इतिहास का एक ऐसा अध्याय,
जिसे पढ़कर सवाल कम और
माथा ज़्यादा घूमता है!
भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद थे।
दिलचस्प बात यह बताई जाती है कि उनकी शिक्षा पारंपरिक स्कूल-कॉलेज की व्यवस्था से नहीं हुई थी।
उनका जन्म मक्का में हुआ और उन्होंने मक्का तथा मिस्र के अल-अज़हर में इस्लामी शिक्षा
प्राप्त की।
फिर भी पंडित नेहरू ने उन्हें स्वतंत्र भारत का पहला शिक्षा मंत्री बनाया।
अब कहानी यहीं खत्म नहीं होती...
शिक्षा मंत्री बनने के बाद मौलाना आज़ाद ने अपने मंत्रालय में,
ख्वाजा गुलाम सैयदैन को शिक्षा सचिव बनाया।
आगे चलकर सैयदैन की बेटी
सैयदा हामिद राजनीति और
सत्ता के गलियारों में महत्वपूर्ण
पदों तक पहुँचीं।
उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय में,
महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ मिलीं और बाद में योजना आयोग की सदस्य तथा कैबिनेट मंत्री के दर्जे तक पहुँचीं।
और फिर वही सैयदा हामिद बांग्लादेशी मुसलमानों के भारत में रहने के अधिकार को लेकर यह तर्क देती हैं कि,
“यह धरती अल्लाह ने बनाई है…”
अब ज़रा सोचिए...
एक तरफ देश में नागरिकता, घुसपैठ और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे सवालों पर बहस चलती रही, और दूसरी तरफ कुछ लोग धर्म के आधार पर ऐसे तर्क पेश करते रहे, मानो भारत कोई खुली धर्मशाला हो!
जिसका टिकट हो या न हो,
प्रवेश सबका अधिकार हो!
और कांग्रेस के दौर में दिए गए
पद्म पुरस्कारों पर भी
सवाल उठते रहे हैं।
आलोचकों का आरोप रहा है कि पुरस्कार और महत्वपूर्ण पद योग्यता से ज्यादा राजनीतिक नज़दीकियों और विचारधारा देखकर बांटे जाते थे।
अब सवाल यह नहीं है कि
कौन किस धर्म का था।
सवाल यह है कि देश चलाने के लिए योग्यता, संविधान और राष्ट्रहित बड़ा था या राजनीतिक व वैचारिक वफादारी?
और जो लोग आज भी
पूरे विश्वास से कहते हैं कि,
राहुल गांधी को
प्रधानमंत्री बनना चाहिए…
भाई साहब,
फिर शिकायत मत करना कि इतिहास ने चेतावनी पहले ही दे दी थी और आपने पढ़ी नहीं! 😂
इन बूढ़े हाथों को गौर से देखिए…
झुर्रियों में सिर्फ़ उम्र नहीं, बल्कि त्याग और तपस्या की कहानी छिपी है।
ज़रा सोचिए, आपके पिता या दादा जब इस उम्र में पहुँचे होंगे तो क्या कर रहे थे?
शायद आराम कर रहे होंगे…
या फिर परिवार की रोज़ी-रोटी जुटाने में लगे होंगे।
आम तौर पर लोग 60 साल के बाद सेवानिवृत्त होकर विश्राम की राह पकड़ लेते हैं।
लेकिन नरेंद्र मोदी, ऐसे हैं जो उम्र की सीमाओं को तोड़कर, दिन-रात, 24 घंटे, 7 दिन, देश के लिए समर्पित हैं।
उनका सपना है कि वह भारत को फिर से उस महान ऊँचाई पर पहुंचाएं, जहाँ से उसे हज़ारों साल की लूट और आक्रमणों ने गिरा दिया।
ध्यान से देखिए इन हाथों को…
यह धैर्य का प्रतीक हैं।
यह तपस्या का प्रतीक हैं।
यह अपने देशवासियों के प्रति अटूट प्रेम का प्रतीक हैं।
एक असाधारण इंसान, जिसकी हर साँस भारत की खोई हुई शान और समृद्धि लौटाने के सपनों से भरी हुई है।
आइए, राजनीति और अपने छोटे-छोटे स्वार्थों को छोड़कर,
एक शुद्ध हृदय, साफ़ मन और निष्कलुष आत्मा के साथ
हम सब इस पुरुषार्थी व्यक्ति के साथ खड़े हों।
यह सिर्फ़ किसी नेता की बात नहीं,
यह उस व्यक्ति की बात है जिसने अपना पूरा जीवन
भारत माता के चरणों में अर्पित कर दिया है।
इन बूढ़े हाथों को गौर से देखिए…
झुर्रियों में सिर्फ़ उम्र नहीं, बल्कि त्याग और तपस्या की कहानी छिपी है।
ज़रा सोचिए, आपके पिता या दादा जब इस उम्र में पहुँचे होंगे तो क्या कर रहे थे?
