ये कैसी स्वास्थ्य व्यवस्था?
उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल समेत बिहार के कई सीमांत जिलों के मरीजों के लिए उम्मीद बने गोरखपुर AIIMS की व्यवस्था पर एक वाकये से सवाल खड़े हुए हैं. हुआ यूं कि AIIMS की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता बीमार हो गईं. उन्हें AIIMS में ही एडमिट कराया गया, लेकिन कैथ लैब की सुविधा नहीं मिल पाई. इस पर वह खुद निजी अस्पताल के दरवाजे पहुंचीं. लगभग आधे घंटे तक वह निजी अस्पताल में रहीं और फिर वापस लौटीं. इस तरह निदेशक को ही निजी अस्पताल के दरवाजे पर पहुंचने से सवाल खड़े हुए हैं. यह सवाल उठ रहा है कि आखिर अस्पताल की व्यवस्था कैसी है, जब निदेशक को ही हेल्थ फैसिलिटी के लिए निजी अस्पताल के दरवाजे पर पहुंचना पड़ा.
हैरानी की बात यह है कि एम्स को खुले 7 साल हो गए, लेकिन वहां कैथ लैब की सुविधा नहीं मिली तो वे एक निजी अस्पताल में पहुंची. कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता की तबीयत खराब होना और एम्स से निजी अस्पताल पहुंचने पर गोरखपुर एम्स सवालों के घेरे में आ गया. यहां 7 साल होने के बाद भी कैथ लैब की सुविधा एम्स में नहीं है. आखिर इतना समय क्यों लगा. जो गंभीर मरीज आते हैं उन्हें भी गोरखपुर एम्स से रेफर करना पड़ता है.
#AIIMS । #Gorakhpur
Terrible experience with Air India Express. Booked flight to Mumbai and reserved seats in advance. Boarding Pass doesn’t show seats strangely. At the airport counter they say seats taken by others. Meanwhile Air India Express has sent 51 emails, 14 texts of web check in. 🤦♂️
India Rejects UNSC Permanent Seat Without VETO?
भारत ने बिना VETO के UNSC की SEAT को परमानेंट ठुकरा दिया।
मास्टरस्ट्रोक ने US और चीन को चौंका दिया..👇👇
#ESTIC_2026
India donated 10 ambulances to Bangladesh in March 2021 as a goodwill gesture during the COVID pandemic.
The Kanglus removed Indian flags from these ambulances.
Moral: Never help Kanglus & Pakistanis
आज हमारे पूरे परिवार के लिए अत्यंत दुःख और पीड़ा का दिन है। हमारी पूज्य माताजी श्रीमती काशी बाई जी हमें छोड़कर अनंत की यात्रा पर प्रस्थान कर गई हैं।
माँ का जाना जीवन में एक ऐसी रिक्तता छोड़ जाता है, जिसे कोई भर नहीं सकता। आज उनकी स्मृतियाँ मन को भावुक कर रही हैं।
परमपिता परमेश्वर के श्रीचरणों में प्रार्थना है कि माताजी को अपने दिव्य धाम में स्थान प्रदान करें।
पूज्य माताजी का अंतिम संस्कार दोहपर 03 बजे गृह ग्राम जैत, जिला सीहोर में होगा।
ॐ शांति!
शोकाकुल परिवार
शिवराज सिंह चौहान
नरेंद्र सिंह चौहान
शशि सिंह चौहान
रोहित सिंह चौहान
वरुण सिंह चौहान
An Indian spy was caught in Pakistan in 1973. He spent the next 35 years in their jails, 17 of them in chains. His wife never stopped waiting.
His name was Kashmir Singh, from Punjab.
He served in the Indian Army, then took up spying for ₹400 a month. He crossed into Pakistan under the name Ibrahim.
In 1973 he was arrested near Rawalpindi. An army court sentenced him to death.
At home he had left his wife Paramjit Kaur and three children, all under 10.
He was moved through seven jails and kept alone in chains for 17 years. For 35 years he never saw the sky.
His family thought he was dead. Only Paramjit kept believing.
In 2008 a Pakistani minister found him in a Lahore jail. President Musharraf accepted his mercy petition.
On 4 March 2008 he walked across the Wagah border into India.
He said he was a spy and he had done his duty.
