मैंने कई बड़े नेताओं को संसद में देखा है, लेकिन चंद्रशेखर आजाद जी @BhimArmyChief का तरीका अलग नज़र आता है।
जब किसी मुद्दे को अपना मान लेते हैं, तो पीछे हटते नहीं। आज छात्रों के मुद्दे पर संसद परिसर में अकेले धरने पर बैठकर अपनी बात रख रहे हैं।
यही वजह है कि कई युवा उन्हें संघर्ष की राजनीति का चेहरा मानते हैं।
ब्रेकिंग न्यूज को बनाने वाले को ही ब्रेकिंग बना डाली क्या बात बोली है इस बच्ची ने एक बार टाइम निकालकर ये न्यूज अवश्य सुने🤣🤣🤣🤣
@LegalAdvisour@CommonBS786OM@Saif__Tweets
इतने दिनों की लंबी लड़ाई लड़ने के बाद आज जाकर छात्रों को थोड़ा सुकून मिला होगा कि
मुद्दा हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के संज्ञान में आ गया है,
प्रधानमंत्री मोदी जी ने छात्रों को न्याय और पेपर लीक के दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की बात तो की है लेकिन
छात्र तो शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़े हैं
जो भी हो छात्रों को न्याय मिले, सिस्टम में पारदर्शिता आए, छात्रों की जिम्मेदारी हो और इन बच्चों को क्या ही चाहिए?
इतने दिनों की लंबी लड़ाई लड़ने के बाद आज जाकर छात्रों को थोड़ा सुकून मिला होगा कि
मुद्दा हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के संज्ञान में आ गया है,
प्रधानमंत्री मोदी जी ने छात्रों को न्याय और पेपर लीक के दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की बात तो की है लेकिन
छात्र तो शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़े हैं
जो भी हो छात्रों को न्याय मिले, सिस्टम में पारदर्शिता आए, छात्रों की जिम्मेदारी हो और इन बच्चों को क्या ही चाहिए?
बारिश की हर बूँद स्वीकार है, मगर मासूमों पर अन्याय स्वीकार नहीं, जिन्होंने अन्याय किया वो कितने ही ताकतवर क्यों ना हो, उनके पीछे कितनी बड़ी शक्ति क्यों ना हो, लेकिन जवाब देना ही होगा।
महापुरुषों के विचार ही मेरे संघर्ष की ताक़त हैं। जय भीम, जय भारत।
राहुल गाँधी ने PM नरेंद्र मोदी, HM अमित शाह और धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा माँगा लेकिन
इन लोगो के इस्तीफे भी मांगने चाहिए थे 👇
निर्मला सीतारमण : इनके वित्त मंत्री रहते रूपये अपने आल टाइम निचले स्तर पर पहुंच गया
अश्विनी वैष्णव : इनके रेल मंत्री रहते हुए देश मे बड़ी बड़ी रेल दुर्घटनाये हुई, कई लोग मारे गए लेकिन इन्होंने कभी जिम्मेदारी नहीं ली
S. जयशंकर : कहने को विदेश मंत्री हैं, लेकिन इनके कार्यकाल में भारत की विदेश नीति कमजोर हुई है, आज नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देश भी भारत को खुली चुनौती देने लगे है जबकि अमेरिका के आगे हम बेबस है
नितिन गडकरी : सड़क परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री हैं, लेकिन इनकी पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की पॉलिसी से लोगो को गाड़ियों मे परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है
ऊपर से सड़कें बनने से पहले ही उनमें गहरे गड्ढे पड़ने की खबरे अब आम बात है
हरदीप पूरी : ये पेट्रोलियम मंत्री है लेकिन इन्हे अपने विभाग के बारे मे क़ोई जानकारी नहीं है
पेट्रोल मे इथेनाल मिलाना हो या उसकी कीमत तय करनी हो नितिन गडकरी ही सब कुछ करता है
राजनाथ सिंह : ये देश के रक्षा मंत्री है जबकि इनके गृह मंत्री रहते पुलवामा हमला हुआ, 300किलो RDX देश मे कहाँ से आया इसका जवाब आज तक नहीं मिला है
इनके रक्षा मंत्री रहते हुए गलवान मे चीन ने हमारे 20 सेनिको को मारा और ये केवल निंदा करते रह गए
क्या इन लोगो के इस्तीफे नहीं लिए जाने चाहिए?
मैंने कई बड़े नेताओं को संसद में देखा है, लेकिन चंद्रशेखर आजाद जी @BhimArmyChief का तरीका अलग नज़र आता है।
जब किसी मुद्दे को अपना मान लेते हैं, तो पीछे हटते नहीं। आज छात्रों के मुद्दे पर संसद परिसर में अकेले धरने पर बैठकर अपनी बात रख रहे हैं।
यही वजह है कि कई युवा उन्हें संघर्ष की राजनीति का चेहरा मानते हैं।
अब वो दिन दूर नहीं जब चंद्रशेखर आजाद जी उन लोगों को रिप्लेस करने वाले हैं जो AC से बाहर नहीं निकलते।
कल जंतर मंतर पर छात्रों के साथ जब बर्बरता हो रही थी तो चंद्रशेखर आजाद जी वहां मौजूद थे, उनसे वो सब देखा नहीं गया
और आकर उसके विरोध में बाबासाहेब आंबेडकर जी की प्रतिमा के पास अकेले धरने पर बैठ गए और घंटों बैठे रहे।
बारिश हो रही है लेकिन एक छाता लेकर वो वहां डटे रहे नेता ऐसा ही होना चाहिए जो जमीन पर दिखे।
अब वो दिन दूर नहीं जब चंद्रशेखर आजाद जी उन लोगों को रिप्लेस करने वाले हैं जो AC से बाहर नहीं निकलते।
कल जंतर मंतर पर छात्रों के साथ जब बर्बरता हो रही थी तो चंद्रशेखर आजाद जी वहां मौजूद थे, उनसे वो सब देखा नहीं गया
और आकर उसके विरोध में बाबासाहेब आंबेडकर जी की प्रतिमा के पास अकेले धरने पर बैठ गए और घंटों बैठे रहे।
बारिश हो रही है लेकिन एक छाता लेकर वो वहां डटे रहे नेता ऐसा ही होना चाहिए जो जमीन पर दिखे।
"ये दिल्ली की सल्तनत के अंत का आरम्भ हो चुका है। देश के नौजवान इस बात को लेकर आगे बढ़ें, ये समय की माँग है। ये ज़ुल्म के सामने जंग ही रास्ता है दोस्तों। ज़ुल्म के सामने झुकना इस देश की मिट्टी में नहीं है दोस्तों।"
- नरेंद्र मोदी जी