शायद आराम कर रहे होंगे…
या फिर परिवार की रोज़ी-रोटी जुटाने में लगे होंगे।
आम तौर पर लोग 60 साल के बाद सेवानिवृत्त होकर विश्राम की राह पकड़ लेते हैं।
लेकिन नरेंद्र मोदी, ऐसे हैं जो उम्र की सीमाओं को तोड़कर, दिन-रात, 24 घंटे, 7 दिन, देश के लिए समर्पित हैं।
उनका सपना है कि वह भारत को फिर से उस महान ऊँचाई पर पहुंचाएं, जहाँ से उसे हज़ारों साल की लूट और आक्रमणों ने गिरा दिया।
ध्यान से देखिए इन हाथों को…
यह धैर्य का प्रतीक हैं।
यह तपस्या का प्रतीक हैं।
यह अपने देशवासियों के प्रति अटूट प्रेम का प्रतीक हैं।
एक असाधारण इंसान, जिसकी हर साँस भारत की खोई हुई शान और समृद्धि लौटाने के सपनों से भरी हुई है।
आइए, राजनीति और अपने छोटे-छोटे स्वार्थों को छोड़कर,
एक शुद्ध हृदय, साफ़ मन और निष्कलुष आत्मा के साथ
हम सब इस पुरुषार्थी व्यक्ति के साथ खड़े हों।
यह सिर्फ़ किसी नेता की बात नहीं,
यह उस व्यक्ति की बात है जिसने अपना पूरा जीवन
भारत माता के चरणों में अर्पित कर दिया है।
🇧🇩🇵🇰🇨🇳2035 का सीन🇨🇳🇵🇰🇧🇩
मुसलमान 50% हो गए है। आज केंद्र सरकार के चुनाव का रिजल्ट आया है भीम आर्मी के साथ मिलकर AIMIM की सरकार बन गई है। असुदूद्दीन ओवैसी भारत का प्रधानमन्त्री बन गया है।
छहः महीने पहले पूर्व प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी राजनीती से सन्यास ले चुके हैं।
आज ओवेसी के नेतृत्व में मुस्लिम सरकार बनते ही हिन्दुस्तान को मुस्लिम मुल्क घोषित कर शरीया कानून लागू दिया गया है जो की उनका मुख्य चुनावी वादा था।
देश में जगह जगह मन्दिरो को तोड़ा जा रहा है देश भर में मस्जिदों का निर्माण जोरो शोरो से चल रहा है।
इधर बांग्लादेश-पाकिस्तान-चीन ने मिलकर भारत पर हमला कर दिया है सेना उधर बाॅर्डर पर मर रही है इधर देश में भयंकर गृह युद्ध चल रहा है।
कानून व्यवस्था पूरी मुस्लिमो के हाथ में है हिन्दू जगह जगह सड़क पर KAटे जा रहे है।
(मरने वाले लोगो को याद आ रहा है कि 2026 में वो मोदी को इसलिए गाली दे रहे थे कि प्याज महंगी है)
रोहिंग्या मुल्ले बंगलो में घुस कर कब्जा कर रहे है और बड़े बड़े घर की हिन्दू लड़कियो को रखेल बनाया जा रहा है या बाजारों में बोली लगा कर बेचा जा रहा है।
आज तक जिन हिन्दू नेताओ ने हिन्दुओ को सेक्युलर बनाए रखा था उनमे से बहुत से नेताओ ने इस्लाम अपना लिया और कई ने अपनी हजारो करोड़ की दौलत लेकर विदेशो में बस गए। बजरंग दल, RSS, BJP के लोगो को खोज खोज के मारा जा रहा है
पर मिडिल क्लास और गरीब हिन्दू इन नरपिशाचो के बीच यहाँ खाया जा रहा है। उसकी बीवी, लडकिया रोड पर बलात्कार कर के मारी जा रही है या रखैल बनाई जा रही है और लड़को को गिलिमा बनाया जा रहा है।
कैसा लगा?
आत्मा काँप गई ना पढ़कर ही ?
ये सिर्फ कल्पना नही है
ये सब चीजे 1990 में कश्मीर में हुई थी.. कश्मीर में बचे 3545 कश्मीरी हिंदुओं को पुछ लिजिए कि 19/01/1990 को दिन 5,00,000 कश्मीरी हिंदूओ, उसकी बहन-बेटियो-घरो के साथ क्या क्या हुआ था?
मुर्ख मत बनो तुमको मोदी के रूप में एक हिन्दू प्रधानमंत्री मिला है. उसको काम करने दो.. अगर उससे दिक्कत है तो योगी जी को पीएम बनाने की मांग रखिए
भरा नही जो भावो से
बहती जिसमे रसधार नही
हिन्दू नही वो गद्दार है जिसको अपने देश का प्यार नहीं !!
जनहित का ये message सिर्फ आप सब के पढने के लिए नहीं है..
