बिहार की जनता कंगाल, नेता लोग मालामाल!
देख लीजिए, सम्राट चौधरी कैबिनेट ने क्या फैसला लिया है।
सीधे 160 प्रतिशत वेतन-भत्ते की बढ़ोतरी!
25 हजार से सीधे 65 हजार।
दैनिक भत्ता 1 हजार से बढ़ाकर 3 हजार।
और कितना विकास चाहिए, बिहार वालों?
बताइए तो, बिहार के शिक्षक आखिर कम मेहनत करते हैं क्या? ��
बेचारे इतने मेहनत से पढ़ाते हैं कि क्लासरूम में ही सोना पड़ता है। सोने के लिए बेहतर बेड नहीं है, तो बेचारे बेंच पर ही नींद पूरी कर लेते हैं। और नींद में कोई डिस्टर्ब न करे, इसलिए दिल पर पत्थर रखकर बच्चों को छुट्टी भी दे देते हैं! 😂
इतने मेहनतकश शिक्षकों के साथ सरकार कितनी नाइंसाफी कर रही है, देखिए सातवें वेतनमान का लाभ तक नहीं दे रही।
कभी ₹1,500 से शुरुआत हुई थी, आज करीब 50 हजार तक पहुंच गई सैलरी… और ऊपर से वोट के लालच में राज्यकर्मी का दर्���ा भी दे दिया गया।
अब सवाल ये है कि आखिर बिहार के इतने मेहनतकश शिक्षक सातवें वेतनमान के हकदार नहीं हैं क्या? 🤔
सरकार को इनकी मेहनत का सम्मान करना चाहिए… आखिर बेंच पर सोना भी कोई आसान काम थोड़े ही है! 😄
यह ताजा - ताजा तस्वीर मुजफ्फरपुर से आई है। जहां शिक्षक बेंच पर सो कर खाली क्लास ले रह�� हैं।
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कोई ई सरवा के कान के नीचे दो लगाते हुए काहे नहीं बोल रहा, ले हई बस्ता, जो स्कूल। नेता बनोगे? भाग यहा��� से।
यह है आदित्य यादव। पटना पुलिस के खिलाफ धरना पर बैठा है। या शायद बैठाया गया है। इसके माँ-बाप इसको बर्बाद करने में लगे हैं, ताकि इसको वायरल करके बेचा जा सके और अपनी जेब भरी जा सके।
यह बिहार प्रदेश रोगियों का हो गया है। अब वायरल प्रदेश भी कह सकते हैं। वायरल होने के लिए लोग कुछ भी कर सकते हैं, जो आप और हम जैसे सामान्य व्यक्ति सोच भी नहीं सकते।
इस आदित्य यादव को छह साल का बताया जा रहा है। पहले तो यह गलत है। करीब दो साल से इसको मार्केट में घूमते हुए मैं देख रहा हूँ। इसको बस मीडिया में आना है और वायरल होना है। इसके प्रयास में यह बहुत दिनों से लगा है।
कभी तेज प्रताप के लिए वोट माँगने महुआ जाता है। इस तरह वीडियो बनाता है, जैसे वह महुआ का ही हो और अचानक तेज प्रताप से मिल गया हो। तेज प्रताप पूछते हैं, मैंने यहाँ क्या काम किया है? बच्चा झट से कहता है मेडिकल कॉलेज अपने दिया है।
समझिए, यह 2025 में इतना नौटंकी कर रहा था। बच्चे को सीखा-पढ़ाकर इसके माँ-बाप ही भेज रहे थे, ताकि तेज प्रताप कुछ पैसा दे दें।
फिर यह कुछ ही दिनों के बाद तेजस्वी यादव के यहाँ अचानक पहुँच जाता है, गुलाब लेकर। लगता है बीजेपी को गाली देने। मीडिया भी खूब खबर चलाती है।
फिर यह जदयू ऑफिस में दिखता है। वहाँ नीतीश और निशांत की तारीफ करता है।
सम्राट जब मुख्यमंत्री ��ने, तो यह नौटंकीबाज बच्चा आवास के बाहर जाकर हल्ला करता है।
इसके माँ-बाप इसको लेकर हर जगह घूमते हैं। इनको चाहिए कि बच्चे को स्कूल ले जाकर छोड़ें। लेकिन ये लोग इसको आंदोलन में ले जा रहे हैं।
यह कथित नौटंकीबाज वायरल बॉय इससे पहले बंटी यादव के घर भी गया था।
अब देखिए, यह तो एक ठीक था। इसको साथ मिल गया है झापलाश वकील का। यह वकील हर विवादित मुद्दे पर कानून का एक्सपर्ट बनकर ज्ञान टेकता है। कोई भी वायरल विवाद हो, उसमें घुसकर अपना चेहरा चमकाता है।
दोनों, वायरल होने की इच्छा पाले एक साथ हो गए हैं। धरना हो रहा है। 📷 भाग ससुर...
