दिल के लुटने का सबब पूछो न सब के सामने
नाम आएगा तुम्हारा ये कहानी फिर सही
नफ़रतों के तीर खा कर दोस्तों के शहर में
हम ने किस किस को पुकारा ये कहानी फिर सही 🦋
~ मसरूर अनवर
@naveen_210
#मजबूर ये हालात, इधर भी है उधर भी
तन्हाई के ये रात, इधर भी है उधर भी
कहने को बहुत कुछ है, मगर किससे कहें हम
कब तक यूँही ख़ामोश रहें, और सहें हम
दिल कहता है दुनिया की हर इक रस्म उठा दें
दीवार जो हम दोनों में है, आज गिरा दें
क्यों दिल में सुलगते रहें, लोगों को बता दें
हां हमको मुहब्बत है, मोहब्बत है, मोहब्बत है
अब दिल में यही बात, इधर भी है, उधर भी...🦋
#सिलसिला 1981
#जावेद_अख़्तर ✍🏽
#गीतमाला
Waaaaaaah....बहुत खूब...
तुम ना आये सनम.....
आ आ आ भी जा....
आ जाओ तड़पते हैं अरमान....
आ जा रे..अब मेरा दिल पुकारा...
कोइ ना कोई तो आयेगा...अपना मुझे बनायेगा..
आ जा रे प्यार पुकारे..नैना तो रो रो हारे.
#छोटा_दरवाज़ा#Hello_X_Friends 🙋🏽♀️
कहते हैं कि "सब्र का फल" बड़ा हीं मीठा होता है और हम ना जाने कब से सब्र का दामन थामे
बैठे हैं कि कभी आप सबके साथ मुलाकात होगी और हम सब जम कर पार्टी करेंगे, देखते हैं कब वो शुभ दिन आता है...😊
बैठे हैं रहगुज़र पर दिल का दिया जलाये
शायद वो दर्द जाने, शायद वो लौट आये 🦋
~ कैफ़ी आज़मी
सुन्दर गीत....
उसको नहीं देखा हमने कभी...
पर उसकी जरूरत क्या होगी....
ऐ मां तेरी सूरत से अलग भगवान की सूरत क्या होगी....
हमेशा नहीं होता ऐसा.....
जन्म देना और प्यार देना.....
दोनों में बहुत अन्तर है......
क्षमा प्रार्थी हूं....
माँ 🙏🏽
इंसान तो क्या देवता भी, आँचल में पले तेरे
है स्वर्ग इसी दुनिया में, कदमों के तले तेरे
ममता ही लुटाये जिसके नयन
ऐसी कोई मूरत क्या होगी
ऐ माँ, ऐ माँ तेरी सूरत से अलग
भगवान की सूरत क्या होगी 🦋
~ मजरूह सुल्तानपुरी
#आँचल#cocoon#दामन#छोटा_दरवाज़ा#Aperture_Of_Dreams
शायद हमें पसंद हो
ढूंढना...
शायद ये आदत हो
हमारी...
धुंध की चादर हटाकर
देखना...
और दूर तक धुंधलके में
ताकना...
फिर घंटों आंखें मूंदे तुम्हें
सोचना...
कहो तो कैसे छोड़ दूं तुम्हें
चाहना...
मेरी कविताओं को तो है बस
रंगना...
बेख्याली में डूबकर फिर ना
उभरना...🦋
~ बिमला वर्मा
प्रश्नचिह्न ?
लिख लिया है
हथेलियों पर तुम्हारा
नाम
और देखो ना
मेंहदी से रंग कर
वो भी
खिलखिला उठा
जैसे
कह रहा हो
कब तक
रख पाओगी
तुम
अपनी मुट्ठी में कैद
मेरे
नाम को...🦋
~ बिमला वर्मा
#छोटा_दरवाज़ा#चिह्न
धन्यवाद...
कहने को बहुत कुछ था अगर कहने पे आते...
अपनी तो ये आदत है के हम कुछ नहीं कहते...
आपके लिये....
ज़ज्ब किये हैं ज़ज्बात सुनाये तो सुनाये कैसे .
जाऊँ कहाँ बता ऐ दिल
दुनिया बड़ी है संगदिल
चाँदनी आई घर जलाने
सूझे न कोई मंज़िल
जाऊँ कहाँ बता ...
बनके टूटे यहाँ आरज़ू के महल
ये ज़मीं आसमाँ भी गये हैं बदल
कहती है ज़िंदगी इस जहाँ से निकल
जाऊँ कहाँ बता ... 🦋
~ शैलेन्द्र