मुगलों, चंगेजों, तुर्कों आदि ने हमारे हिंदू पूर्वजों अत्याचार पर किये
मैं नहीं भूली उस कामपिपासु अलाउद्दिन को, जिससे अपने सतित्तव को बचाने के लिये रानी पद्ममिनी ने 14000 स्त्रियो के साथ जलते हुए अग्निकुंड में कूद गयी थीं।
मैं नहीं भूली उस जालिम औरंगजेब को, जिसने संभाजी महाराज को इस्लाम स्वीकारने से मना करने पर तडपा तडपा कर मारा था।
मैं नहीं भूली उस जिहादी टीपु सुल्तान को, जिसने एक एक दिन में लाखो हिंदुओ का नरसंहार किया था।
मैं नहीं भूली उस जल्लाद शाहजहाँ को, जिसने 14 वर्षकी एक ब्राह्मण बालिका के साथ अपने महल में जबरन बलात्कार किया था।
मैं नहीं भूली उस बर्बर बाबर को, जिसने मेरे श्री राम प्रभुका मंदिर तोडा और लाखों निर्दोष हिंदुओ का कत्ल किया था।
मैं नहीं भूली उस शैतान सिकन्दर लोदी को, जिसने नगरकोट के ज्वालामुखी मंदिर की माँ दुर्गा की मूर्ति के टुकडे कर उन्हे कसाइयो को मांस तोलने के लिये दे दिया था।
मैं नहीं भूली उस धूर्त ख्वाजा मोइन्निद्दिन चिस्ती को, जिसने संयोगीता को इस्लाम कबूल ना करने पर नग्न कर मुगल सैनिको के सामने फेंक दिया था।
मैं नहीं भूली उस निर्दयी बजीर खान को, जिसने गुरूगोविंद सिंह के दोनो मासूम फतेहसिंग और जोरावार को मात्र 7 साल और 5 बर्ष की उम्र में इस्लाम ना मानने पर दीवार में जिन्दा चुनवा दिया था।
मैं नहीं भूली उस जिहादी बजीर खान को, जिसने बन्दा बैरागी की चमडी को गर्म लोहे की सलाखो से तब तक जलाया जब तक उसकी हड्डियां ना दिखने लगी मगर उस बन्दा वैरागी ने इस्लाम स्वीकार नही किया!
मैं नहीं भूली उस कसाई औरंगजेब को, जिसने पहले संभाजी महाराज की आँखों मे गरम लोहे के सलिए घुसाए, बाद मे उन्हीं गरम सलियों से पुरे शरीर की चमडी उधेडी, फिर भी संभाजी ने हिंदू धर्म नही छोड़ा था।
मैं नहीं भूली उस नापाक अकबर को, जिसने हेमू के 72वर्षीय स्वाभिमानी बुजुर्ग पिता के इस्लाम कबूल ना करने पर उसके सिर को धड़ से अलग करवा दिया था।
मैं नहीं भूली उस वहशी दरिंदे औरंगजेब को, जिसनेधर्मवीर भाई मतिदास के इस्लाम कबूल न करने पर बीच चौराहे पर आरे से चिरवा दिया था।
हम हिंदुओ पर हुए अत्याचारो को बताने के लिए शब्द और पन्ने कम हैं, यदि इस पोस्ट को पढ़कर मेरी तरह आपका खून भी खौला हो, तो पोस्ट को अपने मित्रों के साथ शेयर ज़रूर करें।
यही गजवा ए हिन्द है
🙏🚩🚩
कुछ हिन्दू इसे पढ़ने समझने के बाद अब भी शेयर नहीं करेंगे।
🚩जय श्री राम 🚩
🇮🇳वन्दे मातरम् 🇮🇳
उस मित्र को बधाई जिसने जानकारी एकत्र की और अपने समृद्ध भारत देश की 1000 साल की शासन व्यवस्था का परिचय हम तक पहूचाया
1 = 1193 मुहम्मद गोरी
2 = 1206 कुतुबुद्दीन ऐबक
3 = 1210 आराम शाह
4 = 1211 इल्तुतमिश
5 = 1236 रुकनुद्दीन फ़िरोज़ शाह
6 = 1236 रज़िया सुल्तान
7 = 1240 मुइज़ुद्दीन बहराम शाह
8 = 1242 अलाउद्दीन मसूद शाह
9 = 1246 नसीरुद्दीन महमूद
10 = 1266 गियासुद्दीन बलबन
11 = 1286 काई खुसरो
12 = 1287 मुइज़ुद्दीन कैकुबाद
13 = 1290 शमुद्दीन व्यापार
1290 गुलाम वंश का अंत
खिलजी वंश
1 = 1290 जलालुद्दीन ख़िलजी
2 = 1296 अलादीन खिलजी
4 = 1316 सहाबुद्दीन उमर शाह
5 = 1316 कुतुबुद्दीन मुबारक शाह
6 = 1320 नसीरुद्दीन खुसरो शाह
7 = 1320 खिलजी वंश का अंत
(शासनकाल - लगभग 30 वर्ष)
*तुगलक वंश*
1 = 1320 गयासुद्दीन तुगलक प्रथम
2 =1325 मुहम्मद बिन तुगलक द्वितीय
3 1351 फ़िरोज़ शाह तुगलक