यहाँ इसके समर्थक आएँगे ज्ञान देने। तो मोटका बच्चा राधे-राधे वाला जब गलत है, उसके माँ-बाप गलत हैं, जो अपने बच्चे को बाबा बनाकर पैसा कमा रहे हैं, तो यह भी गलत है।
राजनीति और धर्म में नौटंकी नहीं होनी चाहिए।
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यही RS की बोतल पटना के बाढ़ में चार युवक गटक रहे थे। समय सुबह करीब 10 बजे का था। शराब पीने के कुछ देर बाद ही चारों की हालत बिगड़ने लगी और उनके मुंह से झाग निकलने लगा।
तबीयत बिगड़ती देख ग्रामीणों ने चारों को अस्पताल पहुंचाया। वहां प्राथमिक इलाज के ���ाद डॉक्टरों ने सभी को पटना के NMCH रेफर कर दिया।
NMCH में इलाज के दौरान चारों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान बेढ़ना गांव निवासी शशि कुमार (32), विकास राम (40), पंकज सिंह (45) और निशु कुमार (30) के रूप में हुई है।
घटना शही थाना क्षेत्र के बेढ़ना गांव की बताई जा रही है। मौके से शराब की बोतल, खाली टेट्रा पैक और कुछ स्नैक्स भी मिले हैं।
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तेज प्रताप ने दिल्ली होटल कांड की निष्पक्ष जांच की मांग की है। मांग में इन सवालों को भी शामिल किया जाए।
1. मंत्री संजय सिंह पिटाए हैं या नहीं ?
2. अगर पिटाए हैं तो किस चप्पल से ? सैंडल, चमरा का चप्पल या स्लिपर ?
3. चप्पल कहां पड़ा? गाल पर या गा.. पड़ ?
4. मंत्री जी कहां तक माल चापे? ऊपर-ऊपर या नीचे तक गए थे ?
राजपूत नेता इतना बकलोल हो गए हैं कि पूछिए मत…
एक भू-मीडिया ने खबर चला द�� कि बिहार के एक मंत्री जी के साथ दिल्ली में कांड हो गया… माल लेने के चक्कर में चप्पल खा गए। सोशल मीडिया पर बिना नाम के खबर चलने लगी और कुछ पत्रकारों ने भी उसे आगे बढ़ा दिया। खूब चर्चा हुई। लोग अपने-अपने हिसाब से कयास लगाने लगे कि मंत्री कौन थे, कौन नहीं थे। लेकिन कुछ भी कन्फर्म नहीं था। बस हवा में तीर चल रहा था।
वही उड़ता हुआ तीर मंत्री संजय सिंह जी ने खुद लपक लिया। कहने लगे, “हम नहीं थे, कोई साबित कर दे तो कुर्सी छोड़ दूंगा।”
अरे भाई! आपने तो खुद ही सफाई देकर लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींच दिया।
पहले उस पत्रकार की मानसिकता समझते। वह तो इसी इंतजार में माइक लेकर सड़क पर खड़ा था कि आप कुछ बोलें, ताकि उसे आगे मसाला मिल सके।
जब आपने कोई गलती की ही नहीं, तो सफाई देने की जरूरत क्यों थी?
इतना भी तो समझना चाहिए कि हर अफवाह का जवाब देना जरूरी नहीं होता। कई बार जवाब देने से अफवाह खत्म नहीं होती, बल्कि सवाल और बड़ा हो जाता है।
और अगर आपका PR कोई देख रहा है तो कम से कम उसमें इतना दिमाग तो होना ��ाहिए कि आपको समझा सके कब बोलना है और कब चुप रहना है। या फिर वह भी… बकलोल है!
