@SanjayAzadSln जिन्होंने मंदिर तोड़े, सभ्यता नष्ट की, उन्हें झंडे के रंगों में जगह देकर 'धर्मनिरपेक्षता' का ढोल पीटा गया!
आत्महीनता की ऐसी मिसाल दुनिया में कहीं नहीं मिलेगी जहाँ पीड़ित ही आक्रांता को शरण दे।
आज जब कोई इस दर्द पर बात करे, तो उसे राजनीति का रंग दे दिया जाता है!
@SanjayAzadSln 1949 के 'ऑर्गनाइजर' के पुराने पन्ने ढूंढकर राष्ट्रवाद पर ज्ञान देने वाले नेता जी!
कभी नेहरू द्वारा थोपे गए फैसलों और तुष्टिकरण के इतिहास पर भी तो मुंह खोलिए?
इतिहास के ����ी पन्ने पढ़ना जो अपनी राजनीति को सूट करें,
यही विपक्ष का सबसे बड़ा ऐतिहासिक ढोंग है!
@SanjayAzadSln कल तक जो भगवा को सर्वोपरि मानकर तिरंगे के तुष्टिकरण वाले मॉडल पर सवाल उठाते थे,
आज कांग्रेस के 'देशद्रोही' वाले ठप्पे के डर से वही बैकफुट पर आ गए!
अपनी मूल ���ैचारिक पहचान छिपाकर झंडे पर सफाई देना दिखाता है कि
सत्ता की होड़ में सिद्धांत कैसे समझौते में बदल जाते हैं।
@SanjayAzadSln राष्ट्रगान का भूगोल व आज की हकीकत
जिस राष्ट्रगान में उन भू-भागों का जिक्र है जो 1947 में देश से कटकर अलग हो गए
उस पर सवाल उठाओ तो 'दे��द्रोही' और चुप रहो तो 'सच्चे नागरिक'!
जब भूगोल बदल गया, सीमाएं बदल गईं,
फिर ��ी इतिहास की गलतियों को ढोना ही क्या राष्ट्रभक्ति की एकमात्र कसौटी है?
@SanjayAzadSln हजारों सालों का भगवा इतिहास एक तरफ, और 1947 का राजनीतिक तुष्टिकरण एक तरफ!
आक्रांताओं को 'बराबरी का दर्जा' देने की हड़बड़ी में पहचान ही बदल दी गई।
आज जो राष्ट्रवाद का पाठ प��़ाते हैं, वे उस ऐतिहासिक भूल पर चुप क्यों हैं?
ध्वज थोपना आसान था, पर जन-आस्था बदलना आज भी नामुमकिन है!
@ndtvindia@malhotra_malika@aishvaryjain@JainendraKumar 1990 में कारसेवकों पर गोलियां चलवाने पर जिन्हें गर्व था,
और हमेशा उस निर्णय को सही ठहराया
उन्हीं के वारिस राम मंदिर के ट्र���्ट और चढ़ावे पर ईमानदारी का पाठ पढ़ा रहे हैं!
न अतीत पर कोई अफ़सोस, न कोई माफ़ी,
बस समय बदलते ही 'गोली' की राजनीति छोड़कर 'राम नाम' की राजनीति का नया चोला।
@ndtvindia@malhotra_malika@aishvaryjain@JainendraKumar सदियों से आस्था के नाम पर जनता की जेब ढीली हुई है—चाहे वह रसीद वाला दान हो या गुप्त दक्षिणा।
सवाल उठाने वाले को 'धर्मविरोधी' घोषित कर दो, ताकि कोई न पूछे कि भक्तों का पैसा आखिर गया कहाँ!
राजनीति और धर्म का ऐसा संगम, जहाँ हिसाब मांगने की छूट भगवान को भी नहीं दी गई!
@ndtvindia@malhotra_malika@aishvaryjain@JainendraKumar पारदर्शिता बनाम RTI का पर्दा
नियम ये है कि जहाँ बड़ा पैसा आए, वहाँ RTI का दरवाज़ा बंद कर दो!
जब विपक्ष में हो तो 'पारदर्शिता' के नारे लगाओ, और सत्ता में आते ही 'नो ऑडिट' का कवच पहन लो।
देश के संविधान से ऊपर धर्��� का लिफाफा चढ़ाकर हर सवाल का जवाब टाल देना ही असली राजनीति है।
@ndtvindia@malhotra_malika@aishvaryjain@JainendraKumar मंदिरों के खजाने और पिघलता स��ना
केदारनाथ के गर्भगृह से सोना गायब हो जाए या पौराणिक मंदिरों की धातु पिघला दी जाए—
श्रद्धालुओं से बस 'पुण्य' कमाने की अपील होती है, और पीछे से खजाने साफ हो जाते हैं!
धर्म के नाम पर भक्ति जनता की, और मुनाफा सिस्टम में बैठे बिचौलियों का!
@ndtvindia@malhotra_malika@aishvaryjain@JainendraKumar रथ यात्रा के चंदे से लेकर आधुनिक ऑडिट तक
90 के दशक की रथ यात्राओं से जुटी अगाध श्रद्धा का हिसाब इतिहास में कहीं गुम हो गया,
और आज का दौर ये है कि अरबों का चंदा 'गुरु दक्षिणा' और 'प्राइवेट ट्रस्ट' के नाम पर ऑडिट-फ्री है!