4 1388 गियासुद्दीन तुगलक द्वितीय
5 =1389 अबू बकर शाह
6 = 1389 मुहम्मद तुगलक तृतीय
7 1394 सिकन्दर शाह प्रथम
8 1394 नसीरुद्दीन शाह द्वितीय
9 =1395 नुसरत शाह
10 = 1399 नसीरुद्दीन मुहम्मद शाह
11 = 1413 दौलत शाह
1414 *तुगलक वंश का अंत*
शासनकाल - लगभग 94 वर्ष
*सैय्यद वंश
1 = 1414 ख़िज़र खान
2 = 1421 मुइज़ुद्दीन मुबारक शाह
3 = 1434 मुहम्मद शाह चतुर्थ
4 = 1445 अलाउद्दीन आलम शाह
1451 *सैय्यद वंश का अंत*
शासनकाल - लगभग 37 वर्
1 = 1451 बहलोल लोदी
2 = 1489 सिकन्दर लोदी द्वितीय
3 = 1517 इब्राहिम लोदी1526 *लोदी वंश का अं
मुग़ल वंश*
1 = 1526 ज़हरुद्दीन बाबर
2 = 1530 हुमायूँ1539 *मुग़ल वंश का असूरी राजवंश
1 = 1539 शेरशाह सूरी
2 = 1545 इस्लाम शाह सूरी
3 = 1552 महमूद शाह सूरी
4 = 1553 इब्राहिम सूरी
5 = 1554 फ़िरोज़ शाह सूरी
6 = 1554 मुबारक खान सूरी
7 = 1555 सिकंदर सूरीसूरी का अंत
मुगल वंश फिर से शुरू हुआ*
1 = 1555 हुमायूँ पुनः गद्दी पर बैठा
2 = 1556 जलालुद्दीन अकबर
3 = 1605 जहाँगीर सलीम
4 = 1628 शाहजहाँ
5 = 1659 औरंगजेब
6 = 1707 शाह आलम प्रथम
7 = 1712 जहादार शाह
8 = 1713 फरुखसियर
9 = 1719 रायफुडु सिल्वर
10 = 1719 रायफुद दौला
11 = 1719 नेकुशियार
12 = 1719 महमूद शाह
13 = 1748 अहमद शाह
14 = 1754 आलमगीर
15 = 1759 शाह आलम
16 = 1806 अकबर शाह
17 = 1837 बहादुर शाह जफर1857 *मुगल वंश का अंत
शासनकाल - लगभग 315 वर्ष।
ब्रिटिश राज (वायसराय)*
1 =1858 लॉर्ड कैनिंग
2 =1862 लॉर्ड जेम्स ब्रूस एल्गिन
3 1864 लॉर्ड जॉन लॉरेंस
4 =1869 लॉर्ड रिचर्ड मेयो
5 =1872 लॉर्ड नॉर्थबुक
6 1876 लॉर्ड एडवर्ड लेटिनलॉर्ड
7 =1880 लॉर्ड जॉर्ज रिपन
8 1884 लॉर्ड डफरिन
9 = 1888 लॉर्ड हनी लैंसडाउन
10 =1894 लॉर्ड विक्टर ब्रूस एल्गिन
11 =1899 लॉर्ड जॉर्ज कर्जन
12 =1905 लॉर्ड टीवी गिल्बर्ट मिंटो
13 1910 लॉर्ड चार्ल्स हार्डिंग
14 = 1916 लॉर्ड फ्रेडरिक चेम्सफोर्ड
15 =1921 लॉर्ड रूक्स इसाक राइडिंग
16 = 1926 लॉर्ड एडवर्ड इरविन
17 = 1931 लॉर्ड फ्रीमैन वेलिंगटन
18 =1936 लॉर्ड अलेक्जेंडर लिनलिथगो
19 =1943 लॉर्ड आर्चीबाल्ड वेवेल
20 =1947 *लॉर्ड माउंटबेटन*
*लगभग 90 साल का ब्रिटिश शासन समाप्त
स्वतंत्र भारत, प्रधानमंत्री
1 = 1947 *जवाहरलाल नेहरू*
2 = 1964 *गुलजारीलाल नंदा*
3 = 1964 *लाल बहादुर शास्त्री*
4 = 1966 *गुलजारीलाल नंदा*
5 = 1966 *इंदिरा गांधी*
6 = 1977 *मोरारजी देसाई*
7 = 1979 *चरण सिंह*
8 = 1980 *इंदिरा गांधी*
9 = 1984 *राजीव गांधी*
10 = 1989 *विश्वनाथ प्रताप सिंह*
11 = 1990 *चंद्रशेखर*
12 = 1991 *पी. वी. नरसिम्हा राव*
13 =अटल बिहारी वाजपेई*
14 = 1996 *एच. डी. देवगौड़ा*
15 = 1997 *आई. के. गुजराल*
16 =1998 *ए. बी. वाजपेयी*
17 =2004 *डॉ. मनमोहन सिंह*
18 = 2014 से *नरेंद्र मोदी
विदेशियों और अंग्रेजों की गुलामी से 800 साल बाद
अब बताओ अल्पसंख्यक कौन हैं
यह राष्ट्र वर्षों के संघर्ष के परिणामस्वरूप आज भी एक राष्ट्र के रूप में जीवित है
मित्रों... भारत का इतिहास पढ़ें और इसे दस अन्य लोगों के साथ साझा करें, इसे एकत्र करके भेजने वाले व्यक्ति को कितना समय लगा होगा, उनकी मेहनत बेकार नहीं जानी चाहिए, इस महत्वपूर्ण जानकारी को अधिक से अधिक ग्रुप में भेजें
4 मई को चुनाव भले ही SIR के कारण ममता बनर्जी हार गयीं हो, पर बीजेपी को झटके पर झटके दें रही हैँ.