पता नहीं आपका PR कौन देखता है, लेकिन यह पहली बार नहीं है जब आप किसी विवाद में घिरे हों। इससे पहले भी कभी फोटो तो कभी वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चाएं होती रही हैं।
मैंने भी आपके बचाव में पोस्ट लिखा था। सिर्फ पोस्ट ही नहीं लिखा, कम से कम 20 साथियों से आपके समर्थन में पोस्ट करवाए। तब जाकर आपके खिलाफ चल रहा नैरेटिव कुछ हद त��� फेल हुआ।
लेकिन सवाल यह है कि कब तक आपके लिए कोई राजपूत लड़का मुफ्त में तलवार भांजता रहेगा?
अभी भी समय है। अपना PR मैनेजमेंट ठीक कीजिए। क्या बोलना है, क्या नहीं बोलना है। इस पर अच्छे और समझदार लोगों से सलाह लीजिए।
#SanjaySingh #LJPR #BiharNews #Rajput #HotelKand
यह वीडियो सीवान के उसी परिवा�� की लड़की का है, जिसके घर के पागल चाचा ने ��ारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को गाली दी थी। बाद में अंबेडकरवादियों ने उसकी पिटाई कर दी।
अब लड़की कह रही है कि “हम राजपूत हैं, वो छोटी जाति के हैं, इसलिए उन्हें मारना नहीं चाहिए था। उन्हें अधिकार ही नहीं है।”
यह किस युग में जी रहे हैं हम?
खैर, जिस घर का मुखिया ही जहरीला हो। उसके परिवार से इससे ज्यादा क्या ही उम्मीद रख सकते हैं।
अपना खाने का ठीक नहीं। घर पर प्लास्टर नहीं। लेकिन, यह बन गए बड़े जात! कहावत है, “खाई के ठीक ना बाजार में धक्का।”
ऐसी सोच रखने वाले व्यक्ति - परिवार के साथ कोई भी लोकतांत्रिक समाज सहानुभूति क्यों रखेगा?
गलती किसी ने भी की हो, सजा कानून देगा। लेकिन जाति के नाम पर किसी को छोटा समझने का अधिकार किसी को नहीं है।
#Siwan #rajput #ambedkar #दलित #Bihar
@InquisitiveS_ यह आंडू झा है। साले इनको पता नहीं है कि बिहार में यूनिवर्सिटिययों की क्या हालत है।कोई कॉलेज में पढ़ने तक नहीं जाता और यह चुटिया बता रहा कॉलेज ठीक है।
अगर राजपूताना ज्यादा जोर मार रहा है, तो कॉलेजियम सिस्टम खत्म करने की लड़ाई लड़िए। और उससे भी ज्यादा जोर मार रहा है तो सिविल सोसाइटी पैदा कीजिए। पढ़िए-लिखिए, जज बनिए, IAS बनिए, IPS बनिए, पुलिस में जाइए, पत्रकार बनिए।
लेकिन सोशल मीडिया पर गाली का जवाब गाली से, थप्पड़ का जवाब थप्पड़ ��े देकर आप क्या हासिल कर रहे हैं?
दो थप्पड़ खा लिए, दो थप्पड़ दे दिए और समझ लिया कि समाज का सम्मान बचा लिया! भाई, इज्जत ऐसे नहीं बचती।
सीवान का जो ‘पगला’ सोशल मीडिया पर महाराणा प्रताप और देवी-देवताओं के नाम पर लड़ रहा है, उससे मेरा सवाल है कि अपने घर की हालत भी देखो। रोजी-रोटी की चिंता करो। बच्चों की पढ़ाई की चिंता करो। परिवार को आगे बढ़ाने की चिंता करो।
महाराणा प्रताप के सम्मान के लिए घास की रोटी खाने की कहानी सुनाकर सोशल मीडिया पर क्रांति करने से पहले अपने परिवार को दो वक्त की रोटी और बेहतर जिंदगी देने की कोशिश करो।
और दूसरी तरफ यही लोग भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर को गाली देते हैं, पूरे समाज को गाली देते हैं और जब जवाब में दो-चार थप्पड़ पड़ते हैं तो संविधान और कानून की दुहाई देने लगते हैं।
भाई, संविधान का सम्मान करना सीखो। जिस कानून की आड़ लेते हो, उसके निर्माता और विचार की भी इज्ज�� करो।
लोकतंत्र में हर समाज में आपकी स्वीकार्यता होनी चाहिए। इसके लिए गाली नहीं, समझदारी चाहिए। धैर्य चाहिए। शिक्षा चाहिए।
