#కబీర్_పరమాత్మ_అవినాశి
तलवार से कटवा कर मारने की कोशिश,
शेख तकि ने कुछ गुंडे तैयार किये।परमेश्वर कबीर साहेब जी रात्रि में सोने की लीला कर रहे थे उस समय शेख तकि उन गुंडों के साथ परमात्मा की कुटिया में आया और कबीर परमात्मा पर तलवारों से अंधाधुंध वार किये।जब
#కబీర్_పరమాత్మ_అవినాశి
कबीर साहेब जी को जहरीले सर्प से मारने का प्रयास कबीर साहेब जी जब सत्संग कर रहे थे, तब शेखतकी ने सिपाही से कहा कि कबीर के गले में जहरीला साँप डाल दो । सिपाहियों द्वारा कबीर साहेब के गले में जहरीला सर्प डालते ही वह सर्प, सुंदर पुष्पों की माला बन गया । क्योंकि
मुसलमान धर्म गुरु शेख तकी ने षड्यंत्र करके कबीर परमेश्वर के ऊपर 12 घंटे तक तोप के गोले दागे लेकिन कबीर साहेब जी अविनाशी थे वह उनका कुछ नहीं बिगाड़ सके।
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"Sant Rampal Ji Maharaj"
#कबीरपरमात्मा_अविनाशी_हैं
परमात्मा कबीर साहेब को 52 बार मरवाने की कोशिश की गयी। पर परमात्मा को कोई हानि नहीं पहुंची। क्योंकि परमेश्वर कबीर साहेब अजर अमर अविनाशी हैं।
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'या'
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शेख तकी ने सम्राट से कबीर साहब को गंगा नदी में फेंकने का आग्रह किया। निर्देशों का पालन करते हुए बादशाह ने कबीर साहेब के हाथ-पैर बांध दिए और उन्हें एक नाव में नदी के बीच में ले जाकर पानी में फेंक दिया। पर वे बच गये, क्योंकि वो अविनाशी परमात्मा है|
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कबीर साहेब जी जब झोपड़ी में सो रहे थे
तब शेखतकी ने गुंडों से कबीर साहेब जी के शरीर को तलवार से टुकड़े टुकड़े करवा दिए। जब शेखतकी और गुंडों ने कबीर जी को मरा हुआ जाना और चल पड़े तो पीछे से कबीर साहेब ने कहा कि पीर जी दूध पीकर जाना।
कबीर साहेब अविनाशी है l
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कबीर परमेश्वर त्रेतायुग में मुनींद्र ऋषि के रूप में हनुमान जी को मिले और उनको ज्ञान समझाया।
लेकिन हनुमान जी ने उनसे नाम दीक्षा नहीं लिया और जन्म मृत्यु के जाल में फंसे रहे.
द्वापरयुग में परमेश्वर कबीर जी करुणामय नाम से प्रकट हुए थे। उस समय राजा चंद्रविजय और उनकी पत्नी रानी इन्द्रमती को पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी सतलोक से आकर मिले थे।
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शेखफरीद जी को शरण में लेना
परमात्मा को निराकार मानने वाले शेख फरीद जी परमात्मा के दर्शन के लिए कुएं में उल्टे लटके हठ योग कर रहे थे।
परमात्मा कबीर ने इस प्यारी आत्मा को ज्ञान की ऐसी चोट लगाई कि शेख फरीद जी कबीर जी के प्रिय शिष्य हुए व मोक्ष प्राप्त किया।
#2DaysLeftForKabirPrakatDiwas
जब कबीर परमेश्वर को नीरू नीमा घर लेकर आये तो उन्हें देखकर कोई कह रहा था कि यह बालक तो कोई देवता का अवतार है। कोई कह रहा था यह तो साक्षात विष्णु जी ही आए लगते हैं। कोई कह रहा था यह भगवान शिव ही अपनी काशी को कृतार्थ करने को उत्पन्न हुए हैं।
#2DaysLeftForKabirPrakatDiwas
जब कबीर परमेश्वर को नीरू नीमा घर लेकर आये तो उन्हें देखकर कोई कह रहा था कि यह बालक तो कोई देवता का अवतार है। कोई कह रहा था यह तो साक्षात विष्णु जी ही आए लगते हैं। कोई कह रहा था यह भगवान शिव ही अपनी काशी को कृतार्थ करने को उत्पन्न हुए हैं।
#625th_KabirSahib_PrakatDiwas
स्वामी रामानन्द जी ने पाँच वर्षीय बालक कबीर जी से प्रश्न किया। हे बालक! आपका क्या नाम है,कौन जाति है,भक्ति पंथ (मार्ग) कौन है? बालक कबीर जी ने भी आधीनता से उत्तर दिया :- जाति हमारी जगतगुरु, परमेश्वर पद पंथ।
दास गरीब लिखति परै, नाम निंरजन कंत।।
#WhoSawGod
हनुमान जी को भी मिले थे कबीर परमात्मा
कबीर सागर के "हनुमान बोध" में परमेश्वर कबीर साहेब द्वारा हनुमान जी को शरण में लेने का विवरण है
परमेश्वर कबीर जी ने हनुमान जी को शरण में लेकर उनमें सत्य भक्ति बीज डाला था
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#WhoSawGod
संत गरीब दास जी को 10 वर्ष की आयु में पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जिंदा महात्मा के वेश में मिले।
गरीब दास जी ने कबीर परमेश्वर की महिमा गाई है :-
गरीब, हम सुल्तानी नानक तारे, दादू कूं उपदेश दिया।
जाति जुलाहा भेद न पाया, काशी माहीं कबीर हुआ।।
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#WhoSawGod
त्रेता युग में कबीर परमेश्वर मुनींद्र नाम से प्रकट हुए तथा नल व नील को शरण में लिया
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