3 महीने शांत रहने के बाद बंगाल की शेरनी मैदान में है और सबसे पहले जीत सुप्रीम कोर्ट में 20 बागी TMC सांसदों के खिलाफ अयोग्य नोटिस जारी होने की है.
दूसरी जीत बागी विधायकों की हो रही घर वापसी है
3 विधायक वापिस आ चुके हैँ.
तीसरी बडी जीत कोलकाता हाईकोर्ट द्वारा Tmc का बैंक अकॉउंट दोबारा TMC को इस्तेमाल करने देने की परमिशन है. भले ही कुछ बंदिश है पर खजाना ममता के हाथ में ही है.
चौथा, 2 दिन पहले सड़कों पर दोबारा उतरी ममता
के लिए बंगाल के लोगों का क्रेज़ है जो अभी खत्म नहीं हुआ, शुबेन्द्र अधिकारी को लोग जानते ही नहीं
5 वा झटका TMC का कांग्रेस में विलय हो सकता है, खबरों का बाजार गर्म है फिलहाल.
मोदी पूरा ज़ोर लगाकर इलेक्शन जीत गए, पर ममता का जनाधार नहीं खत्म कर सके. 😊
वामपंथ की ट्रेन किस किस स्टेशन पर रुकती आई है...
पहले उद्योग और व्यवसाय पर रुकी. वहां ट्रेड यूनियन लीडर्स उतरे, संपन्नता और समृद्धि का नाश किया.
फिर कृषि पर रुकी... वहां नक्सली उतरे, कृषि का नाश किया और साथ में गांव गांव तक हिंसा फैलाई.
फिर अर्थव्यवस्था के जंक्शन पर रुकी. उसमें से वेलफेयर और सब्सिडी वाला माल उतारा गया.
फिर शिक्षा और कला के स्टेशन पर रुकी. वहां झोला छाप कॉमरेड उतरे, कलाकार और प्राध्यापक बन कर. समाज की सोचने समझने की क्षमता का नाश किया.
फिर न्याय के स्टेशन पर रुकी... वामपंथी उतर कर न्यायाधीश की कुर्सी पर बैठ गया और समाज को न्याय के स्थान पर संघर्ष का नैरेटिव परोस दिया.
फिर परिवार के स्टेशन पर रुकी... वहां फेमिनिस्ट डीडी उतरी और परिवार को तोड़ा, स्त्रियों को असुरक्षित और बच्चों को अनाथ किया. युवाओं को समलैंगिक और बच्चों को ट्रांस बनने को प्रेरित किया…
अज कल वामपंथ की ट्रेन “आंदोलन” के क्षेत्र में उतरी है…
वामपंथ ने “आंदोलन” नाम की इस ट्रेन के लिए दो ड्राइवर उतारें है…
अजीत भारती और अभिजीत दीपिके… दोनों बारी बारी से ड्यूटी कर रहे हैं बस…
देश की जनता एक गंभीर प्रश्न करना चाह रही है मीडीया और न्यूज चैनलों *news18, *znews, aajtak से कि ""TV debate "" पर एक अस्तित्व हिन निराधार और बिना जनाधार वाले राजनीतिक दल ""CPI,CPM "" को क्यों बुलाते हो ??? यह अब तो राष्ट्रीय पार्टी के रूप में भी नहीं जाना जाता ,
जिस पार्टी का प्रतिनिधित्व 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित राज्यों में नगण्य हो , सिर्फ केरल में सिमट गया हो उसे राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा देकर टी वी डीबेट पर बुलाना जनता और अन्य दलों को अवहेलना करना सिद्ध करता है ।
वो भी घोर आश्चर्य कि हर बार CPI,CPM का प्रवक्ता एक ही व्यक्ति नाम " विवेक श्रीवास्तव" ,जिसे संवाद करने का ढ़ंग नहीं , वो अपने आप को इतना ज्ञानी समझता है कि हिन्दू सन्यासी या धर्म गुरु के साथ भी छिछोलापन जैसा बहस करता है।
आंकड़ों के अनुसार CPI,CPM एक ऐतिहासिक पार्टी बन गया है, जिसका आधिपत्य एक समय में बंगाल, त्रिपुरा में था । 2004 के लोकसभा में इसके 60 सांसद थे ,जो " UPA" सरकार को बाहर से समर्थन दे रखा था ,पर 2024 में इसकी संख्या लोकसभा में "8" पर सिमट गया है। राज्यों की बात करें तो सिर्फ केरल में वामपंथी कांग्रेस के साथ सरकार चला रहा है ।
ऐसे पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी का ओहदा क्यों दिया जा रहा है??? कि उसके प्रवक्ता को हर डीबेट में बुलाया जाता है।