और ��ह मत समझिए कि संजय सेना, फलाना सेना, ढिमकाना सेना का कोई नेता आकर आपकी जिंदगी बदल देगा। ज्यादातर लोग अपनी राजनीति और अपनी रोजी-रोटी के लिए सोशल मीडिया पर आग लगाते हैं। आपका भविष्य उनकी पोस्ट और वीडियो से नहीं बदलने वाला।
अपने बच्चों को पढ़ाइए। घर में शिक्षा का माहौल बनाइए। सिविल सोसाइटी में हिस्सेदारी लीजिए।
जज बनिए। IAS बनिए। IPS बनिए। पुलिस में जाइए। पत्रकार बनिए। शिक्षक बनिए। वकील बनिए।
हाथ में कलम उठाइए।
महाराणा प्रताप सिर्फ एक जाति के नहीं हैं। श्रीराम सिर्फ एक जाति के नहीं हैं। डॉ. भीमराव अंबेडकर सिर्फ एक जाति के नहीं हैं। ये सब पूरे देश के हैं।
और सबसे जरूरी बात कि सामंती मानसिकता से बाहर आइए।
यह 2026 का भारत है। जमींदारी का दौर खत्म हो चुका है। लोकतंत्र में सम्मान ताकत दिखाने से नहीं, अपनी योग्यता और व्यवहार से मिलता है।
अगर यही हरकत करते रहे तो दो थप्पड़ के बाद भी कोई ��पका साथ नहीं देगा।
लात-जूते खाने से समाज मजबूत नहीं होता। शिक्षा, समझदारी और संस्थाओं में भागीदारी से समाज मजबूत होता है।
बाकी फैसला आपका है, हाथ में ईंट रखनी है या कलम।
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सवाल उस नौकरशाही की मानसिकता का है, जो जनता की सेवा करने के लिए बनी थी लेकिन खुद को जनता का मालिक समझने लगी है।
लोकतंत्��� में अधिकारी राजा नहीं होता। जनता मालिक होती है।
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TRE4 विज्ञापन, श���क्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के इस्तीफे, BSSC Exam Date, लाइब्रेरियन बहाली, BET, दारोगा , सिपाही, BSSC सहित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर बिहार में आज से शुरू हो रहा छात्र आंदोलन। इससे पहले से प्रोफेसर बहाली को लेकर अभ्यर्थी आमरण अनसन पर 10 दिनों से बैठे हुए हैं।
UPSC को खत्म करने की जरूरत क्यों है? यह तस्वीर चीख-चीख कर बता रही है। नौकरशाही इस देश को अंदर से खा रही है।
प्रमाण, हजारों नहीं लाखो�� मिल जाएंगे।
इस तस्वीर में प्रशांत किशोर दिखाई दे रहे हैं। मधुबनी में रौशन यादव के परिवार को न्याय दिलाने के लिए प्रशांत किशोर SSP ऑ���िस पहुंचे थे।
अब सवाल है कि एक जिले के SSP और उनसे मिलने वालों के बीच इतनी दूरी क्यों? राजा और प्रजा वाला भाव!
ऐसा लगता है कि जैसे पब्लिक को ‘अछूत’ समझ लिया हो! या फिर कोई इंफेक्शन का खतरा!
पता नहीं बिहार के मुख्यमंत्री से लेकर DGP तक ने कभी इस पर ध्यान दिया या नहीं। लेकिन यह तो बड़े अधिकारी की बात हो गई।
जबकि सच्चाई यह है कि एक थाने का थानेदार भी खुद को राजा ही समझता है और अपनी कुर्सी को राजगद्दी। जनत��� से तमीज से बात नहीं करते, काम क्या ही करते होंगे! जनता का शोषण कैसे किया जाए, बस इसमें इनका दिमाग लगा रहता है।
IAS तो IPS से भी खतरनाक हैं। इन्होंने तो भ्रष्टाचार का पूरा सिस्टम खड़ा कर रखा है। हर घूसखोरी में इनका प्रतिशत फिक्स रहता है।
हाल ही में बिहार में रिशु श्री टेंडर घोटाला सामने आया था। इसमें कई बड़े अधिकारियों के नाम सामने आए। SVU ने मामले में चार्जशीट भी ��ाखिल की और कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई भी हुई।
लेकिन सवाल वही है, क्या बड़े अधिकारियों की जवाबदेही कभी तय होगी?
क्या किसी बड़े IAS अधिकारी को भ्रष्टाचार के मामले में जेल जाते आपने देखा है?
