छात्रों और नौजवानों पर लाठीचार्ज करना लोकतंत्र पर हमला है। मोदी सरकार छात्रों को मारने का काम कर रही है।
जो छात्र-नौजवान दिल्ली आकर बात करना चाहते हैं, उन्हें मारना और तंग करना गलत है। हमने इसपर सरकार का कई बार ध्यान खींचा लेकिन उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ रहा।
एक तरफ- बेरोजगारी है, दूसरी तरफ ये सरकार परीक्षा तक नहीं करा पा रही है, इसलिए हमारा यही कहना है कि ये सत्ता में रहने के लायक नहीं हैं।
चढ़ावा चोरी भी हमारा मुख्य मुद्दा है। राम मंदिर में करोड़ों रुपए की लूट हुई और रामभक्तों के साथ धोखा किया गया।
चढ़ावा चोरी की जिम्मेदारी नरेंद्र मोदी को लेनी चाहिए, क्योंकि ट्रस्ट बनाने का काम और उसमें लोगों को शामिल करने का काम खुद उन्होंने ही किया था।
: कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता श्री @kharge
जब मेहनत करने वाला छात्र हर परीक्षा से पहले यह सोचने को मजबूर हो जाए कि पेपर लीक होगा या नहीं, परीक्षा समय पर होगी या नहीं, भर्ती निकलेगी या नहीं - तब समस्या किसी एक परीक्षा की नहीं, पूरे शिक्षा तंत्र की होती है।
देश के युवाओं को भाषण नहीं, भरोसा चाहिए।
अब समय आ गया है कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय हो, पारदर्शी एवं लीक-मुक्त परीक्षा प्रणाली लागू हो, वार्षिक परीक्षा-भर्ती कैलेंडर सुनिश्चित किया जाए और इस विफलता की नैतिक जिम्मेदारी भी तय हो।
मुज़फ्फरनगर में मजदूरों की बंधुआ मजदूरी का मामला बेहद चौंकाने वाला है।
बिना मज़दूरी दिए काम करवाने के अलावा, मजदूरों को कुत्तों से कटवाया गया, भाले से गोदा गया, कोड़े मारे गए, और उन्हें मवेशियों का चारा खिलाया गया। यह इंसानी गरिमा पर हमला है - पीड़ितों को न्याय के साथ पुनर्वास और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
साथ ही हमें यह भी पूछना ज़रूरी है कि मज़दूर ऐसी खतरनाक परिस्थितियों में किन मजबूरियों में फंस जाते हैं।
जब रोज़गार ख़त्म हो जाते हैं, आमदनी ठहर जाती है, और सबसे कमज़ोर वर्गों के लिए बने मनरेगा और श्रम कानूनों जैसी सुरक्षाएं कमज़ोर कर दी जाती हैं, तो हताशा बढ़ती जाती है। जिन लोगों के पास कोई और विकल्प या सुरक्षा नहीं होती, वो ऐसे शोषण का आसान शिकार बन जाते हैं।
यह कोई आम आपराधिक घटना नहीं है - यह एक धराशाई हुई अर्थव्यवस्था का मलबा है।