दिलीप मंडल को कम से कम राष्ट्रपति बनाना चाहिए था
जिस दिलीप मंडल ने बीच चुनाव में अपना ओबीसी-दर्शन भाजपा के पक्ष में डालना आरंभ किया, उसे सूचना-प्रसारण मंत्रालय का मीडिया सलाहकार बनाया गया है। मुझे लगता है कि सरकार का यह निर्णय संकुचित है और बनिया मंडल की दलित चिंतन वाली छवि के समक्ष दो कौड़ी का है।
मंडल जी ने हमें बताया है कि हिन्दू देवी-देवता सब झूठे हैं, सरस्वती सभ्यता कुछ नहीं है, जो है सो बौद्ध ही है। मोदी जी भी अंबेदकर और बुद्ध को ले कर बहुत सारे कार्य कर रहे थे। ऐसे में केवल मीडिया सलाहकार का पद मंडल जी का अपमान है।
उन्होंने मोहन भागवत से ले कर बीएल संतोष तक की 'चर्बी' उतारी है, पेरियार के घनघोर समर्थक हैं, भाजपा के लिए साढ़े नौ वर्ष नवीन अपमानसूचक शब्द गढ़े हैं, उन्हें केवल मीडिया सलाहकार बनाना निकट दृष्टि दोष जैसा है।
आप सोचिए कि इस पद के लिए भाजपा किसी भी दो टके के ट्रोल को बिठा सकती थी, पर महान दार्शनिक दिलीप जी मंडल की स्वर्णिम आभा पर कालिमा पोतने हेतु ऐसा प्रयोग किया गया है। मैं आज लंच नहीं कर पाऊँगा।
दिलीप मंडल जैसा कोई लिखता ही नहीं। उनके पास अखबारों का अभिलेखागार है, जो केवल नालंदा में था जिसे ब्राह्मणों ने जला दिया। मंडल जी बताते हैं कि राहुल गाँधी के झूठ को कैसे काउंटर करना है, भाजपा-संघ के विचारकों में वो बात कहाँ! मंडल जी अखबार की कतरन लाते हैं, भाजपा के मीडिया सलाहकार उसका पोस्टर बनाते हैं और नैरेटिव में ऐसा धमाका होता है कि न भूतो, न भविष्यति!
जायसवाल मंडल जी की प्रतिभा यही है कि वो आजीवन दलित माने जाते रहे। बेचारे को ट्विटर ने वैरिफाय नहीं किया तो आंदोलन पर उतर आए। आज कल आठ सौ रुपया महीने दे कर नीला जनेऊ पहनते हैं, पर उनकी इच्छा बदली के रंग की जनेऊ पहनने की है जो नड्डा जी अवश्य ही पूरी करेंगे।
मंडल जी स्वयं को प्रोफेसर बताते हैं जबकि वो कभी न तो असिस्टेंट प्रोफेसर बने, न असोसिएट, बस कमलनाथ की सरकार ने कहा कि आप सीधे प्रोफेसर बनिए। कॉन्ग्रेस मंडल जी के टैलेंट की कद्रदान थी, भाजपा वालों ने हटा दिया उनको प्रोफेसर के पद से। लेकिन ट्विटर हैंडल से प्रोफेसर न हटा पाए भजपइए!
मंडल जी का प्रोफेसर होना, कवच-कुंडल जैसा है, वो अब उनके व्यक्तित्व का हिस्सा हो गया है। मैं अभी चिंतित हूँ कि ट्विटर हैंडल में वो 'मीडिया अडवाइजर टू आइबी मिनिस्ट्री' कैसे अडजस्ट कर पाएँगे। फोन की चौड़ाई से बाहर नहीं चला जाएगा नाम? दलित चिंतक का फोन फोड़ देना चाहती है ये संघी सरकार!