धर्म के नाम पर तिजोरियां भरने का यह हुनर सच���ुच कालजयी है।
@ndtvindia@malhotra_malika@aishvaryjain@JainendraKumar चढ़ावे और जवाबदेही पर प्रहार
राम मंदिर का दान हो, केदारनाथ का सोना हो या पीएम केयर्स का फंड—
आम ��नता की गाढ़ी कमाई और आस्था का हिसाब मांगो तो जवाब मिलता है: 'RTI लागू नहीं होता!'
आस्था आपकी, पैसा आपका... पर हिसाब 'ऊपर वाला' (या बिना रजिस्ट्रेशन वाले) संघी ही जानेंगे!
@sambitswaraj संसद में बहस इस बात पर है कि 'गोली का आदेश किसने दिया',
और सड़कों पर दर्द ये है कि 'सालों की मेहनत का पेपर फिर लीक कैसे हुआ!'
152 से ज़्यादा लीक्स पर पर्दा डालने के लिए बहस का रुख मोड़ने में उस्ताद हैं,
राजनीति जीत रही है और देश का भविष्य रोज़ हार रहा है!
@sambitswaraj जो नेता चुनावी रैलियों में 'अवतार' और 'विश्वगुरु' बनने के दावे ठोकते थे,
वे आज संसद में एक NEET का निष्पक्ष पेपर तक सुरक्षित कराने में लाचार हैं!
जब डिग्री हाथ में न हो और नौकरी के नाम पर लाठियां मिलें,
तो ऐसी खोखली बयानबाजी सीने में तीर की तरह चुभती है।
@sambitswaraj 2024 में कानून बनाया, 2026 में उसमें संशोधन ले आए...
पर 10 साल का हिसाब ये है कि पेपर माफिया आज भी बेखौफ है और छात्र तनाव में!
असल में सख्त सजा का ये बिल छात्रों के लिए नहीं,
अपनी पुरानी प्रशासनिक नाकामी पर मुहर लगाकर चेहरा बचाने के लिए लाया गया है।
@sambitswaraj जब सरहद पर चीन ज़मीन छीने तो खामोशी, और जब छात्र NEET लीक पर सवाल पूछें तो लाठी व पेलेट!
ऊपर से प्रेस कॉन्फ्रेंस में ज्ञान कि—"गृह मंत्री को क्या पता, फैसला तो मजिस्ट्रेट का था!"
जब वाहवाही लूटनी हो तो 'मास्टरस्ट्रोक', और जब सवाल उठे तो 'निचले अफ़सर' की जवाबदेही!
@sambitswaraj NEET रद्द हुआ, सड़कों पर छात्र पिटे और 152 पेपर लीक का रिकॉर्ड बना,
पर संसद में ताली इस बात की बज रही है कि "नया कड़ा कानून ले आए!"
पर्चा रोकने में ज़ीरो, पर अपनी ही नाकामी पर बधाई देने का ढोंग करने में नंबर वन!
वाह साहब! बीमारी बढ़ाकर अब नए अस्पताल के बिल पर जश्न मना रहे हैं!
@INCIndia कुर्सी की लड़ाई, छात्र बलि का बकरा
यह 'Fight for Students' नहीं, सत्ता के कंट्रोल की जंग है!
जब तक विपक्ष में हो, छात्रों का दर्द दिखता है,
और गद्दी मिलते ही वही छात्र 'विपक्षी साज़िश' नज़र आने लगते हैं।
ढोंग बंद करो, शिक्षा का जनाज़ा तुम सबने मिलकर निकाला है!
@INCIndia ऐतिहासिक नाकामी का रिकॉर्ड
इतिहास उठाकर देख लो—सदन में हंगामा, सड़कों पर नारे और पोस्टरों पर लंब��� आंकड़े,
पर जब कुर्सी मिली, तो हर दल ने सिर्फ पेपर माफिया को पनाह दी!
शिक्षा व्यवस्था को 'कमाई का जरिया' बनाने वाले आज किस मुंह से न्याय की बात करते हैं?
@INCIndia सुविधाजनक राजनीति
आपके राज्य में लीक हो तो 'साज़िश' और दूसरे के राज्य में हो तो 'नाकामी'!
राजनीति क��� यह दोहरा चरित्र ही शिक्षा व्यवस्था का सबसे बड़ा कैंसर है।
छात्रों के भविष्य से ज़्यादा चिंता तुम्हें अपने वोट बैंक की है,
चाहे झंडा किसी भी रंग का हो, चरित्र सबका एक सा है!
@INCIndia सुधार के भाषण बनाम ज़मीनी इतिहास
दशकों से शिक्षा नीति पर लंबे-चौड़े भाषण ��र खोखले वादे मिले,
नतीजा? डिग्री हाथ में है, पर रोज़गार गायब और व्यवस्था ज़ीरो!
जिन्होंने सालों तक शिक्षा तंत्र को सड़ाया,
आज वही 'छात्रों के मसीहा' बनने का नाटक कर रहे हैं।