यह हैवान, यह संघी आतंकवादी रमन है
चंदन नगर बरारी में रहता है
इसका वो हाल होना चाहिए कि सात पुश्तों की रूह काँप जाये
दिल्ली पुलिस कुछ करोगे या सिर्फ़ बकलोली करनी है?
अमित शाह की दिल्ली पुलिस खुद तो गुंडागर्दी पर उतर ही आई - RSS-BJP के असली गुंडों को भी महिलाओं और युवाओं पर हिंसा करने की खुली छूट और बढ़ावा दे रही है।
जैसा मैंने कहा था, Mogambo Modi और उसकी सरकार जितना दबाएगी, Gen Z और छात्रों का गुस्सा उतना ही बढ़ेगा।
सोमवार, 12 अक्टूबर को कांग्रेस, पूरा INDIA गठबंधन और देश के युवा बड़ी संख्या में एक बार फिर सड़कों पर उतरेंगे। और इस बार भी आवाज़ पूरे देश में गूंजेगी - पहले से कहीं ज़्यादा।
@AmitShah, जितनी पुलिस लानी है, 10 हज़ार, 20 हज़ार, 40 हज़ार, ले आइए। BJP-RSS के जितने गुंडे बुलाने हैं, बुला लीजिए।
हम डरने वाले नहीं हैं। पीछे हटने वाले नहीं हैं। ये लड़ाई अब रुकने वाली नहीं है!
सोमवार को हम मुख्य न्यायाधीश से भी मिलेंगे और मांग करेंगे कि जब दिल्ली की सड़कों पर संविधान को तार-तार किया जा रहा है और लोकतंत्र को कुचला जा रहा है, तब कानून के संरक्षक आंखों पर पट्टी डाल कर नहीं बैठ सकते।
संविधान की धज्जियां उड़ेंगी और हम चुप बैठेंगे? ऐसा हरगिज़ नहीं होगा। जवाबदेही तय करवाकर रहेंगे!
आज जयपुर के आराध्य श्री गोविंद देव जी के दर्शन एवं पूजा-अर्चना कर लोकमंथन 2026 के अन्तर्गत ‘हम भारत के लोग’ के संदेश के साथ जयपुर महानगर की ‘लोकमंथन यात्रा’ का शुभारंभ करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
यह यात्रा हमारी गौरवशाली लोक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता और प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवनशैली के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का एक सार्थक प्रयास है। इस यात्रा में नागरिकों, प्रबुद्धजनों, समाजजनों एवं खिलाड़ियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने आयोजन को और विशेष बनाया।
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री अरुण जैन जी, क्षेत्रीय संघचालक डॉ. रमेश अग्रवाल जी, क्षेत्रीय कार्यवाह श्री जसवंत खत्री जी, प्रांत प्रचारक श्री बाबूलाल जी के साथ ही यात्रा में सम्मिलित गणमान्य बंधु, क्रीड़ा भारती के ऊर्जावान खिलाड़ी एवं आमजन उपस्थित रहे।
बॉडी शेमिंग को कितना सहज मान लिया है! ये मध्यप्रदेश के कैबिनेट मंत्री हैं एक महिला पार्षद के बारे में कैसी टिप्पणी कर रहे हैं और मंच से खी खी खी @GargiRawat
हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए
आज ये दीवार पर्दों की तरह हिलने लगी
शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए
हर सड़क पर हर गली में हर नगर हर गाँव में
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए
सिर्फ़ हंगामा खड़ा करना मिरा मक़्सद नहीं
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही
हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए
The Hindu has apologised for publishing yesterday’s controversial front-page advertisement.
can we expect the same accountability from other newspaper that carried the same advertisement?