प्रयागराज के अटाला में कैसे पत्थरबाज़ी शुरू हुई। पढ़िए मौक़े पर मौजूद पीयूष श्रीवास्तव की पोस्ट
नाबालिग लड़के और डायलॉग
अगर पुलिस ने गली में घुसने की कोशिश की तो अंजाम बुरा होगा !
मुझसे हदीसों का हवाला मत मांगिए । मैं आपकी हिंसा के खिलाफ़ कई आयतें, हदीसें और कई वाक्यात पेश कर सकती हूं । जहां माफ़ करना, और शांति से काम लेना बताया गया ।
आप मुझे वो हदीस दिखाइए, जिसकी आड़ में आप माफ़ी मांगने के बावजूद खुलेआम धमकी दे रहे हैं, दंगे कर रहे हैं...
जब से पार्टी ने संदीप @sambitswaraj को भड़काऊ ट्वीट ना करने का निर्देश दिया है तब से बेचारा सिर्फ सरकारी आंकड़े ट्वीट कर रहा है। मन का गुबार निकालने के लिये घर में बच्चों पर चिल्ला रहा है कि बैठ मौलाना, बैठ शिशुपाल। 😹😹😹😹
दंगाइयों/बलवाइयों को देश के क़ानून में भरोसा नहीं होता। उनके साथ कोई भी खड़ा नहीं हो सकता। पत्थरबाज़ी और आगज़नी से कुछ हासिल नहीं होगा। दांव उल्टा पड़ेगा। जिन्होंने आपत्तिजनक बयान दिया उनको क़ानून से ही सज़ा मिल सकती है। दंगाई/उपद्रवियों को तो प्रशासन की लाठी और हवालात मिलेगी ही।
नाराजगी होने पर लोकतंत्र में शांतिपूर्वक प्रदर्शन जायज है. हिंसा नाजायज है, चाहे कोई भी वजह हो. इस वक्त जो कुछ भी हो रहा है, उसकी नौबत न आती, अगर वक्त रहते उचित कार्रवाई की गई होती.
धार्मिक कट्टरता की खाई इतनी गहरी हो चुकी है कि इसे भरना मुश्किल है । इसका सबसे बड़ा कारण है कि दोनों ही पक्ष के लोग अपने धार्मिक विश्वास का सार नहीं समझ पा रहे । धर्म कोई भी हो, अच्छाई ही सिखाता है पर लोग बुनियाद को किनारे कर खुद को बेहतर और श्रेष्ठ साबित करने में लगे हैं ।
ऐसी बेलगाम भीड़ और ऐसी पत्थरबाज़ी के बाद अगर पुलिस एक्शन में आती है तो ये कहने का हक़ नहीं है कि हम पर ज़ुल्म हुआ . समझे न ?
क़ायदे क़ानून सबके लिए बराबर है . ऐसी हरकतें करने वाले लोग पुलिस को लाठियाँ चलाने पर थोक भाव में गिरफ़्तारी का मौक़ा दे रहे हैं .