सामाजिक न्याय, शिक्षा, संवैधानिक मूल्यों और वंचित वर्गों के सशक्तिकरण के प्रति आपका समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा।
आपके स्वस्थ, सुखमय एवं सक्रिय जीवन की मंगलकामनाएँ।
भव्य विदाई कार्यक्रम की कुछ यादे...
Story cover by @Sumitchauhaan
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आदरणीय डॉ. राजा शेखर वुंद्रू, IAS जी को 36 वर्षों की उत्कृष्ट, निष्कलंक एवं प्रेरणादायी प्रशासनिक सेवा पूर्ण करने पर हार्दिक बधाई एवं अभिनंदन।
आपका संपूर्ण सेवाकाल "Pay Back to Society" की भावना का प्रेरक उदाहरण रहा है।
Right
ये आंदोलन राष्ट्र के लोगों की भावना पर आधारित था और ये भावना ही इसे बल दे रही थी। इस क्रांति को रोक पाना संभव नहीं था...
इस क्रांति को देखकर बाबा साहिब के 1927 मे हुए महाड़ सत्याग्रह की याद आ गई।
कई बार सरकारें विवादित फैसलों के पीछे स्पष्ट कारण सार्वजनिक नहीं करतीं। इसलिए केवल आधिकारिक बयान ही नहीं, घटनाओं का क्रम भी सवाल खड़े करता है।
लोकतंत्र में सत्ता से सवाल पूछना और पारदर्शिता की अपेक्षा करना नागरिकों का अधिकार है।
कम लिखा हैं पर ज्यादा समझना...
तुर्की में गवर्नर की साइकिलिंग के दौरान पहनी गई टाइट स्पोर्ट्स ड्रेस पर विवाद हुआ। वहाँ के कुछ नेताओं और नागरिकों ने सार्वजनिक रूप से इसकी आलोचना की और कुछ ही समय बाद उन्हें राष्ट्रपति के आदेश से पद से हटा दिया गया। सरकार ने अपने आदेश में हटाने का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया।
समस्याओं का समाधान सतही उपायों से नहीं, बल्कि उनकी जड़ तक पहुँचकर ही संभव हैं।
आज देश के सामने जातिवाद, बेरोज़गारी, अशिक्षा, भ्रष्टाचार और सामाजिक असमानता जैसी अनेक चुनौतियाँ हैं। यदि हम वास्तव में बदलाव चाहते हैं, तो बहस और आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर...
इन समस्याओं के मूल कारणों की पहचान करनी होगी और उन पर ठोस कार्रवाई करनी होगी।
जड़ मज़बूत होगी, तभी समाज मज़बूत होगा। जब शिक्षा, समान अवसर और न्याय को प्राथमिकता मिलेगी, तभी एक सशक्त, समरस और विकसित भारत का निर्माण होगा।
#शिक्षा#रोजगार#समानता#सामाजिक_सुधार#विकसित_भारत
" बेईमान बुद्विमान , मसीहा नहीं हो सकता "
बाबा साहिब कहते हैं
' बुद्विमता कोई सदगुण नहीं है वह अपनी बुद्वि का इस्तेमाल किस लिए करता है वह उसके ईमानदारी पर निर्भर करता है । ' एक अनपढ़ चोर मालगाड़ी से माल चुराकर ले जाएगा जबकि पढ़ा लिखा चोर पूरी मालगाड़ी ही चुरा ले जाएगा ।
🔥 व्यक्तिवाद, परिवारवाद, सुप्रीमोवाद-लोकतंत्र और गणतंत्र के लिए खतरा कैसे?
भारतीय राजनीति में जातिवाद, परिवारवाद और व्यक्ति-केन्द्रित नेतृत्व लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करते हैं। राजनीतिक दल किसी व्यक्ति या परिवार के नहीं, बल्कि विचार, संगठन और कार्यकर्ताओं के होने चाहिए।
₹4.28 lakh crore has been disbursed under PM-KISAN. Survey findings show that 92% of beneficiaries used the support for seeds, fertilisers and pesticides, while 85% reported higher agricultural income. #12YearsOfKisanSamriddhi
@MPNaveenJindal@DrKaramchand1 Protecting the oceans is not just the responsibility of coastal areas. Farmers, consumers, and citizens—all can contribute to this campaign by adopting environmentally friendly choices at their own level.
@MPNaveenJindal@DrKaramchand1 Reduce excessive use of urea and chemical fertilizers – Chemicals runoff from farms reach rivers and oceans, increasing water pollution and harming marine life. By promoting organic farming, natural fertilizers, and balanced fertilizer use, we can help protect oceans.
समाज में जागरूकता, शिक्षा और संगठन की कमी के कारण लोग अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए पर्याप्त रूप से संगठित नहीं हो पा रहे हैं। आज समय की मांग है कि हम अपने इतिहास, पहचान और अधिकारों को समझें तथा सामाजिक न्याय और समानता के लिए एकजुट होकर कार्य करें।
#मूलनिवासी#संवैधानिकअधिकार
सामाजिक संघर्ष को राजनीतिक नियंत्रण से मुक्त रखकर शोषित वर्गों के हित में ईमानदारी से कार्य करना ही सच्ची सामाजिक जिम्मेदारी है।”
#लोकतंत्र#पारदर्शिता#सामूहिकभागीदारी
Stay away from CJP...
“मूलनिवासी संगठनों की वास्तविक सफलता का आधार केवल संख्या नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक चरित्र, पारदर्शिता और सामूहिक भागीदारी है। संगठन व्यक्ति-पूजा से नहीं, विचारों के सम्मान, जवाबदेही और सामूहिक निर्णय से मजबूत बनते हैं।