प्रयागराज के “विवेक Sir” रोते हुए
मोदी जी योगी जी और गोदी मीडिया क्या आप लोगों को “विवेक SIR” के आँसू नही दिखाई देते?
ऊपर वाले के पास जब हिसाब होगा तो क्या बोलोगे बच्चों की कोचिंग पर बुलडोजर चलाया, किसी का मकान उजाड़ा, किसी की दुकान उजाड़ी, करोड़ों नौजवानों की ज़िंदगी बर्बाद की।
EXAMPUR के विवेक सर ने बहुत बड़ा ऐलान किया है⚠️
विवेक सर ने 12 जून को छात्रों को लखनऊ के मा० श्री कांशीराम साहेब ग्रीन "इको गार्डन " में आने को कह दिया है और आगे उन्होंने यह कहा कुछ भी हो जाए आप छात्रों को आना है अपने अभिभावक सहित तमाम अध्यापक भी साथ होंगे, लगता है यूपी में बहुत बड़ा आंदोलन होने वाला , 8,9,10 जून को यूपी पुलिस कांस्टेबल का परीक्षा है इस परीक्षा को देकर छात्र खाली रहेंगे तो जरूर जाएंगे क्योंकि छात्रों की दिलो के धड़कन विवेक भैया ने बुलाया है,
क्या आप भी जा रहे है इको गार्डन
“मैं नेपाल की निंदा करता हूँ!
सिर्फ मैं ही नहीं, बल्कि हर भारतीय को नेपाल की निंदा करनी चाहिए!
सरकार को तुरंत नेपाल को कड़ी चेतावनी देनी चाहिए और ऐसे व्यवहार की सख्त आलोचना करनी चाहिए. जरूरत पड़े तो सेना को भी तैयार रहने के लिए कहा जाना चाहिए!
कर्नाटक का एक 35 साल का रैपर, जो स्ट्रक्चरल इंजीनियर बना, उसे आप काठमांडू का मेयर बना देते हैं और अब नेपाल का प्रधानमंत्री!
नेपाल, तुम कुछ भी कर देते हो! पिछले साल तुमने उस Gen Z ग्रुप को लाकर सरकार ही पलट दी.
नेपाल, तुम ऐसा क्यों करते हो?
तुम्हारी हरकतें हम भारतीयों को बहुत परेशान करती हैं; वाकई बहुत ज्यादा. हम नजरअंदाज करने की कोशिश करते हैं, लेकिन तुम हर दिन कुछ नया कर देते हो!
वो बालन शाह, जिसे बालेंद्र शाह भी कहा जाता है, नेपाल में एक नई सुबह लाने की कोशिश कर रहा है. वह लोगों से घुलता-मिलता है, काले चश्मे पहनता है, सेल्फी क्लिक करता है. अपनी पत्नी और बेटी को अपने साथ लेकर सम्मान और पहचान भी देता है!
वह प्राइवेट स्कूल और कॉलेज बंद कर रहा है, VIP कल्चर खत्म कर रहा है, और मंत्रियों को आम नागरिकों की तरह व्यवहार करना सिखा रहा है. वह पूरी तरह से युवा कैबिनेट बना रहा है.
ये क्या हो रहा है! क्या तुमने कभी सोचा है कि इसका तुम्हारे पड़ोसी भारत पर क्या असर पड़ेगा?
हमारे देश में राजनीति बुजुर्गों के दम पर चलती है. हम उसी पुरानी पीढ़ी को सत्ता में बनाए रखते हैं. वे अपने तंत्र को इसलिए सहजता से चलाते हैं क्योंकि वे युवाओं के दिमाग में नए विचारों को प्रवेश नहीं करने देते.
लेकिन तुम नेपाली लोगों ने पूरी तरह से पुरानी पीढ़ी, के.पी. शर्मा ओली, प्रचंड, शेर बहादुर देउबा को किनारे कर दिया है और अब नई, युवा, शिक्षित और विशेषज्ञ लोगों को कैबिनेट में ला रहे हो ! तुमने तो एक सरकारी अस्पताल में नर्स रही लड़की को देश का स्वास्थ्य मंत्री तक बना दिया.
कम से कम थोड़ा तो सोचो. मान लिया हमारे नेता मोटी चमड़ी वाले हैं. लेकिन अगर कल भारत के युवा मोबाइल से नजर उठाकर बगावत पर उतर आए तो हम क्या करेंगे?
जो नेपाली यहाँ रात में गश्त करते थे और “सलाम साब” कहते थे, वे अब इतनी बड़ी बौद्धिक क्रांति से गुजर चुके हैं.