देश में बहुजन समाज पार्टी, अकाली दल, नेशनल कांफ्रेंस, बीजू जनता दल, वाईएसआर कांग्रेस जैसे कई दल हैं जिनके पास कम्युनिस्टों से कई गुना अधिक सांसद, विधायक और वोट बैंक है, लेकिन उन्हें कभी भी हर डिबेट में नहीं बुलाया जाता। फिर एक ऐसी पार्टी जिसके पास देश के कुल वोटों में एक प्रतिशत से भी कम वोट है, उसे हर शाम हर चैनल पर बिठाकर क्या संदेश दिया जा रहा है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि हर पार्टी का प्रवक्ता बदलते रहता है पर वामपंथी के पास एक ही ज्ञानी बचा हुआ है विवेक श्रीवास्तव,जो हर चैनल पर मौजूद रहता है । और यह व्यक्ति किसी चुनाव में जनता द्वारा चुना हुआ प्रतिनिधि नहीं है, किसी बड़े जन-आंदोलन का नेता नहीं है, फिर भी वह हर विषय पर, चाहे वह हिंदू धर्म हो, राम मंदिर हो, सेना हो, विदेश नीति हो, आर्थिक नीति हो, हर विषय पर वामपंथी दृष्टिकोण को ही अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत करता है। अर्थात क्या ""चैनलों "" ने जानबूझकर एक ऐसे व्यक्ति को चुन लिया है जो हर क्षेत्र में बेतूका बकवास कर "टी वी"का TRP बढ़ाए???
आज पूरी दुनिया जानती है कि चीन किस तरह से अपने विस्तारवादी एजेंडे के लिए दुनिया के अलग-अलग देशों में मीडिया, शिक्षा संस्थानों और थिंक टैंकों में पैसा लगाता है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के कई देशों में इस बात के प्रमाण सामने आए हैं कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी वहां की यूनिवर्सिटीज और मीडिया को फंडिंग करके अपने अनुकूल नैरेटिव बनवाती है।
तो क्या भारत में भी चीन से फंडिंग होने वाले न्यूज नेटवर्क नहीं है?? जो भारत विरोधी "propaganda""फैलाने का काम करता है। यही बामपंथी किसान आंदोलन,"caa", काक्रोच गिरोह में सक्रिय था।
ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि कहीं कम्युनिस्ट पार्टी, जो कि विचारधारा के स्तर पर आज भी चीन को ही अपना आदर्श मानती है, जिसने 1962 के युद्ध में भी चीन का समर्थन किया था, जिसने संसद में चीन के खिलाफ प्रस्ताव का विरोध किया था, उस पार्टी को टीवी पर जबरदस्ती जिंदा रखने के पीछे कहीं उसी विस्तारवादी फंडिंग का खेल तो नहीं है ??? क्या कुछ चैनलों को यह फंडिंग सीधे या परोक्ष रूप से इस शर्त पर दी जाती है कि वे वामपंथी विचारों को प्राइम टाइम में जगह देंगे और राष्ट्रवादी विचारों को बदनाम करेंगे। यह एक गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय है। जांच के घेरे में इन चैनलों को लेना चाहिए।
भारत की जनता ने कम्युनिस्ट पार्टी और उसकी विचारधारा को पूरी तरह से नकार दिया है। उसके विचारों को न तो कोई पसंद करता है और न समर्थन करता है। फिर भी अगर टीवी चैनल उसे जिंदा रखने की कोशिश कर रहे हैं तो यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के दुरुपयोग के अलावा कुछ नहीं है। इसे रोकना ही देश हित में होगा।
.......इस तस्वीर मे मोदीजी के हाथ मे जो राइफल है....उसका नाम "शेर" है....."AK-203 शेर"....आज उत्तर प्रदेश के अमेठी के Indo Russian Rifles Private Limited प्लांट मे इसका सफल परीक्षण किया गया........
* Make In India के तहत बनी ये 100% स्वदेशी Assault Rifle है.
* 2023 में UP के अमेठी मे भारत और रूस के joint venture के रूप मे इसके निर्माण का काम शुरू किया गया था.
* ये 700 राउन्ड/ मिनट फायरिंग करती है....और इसकी रेंज 800 मीटर है.
* सितंबर मे इसे सेना मे शामिल किया जाएगा....ये INSAS राइफल की जगह लेगी.
