#625th_KabirSahib_PrakatDiwas
Sant Rampal Ji Maharaj
Kabir Sahib Prakat Diwas is the day God Kabir Ji descended on this mortal world in Lahartara lake on a lotus flower in Kashi, Uttar Pradesh, India.
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काजियों ने फिर कुरान शरीफ को खोला उन पृष्ठों पर भी कबीर-कबीर-कबीर अक्षर ही लिखा था।
कबीर-कबीर-कबीर-कबीर हो गए। काजी बोले इस बालक ने कोई जादू मंत्र करके हमारी कुरान शरीफ को ही बदल डाला।
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Kabir Prakat Diwas 14 June
नीरू-नीमा (निःसन्तान दम्पति थे)
600 वर्ष पूर्व ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने के लिए गए हुए थे।
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तुम साहेब तुम सन्त हो तुम सतगुरु तुम हंस। गरीबदास तुम रूप बिन और न दूजा अंस।।
तुम स्वामी मैं बाल बुद्धि भर्म कर्म किये नाश। गरीबदास निज ब्रह्म तुम, हमरै दृढ विश्वास।।
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ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को विक्रमी संवत 1455 (सन 1398 ई.) को सुबह ब्रह्म मुहूर्त में कबीर परमेश्वर सतलोक (ऋतधाम) से सशरीर आकर शिशु रूप में लहरतारा तालाब के ही कमल के पुष्प में विराजमान हुए।
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कबीर परमेश्वर का कलयुग में प्रकट होना
ज्येष्ठ मांस की पूर्णमासी सन् 1398(विक्रम संवत 1455) को पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब काशी में शिशु रूप में प्रकट हुए।
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गरीब, दुनी कहै योह देव है, देव कहत हैं ईश।
ईश कहै परब्रह्म है, पूरण बीसवे बीस।।
संत गरीबदास जी कहते हैं कि शिशु रूप में कबीर परमेश्वर जी को देखकर काशी के लोग कह रहे थे कि यह तो कोई देवता का अवतार है।
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स्वामी रामानन्द जी ने पाँच वर्षीय बालक कबीर जी से प्रश्न किया। हे बालक! आपका क्या नाम है,कौन जाति है,भक्ति पंथ (मार्ग) कौन है? बालक कबीर जी ने भी आधीनता से उत्तर दिया :-
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जन्म नहीं लेते, ना ही उनकी कोई पत्नी थी। क्योंकि वे तो सबके उत्पत्तिकर्ता हैं। ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 17 में प्रमाण है कि कविर्देव शिशु रूप धारण कर लेता है। लीला करता हुआ बड़ा होता है।
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⚡️625वां कबीर साहेब प्रकट दिवस 14 जून को
काशी शहर की पवित्र भूमि पर परमेश्वर कबीर जी ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) सोमवार सुबह सुबह ब्रह्म मुहूर्त में पूर्ण परमेश्वर कबीर/कविर्देव जी स्वयं अपने सतलोक से
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शिशु रूप कबीर परमेश्वर का
नामकरण करने आए काजियों ने जब कुरान शरीफ को खोला तो कुरान शरीफ में सर्व अक्षर कबीर - कबीर - कबीर हो गए ।
तब कबीर परमेश्वर शिशु रूप...
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यजुर्वेद अध्याय 5 मंत्र 1 में कहा है कि ‘अग्नेः तनुः असि = परमेश्वर सशरीर है। विष्णवे त्वा सोमस्य तनुः असि = उस अमर प्रभु का पालन पोषण करने के लिए अन्य शरीर है जो अतिथि रूप में कुछ दिन संसार में आता है।
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ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत् 1455(सन् 1398)सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में परमेश्वर कबीरजी तेजोमय रूप में आकर काशी के लहरतारा तालाब में बालक रूप में कमल के फूल पर प्रकट हुए,इसके प्रत्यक्ष दृष्टा ऋषि अष्टानन्द जी थे
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परमेश्वर कबीर साहेब जी किसी माँ से जन्म नहीं लेते।
ऋग्वेद मंडल १० सूक्त ४ मंत्र ३ पूर्ण परमात्मा जब शिशु रूप धारण करके यहां आते हैं तब उनका जन्म किसी मां के द्वारा नहीं होता।
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कबीर परमेश्वर सशरीर प्रकट हुए
ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में परमेश्वर कबीर जी तेजोमय रूप में आकर काशी के लहरतारा तालाब में बालक रूप में कमल के फूल पर प्रकट हुए।
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कबीर परमेश्वर जी संवत् 1455 (सन् 1398) ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में काशी के लहरतारा तालाब में कमल के पुष्प पर बालक रूप में प्रकट हुए। निःसंतान नीरू-नीमा जुलाहे दम्पति को मिले।
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गरीब शिव उतरे शिवपुरी से, अविगत बदन विनोद।
महके कमल खुशी भये, लिया ईश कूं गोद।
सात बार चर्चा करी, बोले बालक बैन।
शिव कूं कर मस्तक धरया, ला मोमन एक धैन।
गरीब अन ब्यावर कूं दूहत है, दूध दिया तत्काल।
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⚡️कबीर साहेब जी का नामकरण-
काजियों ने पुनः पवित्र कुरान शरीफ को नाम रखने के उद्देश्य से खोला। उन दोनों पृष्ठों पर कबीर-कबीर-कबीर अक्षर लिखे थे अन्य लेख नहीं था। काजियों ने फिर कुरान शरीफ को खोला उन पर भी कबीरअक्षर ही लिखा था
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कबीर परमेश्वर जी कभी मां के गर्भ से जन्म नही लेते।
परमेश्वर कबीर साहेब जी का 14 जून को प्रकट दिवस हे।
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