हम इसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे.”🎯
— प्रशांत बोराडे
#MindfulMonday
जौनपुर में प्राइमरी स्कूल बंद होने से बच्चे रो रहें है 😭
जिस प्रदेश में बच्चों को स्कूल के लिए रोना पड़े उस प्रदेश का बेड़ागर्क होना तय है
बीजेपी हटाओ
अपने बच्चों का भविष्य बचाओ
सर्व शिक्षा अभियान पूर्व प्रधानमंत्री माननीय अटल बिहारी बाजपेई जी के नेतृत्व वाली सरकार ने पारित किया था सरकार की सोच थी कि 6-14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जाए ।इस अभियान के अंतर्गत सरकार ने प्रत्येक गाँव व मजरे में प्राथमिक विद्यालय व प्रत्येक किमी पर उच्च प्राथमिक विद्यालय की स्थापना हेतु भवन सहित तमाम संसाधन उपलब्ध कराए
परंतु आज कम/अपर्याप्त छात्र संख्या के आधार पर विद्यालयों को समाप्त करके अन्य विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराने की योजना तैयार की गई है
परिवार कल्याण कार्यक्रम के अंतर्गत जनसंख्या वृद्धि की दर घट रही है दूसरी तरफ़ विभाग ने तमाम अधो मानक विद्यालयों को मान्यता प्रदान कर रखी है तमाम ग़ैर मान्यता के विद्यालय अधिकारियों की मिलीभगत से आज भी संचालित हो रहे है ऐसे में नामांकन कम होना स्वाभाविक है
सरकार ने विधान सभा में सदैव माना है कि छात्र व शिक्षक अनुपात उत्तर प्रदेश में मानक के अनुसार सही है तो फिर विद्यालयों को बंद करने की जरूरत क्या है और यदि सरकार को लगता है कि शिक्षकों की आवश्यकता है तो उसकी कमी नई भर्ती करके करनी चाहिए न कि विद्यालय बंद करके ।
इससे गाँव देहात के तमाम बच्चों से शिक्षा दूर हो जाएगी
लगभग २० हज़ार विद्यालयों का मर्जर पूर्व में करके शिक्षकों की पदोन्नति के अवसर समाप्त कर दिए गए ।वर्ष 2015 से आज तक किसी भी शिक्षक की पदोन्नति नहीं हुई ।इस आदेश से शिक्षकों के हजारों पद समाप्त हो जायेंगे
जिससे कार्यरत शिक्षकों की पदोन्नति नहीं होगी
जो डी एल एड या बीटीसी पास युवक युवतियाँ शिक्षक बनने की उम्मीद में हैं वे शिक्षक नहीं बन पाएंगे
माननीय मुख्यमंत्री जी से अनुरोध है कि इस आदेश को निरस्त करने की कृपा करें।
वैसे भी किसी राज्य में शराब की दुकानों की संख्या में वृद्धि तथा विद्यालयों की संख्या में कमी की नीति आलोचना का कारण बनेगी
जब ग्रामीणों को पता चलेगा कि उनके गाँव का विद्यालय दूसरे गाँव में शिफ्ट किया जा रहा है तो जन आक्रोश लाजिमी होगा ।
@thisissanjubjp@basicshiksha_up@UPGovt गज़ब मजाक करते है आप संदीप साहब आप के मुंह से विद्यार्थियों या विद्यालयों के विकास जैसा शब्द शोभा नहीं देता,विकास जैसे शब्द की गरिमा बने रहने दे,नहीं तो इंसानों को विकास से नफरत हो जाएगा।
सूबे के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह पर गंभीर आरोप लग रहे हैं 30 -30 लाख BSA से वसूली ? वाह मंत्री जी वाह यहां हम सभी धरने पर बैठे हुए हैं आपको दिखाई नहीं पड़ रहा है उधर आप लाखों लेकर AC का मजा ले रहे ? @thisissanjubjp https://t.co/Zn6l18hA3p
उप्र शिक्षा चयन आयोग को भंग करके उसके सभी सदस्यों से जो धनराशि इतने सालों में उन पर खर्च की गयी है, उसकी वसूली हो। वेतन और भत्ते काम करने के दिये जाते हैं, आराम करने के नहीं।
#97000_प्राथमिक_शिक्षक_भर्ती#डीएलएड#डीएलएड_शिक्षक_भर्ती
प्रयागराज में शिक्षा चयन बोर्ड के सामने बेसिक शिक्षक के अभ्यर्थियों और लखनऊ के इको गार्डन में प्रदेश भर के शिक्षामित्रों के ‘2 जून को 2 जून की रोटी के संघर्ष’ का प्रदर्शन सच में चिंतनीय है क्योंकि एक तरफ 7 सालों से शिक्षा चयन बोर्ड की बेसिक शिक्षकों की वैकेंसी नहीं आई है और दूसरी तरफ़ शिक्षा मित्रों को मात्र 11 महीने ही वेतन मिलता है और वो भी केवल 10 हज़ार प्रति माह।
शिक्षामित्र जानते हैं कि रोटी को थाली की तरह बजाने से आवाज़ नहीं आती है, इसीलिए वो ‘सोती सरकार’ को जगाने के लिए गुहार-पुकार का भी सहारा ले रहे हैं।
केवल परिवारवाले ही ये जानते हैं कि चंद पैसों में परिवार चलाना कितना मुश्किल होता है। हम हर शिक्षामित्र और उनके परिवार के साथ हैं।
शिक्षक कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!
सभी गैर भाजपा शासित राज्यों में अध्यापकों की नियुक्ति हो रही है विज्ञापन आ रहा है,एक योगी आदित्यनाथ का शासन है उत्तर प्रदेश में जहां वर्षों से बगैर अध्यापकों की नियुक्ति के शिक्षा व्यवस्था का कायाकल्प किये जाने का जुमला परोसा बजा रहा है।
उत्तर प्रदेश में जल्द से जल्द अध्यापकों को नियुक्ति कर शिक्षा व्यवस्था को बेपटरी करने की साजिश बंद की जाय।
@thisissanjubjp उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा की यही स्थिति हो गई है जब स्कूल में अध्यापक ही नहीं होगा तो कोई अपना बच्चा वहां भेजेगा ही क्यों,राशन बंटवाए और एहसान जताईये की हम दे रहे की तुम लोग जिन्दा हो नहीं मर जाते जनता तो भेड़ बकरी है ही एहसान समझ वोट कर ही देंगी
@thisissanjubjp तो क्यों नहीं देते उन्हें अध्यापक का वेतन अगर अनुदेशक गिने जा रहे है शिक्षक में तो क्यों नहीं दिया जाता उन्हें अध्यापक का वेतन और ये जो आंकड़े बताए जाते है ना कि 30 लाख 40 बच्चे कम हो गए ये एक दिन 0 होंगे क्योंकि जिस दुकान में मिठाई नहीं होती ना वहां ग्राहक नहीं जाते