फिर बात वही है कि जात न पूछो मंडल की, पूछ लीजिए ज्ञान। भाजपा में अभी मंडल जी के समकक्ष कोई तेजवान व्यक्ति न है, न होगा। किसी ने विमर्श को बढ़ाने में, उनकी जितनी किताबें पढ़ कर ट्वीट लिखे ही नहीं। हम और आप किसी बात पर लिखते हैं, और उसमें तीन किताबों का नाम न हो तो वजन कैसे आएगा, मंडल जी बटखारा ले कर लिखते हैं, तीन किलो भार स्वतः बढ़ जाता है।
मंडल जी के, बीच चुनाव में, भाजपाई होते ही जो भाजपा 140 सीटें लाने वाली थी, उसे सौ सीटों का लाभ हुआ और मोदी जी प्रधानमंत्री बन पाए। अतः, राष्ट्रपति से कम कुछ भी बनाना, उनके सम्मान में सेंधमारी है। सौ सीट से कम में तो राहुल गाँधी आपसे सारे काम विपक्ष में बैठ कर करा ले रहा है, तो मंडल जी को केवल मीडिया सलाहकार बनाना, कहाँ तक उचित है!
इसी कारण इन्हें अब दलित विमर्श के पुरोधा के तौर पर भाजपा, स्वयं को सतत इनकी गालियों का ग्रास बनते देखने के बाद भी, आगे बढ़ा रही है क्योंकि भाजपा के बाकी समर्थकों में न तो योग्यता है, न ही वो नड्डा जी की फेवरेट बात को फुलफिल करते हैं: पहले कॉन्ग्रेसी बनो, भाजपा को खूब गरियाओ और तब भाजपा तुम्हारा टैलेंट देखेगी कि निंदक नियरे राखिए ब्रो!
इस अपमान का कारण मंडल जी स्वयं हैं। आपने भारत में सब चीज बौद्ध बताया है, हिन्दू सभ्यता कभी थी ही नहीं। हिन्दुओं ने बौद्धों के मंदिर तोड़े। पर नड्डा जी या भाजपा की मानें तो मंडल जी यदि अपने अखबारों के बंडल से कटिंग निकाल कर और 'मैं इस विषय पर तीन किताबें पढ़ कर अन्वेषण करूँगा' कह कर, यह बता देते कि भारत वस्तुतः इस्लामी सभ्यता है, तो निश्चय ही नड्डा जी उन्हें बनारस की लोकसभा सीट दे देते।
यदि वो बनारस हार जाते, तो उन्हें राज्यसभा भेजा जाता। अशोक चव्हाण ने जैसे भाजपा की जीत महाराष्ट्र में सुनिश्चित कर दी है, मंडल जी भी दो-तीन राज्य तो सँभाल ही देते। कुल मिला कर, मैं पेरियारपुत्र मंडल जी के इस अपमान से क्षुब्ध हूँ।
एक 'आइ आइडेंटिफाय एज दलित' बनिया जी के साथ यह अपमान मोदी जी के शासनकाल में हो रहा है। क्या हम अपने राष्ट्र के विचारकों और दार्शनिकों को एक मीडिया सलाहकार का पद दे कर टरकाते रहेंगे? डूब मरिए नड्डा जी, आप हीरा को कोयला समझ कर फेंक रहे हैं।
CJI चंद्रचूड़ और कपिल सिब्बल आमने -सामने!
CJI चंद्रचूड़ :
कपिल सिब्बल जी, बंगाल का रेप कांड बहुत ही गंभीर मामला है!
ऐसे संवेदनशील मुद्दे राजनीति के लिए नहीं होते हैं, कृपया इसका राजनीतिकरण मत करिए।
आप सुनवाई के दौरान हंसने लगे, ये आपको शोभा देता है क्या?
आप बंगाल सरकार के प्रतिनिधि हैं लेकिन जरा उस रेप पीड़िता के बारे में भी सोचिए, उनके माता-पिता के बारे में सोचिए!
While it's clear you have strong feelings about Jake Paul, personal attacks and derogatory language don't contribute to a productive conversation. If you want to discuss his boxing skills or match choices, focusing on the facts and providing constructive criticism would be more effective. For instance:
I find Jake Paul's recent fight strategies and opponent choices questionable. The weight differences and concerns about fair testing raise valid points about the integrity of these matches. Challenging older fighters like Mike Tyson doesn't seem to be a fair or meaningful test of his abilities."
This is Payal Malik, the second wife of polygamist Armaan Malik. Even she is now contemplating leaving him to live her life peacefully. His own wife is disturbed by his actions, yet #BiggBossOTT3 continues to promote him. It’s absolutely disgusting.
POCSO ACCUSED ARMAN