नहीं देखा होगा।
क्योंकि सिस्टम ऐसा है कि नीचे वाला पकड़ा जाता है और ऊपर वाला सिस्टम चलाता रहता है।
UPSC की जड़ें उसी औपनिवेशिक प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ी हैं, जिसे अंग्रेजों ने भारत पर शासन चलाने और जनता पर नियंत्रण रखने के लिए खड़ा किया था।
आज की UPSC और IAS व्यवस्था वही अंग्रेजी व्यवस्था नहीं है। लेकिन सवाल यह है कि क्या उस व्यवस्था की मानसिकता पूरी तरह बदली है?
अंग्रेज चले गए।
राजा-महाराजा चले गए।
देश लोकतांत्रिक हो गया।
लेकिन कई सरकारी दफ्तरों में आज भी अधिकारी की कुर्सी राजगद्दी है और जनता प्रजा।
खैर, ये UPSC भी इसी लिए इतने मेहनत करके पास करते हैं कि इतना कमा लिया जाए कि गरीबी तो खत्म हो ही जाए। स��त पुश्त बैठकर खाए!
नेताओं से भी ज्यादा देश को बर्बाद करने में इनका ही हाथ है। क्योंकि नेता तो पांच साल में बदल ��ाता है। अधिकारी अपनी कुर्सी पर दशकों तक सिस्टम चलाता है।
इसलिए UPSC सिस्टम पर चोट करने का समय आ गया है। सवाल UPSC की परीक्षा का नहीं है।
सवाल उस नौकरशाही की मानसिकता का है, जो जनता की सेवा करने के लिए बनी थी लेकिन खुद को जनता का मालिक समझने लगी है।
लोकतंत्र में अधिकारी राजा नहीं होता। जनता मालिक होती है।
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कल पटना में समाजवादी राजनीति का संकट विषय पर एक महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने का अवसर मिला।
Rakesh Kumar जी के निमंत्रण पर मैं भी इस बैठक में पहुंचा और अपनी बात रखी। लेकिन सच कहूं तो वहां मौजूद अलग-अलग वक्ताओं को सुनन�� मेरे लिए ज्यादा महत्वपूर्ण और सुखद अनुभव रहा।
बैठक में करीब 40-50 लोग थे। संख्या भले बहुत बड़ी नहीं थी, लेकिन मौजूद लोगों में पूर्व विधायक, राजनीतिक कार्यकर्ता, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार, बुद्धिजीवी और बड़ी संख्या में युवा साथी शामिल थे। स��से अच्छी बात यह थी कि अलग-अलग जातियों और समुदायों से आने वाले लोग एक ही सवाल पर चर्चा कर रहे थे कि समाजवाद, सामाजिक न्याय और समानता की राजनीति को आज के दौर में कैसे मजबूत किया जाए?
चर्चा का केंद्र यही था कि राम मनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण जैसे समाजवादी नेताओं के विचार कहीं राजनीति के शोर में खत्म न हो जाएं। समाजवादी आंदोलन से निकली पार्टियां और नेता आज परिवारवाद की गिरफ्त में क्यों हैं? राजनीति धर्म और जाति के इर्द-गिर्द क्यों सिमटती जा रही है? राजनीति का बाजारीकरण किस तरह लोकतंत्र और आम आदमी की आवाज को कमजोर कर रहा है?
