ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री @BorisJohnson ने तो @narendramodi को फट्टू बता दिया!
नेहरू में हिम्मत थी, मोदी शॉर्टकट ढूंढते हैं।
नेहरू के पास दूरदर्शी सोच थी, मोदी झुक जाते हैं।
UK के पूर्व PM बोरिस जॉनसन ने बताया कि #महारानी ने उनसे कहा था कि 1952 में PM नेहरू ने उनसे कहा था कि भारत हमेशा रूस के साथ रहेगा।
अब #मोदी को देखिए, वे कैसे USA के सामने झुक गए। मोदी के राज में भारत को रूस, वेनेज़ुएला वगैरह के साथ व्यापार करने के लिए US से इजाज़त लेनी पड़ती है।
USA के कहने पर मोदी UPI पर टैक्स लगाते हैं ताकि वीज़ा और मास्टरकार्ड के हितों की रक्षा हो सके; USA भारत को ईरान के साथ व्यापार न करने का आदेश देता है और भारत के लिए सीज़फायर का फ़ैसला भी USA ही करता है।
मोदी भारत के लिए एक आपदा हैं। इतिहास उन्हें भारत के सबसे कमज़ोर PM के तौर पर याद रखेगा।
बोरिस जॉनसन को मोदी गुजरात घुमाने ले गए थे और बुलडोजर पर बैठाया था।
बांसुरी स्वराज BJP :— राहुल गांधी देश के एक असफल कॉमेडियन हैं।🤔
पवन खेड़ा INC:— हां आप सही कह रही हैं राहुल गांधी इस मामले में असफल हुए हैं और देश में सिर्फ एक ही सफल कॉमेडियन हैं और वो देश के प्रधानमंत्री "मोदी जी" हैं।🔥🔥
पवन खेड़ा का डिबेट में कोई तोड़ नहीं है— ये INC के बेस्ट प्रवक्ताओं में से एक हैं।
उत्तराखंड में भाजपा का नया जाल? मुसलमानों के वोट काटने की नई साज़िश।
रिपोर्ट में सामने आए आंकड़ों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। SIR के दौरान कुछ इलाकों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आपत्तियां दर्ज कराई गईं, जिनमें कई मामलों में मुस्लिम मतदाता निशाने पर होने का पैटर्न सामने आया।
अगर धार्मिक पहचान के आधार पर मुसलमानों के वोट चुन-चुनकर कमजोर करने की कोशिश हो रही है, तो यह सिर्फ एक समुदाय नहीं, पूरे लोकतंत्र पर हमला है।
वोट किसी सरकार की मेहरबानी नहीं, बल्कि संविधान से मिला हर नागरिक का बराबर अधिकार है।
आज मुसलमानों का वोट निशाने पर है, तो कल किसी और की बारी हो सकती है।
मुसलमानों को वोट के अधिकार से वंचित रखने के लिए ये जाल और साजिश बुने जा रहे हैं।
‘गाँव’ गोद लेने की बात करनेवालों के बुरे दिन आ गये हैं, वो अब अपने ही ख़िलाफ़ हो रहे प्रोटेस्ट के ‘आंदोलनकारियों’ को गोद लेने पर मजबूर हैं।
मुख्यमंत्री जी के सूचनार्थ-ज्ञानार्थ : P से Protest भी होता है।
मदर ऑफ डेमोक्रेसी की न्यायपालिका ने बाबरी मस्जिद गिराए जाने को अपराधिक कृत्य माना है। यह इस देश का दुर्भाग्य है कि अपराधिक कृत्य को अंजाम देने वाले लोग संख्या बल के माध्यम से संवैधानिक पदों पर पहुंच जाते हैं, और वहां पहुंच कर भी अपने अपराधिक कृत्य को ‘गर्व’ के साथ बयान करते हैं।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ‘गर्व’ के साथ बता रहे हैं कि वो बाबरी मस्जिद को गिराने का उन्हें गर्व है। वो बाबरी को मस्जिद ना कहकर ढांचा बता रहे हैं। हो सकता है उनके लिए वो ढांचा हो, लेकिन मुसलमानों और इस देश के न्याय प्रिय समाज के लिए वह मस्जिद थी, मस्जिद है, और मस्जिद रहेगी। वो उसे कभी भी ढांचा स्वीकार नहीं करेंगे। लेकिन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री मानसिकता वाले भले ही कितने ‘बड़े’ पदों पर पहुंच जाएं, उनकी सोच कभी ‘बड़ी’ नहीं हो सकती। नफ़रत की सियासत पर अपने राजनीतिक अस्तित्व की नींव रखने वाले लोग क्या जानें कि संविधान क्या है, और दूसरों की धार्मिक आस्था क्या है।
देवेंद्र जिस घटना को गर्व से बता रहे हैं वह घटना शर्मनाक है। उस पर शर्म होनी चाहिए। दूसरों की इबादतगाह को अपनी ज़िद, अराजकता और नफ़रती कुंठा में तोड़ दिया गया, उसके बाद इस देश ने हिंसा का कैसा नंगा नाच देखा उसकी गवाही तत्कालीन अखबारात की रिपोर्ट्स दे देंगी। काश! मदर ऑफ डेमोक्रेसी की न्यायपालिका बाबरी मस्जिद के गिराए जाने को अपराध मानने के साथ-साथ उन अपराधियों को सज़ा देने का भी फैसला देती, तो शायद ही कोई ‘देवेंद्र’ उस अपराधिक एवं शर्मनाक कृत्य पर गर्व कर पाता।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अपने 20 बागी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई में देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी की ओर से दायर याचिका में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला न लेने पर सवाल उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को इस याचिका पर सुनवाई कर सकता है।
पोल खुलने का इतना डर! क्या स्कूलों की बदहाली छिपाने का और कोई रास्ता नहीं बचा है? विद्यालयों की दुर्दशा छिपाने की बजाय सुधार भी तो किया जा सकता है!
@myogiadityanath@myogioffice
मोदी को सवालों से कितना डर लगता है, इसका सबूत देख लीजिए 👇
अमेरिकी राजदूत ने बताया - फ्रांस में G7 सम्मेलन में मोदी की ट्रंप से मुलाकात होनी थी।
इससे पहले भारत के विदेश मंत्रालय ने यह अनुरोध किया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के सवाल ना लिए जाएं।
मने 56 इंच वाले पत्रकारों के सवालों से इतना डर रहे हैं कि मीटिंग से पहले गिड़गिड़ा रहे हैं - प्लीज कोई सवाल ना पूछ ले।
इसी डर की वजह से मोदी ने आज तक एक प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की है।
एक बार अमेरिका के वाइट हाउस में सवालों से सामना हुआ था तो पसीना-पसीना हो गए थे, जबान लड़खड़ाने लगी थी।