इजरायल में 1988 के बाद पहली बार रिकॉर्ड स्तर पर मतदान की खबरों के बीच सभी की नजरें चुनावी नतीजों पर टिकी हैं। 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले और उसके बाद गाजा, लेबनान व ईरान से जुड़े संघर्षों के बाद यह पहला राष्ट्रीय चुनाव बताया जा रहा है।
एग्जिट पोल के मुताबिक, बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन को 59 सीटें, जबकि गादी आइजनकोट के खेमे को 49 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। हालांकि, इजरायल में सरकार बनाने के लिए 120 सदस्यीय संसद में कम से कम 61 सीटों का समर्थन जरूरी है।
नेतन्याहू के सामने पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट समेत कई विपक्षी नेताओं की चुनौती है। देश की सुरक्षा, गाजा युद्ध, हमास के खिलाफ कार्रवाई, सैन्य सेवा और न्यायिक सुधार इस चुनाव के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।
#IsraelElection #BenjaminNetanyahu #IsraelPolitics #WorldNews #ZeeNews
भारत सरकार जानवरों पर होने वाले प्रयोगों के नियमों में बदलाव करने जा रही है, इसका ड्राफ्ट जारी किया गया है और 5 नवंबर तक जनता से राय मांगी गई है. इस ड्राफ्ट में कई बातें हैरान करने वाली हैं. अब तक हमारे देश में जानवरों पर कॉस्मैटिक टेस्टिंग बैन है, लेकिन नए नियमों के मुताबिक इसकी इजाजत मिल सकती है.
अब तक जानवरों पर लैब ट्रायल्स के लिए कड़े नियम हैं, सरकार से परमीशन लेनी पड़ती है, लेकिन अब एक्सपेरिमेंट्स के लिए सिर्फ उन्हीं मामलों में सरकारी परमीशन की जरूरत होगी, जिनमें ट्रायल के दौरान एनीमल को असहनीय दर्द होता हो या जानवरों की जिंदगी खतरे में हो. पशुप्रेमियों ने इसका विरोध किया है. PETA India ने सरकार से ये प्रस्ताव वापस लेने की मांग की है. उनका कहना है कि अगर ये कानून लागू हुआ तो पशुओं पर क्रूरता बढ़ेगी, जंगली जानवर भी सुरक्षित नहीं रहेंगे, नए नियमों में खामियों का फायदा बड़ी कंपनियां उठाएंगी.
PETA India की इस मुहिम का समर्थन करते हुए मेनका गांधी ने कहा कि जब दुनिया के बड़े देश अपने यहां पशुओं की लैब टेस्टिंग पर बैन लगा चुके हैं, तब भारत में इस तरह की छूट देना कहां तक उचित है.
एक बात तो साफ़ है कि animal testing के नियमों में बदलाव पशुओं पर क्रूरता को बढ़ावा देगा, बेज़ुबान जानवरों को experiments के लिए और ज़्यादा आसानी से उपलब्ध करा देगा. जब Ethics Panel को जानवरों पर किए जाने वाले experiments के approval की authority मिल जाएगी तो कोई रोकने वाला नहीं होगा. जानवरों को भी दर्द होता है, उन्हें भी डर लगता है. सिर्फ़ वो अपनी तकलीफ़ कह नहीं पाते.
Procedures के लिए खरगोश, चूहे, बंदर और dogs को labs में जिस तरह छोटे पिंजरों में बंद करके रखा जाता है, उन्हें बार-बार सुइयां चुभोई जाती हैं, ये सरासर ज़ुल्म है. इन मासूमों से उनकी consent नहीं ली जा सकती इसलिए उन पर जुल्म होता है.
होना तो ये चाहिए कि testing में पशुओं का इस्तेमाल कम से कम हो, जानवरों की पीड़ा कम हो, जहां तक संभव हो animal testing के स्थान पर non animal testing अपनाई जाए, लेकिन नए नियमों से इसका उल्टा होगा.
एक डर ये भी है कि जिन देशों में animal testing मुश्किल है, महंगी है, वो भारत की labs को animal testing के लिए इस्तेमाल करेंगे. ये बहुत ही ख़तरनाक है. इसलिए हम सबको इन नए नियमों के ख़िलाफ़ अपनी आपत्ति दर्ज करानी चाहिए. पांच नवंबर की जो deadline है, उससे पहले विरोध ज़ाहिर करने के लिए एक QR code है, इसे स्कैन करके आप सभी अपनी आपत्तियां दर्ज कर सकते हैं.