जब गांधी जी ने अछूतों के लिए हरिजन शब्द का इस्तेमाल करना शुरू किया, त��� बाबासाहेब अंबेडकर ने इसका कड़ा विरोध किया और कहा कि यह अपमानजनक और धोखा देने वाला शब्द है, और जाति-भेद और अछूत प्रथा के असली मुद्दे को चुपने करने का प्रयास है।
शायद कांग्रेस भूल गई है कि 1982 में केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों को बयान जारी कर दलितों के लिए इस शब्द का इस्तेमाल न करने को कहा था।
2010 में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने दुबारा नए दिशा-निर्देश जारी किए।
लेकिन कांग्रेस ने हरिजन शब्द का इस्तेमाल क्यों जारी रखा है? इसका एक ही कारण हो सकता है — अहंकार।
कांग्रेस जैसे सांप 🐍 ने समय-समय पर दलितों को अपने असली जहरीले दांत दिखाए हैं।
अब दलितों को यह तय करना है कि वे किस पर विश्वास करें — कॉस्मेटिक बदलाव और एक परिवार के इशारों पर नाचने वाली कटपुतली कांग्रेस?
या फिर स्वतंत्र लीडरशिप वाली अंबेडकरवादी पार्टी जो किसी जनेऊधारी के इशारे पे ना नाची हैं ना कभी नाचेगी, और हमेशा दलितों, आदिवासियों, मुसलमानों और ओबीसी के राजनीतिक अधिकारों के लिए काम करेगी।
@SupriyaShrinate मम्मी, मम्मी, मेरा मेडिकल में इसलिए नहीं हुआ क्योंकि ढेर सारे लोग टेस्ट दे रहे थे थे. हर बार यही होता है मम्मी. ऐसा टेस्ट कराओ न मम्मी जिसमें सिर्फ मैं बैठूं. प्लीज मम्मी. फिर देखना मेरा टैलेंट. मैं पास हो जाऊंगी मम्मी.