और सबसे बड़ा सवाल, क्या बिहार को एक ऐसा राजनीतिक विकल्प मिल सकता है, जहां सामाजिक न्याय सिर्फ चुनावी नारा नहीं, बल्कि व्यवस्था का आधार हो? जहां आर्थिक न्याय, समानता और अवसर की बात हो।
आज के बिहार को देखें तो एक तरफ जाति के नाम पर लगातार बैठकें हो रही हैं, संगठन और स��नाएं खड़ी करने की बातें हो रही हैं। समाज को अलग-अलग खांचों में बांटने की कोशिशें तेज हैं। ऐसे समय में कुछ लोग बैठकर यह सवाल पूछ रहे हैं कि समाज को बांटने के बजाय जोड़ा कैसे जाए, और समाजवादी विचार को फिर से जमीन पर कैसे उतारा जाए, यह अपने आप में बड़ी बात है।
मुझे सबसे ज्यादा उम्मीद वहां मौजूद युवाओं को देखकर हुई। राजनीति से निराश होने के बजाय अगर युवा फिर से विचार, समानता, सामाजिक न्याय और बेहतर समाज की चर्चा में लौट रहे हैं, तो इसे एक सकारात्मक संकेत मानना चाहिए।
हो सकता है आज की बैठक में भीड़ बहुत बड़ी नहीं थी। लेकिन हर राजनीतिक बदलाव की शुरुआत भीड़ से नहीं, विचार से होती है।
बिहार की राजनीति को अगर सच में नया विकल्प देना है तो सिर्फ चेहरे बदलने से काम नहीं चलेगा। राजनीति की दिशा और सोच भी बदलनी होगी।
लोहिया और जेपी के विचारों को किताबों और भाषणों से निकालकर आज की राजनीति के सवालों से जोड़ना होगा।
आज की बैठक ने कम से कम यह उम्मीद जरूर जगाई कि समाजवादी विचार अभी खत्म नहीं ह��आ है। उसे फिर से मजबूत करने की जरूरत है… और शायद शुरुआत ऐसे ही छोटे-छोटे संवादों से होगी।
और जल्द ही पटना में एक और बड़ा कार्यक्रम होने जा रहा है। सम��, स्थान निर्धारित होने पर आपलोगों को भी सूचना दी जाएगी। आप किसी भी पार्टी, जाति, धर्म के हो अगर आप समाजवाद पर विश्वास रखते हैं तो आपका स्वागत है।
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सीवान के बंगरा गांव में पागल के साथ जो हुआ। वह निंदनीय है। इन जैसे पागल बुजुर्गों को रेलने की जरूरत नहीं थी। प्यार से सहला के ठोकने की जरूरत थी। ऐसे पागल राजपूत के नाम पर कलंक हैं। इसको कुटाई के बाद पागलखाने में छोड़ना चाहिए था।
राजपूत युवाओं से आग्रह है कि हर मैटर में उलझने की जरूरत नहीं। जो गलत है उसे टाइट होकर बोलिये गलत है। इस जाहिल के समर��थन में खड़े होने की कोई जरूरत नहीं। अगर साथ दीजिएगा तो यह कल को फिर महापुरुषों को गाली देगा।
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बिहार में अपराधियों की बहार है... क्योंकि नीतीश कुमार का चेला बेकार है...
आज हाजीपुर के दिघी निवासी चर्चित ठेकेदार नरेश राय की टहलने के दौरान अपराधियों ने चार गोलियां मारकर हत्या कर दी.
कल पटना में युवक को चार गोली मारी गई। कल ही बख्तियारपुर में एक और हत्या हुई।
बिहार में रिलबाज सेना सब गंध मचा दिया है सब। मरने वाला अपराधी हो गया और मारना वा��ा क्रांतिकारी। इन सबको पहले जेल में ठेल देना चाहिए।
रिलबाज सेना, संजय सेना यह सब सिर्फ चेहरा चमकाने में लगे रहते हैं। इनके कारण समाज बंट रहा है।
दिलीप जायसवाल जी का बयान आया है कि पैसे के लिए क्या कोठा खोल दें? शराब पीने वाला अपराधी होता है।
शराबबंदी पर NDA के नेता अनाप-��नाप बयानबाजी कर रहे हैं। खुद को ��मझ नहीं आ रहा कि क्या बोल रहे हैं।आपके अपने विभाग में CO लूट कर गर्दा-गर्दा कर रहे हैं। पीड़ित कोर्ट से लेकर पटना में मंत्री जी तक चक्कर काट रहे हैं। लेकिन आपको चिंता सिर्फ शराबबंदी की है।
यूपी शराब बेचकर सालाना करीब 70,000 करोड़ कमाता है। बंगाल में भी 50,000 करोड़ के आसपास राजस्व आता है। क्या यह “कोठा” की कमाई है? क्या आपकी सरकार पूरे देश में शराबबंदी लागू करेगी?अगर शराब पीने वाले अपराधी हैं, तो फिर बीजेपी के वे बड़े नेता जो शराब पीते थे या पीते हैं, वे भी अपराधी हैं?
अटल बिहारी वाजपेयी भी शराब पीते थे। क्या वे अपराधी थे? क्या उन्होंने महिलाओं के साथ हिंसा की थी? तर्क दोहरे मापदंड वाले हैं। पहले अपने विभाग को संभालिए, फिर दूसरों को उपदेश दीजिए।
#Shrabbandi #DilipJaiswal #Bihar #BJP #BiharNews