ ॐ जपूंगा कंठ से। तुम भी जपोगे, याद शक्ति बढ़ेगी। लंबा श्वास लो ओम ओम ...ओम्मा ओम्मा … फिर से लंबा श्वास बेटे ओम ओम ..... ॐ ॐ ॐ ॐ …. 10 बार श्वास लेके ऐसा करा तो कैसे भी बच्चा-बच्ची होंगे, बिल्कुल पावरफुल याद शक्ति!
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मैं तो उन जापानियों को शाबाश देता हूं कि वो अमेरिकन अंग्रेजी जानते हुए भी अमेरिका में अपने देश की भाषा ही बोलते हैं और हम अपने देश में पराई गुलामी के गीत गाए जा रहे हैं। अंग्रेजी रहन - सहन, बोलचाल मानों अपनी संस्कृति के पीछे डंडा लेकर पड़े हैं कि नाबूत हो जाए।
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वाणी का प्रयोग करते समय यह अवश्य खयाल में रखा जाय कि मैं जिससे बात करता हूँ वह कोई मशीन नहीं है, रोबोट नहीं है... उसके पास भी दिल है। हर दिल को स्नेह, सहानुभूति, प्रेम और आदर की आवश्यकता होती है । #AsharamjiBapuQuotes
बड़ी - बड़ी आपदाएं आ जाएं, उस समय अबदल (परमात्मा) का सुमिरन करके मन में टं टं टं जप करें। विपदाएं भेजने वाले दंग रह जायेंगे कि इतनी विपदाएं जाती हैं और ये विपदा में क्यों नहीं आ रहे।
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प्रभु का नाम स्वाभाविक आये तो समझ लेना कि प्रभु हमें अपना नाम जपा के शुद्ध कर रहे हैं, अपने में मिला रहे हैं, अपने साथ एकाकार कर रहे हैं ।
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