रक्षा का सच्चा भाव तभी सार्थक है, जब हर नारी के प्रति सम्मान और सद्भाव आचरण में दिखाई दे।
परस्पर मर्यादा और सदाचार से ही स्वस्थ समाज बनता है। Raksha Sutra इसी जिम्मेदारी की याद दिलाता है। रक्षाबंधन
#VedicRakshaBandhan ☀️🚩
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@jiya19977 जब रिश्ते स्वार्थ से ऊपर उठकर शुभ भावों से जुड़े होते हैं, तो उनका प्रभाव पूरे परिवार और समाज तक पहुँचता है। यही रक्षाबंधन की सुंदर भावना है। 🙏🌺
#VedicRakshaBandhan
बहन की शुभकामना भाई के जीवन में सद्गुणों की रक्षा करे और भाई का स्नेह बहन के जीवन में सुरक्षा व विश्वास लाएं। पवित्र भावों से मनाया गया रक्षाबंधन परिवार और समाज को आपस में जोड़ता हैं l
🌸🙏#VedicRakshaBandhanRaksha Sutrahttps://youtu.be/OJVPdtzBd_Y?si=ysu6b9xDqbwPssSF
@Asharamjiashram महिला उत्थान मंडल द्वारा सैनिकों एवं अधिकारियों की कलाई पर रक्षासूत्र बाँधना उनके प्रति सम्मान, कृतज्ञता और राष्ट्र की उन्नति के लिए शुभ संकल्प का सुंदर प्रतीक है। 🇮🇳🚩🇮🇳🚩#VedicRakshaBandhan
Sant Shri Asharamji Bapu has explained how #VedicRakshaBandhan was celebrated in Our Sanskriti & its importance in today's context. With His inspiration today Mahila Utthan Mandal has been tying Raksha Sutra on wrist of Soldiers & Officers with intention of national development.
In the vision of Sant Shri Asharamji Bapu, Raksha Bandhan is a sacred vow rooted in Sanatan Dharma. The Raksha Sutra, though a simple strand, becomes infused with extraordinary strength through the sister’s pure and selfless resolve. Her tilak on the brother’s forehead, her prayer for his protection, and her wish that he remain steadfast in dharma, transform the occasion into a spiritual covenant.
Bapuji explains that when vows are innocent, selfless, and sacred, their impact multiplies. The sister’s sankalp empowers the brother to overcome obstacles, while the brother’s effort ensures victory over trials. Together, they embody the divine balance of devotion and discipline. This is the essence of #VedicRakshaBandhan - a festival that fortifies bonds not only of affection, but of dharmic responsibility.
@Asharamjibapu__ भाई बहन के द्वारा राखी बंधवा कर उसे जीवन भर रक्षा करने का संकल्प देता है लेकिन गुरु तो 84 लाख जन्म से छुटकारा दिलाने की जिम्मेदारी लेते है हजार मां और पाप जो नहीं कर सकते वो गुरु हस्ते खेलते एक ही जन्म में दे देते है।
Sant Shri Asharamji Bapu
#AsharamjiBapuQuotes
@Asharamjibapu__ सद्गुरु की कृपा और सदगुरु के सत्संग के आगे सब कुछ फीका है गुरु कृपा ही केवलम शिष्यस्य परम मंगलम। और उनके सत्संग सुनने से विवेक , संयम , शांति सदाचार , सारे गुण के साथ साथ हस्ते खेलते परमात्मा से भी मिला देते हैं ।
Sant Shri Asharamji Bapu
#AsharamjiBapuQuotes
बहन का संकल्प हो कि “मेरे भाई की दृष्टि मंगलमय हो, वह सदैव सत्य और सदाचार के मार्ग पर चले, जीवन की विघ्न-बाधाओं पर विजय प्राप्त करे”—और भाई भी अपने जीवन में संयम, सदाचार और पुरुषार्थ को अपनाए। यही रक्षाबंधन की सुंदर आध्यात्मिक भावना है। 🙏#VedicRakshaBandhan
भारतीय संस्कृति में रक्षाबंधन आत्मीयता, स्नेह और पवित्र संकल्पों को मजबूत करने वाला पर्व है। राखी का धागा भले ही छोटा हो, लेकिन जब उसमें निःस्वार्थ प्रेम, पवित्र भावना और शुभ संकल्प जुड़ते हैं, तो उसका महत्व बहुत बढ़ जाता है।#VedicRakshaBandhan
@Asharamjibapu__ गुरु की कृपा और सत्संग से शिष्य के जीवन में सद्बुद्धि, संयम, श्रद्धा और आत्मबल पुष्ट होते हैं। यही रक्षाबंधन के भाव को और भी गहरा बना देता है। 🪷#AsharamjiBapuQuotes
"रक्षाबंधन"
बहन भाई की ऐहिक रक्षा का संकल्प करती है और भाई बहन की ऐहिक रक्षा की जिम्मेदारी ले सकता है लेकिन गुरु 84 लाख जन्मों से हमारा रक्षण हो और आपके दैविकार्य में जो विघ्न आते हैं उनसे आपका भी रक्षण हो, इस भाव से गुरु - शिष्य एक दूसरे को शुभ संकल्पों से पुष्ट करते हैं।
#AsharamjiBapuQuotes
@Asharamjibapu__ गंगा स्नान और एकादशी जैसे पुण्य कर्म अपने स्थान पर श्रेष्ठ हैं, लेकिन सद्गुरु का सत्संग जीवन को भीतर से बदलने की शक्ति रखता है।#AsharamjiBapuQuotes
हजार गंगा नहा लो, हजार एकादशी कर लो, अच्छा है, पुण्य होता है लेकिन सद्गुरु के सत्संग के आगे वह सब छोटा हो जाता है । आत्मवेत्ता गुरु की कृपा और सत्संग सर्वोपरि हैं ।
#AsharamjiBapuQuotes