ये जो तस्वीर में मुंह बांधे खड़ी है इस महिला का नाम रीना है, यह महिला ग़ाज़ियाबाद की एक कॉलोनी में एक घर में खाना बनाने का काम करती थी,
रीना जिस परिवार के यहां खाना बनाती थी उन सबको पेट और लीवर में दिक्कत हुई तो
उनका शक़ रीना पर गया, उन्होंने किचन में मोबा���ल का कैमरा खोलकर रख दिया, इसके बाद जो हुआ वह डरा��े वाला है,
रीना ने आटे में पेशाब करके उसे गूंध दिया और उसी से रोटी बनाई, यह सब देखकर घर वाले लोगों के छक्के छूट गए,
बाद में जब उन्होंने पुलिस में शिकायत की तो रीना ने बताया कि
मालिक उसे छोटी गलती होने पर भी टोक देते थे, इससे नाराज होकर वह खाने में पेशाब मिलाने लगी।
पिछले 6 महीने में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें करीब 21% कम हुई हैं परन्तु पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई कटौती नहीं हुई है। ऐसा लगता है कि भारत सरकार और तेल कंपनियां मिलकर आम आदमी की जेब लूट रही हैं। अगर कच्चे तेल की कीमतों के अनुरूप पेट्रोल-डीजल की कीमतें घटाई जाएं तो पेट्रोल की कीमत 10 रु एवं डीजल की कीमत 8 रु प्रति लीटर तक कम हो सकती हैं।
राजस्थान की जनता के साथ तो ��क तरह से दोगुनी ठगी हुई है। विधानसभा चुनावों में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जनता से वादा किया था कि राजस्थान में भाजपा सरकार बनने पर यहां पेट्रोल-डीजल के दाम हरियाणा और गुजरात के बराबर की जाएंगी परन्तु आज तक ऐसा नहीं हुआ है। राजस्थान की जनता जानना चाहती है कि मोदीजी की यह गारंटी कब पूरी होगी?
ऐसा लगता है कि मणिपुर में हो रही हिंसा के बावजूद वहां का दौरा करने को प्रधानमंत्री जी ने अपनी प्रतिष्ठा का मुद्दा बना लिया है। वहां राज्यपाल आवास एवं मुख्यमंत्री के घर जैसे सुरक्षित स्थानों तक पर लगातार हमले हो रहे हैं परन्तु केन्द्र सरकार का इस ओर कोई विशेष ध्यान नहीं है। मणिपुर में अत्याधुनिक हथियारों एवं ड्रोन्स का इस्तेमाल कर आम लोगों पर हमले किए जा रहे हैं।
तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी ने असम में शांति स्थापित करने के लिए राज्य में कांग्रेस पार्टी की सरकार तक की कुर्बानी देने में संकोच नहीं रखा जिसके कारण आज तक वहां शांति का दौर स्थापित है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी सहित तमाम विपक्षी दल मणिपुर का दौरा करने की मांग कर रहे हैं। प्रधानमंत्री जी को मणिपुर में शांति स्थापना के लिए अब आवश्यक कदम उठाने में देरी नहीं करनी चाहिए एवं मणिपुर का दौरा करना चाहिए।
देश में पिछले कुछ सालों से शुरू हुए "बुल्डोजर कल्चर" पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी स्वागतयोग्य है। किसी भी आरोपी के घर पर बुल्डोजर चला देना न्याय नहीं है। मैंने दो वर्ष पहले भी इस कल्चर के खिलाफ सार्वज��िक तौर पर कमोवेश ऐसे ही विचार रखे थे जैसी आज सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है।
त्वरित न्याय जैसे सिद्धांत एक सभ्य और कानून का पालन करने वाले समाज में स्वीकार्य नहीं हैं एवं संविधान की मूल भावना के पूरी तरह विपरीत है।