समझदारी तो जिन्दगी में दूसरों से मिलने, ठोकर खाने, असफल होने के बाद जो सीखने के बाद मिलता है...वो समझ की बढ़िया पाठशाला है.
अकेले तो आत्म चिंतन करने का सबसे अच्छा तरीका है.....
कुरान तो कहता है..
दो-दो, तीन-तीन,चार-चार शादियाँ करो=18
और
जितनी चाहे लौंडीयां रखो
ये मोहम्मद की सुन्नत है
और उसको पालन करना हर मोमिन का फर्ज है..
वर्ना वो दीन से बेदखल है
वो मोमिन ही नहीं
और वाज़िबुल कत्ल है....
ठीक है ना...
@m_l_bubna@INeetuDabas 4 शादियाँ पर्था नहीं है.
एक विकल्प है.
यदि ये विकल्प नहीं होता तो
अन्य धर्म गुरू के तरह
मुस्लिम गुरु भी बेलगाम होते
4 शादियों का विकल्प होने के बाद भी मुस्लिम एक ही शादी करते हैं.
मैंने अपनी पूरी जिंदगी में ऐसा मुस्लिम नहीं देख है जिसने 4 शादियाँ की हों.
आप लोग तो आपके मोहम्मद,अल्लाह और दीन के गुलाम हैं
24 घंटे,उठना,बैठना,खाना,पीना,धोना,सोचना...सब में तो आप बंधे और जकड़े हैं
आपको तो कोई सवाल पूछने का हक्क नहीं
आपकी बुद्धि और गवाही आधी है
मुल्ला मालावी के फतवों और पुरुषों के अत्याचार के आप गुलाम है
औरत का अर्थ अरबी में क्या है...
आप लोगो की मांग पर और देशहित की सोच कर फिर से ट्विटर पर एक्टिव हो रही
#ट्विटर_योद्धा के रूप में अपना योगदान देने अा गई हूं
पर क्या आप लोगो का साथ समर्थन मिलेगा😊🙏
उसके बिना मै कुछ नहीं ना मुझे ट्विटर पर रहने का मन करता आप लोग मेरी ताकत हो💪
तो जरा अपने साथ का अहसास करा दीजिए🙏
ये प्यार का पिंजरा मन भाया, हम जी भर भर कर मुस्काये
जब प्यार हुआ इस पिंजरे से, तुम कहने लगे आजाद रहो
हम कैसे भुलाये प्यार तेरा तुम अपनी जबां से ये ना कहो
हम प्यार के गंगा जल से बलम जी तन मन अपना धो बैठे
तुम कहते हो के ऐसे प्यार को भूल जाओ