@Raghwendrashuk जब तक स्कूल में किसी प्यासे बच्चे को पानी का घड़ा छूने पर मारना बंद नहीं करते जब तक यह "नीचता" जारी है तब तक आरक्षण देना ही पड़ेगा ।और यह घटना 5000 साल पुरानी नहीं है आज के सभ्य समाज की है "उच्च " लोगों के द्वारा गर्व से की गई घटनाएं है । बताओ इसका आधार आर्थिक है क्या ?
@SushantBSinha@MGMotorIn जिनकी पाठशाला में वक़ालत करते हो वो सभी बेहतर है ।
MG वाले को बीजेपी की सदस्यता दिला दो , फिर तुम खुद ही इनकी गाड़ी के गुण गाते फिरोगे , और पाठशाला में दूसरों को भी बताओगे कि ये गाड़ी क्यों लेनी चाहिए ।
@KraantiKumar भाई अपने पीछे भीड़ को देख कर अति उत्साहित है । वो यह भूल रहे है कि बहुजन लोग इनके पीछे तो चलते है । जब पिट जाते है तो अपने कार्य के लिए इनको पुकारते भी हैं।
लेकिन वोट के समय सारे दलित वोट बहाव जी को करते है ।
अगर ऐसा न होता तो अब तक दलित राजनीति का दोबारा से डंका बज रहा होता ।
@ShivamSanghi12 हाहाहा ताली बजाना सनातन है इतनी सी परिभाषा रह गई सनातन की ?
मंदिर में चोरी पर सनातनी चुप रहते है ,
बलात्कारों पर सनातनी चुप रहते हैं ,
पीड़ित लड़की को ही अपराधी घोषित करते है ।
दूसरों के धर्मस्थलों के सामने डीजे बजाना सनातन है,
कितनी हल्की परिभाषा बना दी तुम लोगों ने धर्म की
@neha_laldas दहेज एक्ट को भी इसी तरह क्रिटिसाइज किया जाता है , खुद दूसरों पर लगाओ तो बढ़िया है कोई बहू आपके परिवार पर लगाए तो खराब ।
लेकिन वास्तविकता यह है कि इस एक्ट के बाद महिलाओं की स्थिति में सुधार तो हुआ है ।
अब घरेलू हिंसा भी कम होती है ।
@MaheshThuppeKal@RSF_inter आपका हमेशा सब कुछ इंटरनेशनल ही होता है , अरबपतियों का लोन माफ करने में कोई इंटरनेशनल षड्यंत्र नहीं दिखता कभी आपको ?
बच्चों पर पैलेट गन चलाने में कॉन्सपिरेसी नहीं दिखती ? बच्चों के स्कूल बंद करने में षड्यंत्र नहीं दिखता डॉ साहब ?
@LegalAdvisour ये सब के सब बता रहे है कि अब सवर्णों का भविष्य ऐसे ही लोग है इनको ही सवर्णों ने स्वेच्छा से अपना भविष्य चुन लिया है । ऐसा मानसिक और प्रतिभा का दिवालियापन किसी और समाज का आजादी के बाद नहीं हुआ है ।
और इसका कारण आरक्षण नहीं बल्कि किसी की अंधभक्ति है ।
@Shubhamshuklamp अब ब्राह्मणों का अच्छा बुरा का भेद करने का विवेक ही खत्म हो गया ।
जिस चीज को अपनी पूंजी मानते थे , ज्ञान , विवेक , मर्यादा , संस्कार । पिछले कुछ साल में सबसे पहले इन्हीं की तिलांजलि दी इन लोगों ने।
मुबारक हो आपके समाज का भविष्य भी अब 10 साल बाद स्वतंत्र भारद्वाज जैसा ही होगा
@JaikyYadav16 पहले ब्राह्मणों के बच्चे विकास दिव्यकीर्ति जैसे शिक्षक को सुनते थे ,उनको देख कर सुन कर इंस्पायर होते थे , फिर एक दिन देश का हिंदू जाग गया ,और अब ब्राह्मण लोग अजीत भारती , स्वतंत्र भारद्वाज को सुनते है उनको फॉलो करते है ।
ऐसा पतन किसी समाज का आज तक नहीं देखा होगा ।
@LegalAdvisour गालियां सभी देते है लेकिन गालियों को कमर्शियलाइज करके उनका प्रचार प्रसार करना किसी भी सभ्य व्यक्ति को शोभा नहीं देता ।
समाज को प्रत्यक्ष रूप से देने के लिए इंसान के पास और भी बहुत कुछ है ।
गाली तो बाकी बुराइयों की तरह समाज में स्वत: ही मौजूद है , उसकी क्या वकालत करनी ?
@Pradeepthakur_4@AshokShrivasta6 इसी अशोक श्रीवास्तव ने हाईस्कूल में पढ़ने वाले एक श्रीवास्तव बच्चे को पाकिस्तानी बोला था ।
तब भी ये सही था क्या ? अगर ये सही बोलता है तो श्रीवास्तव कब से पाकिस्तानी होने लगे ?
@ibmindia20 इतना सिम्पल लिख रही हो , पाकिस्तानी लिखो , गद्दार लिखो इनको गद्दार , मजा तो अब आयेगा लिखो पांडे , दुबे , सक्सेना , सिंह साहब सबको मोदी का विरोध करने पर लिखो देशद्रोही ।
इन लोगों ने 12 साल यही बोया है , एक दिन तुमको भी यही सब सहना पड़ेगा ।