.........10 साल का समय लम्बा होता है....लेकिन इतना लम्बा भी नहीं होता की हम सब कुछ भूल जाएं...हमे कुछ याद ही ना रहे.....10 साल पहले हमारी सेना के पास ना बुलेट प्रूफ जैकेट थी....ना हथियार...यहां तक कि ढंग के जूते तक नहीं थे........2016 में पठानकोट एयरबेस पर जब हमला हुआ था....हमारे जवान दोनाली राइफल से लड़ रहे थे.......
........मोदी से शिकायत हो सकती है....लेकिन मोदी ने जो किया है देश के लिए....उसके आगे वो शिकायतें कहीं नहीं टिकती.....और जो शिकायतें हैं.....उनका निपटारा कोई और नहीं करेगा....दूसरों ने तो सिर्फ समस्याए पैदा की है....समाधान तो मोदी ने ही किया.....और आगे भी यही करेंगे.....दूसरों से तो कोई उम्मीद ही नहीं है....भरोसा ही नहीं बचा....
......मोदीजी के राज मे देश हर रोज एक नई कामयाबी लिख रहा है....और ये सिलसिला ऐसे ही बना रहेगा...
जयहिंद 🇮🇳🚩
आज जब पूरी दुनिया आर्थिक मंदी, युद्ध और अस्थिरता के दौर से गुजर रही है, तब भारत मजबूती के साथ दुनिया का नेतृत्व करता दिख रहा है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था का मौजूदा हाल:
* अमेरिका: कर्ज अपनी GDP के
130% के पार पहुंच चुका है।
* यूरोप: कई बड़े देशों की GDP ग्रोथ
निगेटिव में जा चुकी है।
* जापान और चीन: मंदी और रियल
एस्टेट संकट से जूझ रहे हैं।
* रूस: युद्ध और कड़े अंतरराष्ट्रीय
प्रतिबंधों का सामना कर रहा है।
* पड़ोसी देश: कंगाली और भारी
आर्थिक संकट के दौर में हैं।
यह कोई संयोग नहीं है कि जहां दुनिया पीछे जा रही है,
वहीं भारत सबसे तेजी से बढ़ती
प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
यह पिछले एक दशक की दूरदर्शी नीतियों और रणनीतिक फैसलों का परिणाम है।
दशकों तक भारत सिर्फ दुनिया के लिए हथियारों, दवाओं, तकनीक और सस्ते सामान का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार बना रहा। लेकिन 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' की नीतियों ने इस पूरे समीकरण को बदल दिया।
* जो देश कभी रक्षा उपकरणों का
सबसे बड़ा आयातक था, आज
वही भारत दुनिया को ब्रह्मोस और
आकाश जैसी मिसाइलें निर्यात
करने की दिशा में आगे
बढ़ चुका है।
* फार्मा, टेक और मैन्युफैक्चरिंग में
भारत अब खुद निर्माता बनकर
उभरा है।
वैश्विक मंचों पर भारत का रणनीतिक कद ऐसा है कि दुनिया की महाशक्तियां अपने व्यापार और कूटनीति के लिए भारत की ओर देख रही हैं। जब भारत आयातक से निर्यातक बनता है, तो वैश्विक बाजार के कई पुराने समीकरण टूटते हैं। स्वाभाविक है कि वे ताकतें दबाव बनाने की कोशिश करेंगी जो भारत को फिर से एक कमजोर और निर्भर बाजार के रूप में देखना चाहती हैं।
लेकिन आज का भारत अपने हितों को प्राथमिकता देना जानता है। यह आत्मविश्वास से भरा नया और आत्मनिर्भर भारत है।
अमित शाह को भारत के गृह मंत्री के रूप में आप 100 में से कितने नंबर देंगे?
1️⃣ 0–25 अंक
2️⃣ 26–50 अंक
3️⃣ 51–75 अंक
4️⃣ 76–100 अंक
💬 कमेंट में अपना विकल्प और नंबर जरूर बताएं।
@PNRai1 मोदी जी ने इनको मीटिंग करके और मैटर सुलझा कर सर पे चढ़ा दिया, असल में ये लोग इस लायक नहीं थे लेकिन इन 2 कौड़ी के लोगो को हीरो भाजपा ने ही बनाया है
अब भुगते भाजपा
जंगल में मोर नाचा किसने देखा?
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक और शानदार फैसला। लाखों लोगों को राहत मिलेगी।
एकांत में दिया गया जाति सूचक गाली एससी एसटी एक्ट की परिधि में नहीं आता। (गाली सार्वजनिक रूप से होनी चाहिए। पीड़ित के अलावा अन्य लोगों को भी सुनाई देना चाहिए)
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SC/ST Act की धारा 3(1)(r) और 3(1)(s) के तहत अपराध के लिए “public view” यानी सार्वजनिक दृष्टि/उपस्थिति की शर्त महत्वपूर्ण है।
यदि कथित जातिसूचक अपमान एक बंद कमरे के भीतर हुआ हो और वहां जनता/सार्वजनिक रूप से देखने-सुनने वाले लोग मौजूद न हों, तो केवल उस आधार पर SC/ST Act का अपराध स्वतः नहीं बन जाता।
इसी आधार पर कोर्ट ने एक स्कूल मैनेजर के खिलाफ SC/ST Act की कार्यवाही रद्द कर दी।
*The role of RSS in Indian independence movement*
🚩भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में RSS का क्या योगदान है?
