यह जातिवाद नहीं काके. पठानो की छातियों में राजपूती तलवारें घुसेङ कर पठानिया कहलाए है
य़ह गौरव है उस वीरता का,य़ह गौरव है गर्म राजपूती रक्त का,य़ह गौरव उस साहस का य़ह गौरव है उस महानता का जिसके संरक्षण में सभी वर्ग आनंद से जीवन व्यतित करते थे #rajput#क्षत्रिय#pathania#thakur
UGC ROLLBACK — हिमाचल प्रदेश
आज 2 अक्टूबर से हिमाचल प्रदेश में UGC Rollback की आवाज़ ने एक नए चरण में प्रवेश किया।
महिपाल सिंह मकराना जी के नेतृत्व में मनाली से लगभग 600 किलोमीटर की 21 दिवसीय पदयात्रा की शुरुआत हुई है, जो 22 अक्टूबर को शिमला सचिवालय तक पहुंचेगी।
पहला दिन — मनाली से शुरुआत
मंजिल — शिमला सचिवालय
यह यात्रा UGC Regulations 2026 को लेकर उठाई जा रही आपत्तियों और UGC Rollback की मांग को लेकर जन-जागरूकता एवं लोकतांत्रिक तरीके से आवाज़ उठाने के उद्देश्य से है।
पहला दिन पूरा हुआ, संघर्ष जारी है।
#UGCRollback
#UGCROLLBACK
#महिपालसिंहमकराना
#सवर्णन्याययात्रा
#HimachalPradesh
#UGC_वापस_लो
अहिंसा का चोला ओढ़ शैतान ने विभाजन होने दिया जिसका परिणाम 26 लाख लोगों ने अपना बलिदान देने से चुकाया
और वह राष्ट्रपिता है? क्या 1947 से पहले भारत नहीं था?
#rajput#pathania#thakur#लाल_बहादुर_शास्त्री
ममत्व का पर्दा हटा आँख से,
गांडीव की टंकार सुनो।
यदि वीर बने हो सेनापति,
तो केवल रक्त का मार्ग चुनो।
तप, जप, व्रत सब पीछे छोड़ो,
यहाँ काल का तांडव सजता है।
वीर सदा ही युद्ध करते हैं,
यहाँ केवल महाकाल गरजता है!
जय मां भवानी ⚔️#Rajput#pathania#thakur
⚔️ वीर युद्ध करते हैं आचार्य तपस्या नहीं किया करते।
उठो आचार्य त्याग दो आसन,
अब शंखनाद घनघोर करो।
यह समर भूमि है वीरों की,
रणचंडी सा तुम शोर करो।
ब्राह्मण का तप और शांत नियम,
कुटिया की सीमा तक ही था।
पर जब कौतुक तलवारों का,
तब मौन यहाँ का कब सही था?
#Rajput#ठाकुर#Pathania
संपूर्ण संसार में कहीं इस प्रकार की वीरता का उल्लेख नहीं मिलता यह राजपूतों की रगों भुजाओं में गूंजती है, राजपूतों की साहस की कोई सीमा नहीं...!
#rajput#ठाकुर#pathania#क्षत्रिय#सर_कटे_धड़_लड़े
संपूर्ण संसार में कहीं इस प्रकार की वीरता का उल्लेख नहीं मिलता यह राजपूतों की रगों भुजाओं में गूंजती है, राजपूतों की साहस की कोई सीमा नहीं...!
#rajput#ठाकुर#pathania#क्षत्रिय#सर_कटे_धड़_लड़े
कहानी रावलपिंडी के तोहा खालसा गांव की जहां हिंदू-सिख स्त्रियों ने कुएँ में कूदकर किया था जौहर
गांव में केवल तीन स्त्रियाँ बची क्योंकि कुएँ में इतनी लाशें थी कि डूबने लायक पानी ही नहीं बचा
@Shh_Shaili बता रही हैं 1947 की वो त्रासदी जब जिहादियों के आगे समर्पण ना करके हज़ारों हिंदू-सिख स्त्रियों ने जलकुंडों में किया जौहर
🛑🛑🛑
जौहर' और 'साके' को केवल राजस्थान तक ही सीमित ना माने, इतिहास प्रमाण है कि प्राचीन एवं मध्यकालीन पंजाब और जम्मू (डोगरा अंचल) के क्षेत्रों में भी आत्मसम्मान और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए भयंकर जौहर और सामूहिक आत्मोत्सर्ग की घटनाएं हुईं। पूरा Thread पढ़ें 🙏
#साका_जौहर
किले के घेरों के दौरान स्थानीय जौहर: जम्मू संभाग के रियासी, अखनूर और पुंछ जैसे सीमावर्ती किलों में स्थानीय स्तर पर कई छोटे-छोटे साके हुए। जब भी पठान या मुगल सेनाएं इन पहाड़ी किलों को घेरती थीं, तो डोगरा वीरांगनाएं जौहर की ज्वाला सुलगने से पीछे नहीं हटती थीं।
*जय मां भवानी ⚔️*
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जौहर' और 'साके' को केवल राजस्थान तक ही सीमित ना माने, इतिहास प्रमाण है कि प्राचीन एवं मध्यकालीन पंजाब और जम्मू (डोगरा अंचल) के क्षेत्रों में भी आत्मसम्मान और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए भयंकर जौहर और सामूहिक आत्मोत्सर्ग की घटनाएं हुईं। पूरा Thread पढ़ें 🙏
#साका_जौहर
राजपूतों को लगा कि वे घिर चुके हैं, तब महिलाओं ने विदेशी सेना के हाथों बंधक और अपमानित होने के बजाय जौहर (अग्नि में कूदकर या पहाड़ी से कूदकर) करना चुना और पुरुषों ने केसरिया बाना पहनकर अंतिम युद्ध लड़ा।