आपने सोशल मीडिया पर ऐसे कई पोस्ट देखे होंगे जिनमें कहा जाता है कि RSS ने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग नहीं लिया।
इसके अलावा, RSS ने अंग्रेजों के खिलाफ भारतीयों के बजाय अंग्रेजों का पक्ष लिया।
आइए कुछ तथ्यों के साथ इस प्रोपेगैंडा को तोड़ते हैं।
RSS के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार स्वयं एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे।
1910 में, वह बंगाल में 'अनुशीलन समिति' से जुड़े, जो ब्रिटिश शासन के खिलाफ सशस्त्र क्रांति की वकालत करने वाली एक गुप्त संस्था थी। उन्होंने क्रांतिकारियों को हथियार और गोला-बारूद सप्लाई करके बंगाल और देश के अन्य हिस्सों के क्रांतिकारियों के बीच एक कड़ी (लिंक) के रूप में काम किया।
वह बाद में कांग्रेस में शामिल हुए, लेकिन उनकी सोच उस समय की इंडियन नेशनल कांग्रेस से काफी आगे थी।
1920 में, इंडियन नेशनल कांग्रेस के नागपुर अधिवेशन में, डॉ. हेडगेवार ने स्वागत समिति में सेवा दी और एक प्रस्ताव रखा जिसमें स्पष्ट रूप से मांग की गई कि कांग्रेस अपना अंतिम लक्ष्य 'पूर्ण स्वराज्य' यानी पूर्ण स्वतंत्रता घोषित करे।
लेकिन उस समय के कांग्रेस नेतृत्व ने स्वराज्य की तात्कालिक मांग पर ही टिके रहना चुना और कांग्रेस को 1929 के लाहौर अधिवेशन में 'पूर्ण स्वराज्य' की घोषणा करने में एक दशक से अधिक समय लग गया।
उन्होंने 1920 से असहयोग आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया और 1921 में अपने औपनिवेशिक विरोधी भाषणों के लिए गिरफ्तार किए गए, जिसके लिए उन्हें एक साल के कारावास की सजा मिली।
जेल से रिहा होने के तीन साल बाद, उन्होंने वर्ष 1925 में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, व्यक्ति-निर्माण और स्वयंसेवकों के चरित्र-निर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शुरुआत की।
डॉ. जी का विजन स्वयंसेवकों की एक ऐसी सेना तैयार करना था जो राष्ट्र के एक इशारे पर तत्पर रहे, जिसे आज तक देखा जा सकता है।
RSS की स्थापना के बाद भी, डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार अपनी औपनिवेशिक विरोधी गतिविधियों में सक्रिय रहे।
1930 में, उन्होंने 'जंगल सत्याग्रह' में भाग लिया, जिसके बाद उन्हें फिर से गिरफ्तार किया गया और 9 महीने के लिए जेल भेज दिया गया।
देश भर के लाखों स्वयंसेवक ब्रिटिश राज के खिलाफ सभी आंदोलनों में सक्रिय रूप से भाग ले रहे थे। RSS के लोगों ने पूरे भारत में कई क्रांतिकारियों को शरण, हथियार और गोला-बारूद प्रदान किया।
यहाँ तक कि विभाजन के दौरान भी, RSS भारतीय सेना के साथ मिलकर काम कर रहा था ताकि भारत की ओर आ रहे शरणार्थियों की रक्षा की जा सके और उन्हें उस समय की पाकिस्तानी सेना द्वारा मारे जाने से बचाया जा सके।
तत्कालीन RSS प्रमुख गोलवलकर ने कश्मीर के महाराजा हरि सिंह को मनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने भारत के साथ कश्मीर के विलय पत्र (Instrument of Accession) पर हस्ताक्षर किए।
RSS स्वयंसेवकों ने दादरा और नगर हवेली को भारत में मिलाने तथा गोवा को मुक्त कराने और उसे भारत में एकीकृत करने में अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
1962 के भारत-चीन युद्ध में RSS की भूमिका भी सर्वविदित है।
आज तक, भारत के किसी भी हिस्से में प्राकृतिक आपदा के समय RSS मदद के लिए आगे आने वाला पहला संगठन होता है।
जो लोग RSS के बारे में गलत जानकारी फैला रहे हैं और जो लोग RSS से नफरत कर रहे हैं, वे नफरत करना जारी रख सकते हैं क्योंकि संगठन ने अपने निष्काम त्याग के 100 वर्ष पूरे कर लिए हैं और अपनी अंतिम सांस तक राष्ट्र की सेवा करना जारी रखेगा।"